Category: Natural Disaster

  • दो नेशनल हाईवे समेत 242 सड़कें अवरुद्ध, दलदल में फंसी छात्रा

    दो नेशनल हाईवे समेत 242 सड़कें अवरुद्ध, दलदल में फंसी छात्रा

    शिमला

    हिमाचल प्रदेश में येलो अलर्ट के बीच शुक्रवार को भारी बारिश हुई है।  प्रदेशभर में दो नेशनल हाईवे समेत 242 सड़कें अवरुद्ध हैं। वहीं 989 बिजली ट्रांसफॉर्मर ठप और 19 पेयजल योजनाएं प्रभावित हैं। कालका शिमला नेशनल हाईवे-5 चक्कीमोड़ के पास भूस्खलन होने से बाधित हो गया है।

    चक्कीमोड़ के समीप दत्यार में भी भूस्खलन हुआ है। मंडी कुल्लू नेशनल हाईवे 6 मील और 9 मील के पास अवरुद्ध है। मंडी पठानकोठ रोड 32 मील के पास बाधित है। वहीं पांवटा शिलाई हाईवे भी बंद है।  प्रदेश में 14 अगस्त तक बारिश का दौर जारी रहने का पूर्वानुमान है।

    घागस-ब्रह्मपुखर रोड मगरोट के पास भूस्खलन होने से बाधित है। वाहनों को वाया बिलासपुर बाजार रूट से भेजा जा रहा है। सोलन-बिलासपुर रोड सबाठू के पास भूस्खलन होने से बाधित है। सुबाथू कुनिहार मार्ग सुबाथू के समीप बंद है। लोग पैदल अवाजाही कर रहे हैं।

    रामशहर-नालागढ़ रोड बाधित है। रामशहर से स्वारघाट घाट क्वारनी के पास क्षतिग्रस्त होने से से आवाजाही के लिए अवरुद्ध है। रामशहर से गंभारखड़ रोड जगह जगह भूस्खलन होने से बाधित है।  रामशहर से शिमला रोड दिग्गल के पास चट्टानें गिरने से अवरुद्ध है।
    दलदल में फंसी छात्रा
    जिला शिमला के चौपाल में एक स्कूली छात्रा दलदल में फंस गई। ग्रामीणों ने कड़ी मशक्कत से छात्रा को बाहर निकाला। चौपाल की लिंगजार पंचायत में यह घटना उस वक्त हुई जब छात्रा स्कूल जा रही थी।

  • किंक्रेग में तीन मंजिला भवन के नीचे हुआ भूस्खलन, एक झुग्गी तबाह

    किंक्रेग में तीन मंजिला भवन के नीचे हुआ भूस्खलन, एक झुग्गी तबाह

     मसूरी

    मसूरी शहर में भारी बारिश से तीन मंजिला भवन के नीचे भूस्खलन हो गया। इससे एक झुग्गी तबाह हो गई। वहीं, दूसरी झुग्गी में सो रहा परिवार बाल-बाल बच गया। प्रशासन ने भवन में रह रहे पांच परिवारों को दूसरी जगह पर शिफ्ट किया है।

    किंक्रेग में भारी बारिश से तीन मंजिला भवन के नीचे पुश्ता ढह गया। मलबा नीचे बनी झुग्गियों पर गिरा, इससे एक झुग्गी तबाह हो गई। गनीमत रही कि उस वक्त झुग्गी में कोई नहीं था। वहीं, दूसरी झुग्गी में सो रहा नेपाली परिवार आवाज सुनकर बाहर की ओर दौड़ा। झुग्गी में रहने वाले प्रमोद थापा ने बताया कि वह पत्नी और दो बच्चाें साथ सो रहे थे। अचानक मलबा आने की आवाज से नींद खुली और बाहर भागकर जान बचाई।

    भवन में रहने वाला दिनेश उनियाल की पत्नी रेनू उनियाल ने बताया कि जैसे ही पुश्ता गिरा उसी समय घर से बाहर आ गए। भवन को खतरा बना हुआ है। पालिकाध्यक्ष अनुज गुप्ता ने क्षेत्र का दौरा कर स्थिति जानी।

