Category: Transport

  • फिरोजाबाद : टोल प्लाजा पर लघुशंका को उतरीं सवारियों को छोड़कर चली गई बस, चालक की दबंगई पर महिला ने दिखाई ‘पावर’।

    फिरोजाबाद : टोल प्लाजा पर लघुशंका को उतरीं सवारियों को छोड़कर चली गई बस, चालक की दबंगई पर महिला ने दिखाई ‘पावर’।

    नोएडा से औरैया जा रही प्राइवेट स्लीपर कोच बस का चालक रविवार सुबह मथुरा टोल पर लघुशंका करने उतरे यात्रियों को छोड़कर चला गया। इस दौरान बस में सवार यात्रियों से मारपीट भी हुई। इस दौरान एक महिला ने 1090 पर काल कर दी। इसके बाद पुलिस ने शिकोहाबाद मैनपुरी चौराहे पर बस को पकड़ लिया।

    स्लीपर कोच बस नोएडा से औरैया जा रही थी,,,,,,,

    रविवार सुबह छह बजे एक बस नोएडा से औरैया जा रही थी। बस में काफी सवारियां थीं। मथुरा टोल के पास महिलाओं को लघु शंका होने पर वह बस से उतरकर चली गई। लेकिन बस के स्टाफ महिलाओं को छोड़कर जाने लगा तो महिलाओं के स्वजन ने इसका विरोध कर दिया आरोप है कि विरोध करने पर बस के स्टाफ ने उनसे मारपीट कर दी।

    शिकायत 1090 वूमेन हेल्प पावर पर शिकायत,,,,,,,

    एक महिला ने इस मामले की शिकायत 1090 वूमेन हेल्प पावर पर कर दी। जिससे पुलिस सक्रिय हो गई। बस को मैनपुरी चौराहा पर पकड़ लिया गया।

    इधर मथुरा टोल से यात्री दूसरी बस से शिकोहाबाद पहुंचे। पीड़ितों ने तहरीर दी है। बस में सावरियां अधिक होने के चलते उसे जाने दिया गया। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

  • वाहन क्षेत्र में जुड़े निम्न/मध्यमवर्गीय का शोषण, सरकारें चुप आख़िर क्यों ?

    वाहन क्षेत्र में जुड़े निम्न/मध्यमवर्गीय का शोषण, सरकारें चुप आख़िर क्यों ?

    एनबीएफसी, प्रशासनिक अधिकारियों और न्यायतंत्र की मिलीभगत का दूसरा नाम ऑटो माफिया

    भारत देश में परिवहन क्षेत्र में लगकर अपना और अपने परिवार के भरण पोषण में लगे निम्नवर्गीय/मध्यमवर्गीय लोगो का खुल कर एनबीएफसी कंपनियों और ऑटो माफियाओं द्वारा शोषण और अत्याचार किसी से भी छुपा हुआ नही है ।

    सबसे बड़ी बात सबको (भारत सरकार, राज्य सरकारें, प्रशासनिक अधिकारी और न्यायतंत्र) इसकी पूर्ण जानकारी है फिर भी सभी साथ दे रहे हैं ऑटो माफिया और एनबीएफसी कंपनियों का, आख़िर क्यों !

    दिल्ली के परिवहन आयुक्त आशीष कुंद्रा द्वारा अपने पद की ताकत का प्रयोग करते हुए दिल्ली में वाहनों के लिए कर्जा देने वाले बैंको, एनबीएफसी को परिवहन विभाग के साथ इंटीग्रेटेड होने पर बाध्य कर दिया पर जनहित और वाहन मालिको के हित का कही ध्यान नहीं रखा जबकि दुनिया मे इस कार्य को करने के लिए नाम दिया गया था जनहित में। यह तो आशीष कुंद्रा ही बेहतर समझा सकते है की इस कार्य को करने से किसका हित हुआ क्योंकी अधिकतर जनता/वाहन मालिकों को इसके होने के बाद से दिक्कतें बढ़ गई ।

    दिल्ली में ई रिक्शा / ऑटो खरीदने या अन्य कारणो से इन वाहनों पर कर्जा लेने के लिए ऑटो माफिया के चंगुल में फस जाते हैं क्योंकि सरकारी बैंक से उन्हें कर्जा नही मिल पाता।