    एसडीएम ने निरीक्षण कर सुनीं समस्याएं

    एसडीएम नंदन कुमार ने भूस्खलन प्रभावित किंक्रेग का निरीक्षण किया और परिवारों से समस्याएं जानीं। उन्होंने भवन में रहने वाले पांच परिवारों को अन्य स्थान पर शिफ्ट करने के लिए नगर पालिका के ईओ को निर्देश दिए।
    साथ ही पुश्ते की मरम्मत करने के लिए कहा। एसडीएम नंदन कुमार ने कहा कि प्रभावित परिवारों की हर संभव सहायता की जाएगी। वहीं, देर शाम तक दो परिवारों को शिफ्ट कर दिया गया था। बाकी तीन को भी दूसरी जगह भेजा जा रहा है।

  • नेपाल में जोरदार बारिश, फिर से उफनाएंगी घाघरा-राप्ती

    नेपाल में जोरदार बारिश, फिर से उफनाएंगी घाघरा-राप्ती

    गोरखपुर।

    गोरखपुर जिले में कम लेकिन नेपाल में हो रही जोरदार बारिश की वजह से नदियों का जलस्तर बढ़ने लगा है। श्रावस्ती जिले में राप्ती बैराज पर जलस्तर बढ़ने की वजह से नदी में 41678 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इससे अगले 24 घंटे में गोरखपुर-बस्ती मंडल में भी राप्ती और घाघरा नदी का जलस्तर बढ़ सकता है।

    नेपाल में होने वाली बारिश से ही राप्ती, रोहन, सरयू सहित अन्य नदियों का जलस्तर बढ़ता है। बताया जा रहा है कि नेपाल में राप्ती नदी के कैचमेंट एरिया ( वह क्षेत्र जिसमें बरसने वाला जल नदियों में आकर मिलता है) में बारिश हो रही है। इस वजह से नदी का पानी बढ़ रहा है।

    सिंचाई विभाग की ओर से जारी बुलेटिन के अनुसार श्रावस्ती जिले में राप्ती बैराज पर खतरे का निशान 127.750 मीटर है। सोमवार की शाम सात बजे वहां राप्ती का पानी खतरे के निशान से पांच सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया था। इस दौरान नदी के कैचमेंट एरिया में 10 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है।

  • पहाड़ से मैदान तक बरसी आफत, कई लोग बहे, भवन हुए ध्वस्त

    पहाड़ से मैदान तक बरसी आफत, कई लोग बहे, भवन हुए ध्वस्त

    देहरादून

    उत्तराखंड में आज भी मौसम बिगड़ा हुआ है। बारिश पहाड़ से मैदान तक कहर बरपा रही है। नदी-नाले उफान पर हैं। वहीं, रुद्रप्रयाग और कोटद्वार में भूस्खलन के कारण भवन ध्वस्त हो गए । नैनीताल और ऋषिकेश में दो लोग उफनाए बरसाती नदी नालों में बह गए।

    वहीं, आज राजधानी दून समेत आठ जिलों में भारी बारिश की आशंका है। मौसम विभाग की ओर से देहरादून, टिहरी, पौड़ी, नैनीताल, चम्पावत, बागेश्वर, पिथौरागढ़ और ऊधमसिंह नगर जिले के लिए भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है।

    उधर, प्रदेश में 210 सड़कें बंद हैं। बंद सड़कों में 13 मुख्य जिला मार्ग, आठ जिला मार्ग, चार अन्य जिला मार्ग, 90 ग्रामीण सड़कें और 95 पीएमजीएसवाई की सड़कें शामिल हैं। सड़कों को खोलने के काम में सोमवार को 185 जेसीबी मशीनों को लगाया गया।

    रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड हाईवे पर मंगलवार सुबह भारी भूस्खलन हो गया। जिसके चलते हाईवे पर रामपुर में होटल जमींदोज हो गया। वहीं, अगस्त्यमुनि से सोनप्रयाग के बीच हाइवे कई जगह पर बाधित है। बताया जा रहा है कि यह होटल शहर का सबसे पुराना होटल था। इसे पहले भी खाली कराया जा चुका था।

    ऋषिकेश-बदरीनाथ हाईवे पर तोता घाटी में भारी भूस्खलन हो गया। जिससे यहां सड़क का आधा हिस्सा ढह गया। इसके चलते हाईवे पर यातायात बाधित हो गया है। उधर, व्यासी के समीप अटाली  गंगा में मलबा आने से हाईवे सोमवार से अवरुद्ध चल रहा है।

    नैनीताल में सोमवार देर रात भारी बारिश से जन-जीवन अस्त व्यस्त हो गया। बारिश के कारण चोरगलिया में शेर नाला अचानक उफान पर आ गया। इस दौरान एक ग्रामीण नाले के तेज बहाव में बह गया। वहीं, बहाव तेज होने के कारण नाले के दोनों तरफ वाहनों की कतार भी लग गई।

    ऋषिकेश में देर रात भारी बारिश के बाद बरसाती नाला उफान पर आ गया। इस दौरान तेज बहाव की चपेट में आने से एक युवक बह गया। सूचना मिलने पर एसडीआरएफ ने सर्च ऑपरेशन चलाया। टीम ने युवक का शव शिवपुरी से बरामद किया है।

  • जमकर बरसे बदरा, किसानाें के चेहरे खिले

    जमकर बरसे बदरा, किसानाें के चेहरे खिले

    शाहतलाई( बिलासपुर)। जिले में रविवार को जमकर बादल बरसे। काफी दिनों के बाद हुई अच्छी बारिश से लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिली। रविवार सुबह मौसम बिल्कुल साफ था। दोपहर तक आसमान में घने बादल छा गए। इसके झमाझम बारिश शुरू हुई जो शाम तक रुक-रुक होती रही। बारिश से किसानों ने राहत महसूस की। जिले में रविवार को अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
    जिले में हुई बारिश से मौसम ठंडा और सुहावना हुआ। पिछले कुछ दिनों से बारिश न होने से लोगों को उमस भरी गर्मी परेशान कर रही थी। बारिश होने के साथ ही लोगों को इससे राहत मिली। वहीं यह बारिश किसानों के लिए लाभकारी साबित हो सकती है। मक्की की पौध पर भूट्टे बनना शुरू हो गए हैं। फसल के लिए बारिश की आवश्यकता थी। किसान पवन देवता से प्रार्थना कर रहे थे कि आंधी से फसल का बचाव हो जाए तो उन की आर्थिकी में सुधार हो जाएगा। पहले ही सुंडी रोग से फसल को काफी नुकसान पहुंचा है। किसान वीरी सिंह वर्मा, मनसा राम, कर्मचंद, देवराज, पवन, अमरचंद, ज्ञानचंद, प्रकाश चंद, कुलदीप चंद, प्रेमचंद भारद्वाज और जगदीश चंद ने बताया कि जुलाई के पहले सप्ताह में अधिक बारिश और उसके बाद कम बारिश से किसान फसल को लेकर चिंतित हो गए। इस बारिश से थोड़ी राहत मिली है। साथ ही किसानों ने सरकार से किसानों की फसल को हुए नुकसान का उचित मुआवजा देने की मांग की है। उधर कृषि विशेषज्ञ हेमराज ने बताया कि रविवार को हुई बारिश मक्की की फसल के लिए वरदान साबित होगी।

  • रेणुकाजी बांध रोक सकता है दिल्ली में बाढ़ से होने वाली तबाही, 48 घंटे तक पानी रोकने की क्षमता

    रेणुकाजी बांध रोक सकता है दिल्ली में बाढ़ से होने वाली तबाही, 48 घंटे तक पानी रोकने की क्षमता

    ददाहू (सिरमौर)

    इस बरसात से दिल्ली में जो बाढ़ जैसे हालात बनते हैं। बाढ़ जैसी भयावह स्थिति पर जिला सिरमौर का रेणुकाजी बांध विराम लगा सकता है। राजधानी दिल्ली की प्यास बुझाने के लिए बनाई जाने वाली रेणुकाजी बांध परियोजना दिल्ली में बाढ़ की स्थिति को रोकने में भी सहायक होगी। रेणुकाजी बांध प्रबंधन ने इसका दावा किया है। बीते दिनों दिल्ली में बाढ़ और जलभराव के चलते स्थिति गंभीर हो गई थी।

    इसके चलते करोड़ों रुपये की संपदा को भारी नुकसान पहुंचा है। दिल्ली की जनता इस त्रासदी से अभी तक उभर नहीं पाई है। यदि रेणुकाजी बांध का निर्माण हुआ होता तो दिल्ली को इस तबाही से बचाया जा सकता था। जिला सिरमौर में स्थित गिरि नदी पर बनने वाले 148 मीटर (नदी के तल) ऊंचे रेणुका बांध से 24 किलोमीटर लंबी झील (परशुराम सागर) के वजूद में आने से 48 घंटे तक बाढ़ को नियंत्रित किया जा सकता है।

    इससे दिल्ली सहित आसपास के राज्यों में बाढ़ की स्थिति से बचा जा सकता है। बीते दिनों भारी बारिश के चलते दिल्ली और अन्य पड़ोसी राज्यों में आई बाढ़ तथा जलभराव की स्थिति से सबक लेते हुए राज्य और केंद्र सरकार रेणुकाजी बांध बनाने की ओर इशारा कर रही हैं। इससे बांध प्रबंधन को केंद्र सरकार से बजट की उम्मीद बंधी है।

    रेणुकाजी बांध परियोजना के महाप्रबंधक आरके चौधरी ने बताया कि रेणुका बांध को राष्ट्रीय महत्व के साथ-साथ बहुआयामी परियोजना में शामिल किया गया है। यदि रेणुका बांध बना होता तो दिल्ली में तबाही से निश्चित तौर पर बचा जा सकता था। प्रस्तावित रेणुकाजी बांध 48 घंटे तक पानी को रोककर रखने की क्षमता रखता है। बांध का निर्माण पानी को रोकने के मकसद से ही किया जाता है, जबकि बैराज में पानी बहुत कम मात्रा मेंं कुछ समय तक ही ठहर सकता है।

  • बादल फटा, 60 मीटर सड़क बही, गाड़ियां फंसी, बागवान परेशान

    बादल फटा, 60 मीटर सड़क बही, गाड़ियां फंसी, बागवान परेशान

    कुल्लू

    हिमाचल में बारिश से नुकसान का सिलसिला जारी है। कुल्लू जिले में शुक्रवार शाम को खनेरनाला में बादल फटने से खनाग-जुहड़ व टकरासी सड़क का करीब 60 मीटर हिस्सा पूरी तरह से बह गया है। इससे रघुपुर घाटी की आठ पंचायतों का संपर्क उपमंडल व जिला मुख्यालय से कट गया है। वहीं इसी नाले से जोड़ी गई दो पेयजल योजनाएं भी पूरी तरह से ध्वस्त हो गई हैं। सड़क के बहने से यहां कई गाड़ियां भी फंस गई हैं और बस सेवा भी पूरी तरह से ठप हो गई है।

    कुछ दिनों बाद घाटी में सेब का सीजन शुरू होने वाला है। ऐसे में बागवानों की चिंता बढ़ गई है। वहीं मंडी जिला के सराज के छतरी में नाले में बाढ़ आने से दो कारे बह गईं। पेड़ गिरने से चार गाड़ियां भी क्षतिग्रस्त हुई हैं। हिमाचल में शनिवार और रविवार को भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी हुआ है। 7 अगस्त से बारिश से थोड़ी राहत मिलने का पूर्वानुमान है। बिलासपुर के बम्म गांव में पशुशाला जमींदोज होने से भैंस की मौत हो गई। उधर, मंडी जिले में बारिश का कहर जारी है।