    भारत सरकार के राजस्व मंत्रालय और रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया के आदेशों/ दिशा निर्देशों को माने तो कोई भी कर्जा नगद राशि में लिया या दिया नही जा सकता पर ऑटो माफियाओं और एनबीएफसी कंपनियों पर शायद यह नियम/ आदेश/ दिशा निर्देश लागू नहीं होता या दूसरे शब्दो में उनकी पकड़ न्यायतंत्र, प्रशासनिक अधिकारियों और सरकारों से इतनी अधिक है की उन्हे इस नियम को दरकिनार करने से कोई दिक्कत नही।

    वाहन क्षेत्रों में इस तरह के पैसों के चलन से जनता की सुरक्षा को तो खतरा है ही पर शायद राज्य सरकारें, प्रशासनिक अधिकारी और न्यायतंत्र यह नही देखना चाहते की देश को भी खतरा (उग्रवादी, अलगाववादी, गलत प्रवृत्ति और नशे में) बनता है। काले धन का इतना बड़ा प्रवाह और सभी की जानकारी में होने के बावजूद फलीभूत होना साफ़ संदेश देता है की यह कार्य सभी की मिलीभगत से हो रहा है।

    इस बात को सभी के समक्ष सिद्ध करने के पुख्ता सबूत परिवहन विशेष समाचार पत्र कार्यालय में उपलव्ध, कुछ और सबूत प्राप्त करने हेतू मेहनत की जा रही है जिससे कुछ विशेष अधिकारियो, जिला अधिकारियो और नेताओं के नाम भी घोषित किए जा सके।

    संजय बाटला

  • डी.सी.बी.ए. की मासिक मैनेजमेंट कमेटी मीटिंग, जाने

    डी.सी.बी.ए. की मासिक मैनेजमेंट कमेटी मीटिंग, जाने

    दिल्ली कॉन्ट्रैक्ट बस एसोसिएशन(पंजीकृत) की संपन्न हुई मैनेजमेंट कमेटी मीटिंग

    दिल्ली कॉन्ट्रैक्ट बस एसोसिएशन सन 1962 से कार्य करने वाली सबसे संगठित संस्था है । होटल जे पी सिद्धार्थ राजिंद्र प्लेस में आज एसोसिएशन के चुने हुए मेनेजमेंट कमेटी पद्दाधिकारियो की बैठक बुलाई गई जिसमे सभी सदस्यों को दिल्ली एवम् अन्य राज्यो मे आने वाली समस्याओं पर विचार विमर्श कर आने वाली समस्याओं के समाधान की रणनीति बनाई गई।

    बैठक में अनेक मुद्दों पर परिचर्चा की गई पर मुख्य बात हिमाचल, जम्मू – कश्मीर आदी राज्यो मे ऑल इंडिया परमिट वाहनों जिनके सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा जारी दिशा निर्देश के अनुसार टैक्स जमा किए हुए है से दुबारा राज्य में एंट्री पर टैक्स मांगना और वाहनों में पैसेंजर लिस्ट उपल्ब्ध होने पर भी नियम के विरुद्ध जाकर वाहनों के चालान करना के लिए राज्य सरकारों के परिवहन आयुक्त एवम् मंत्री से बात कर बंद करवाना रहा।

    मासिक मीटिंग के इस अवसर पर टीम डीसीबीए द्वारा परिवहन विशेष हिन्दी दैनिक समाचार पत्र के मुख्य संपादक संजय बाटला को सम्मानित किया।

    मैनेजमैंट कमेटी सदस्यों की बैठक अंदाजन 2 घण्टे तक चली और सभी सदस्यों द्वारा उठाए गए मुद्दों पर परिचर्चा कर शांतिपूर्वक सम्पन्न हुई।

  • परिवहन विभाग (स्क्रैपिंग सेल) द्वारा दिल्ली की जनता के लिए अद्भुत आदेश

    परिवहन विभाग (स्क्रैपिंग सेल) द्वारा दिल्ली की जनता के लिए अद्भुत आदेश

    परिवहन विभाग के आला अधिकारियो की जनहित में जारी पॉलिसी के कारण दिल्ली की जनता को
    a. ना तो अधिकृत ई वाहन किट लगाने वाले मिलने दिए,
    b. ना ही दिल्ली का अपना अधिकृत स्क्रैप डीलर मिलने दिया,
    c. ना ही दिल्ली की जनता के पक्ष में एनजीटी/वायु गुणवक्ता कमिटी/माननीय उच्चतम न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास किया,
    d. दिल्ली में स्वयं डीजल वाहनों को 15 वर्ष की आयु प्रदान करने के बाद भी वाहनों को अपने ही प्रिय स्क्रैप डीलरो को अपनी ताकत का गलत प्रयोग कर के सुपुर्द करने का कार्य कर रहे हैं,