    मंडी, सरकाघाट, बल्ह, सराज, नाचन और धर्मपुर में भारी बारिश से कई स्थानों पर भूस्खलन हुआ है और मकानों को खतरा बन गया है। इससे कई सड़कों पर आवाजाही बंद हो गई है। जिला कुल्लू के आनी और बंजार क्षेत्र में भारी बारिश से जनजीवन प्रभावित हो गया है। तीर्थन नदी के साथ क्षेत्र के नालों का जलस्तर बढ़ गया है। जिला प्रशासन ने लोगों को बरसात के मौसम में नदी-नालों की तरफ न जाने की हिदायत दी है। लगातार हो रही बारिश से प्रदेश की कई संपर्क सड़कों पर भी यातायात प्रभावित चल रहा है।

    चंडीगढ़मनाली एनएच एक बार फिर बंद
    चंडीगढ़-मनाली एनएच एक बार फिर भारी बारिश के चलते शुक्रवार देर शाम को 7:00 बजे मलबा आने के कारण 6 मील के पास पूरी तरह बंद हो गया है। सड़क के सुबह तक खुलने के आसार नहीं दिख रहे हैं। एएसपी मनमोहन ने बताया कि मार्ग 7:00 बजे बंद हो गया है। उल्लेखनीय है कि दिन के समय भी हाईवे मंडी के पास एक घंटा बाधित हो गया था।

  • बारिश नहीं हुई तो शाम तक छोटे वाहनों के लिए बहाल होगा कालका-शिमला फोरलेन

    बारिश नहीं हुई तो शाम तक छोटे वाहनों के लिए बहाल होगा कालका-शिमला फोरलेन

    सोलन

    कालका-शिमला फोरलेन शुक्रवार को तीसरे दिन भी बंद रहा। शनिवार को बारिश नहीं हुई तो शाम तक छोटे वाहनों के लिए फोरलेन बहाल हो जाएगा। शुक्रवार को वैकल्पिक मार्गों पर जाम लमा रहा। इससे आवाजाही करने वाले लोगों का खर्च ज्यादा हो गया है। शुक्रवार को दूध, ब्रेड समेत अन्य जरूरी सामान की सप्लाई सोलन और शिमला नहीं पहुंची।

    भारी बारिश के चलते चंडीगढ़-मनाली नेशनल हाईवे मंडी के पास एक घंटा बाधित रहा। बिलासपुर के बम्म गांव में पशुशाला जमींदोज होने से भैंस की मौत हो गई। मंडी जिला के सराज के छतरी में नाले में बाढ़ आने से दो कारे बह गईं। पेड़ गिरने से चार गाड़ियां भी क्षतिग्रस्त हुई हैं। हिमाचल में शनिवार और रविवार को भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी हुआ है। 7 अगस्त से बारिश से थोड़ी राहत मिलने का पूर्वानुमान है।

    पहाड़ दरकने से बंद पड़े कालका-शिमला फोरलेन में अभी 30 फीसदी कार्य ही हुआ हैं। बारिश से निर्माण कार्य प्रभावित हो रहा है। पहाड़ी से आ रहा पानी भी मुसीबत बना हुआ है। उधर, मंडी जिला में बारिश का कहर जारी है। चंडीगढ़-मनाली एनएच छह मील के पास मलबा आने से सुबह साढ़े छह बजे से साढ़े सात बजे तक बाधित रहा। मंडी, सरकाघाट, बल्ह, सराज, नाचन और धर्मपुर में भारी बारिश से कई स्थानों पर भूस्खलन हुआ है और मकानों को खतरा बन गया है।
    इससे कई सड़कों पर आवाजाही बंद हो गई है। जिला कुल्लू के आनी व बंजार क्षेत्र में भारी बारिश से जनजीवन प्रभावित हो गया है। तीर्थन नदी के साथ क्षेत्र के नालों का जलस्तर बढ़ गया है। जिला प्रशासन ने लोगों को बरसात के मौसम में नदी-नालों की तरफ न जाने की हिदायत दी है। राजधानी शिमला में दोपहर के समय बादल झमाझम बरसे। सुबह और शाम को मौसम साफ रहा। प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में भी शुक्रवार को मौसम साफ बना रहा।

  • हिमाचल में भारी बारिश से चार एनएच, 468 सड़कें ठप

    हिमाचल में भारी बारिश से चार एनएच, 468 सड़कें ठप

    शिमला

    मौसम का कहर लगातार जारी है। भारी बारिश और भूस्खलन से चार नेशनल हाईवे और 468 सड़कों पर यातायात बंद हो गया है। नदी-नाले उफान पर हैं। गुरुवार रात को हमीरपुर की दरब्यार पंचायत में स्टेलपोश मकान गिरने से सो रहे एक ही परिवार के छह सदस्य मलबे में दब गए। ग्रामीणों ने कड़ी मशक्कत के बाद सुरक्षित निकाला। शिमला जिले से सबसे ज्यादा 220 और कुल्लू में 115 सड़कें बंद हैं। वहीं, राज्य में 552 बिजली ट्रांसफार्मर भी ठप हैं। 224 जलापूर्ति योजनाएं भी बाधित चल रही हैं। शिमला, कुल्लू व मंडी में सबसे ज्यादा ट्रांसफार्मर बंद पड़े हैं।

    पौंग बांध से तीसरे दिन भी पानी छोड़ा
    शुक्रवार को पौंग बांध से तीसरे दिन भी पानी छोड़ा गया। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने प्रदेश के कई इलाकों के लिए शनिवार को भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है। 30 जुलाई से मौसम में कुछ सुधार होने से राहत के आसार हैं। किन्नौर के नाथपा गांव की पहाड़ी से पिछले चार दिनों से लगातार चट्टानें गिरना जारी है। इससे गांव को खतरा पैदा हो गया है। शुक्रवार सुबह 5:15 बजे पहाड़ी से भूस्खलन होने पर नाले के साथ मौजूद गांव के पांच मकान खाली करवाए गए। कोटसारी में भूस्खलन से मकानों में दरारें आने से तीन परिवार बेघर हो गए हैं।

    लोअर कोटी गांव में मकान क्षतिग्रस्त
    वहीं लोअर कोटी गांव में प्रदीप ठाकुर का मकान भी क्षतिग्रस्त हुआ है। नाथपा गांव में पहाड़ी दरकने से ग्रामीणों ने खौफ के साये में रात गुजारी। कक्षस्थल में पहाड़ से चट्टानें गिरने से दोमंजिला मकान क्षतिग्रस्त हुआ है। दंपती, बेटे और 6 मजदूरों ने भागकर अपनी जान बचाई। नेशनल हाईवे पांच रामपुर के ब्रौनी खड्ड में भूस्खलन से फिर बंद हो गया है। इसके अलावा कुल्लू-मनाली, कुल्लू-आनी और चंबा-भरमौर एनएच भी ठप पड़ा है। उधर, किन्नौर प्रशासन ने खतरे को भांपते हुए बाढ़ग्रस्त कांधार, खुडणा और शीलाभावी गांव में मकान खाली करवा दिए हैं।

    चंडीगढ़-मनाली मार्ग दो स्थानों पर मलबा गिरने से बंद

    सरपारा पंचायत घर और मंदिर में प्रभावितों के रहने का इंतजाम किया गया है। उधर, मंडी जिला में भारी बारिश के चलते चंडीगढ़-मनाली मार्ग दो स्थानों पर मलबा गिरने से बंद है। मंडी-पठानकोट हाईवे की सड़क पर ऐहजू, चौंतड़ा व बीड़ मार्ग पर भारी बारिश से जलभराव से दुकानों में पानी घुस गया। सरकाघाट की सुलपुर जबोठ पंचायत में बारिश में एक पेजयल योजना जबोठी खड्ड में बह गई है। बल्ह क्षेत्र में कलखर से रिवालसर मार्ग आठ घंटे बाधित रहा।