    आप सभी की जानकारी हेतु बता दें की किसी भी राज्य के परिवहन विभाग का
    1. पहला दायित्व वहा की जनता को सुखद, विश्वसनीय और सुरक्षित सार्वजानिक सवारी सेवा उपलव्ध करवाना :- जो दिल्ली परिवहन विभाग आज में करवाने में विफल साबित हो रहा है।
    2. दूसरा दायित्व है जनहित में जनता को घर के पास परिवहन विभाग की शाखाओं को प्रदान करना :- आज दिल्ली परिवहन विभाग पहले से बनी शाखाओं को जनहित का नाम लेकर बंद करने में प्रयासरहित है,
    3. राज्य की जनता को उनकी जरुरत अनुसार सुरक्षित / दुर्घटना रहित / जाम मुक्त सड़के उपलब्ध करवाना :- दिल्ली परिवहन विभाग इसे उपलव्ध करवाने में पूर्ण रूप से विफल है,

    दिल्ली परिवहन विभाग के आला अधिकारी जनहित के नाम का प्रयोग कर जितनी भी पालिसी बना कर लागू करने में व्यस्त हैं उससे सिर्फ परिवहन विभाग के प्रिय उद्योगपतियों / व्यवसायियों को ही मिल रहा है ना की राज्य की जनता को।

    हम पहले भी आप को कई बार सबूतों के साथ यह दिखा और बता चुके है कैसे परिवहन विभाग गैर कानूनी तरीके से पैसे वसूल कर राजस्व में इज़ाफ़ा करने में लगा हुआ है।

    अब आपके वाहनों जिनकी माननीय न्यायालय के आदेश से सिर्फ सड़को पर चलाना वर्जित हुआ है उसे भी डरा धमकाकर / अपनी ताकत का दुरुपयोग कर आदेश पारित कर अपनें प्रिय स्क्रैप डीलरो को सुपुर्द करवाकर उनको कमाई करवाने में लग गए, कितना जनप्रिय है ना आदेेश

    दिल्ली से बाहर के पंजीकृत / अधिकृत स्क्रैप डीलरो में से अपनी पसन्द के चार डीलरो को अपनी इच्छा से दिल्ली के अलग अलग क्षेत्रो के वाहनो को परिवहन विभाग की ताक़त से उठाकर स्क्रैप करने का कार्य सोप दिखाया, कितना जनहित और जनप्रिय है ना यह आदेश

    दिल्ली की जनता अगर एम.वी.एक्ट के अनुसार या माननीय न्यायालय के आदेशो की अवहेलना करता पाया जाता हैं तो प्रवर्तन शाखा के अधिकारी/कर्मचारियों द्वारा चालान कटवा कर अपनी पिट में जमा करना हो सकता है ना कि किसी अन्य को वाहन सुपुर्द करवाना।

    पूर्ण सच को सबूतों के साथ जानने के लिए सोमवार को परिवहन विशेष का अंक और यूट्यूब पर न्यूज़ ट्रांसपोर्ट विशेष पर विडियो एवम् समाचार देखना ना भुलना।

    संजय बाटला

  • देहरादूनः वाहन चालको को आरटीओ ने दी बड़ी राहत, अब इस डेट तक करा सकते है आवेदन

    देहरादूनः वाहन चालको को आरटीओ ने दी बड़ी राहत, अब इस डेट तक करा सकते है आवेदन

    शहर में यातायात व्यवस्था एवं आम जनता को सुलभ सस्ती सार्वजनिक परिवहन सेवा प्रदान करने हेतु वर्गीकृत किये उल्लेखित 18 मार्गो पर चार पहिया (चालक सहित 08 से 13 सीटर) नई यूरो-6 वाहन / सीएनजी चालित वाहन को देहरादून केन्द्र हेतु जारी विक्रम टैम्पो परमिट धारकों के द्वारा उनको स्वीकृत विक्रम टैम्पो ठेका गाडी परमिट कार्यालय में निरस्त किये जाने हेतु आवेदन करने पर प्रथम आवत प्रथम पावत के आधार पर दिनांक 31.03.2023 तक नये मंजिली गाड़ी परमिट जारी किये जाने थे। लेकिन अब वाहन चालको को राहत देते हुए संभागीय परिवहन प्राधिकरण देहरादून ने इसकी लास्ट डेट बढ़ा दी है।