    मनाली के बाहंग नाले में बाढ़ से पानी सड़क पर आ गया

    शुक्रवार को मनाली सहित कई इलाकों में बारिश का दौर जारी रहा। मनाली के बाहंग नाले में बाढ़ से पानी सड़क पर आ गया। पार्वती घाटी के छरोड़नाला में एक मकान भूस्खलन की चपेट में आने से क्षतिग्रस्त हो गया है। वहीं पार्वती व तीर्थन घाटी में लोगों के घरों के आसपास दरारें पड़ने से खतरा बढ़ गया है। राजधानी शिमला में शुक्रवार को मौसम मिलाजुला रहा। सुबह के समय शहर में बादल बरसे। दोपहर को मौसम साफ हुआ। शाम को फिर बारिश हुई।

    पुलिस लाइन सोलन के पास चौथी बार धंसा हाईवे का हिस्सा

    वहीं, कालका-शिमला नेशनल हाईवे-5 पर सोलन बाईपास में पुलिस लाइन के पास चौथी बार ट्रक ले-बाय धंस गया है। हाल ही में हुई बारिश के बाद हाईवे को काफी क्षति हो गई है। इसी के साथ दर्जनों क्षेत्रों में सड़क धंस चुकी है। इससे वाहन चालकों को यहां से निकलने में दिक्कत पेश आ रही है। लोग जान जोखिम में डालकर हाईवे से गुजर रहे हैं। वहीं शहर के दोहरी दीवार पर लगातार भूस्खलन हो रहा है। लगातार डंगे से भी पत्थर गिर रहे हैं। ऐसे में यहां पर खतरा बना हुआ है। इसे देखते हुए प्रशासन ने ऑटो और बस स्टैंड का स्थान भी बदल दिया है। वहीं कुमारहट्टी में वीरवार देर शाम भूस्खलन हुआ है। जिलेभर में शुक्रवार सुबह भी बारिश हुई है।

    प्रदेश में अब तक 5,361.16 करोड़ रुपये का नुकसान

    इस बार मानसून में 24 जून से 28 जुलाई तक प्रदेश में 5536.15 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हो चुका है। 184 लोगों की जान गई है। 211 लोग जख्मी हुए हैं। बाढ़ से 699 मकान ढह गए, जबकि 7093 मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। इस दौरान भूस्खलन की 71 और अचानक बाढ़ की 51 घटनाएं सामने आई हैं।

  • कमेड़ा में हाईवे खोलने में जुटी जेसीबी

    कमेड़ा में हाईवे खोलने में जुटी जेसीबी

    तीन दिनों से कमेड़ा में बंद ऋषिकेश-बदरीनाथ हाईवे खोलने का काम जारी है। यहां सड़क निर्माण के लिए पहाड़ी कटिंग के लिए दोनों ओर से जेसीबी लगी है। बुधवार को बारिश के बाद भी हाईवे निर्माण का काम जारी रहा। वहीं जखेड़ गदेरे में पानी अधिक होने से एनएच की ओर से यहां पुलिया बनाने की भी तैयारी है। एनएचआईडीसीएल के डीजीएम शैलेंद्र कुमार ने कहा कि हाईवे शुक्रवार सुबह तक बहाल कर दिया जाएगा। गदेरे में ज्यादा पानी होने के कारण अभी यहां अस्थायी पुलिया बनाई जाएगी ताकि पैदल आवाजाही हो सके।

    देवाल- बुरकोट गदेरे में मलबा आने से लोहाजंग-वाण सड़क बंद हो गई है जिससे वाण गांव तक वाहन नहीं जा सकेंगे। इस गदेरे पर बना मोटर पुल वर्ष 2018 की आपदा में बह गया था। पांच साल बाद भी यहां मोटर पुल नहीं बना है। वाण के हीरा पहाड़ी ने कहा कि सरकार से कई बार पुल बनाने की मांग कर चुके हैं लेकिन अभी तक निर्माण नहीं हुआ। उन्होंने डीएम से मोटर पुल स्वीकृत करने की मांग की। संवाद