    बताया जा रहा है कि कार्यालय में प्रत्यावेदन प्रस्तुत कर विभिन्न आवेदकों द्वारा यह अवगत कराया है कि उनके द्वारा संबंधित वाहन डीलर के यहां वाहन प्राप्ति हेतु आवश्यक अग्रिम धनराशि जमा करा दी गई है किंतु संबंधित डीलर के यहां वाहन ना होने के कारण उनके द्वारा उपरोक्तानुसार उल्लेखित समयावधि के अंतर्गत वाहन प्रस्तुत नहीं किया जा सका। अतः उक्त के दृष्टिगत उनके द्वारा वाहन पंजीयन एवं परमिट प्राप्ति हेतु अतिरिक्त समय प्रदान किए जाने का अनुरोध किया गया है। जिससे देखते हुए आरटीओ ने कई बड़े फैसले लिए है।

    ये हुए फैसले

    उक्त अनुरोध के दृष्टिगत वाहन स्वामियों को जिनके द्वारा संबंधित वाहन डीलर के समक्ष वाहन प्राप्त करने हेतु आवश्यक औपचारिकताएं पूर्ण कर ली गई हो या वाहन प्राप्त कर लिए गये हों को राहत प्रदान किए जाने के दृष्टिगत प्राधिकरण द्वारा यह निर्णय लिया गया है-

     

    01. वाहन स्वामी जिन्हे पूर्व में संस्तुति पत्र जारी किये गये हैं व उनके द्वारा संबंधित वाहन डीलर से वाहन प्राप्त करने हेतु आवश्यक औपचारिकताएं से सम्बंधित प्रमाण पत्र प्राप्त करने के उपरान्त उक्त प्रमाण पत्र दिनांक 10 अप्रैल 2023 तक कार्यालय में प्रस्तुत कर दिया जाता है तो उन वाहन स्वामियों को वाहन पंजीयन एवं परमिट प्राप्त करने हेतु दिनांक 28.04.2023 तक का अतिरिक्त समय प्रदान कर दिया जाए।

    02. दिनांक 10 अप्रैल 2023 के उपरान्त बिन्दु संख्या 01 में उल्लेखित आवेदनों एवं जिन आवेदनों के सापेक्ष परमिट प्राप्त कर लिया गया है, को छोड़कर समस्त आवेदनों को निरस्त मानते हुए उक्त अधिसूचित 18 मार्गो पर प्रथम आवत प्रथम पावत के आधार पर अवशेष रिक्तियों के सापेक्ष आमजन को निर्धारित प्रकिया का पालन करते हुए दिनांक 30.04.2023 तक आवेदन प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान कर दिया जाए। प्राधिकरण की बैठक दिनांक 01.11.2022 के मद संख्या 32 के अर्न्तगत के अन्तर्गत रूड़की ग्रामीण क्षेत्र झबरेडा में विक्रम टैम्पो वाहनों के संचालन हेतु केन्द्र निर्धारित करने एवं ठेका गाडी परमिट जारी करने के सम्बन्ध में वाहन पंजीयन एवं परमिट प्राप्त करने हेतु दिनांक 30.04.2023 तक का अतिरिक्त समय प्रदान किये जाने कानिर्णय लिया गया है।

  • दिल्ली परिवहन विभाग किसके लिए, बड़ा सवाल ?

    दिल्ली परिवहन विभाग किसके लिए, बड़ा सवाल ?

    दिल्ली परिवहन विभाग
    जनहित के लिए या अन्यों के हित के लिए बड़ा सवाल ???

    परिवहन विभाग द्वारा दिल्ली के वाहन मालिको से गैर कानूनी तरीके से फीस लेकर सरकार के राजस्व में इज़ाफ़ा करवाने का सबूत आया सामने,

    वाहन के परमिट के लिए ली जाने वाली फीस सड़क परिवहन एवम् राजमार्ग मंत्रालय और दिल्ली परिवहन विभाग द्वारा एमवी एक्ट और रूल में व्यक्त है और साथ ही यह भी बताया गया है कि कितने समय पहले उस परमिट के लिए दुबारा रिन्यू के लिए फीस जमा करवा सकते हैं।

    दिल्ली परिवहन विभाग में एक वाहन मालिक के द्वारा 2022 में अपने परमिट के नवीनीकरण (रिन्यू) की फीस जमा करवाई जो कि 5 साल के लिए थी यानी 2027 तक।
    वाहन की उस परमिट पर चलने की समय सीमा 2023 तक थी जिसके लिए परिवहन विभाग द्वारा उस मालिक को वाहन का परमिट नवीनीकरण (रिन्यू) 2023 तक करके जारी कर दिया,
    वाहन मालिक के द्वारा वाहन का परमिट रिप्लेसमेंट मोड़ यानी नए वाहन को अपने पुराने वाहन के लिए ज़ारी परमिट पर लाने के लिए जमा कर दिया गया,
    वाहन मालिक द्वारा जिस दिन रिप्लेसमेंट मोड़ में परमिट जमा करवा कर रिप्लेसमेंट स्लिप प्राप्त की गई उस दिन तक उस पर कोई देरी का जुर्माना बकाया नही था
    नियम के अनुसार वाहन को रिप्लेसमेंट करवाने के बाद बिना किसी जुर्माना भरे 120 दिन में नया वाहन खरीद कर उस परमिट पर चढ़वाया जा सकता है,
    वाहन मालिक द्वारा 10 दिनों में ही नया वाहन खरीद कर अपने पुराने वाहन की जगह उस परमिट पर चढवाने के लिए परिवहन विभाग में प्रस्तुत कर दिया,
    वाहन मालिक को नए वाहन पर उसके पुराने वाहन की जगह नए वाहन पर जो परमिट प्रदान किया गया वह उसी तारीख तक मान्य था जिस तारीख को उसका पुराने वाहन के लिए परमिट जारी किया गया था क्योंकि उस वाहन की परमिट श्रेणी के अनुसार सड़क पर चलने की समय सीमा समाप्त हो रही थी,
    वाहन मालिक द्वारा परिवहन विभाग को बताया गया की उसके द्वारा इस परमिट के लिए 2027 तक की फीस जमा करवाई हुई है पर उसकी बात किसी ने नहीं सुनी और उसे उसके परमिट के नवीनीकरण (रिन्यू) के लिए दुबारा फीस जमा करवाने के लिए कह दिया,

    अचम्बा
    वाहन मालिक द्वारा परमिट फीस जमा होने के बावजूद जब दुबारा उसी परमिट के नवीनीकरण (रिन्यू) की फीस कटवाने लगा तो फीस के साथ उससे जुर्माना भी मांगा गया वह भी उस समय के लिए जब वह परमिट रिप्लेसमेंट मोड़ में जमा था,

    अब आप समझ सकते है की परिवहन विभाग ने सरकार के राजस्व में इज़ाफ़ा करवाने के लिए किस आधार पर मालिको के साथ ठगी यानी गैर कानूनी तरीके से पैसा वसूल करने के लिए एप प्रोग्राम बनवा रखे हैं और सच तो यह भी है की आप किसी से भी शिकायत करके देख ले असर जीरो पाएंगे।

    जनहित में जारी
    संजय बाटला

  • डीटीसी की बसों में आग

    डीटीसी की बसों में आग

    क्या दिल्ली सरकार और परिवहन विभाग जनता को बता सकती हैं* दिल्ली में आम आदमी पार्टी सरकार आने की तारीख से आज तक डीटीसी के बेड़े में एक भी बस डीटीसी के नाम से शामिल क्यों नहीं हुई ?