    कर्णप्रयाग/थराली- ऋषिकेश-बदरीनाथ हाईवे कर्णप्रयाग में उमा माहेश्वर आश्रम के पास करीब 10 घंटे बाद वाहनों की आवाजाही के लिए खुल गया। मंगलवार रात को 12 बजे हाईवे पहाड़ी से मलबा व पत्थर गिरने से बंद हो गया था। इस दौरान वहां कर्णप्रयाग, रुद्रप्रयाग, श्रीनगर, देहरादून सहित गोपेशवर, जोशीमठ और बदरीनाथ जाने वाले कई यात्री वाहन फंसे रहे। लोगों ने होटलों व अपने वाहनों में रात गुजारी। बुधवार सुबह करीब 10 बजे तक एनएच ने जेसीबी से हाईवे से मलबा हटाया और यातायात बहाल किया। उसके बाद यात्री व स्थानीय वाहन अपने गंतव्यों को रवाना हुए। दूसरी ओर थराली में बारिश से कर्णप्रयाग-ग्वालदम हाइवे नारायणबगड़, हरमनी, मल्योपहाड़, बुसेड़ी और बैनोली बैंड में 5 घंटे तक बंद रहा। संवाद

    जोशीमठ-  हाईवे से मलबा हटाने के दौरान पहाड़ी से जेसीबी पर बोल्डर गिर गए। तभी जेसीबी ऑपरेटर ने जेसीबी से कूद मार दी और वह बाल-बाल बच गया। हालांकि बाद में अन्य जेसीबी लगाकर हाईवे सुचारु कर दिया गया।

    बुधवार सुबह पांच बजे बदरीनाथ हाईवे जोशीमठ से एक किमी पहले कूड़ा निस्तारण केंद्र के पास मलबा आने से बंद हो गया। हाईवे जेसीबी से खोल दिया गया, लेकिन कुछ देर बाद फिर मलबा आ गया। मलबा हटाने के लिए फिर जेसीबी लगाई गई लेकिन इसी दौरान पहाड़ी से बोल्डर जेसीबी पर गिर गए। तभी ऑपरेटर ने जेसीबी से कूद मार दी और बाल-बाल बच गया। बाद में यहां तीन जेसीबी लगाकर हाईवे खोला गया। सुबह कुछ घंटे क्षेत्र में संचार सेवा भी ठप रही।

    गोपेश्वर- बरसात शुरू होने के दौरान प्रशासन की ओर से कई बैठकों का दौर चला जिसमें हाईवे के साथ ही ग्रामीण सड़कों को तुरंत खोलने के निर्देश दिए गए लेकिन प्रशासन के निर्देश और दावे बरसात में हवाई साबित हो रहे हैं। बरसात से चमोली जिले में 49 सड़कें बंद हैं जिससे 150 से अधिक गांव के लोगों की आवाजाही ठप हो गई है। ऐसे में ग्रामीण पैदल ही कई किमी चलने के लिए मजबूर हैं।
    -जिले में विरही-निजमुला मार्ग काली चट्टान के समीप कई दिनों से मलबा आने से लगातार बंद हो रहा है। कभी स्थानीय लोग तो कभी विभाग की ओर से मार्ग खोला जा रहा है। वहीं नंदप्रयाग-नंदानगर, नंदानगर-भेंटी, सेरा-मोख और नंदानगर-सुतोल सहित अन्य सड़कें बंद पड़ी हैं।
    खतरे की जद में सरतोली मार्ग का पुल

    – चमोली-सरतोली मार्ग पर मजोठी गांव के पास बने पुल पर कभी भी हादसा हो सकता है। नालियां नहीं होने से बारिश का पानी पुल पर बह रहा है जिससे पुल की एप्रोच रोड को खतरा बना हुआ है। इस सड़क पर हर दिन कई वाहनों की आवाजाही होती है। ऐसे में यदि पुल खतरे की जद में आता है तो यहां बड़ा हादसा हो सकता है।