    *डीटीसी की बसों में आग लगने की दुर्घटनाएं दिन प्रतिदिन पर परिवहन आयुक्त चुप, आख़िर क्यों?*

    दिल्ली में अगर किसी व्यवसायिक वाहन में आग लग जाए तो परिवहन विभाग की एसटीए शाखा द्वारा वाहन मालिक को नोटिस जारी कर जवाब मांगा जाता रहा है और पूछा जाता हैं की वाहन में आग लगने के कारण बताए और क्यों इसके लिए उनके खिलाफ़ कार्यवाही ना की जाए । वाहन मे आग लगने के लिए एसटीए शाखा द्वारा वाहन का परमिट रद्द करने की बात कही जाती रहीं हैं।

    दिल्ली में डीटीसी की बसों में चलते हुए आग लगने की अनगिनत दुर्घटनाएं हो रही है जो दिल्ली की जनता के लिए जान माल का खतरा पैदा करती है उसके बावजूद परिवहन आयुक्त जिनके द्वारा डीटीसी बसों को स्टेज कैरिज रूट पर 10 साल की जगह 15 साल तक चलने की इजाजत दी गई जिसके बाद से डीटीसी की बसों में इस तरह के हादसे देखने में आ रहे हैं और इन दुखद हादसों/दुर्घटनाओं के होने पर भी परिवहन आयुक्त चुप है और एसटीए शाखा द्वारा भी डीटीसी को कोई नोटिस जारी नही किया गया, आख़िर क्यों ?

    *क्या परिवहन आयुक्त कि नज़र में दिल्ली की जनता के जान माल की कोई कीमत नहीं ?*

    *क्या परिवहन आयुक्त किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं डीटीसी की जलती बसो में, और इसलिए अभी तक चुप है ?*

    दिल्ली परिवहन निगम द्वारा जनहित और सार्वजनिक सवारी सेवा के सुचारू संचालन के लिए नई बसें नहीं खरीदी गई । मोटर वाहन नियम के अनुसार डीटीसी की बसों के किलोमीटर और स्टेज कैरिज रूट्स पर चलने की समय सीमा समाप्त होने पर जनता के समक्ष बसो की गिनती बनाए रखने के लिए परिवहन आयुक्त द्वारा डीटीसी बसों को 15 साल तक सड़कों पर चलाएं रखने की इजाजत दी और आग लगने की घटनाओं और हादसों के बाद भी चुप है?

    *क्या दिल्ली सरकार और परिवहन विभाग जनता को बता सकती हैं* दिल्ली में आम आदमी पार्टी सरकार आने की तारीख से आज तक डीटीसी के बेड़े में एक भी बस डीटीसी के नाम से शामिल क्यों नहीं हुई ?

    जनहित में जारी
    संजय बाटला

  • दिल्ली की जनता से सवाल ?

    दिल्ली की जनता से सवाल ?

    सभी प्रदुषण नियंत्रण करने वाली सरकारी संस्थाए, विशेषज्ञ, सरकारी विभागों के प्रमुख एवम दिल्ली सरकार एवम् प्रदुषण नियंत्रण में सहायक सरकारी विभागो द्वारा दिल्ली में प्रदुषण के लिए मुख्य रूप में वाहनों को जिम्मेदार ठहराया जाता रहा है. क्या जनता भी दिल्ली में बढ़ते हुए इस प्रदुषण के लिए दिल्ली में चलने वाले वाहनों को जिम्मेदार मानती हैं ।

    हमारा आपसे प्रश्न है :- क्या दिल्ली की जनता भी यह मानती हैं की दिल्ली में बढ़ते प्रदुषण का मुख्य स्त्रोत / कारण दिल्ली में चलने वाले वाहन है ?

    दिल्ली की जनता से एनटीवी अपील करता है की आप अपने राय ओर विचार व्यक्त करे और बताए की दिल्ली में प्रदुषण के लिए वह किसे मुख्य रूप से जिम्मेदार मानते हैं और आपके विचार से दिल्ली में बढ़ते प्रदुषण पर कैसे नियंत्रण किया जाना चाहिए .

    आपके और विशेषज्ञों के द्वारा दिए गए जवाबो और सुझावों को हम दिल्ली और भारत सरकार तक पहुंचा कर दिल्ली में बढ़ते प्रदुषण पर अंकुश लगाने का सफल प्रयास करेंगे और दिल्ली को पूर्ण रूप से प्रदुषण मुक्त राज्य बनवाने का कार्य करेंगे।

  • दिल्ली परिवहन विभाग द्वारा जारी जनहित में बड़ा आदेश

    दिल्ली परिवहन विभाग द्वारा जारी जनहित में बड़ा आदेश

    *दिल्ली परिवहन आयुक्त द्वारा पार्किंग / कस्टडी फीस में भारी बदलाव के साथ जारी किया गया जनहित में आदेश*

    जनहित के लिए प्रसिद्ध परिवहन विभाग द्वारा जनहित में जारी हुआ आज आदेश जिससे व्यवसायिक वाहन जो किसी नियम/अधिनियम/मोटर वाहन कानून की त्रुटि/ गलती करने पर चालान कर जब्त कर लिया जाता हैं उसको समय सीमा पर ना छुड़ा पाने के कारण जो पार्किंग / कस्टडी फीस नए मोटर वाहन के तहत लगाई और चार्ज की जा रही थी उससे बहुत से वाहन मालिको के हालात बद से बदतर होते जा रहे थे।

    लम्बे समय से ऑटो टैक्सी एवम अन्य बहुत संगठन इस पर विचार कर कम करने या खत्म करने की प्रार्थना करते आ रहे थे, आख़िर आज सोमवार 30 जनवरी 2023 को परिवहन आयुक्त के स्वयं के हस्ताक्षर से जनहित में नए आदेेश ज़ारी हो गए जिससे सभी व्यवसायिक वाहन मालिको को काफी हद तक फायदा मिलेगा।

    यह आदेश आज से ही लागू माना जाएगा और इसका फायदा उसी वाहन मालिक को मिलेगा जो आज या आज के बाद अपने वाहन पार्किंग/ कस्टडी से छुड़वाएगे। पहले से छुड़वाए गए वाहन मालिकों को इसका कोई फायदा नही दिया जाएगा और ना ही उनके द्वारा जमा राशी वापिस की जाएगी।

    जनहित में जारी
    *संजय बाटला*

  • बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र शास्त्री के भाई के खिलाफ FIR दर्ज, दलितों के साथ तमंचा लहराते हुए की थी मारपीट

    बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र शास्त्री के भाई के खिलाफ FIR दर्ज, दलितों के साथ तमंचा लहराते हुए की थी मारपीट

    छतरपुर। बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के भाई की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। वो इसलिए क्योंकि अब इनके खिलाफ कई गंभीर आरोप के तहत मामला दर्ज किया गया है। आपको बता दें बीते दिन भाई शालिग्राम गर्ग द्वारा एक विवाह समारोह में तमंचा लहराते हुए दलितों के साथ मारपीट का वीडियो वायरल हुआ था। जिसके बाद उनके खिलाफ ये कार्रवाई की गई है।

    इन धाराओं में मामला दर्ज 

    पुलिस द्वारा जो जानकारी आई है उसके अनुसार बागेश्वर धाम प्रमुख पंडित धीरेंद्र शास्त्री के भाई शालिग्राम गर्ग के खिलाफ आईपीसी की धारा 294, 323, 506, 427 और एससी.एसटी अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की गई। आरोपी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा था। इस वीडियो में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के छोटे भाई शालिग्राम के हाथ में कट्टा और मुंह में सिगरेट थी। वह वीडियो में दलितों के साथ मारपीट करते नजर आ रहे थे।

    ये था मामला

    गौरतलब है बीते दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो जमकर वायरल हुआ था। जिसके अनुसार 11 फरवरी को छतरपुर जिले के गढ़ा गांव में अहिरवार समाज में एक शादी समारोह था। जहां पंडित धीरेंद्र शास्त्री का भाई शालिग्राम भी पहुंचा था। इसी दौरान उसकी एक युवक से बहस हो गई थी। जिसके बाद शालिग्राम के भाई द्वारा युवक को कट्टा निकालकर धमकाते हुए दिखाई दे रहा था। मुंह में सिगरेट भी लिया था। इस दौरान जब वहां मौजूद लोगों ने बचाव करना शुरू किया तो बागेश्वर सरकार के भाई ने उन लोगों के साथ गाली गलौज की।

    धीरेंद्र शास्त्री ने क्या कहा 

    आपको बता दें इस वीडियो के सामने आने के बाद बागेश्वर सरकार की कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन उन्होंने कहा कि हर मामले को बागेश्वर धाम से जोड़ना सही नहीं है। चूंकि इस अभी बागेश्वर धाम बड़े चर्चा में हैं। इसलिए उनके भाई का ये कारनामा धीरेंद्र शास्त्री के लिए मुसीबत बन सकता है।