Author: News Editor

  • मानसून में बचना है पेट के संक्रमण से, तो इन बातों का रखें याद

    मानसून में बचना है पेट के संक्रमण से, तो इन बातों का रखें याद

    नई दिल्ली: बारिश के दिनों में दूषित जल और खाद्य पदार्थों से होने वाली बीमारियों का बढ़ना स्वाभाविक है। इस समय पेट दर्द और संक्रमण की शिकायतें बढ़ जाती हैं और यह समस्या देश के ज्यादातर हिस्सों में है। इसे स्टमक फ्लू भी कहा जाता है। दस्त, पेचिस और उल्टी की दिक्कत देखी जा रही है। दस्त के साथ ब्लड आने की भी शिकायत देखी जाती हैं। इन दिनों पीलिया होने पर एक-दो दिन बुखार रहता है और फिर उल्टियां होती हैं। इसके बाद आंखों, त्वचा और यूरिन के पीला होने की दिक्कतें आने लगती हैं। इस मौसम में हेपेटाइटिस-ए और ई के भी मामले सामने आते हैं। पीलिया का मुख्य कारण है-दूषित भोजन और पानी का सेवन।

    दूषित खाद्य से बढ़ती समस्या

    अगर बुखार चार-पांच दिन से ऊपर चला जाता है, तो टायॉइड होने की आशंका बढ़ जाती है। विषाक्त भोजन, दूषित जल, बाहरी पानी-पूरी या गन्ने का जूस पीने से भी पेट का संक्रमण हो सकता है। मौसमी परिवर्तन के चलते कॉलरा (हैजा) की आशंका रहती है। पेट के संक्रमण से बचाव का आसान तरीका यही है कि भोजन से पहले और बाद में हाथों को अच्छी तरह से साफ करें। भोजन को ढककर रखें। इन दिनों भोजन चार से पांच घंटे में खराब होने लगता है। इसलिए भोजन को फ्रिज में रखें।

    हवा की नमी से जोखिम

    आर्द्रता अधिक होने से खान-पान और शारीरिक श्रम दोनों को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है। हवा में नमी बढ़ने से बैक्टीरिया पनपने की गुंजाइश अधिक रहती है। इससे संक्रमण की आशंका बढ़ जाती है। जो लोग सर्दी-खांसी से पीड़ित हैं, उन्हें यह ध्यान रखना चाहिए कि छींकते या खांसते समय ड्रॉपलेट इधर-उधर न गिरने दें। उन गंदे हाथों से चेहरे को न छुएं। बचाव के लिए मास्क का प्रयोग कर सकते हैं।

    डायबिटीज और ब्लड प्रेशर में अधिक सतर्कता

    मधुमेह, कैंसर या किडनी आदि बीमारियों से जूझ रहे लोगों की प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) पहले से कम हो चुकी होती है। ऐसे लोगों को नियमित दवाएं लेने के साथ-साथ खानपान का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए। कोविड टीकाकरण की ही तरह कई अन्य बीमारियों के लिए भी मरीजों को टीका दिया जाता है।

    टीकाकरण बेहतर उपाय

    मानसून में इन्फ्लूएंजा यानी फ्लू जैसी दिक्कतें सामान्य हैं। इन दिनों निमोनिया और टायफॉइड भी बढ़ता है। इन तीनों बीमारियों के लिए टीकाकरण बेहतर विकल्प है। कम उम्र के मधुमेह रोगियों और खासकर, जो लोग अक्सर बाहर का भोजन करते हैं, उन्हें हेपेटाइटिस-ए का टीकाकरण जरूर कराना चाहिए।

    ध्यान रखने वाली जरूरी बातें

    अगर सिरदर्द, बुखार या ठंड लग रही है, तो सिर्फ पैरासिटामोल की ही गोली लें। निमूस्लाइड, कांबिफ्लेम जैसी दवाएं जो तुरंत बुखार को कम कर देती हैं, वे कभी-कभी खतरनाक हो सकती हैं। बिना डॉक्टर की सलाह के उनका सेवन न करें। पैरासिटामोल की गोली 24 घंटे में तीन से चार बार ली जा सकती है। अगर एक-दो दिन में बुखार नहीं उतर रहा है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। उल्टी और दस्त की ही समस्या है, तो भी खुद से दवा न लें। डॉक्टर से परामर्श करें, क्योंकि ये लक्षण हेपेटाइटिस के भी हो सकते हैं। हेपेटाइटिस अगर गंभीर हो जाता है, तो लिवर को नुकसान पहुंचा सकता है। ध्यान रखें छोटा सा संक्रमण कई बार लापरवाही की वजह से गंभीर रूप ले सकता है।

    इन बातों का रखें ध्यान

    • अगर किसी बीमार व्यक्ति से मिल रहे हैं, तो स्वच्छता का ध्यान रखें।
    • सामान्य वायरल डायरिया एक दिन बाद ठीक हो जाता है। इसमें मरीज को दूध से परहेज कर दही का सेवन करना चाहिए।
    • रक्तचाप से ग्रस्त लोग, जो दवाइयों का सेवन कर रहे हैं, लूज मोशन या उल्टी होने पर ब्लडप्रेशर माप कर ही दवाएं लें, क्योंकि इन बीमारियों में रक्तचाप नीचे आ जाता है।
    • अगर बीपी 120 और 70 से ऊपर है, तभी दवाई लें, अन्यथा न लें।

    खानपान का रहे ध्यान

    किसी कारण बाहर खाना खा रहे हैं, तो ध्यान रखें कि वह अच्छी तरह से पका, उबला या गर्म होना चाहिए।

    कटे हुए फल, बाहर की चटनी, सलाद, कटी हुई प्याज, पानी-पूरी आदि के सेवन से बचें।

    दही में कुछ प्राकृतिक तत्व हैं, जो पेट को राहत पहुंचाते हैं।

    शरीर में पानी की कमी न होने दें। नारियल पानी, ओआरएस घोल या शिकंजी भी ले सकते हैं।

  • …फिर ऊना की पटरी पर दौड़ेगी वंदे भारत ट्रेन

    …फिर ऊना की पटरी पर दौड़ेगी वंदे भारत ट्रेन

    अंब-अंदौरा एवं ऊना से दिल्ली तक सुपरफास्ट वंदे भारत के माध्यम से सफर करने वाले यात्रियों के लिए राहत भरी खबर है। ऊना और चंडीगढ़ के बीच करीब चार दिन स्थगित रहने के बाद वंदे भारत एक बार फिर ऊना की पटरी पर लौटेगी। सोमवार को इस ट्रेन के ऊना रेलवे स्टेशन पर निर्धारित समय 10:35 बजे पहुंचने की संभावना है।

    इसके बाद मंगलवार को भी वंदे भारत यहां से दिल्ली जाएगी। फिलहाल इस ट्रेन को नंगल में रेलवे ट्रैक के कंप्यूटरीकरण तथा नंगल और रोपड़ के बीच मरम्मत किए गए ट्रैक पर गति सीमा कम करने के चलते चंडीगढ़ से ही दिल्ली तक दौड़ाया जा रहा है। बीच-बीच में कुछ दिन वंदे भारत ऊना और अंब-अंदौरा रेलवे स्टेशन पहुंची, लेकिन यहां पहुंचने के लिए ट्रेन को रोपड़ और नंगल के बीच 45 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलना पड़ा।

    हालांकि अंब-अंदौरा से नंगल के बीच ट्रेन अपनी निर्धारित सीमा 75-100 किलोमीटर के बीच दौड़ रही है। अब रेलवे प्रबंधन की ओर से ऊना से इस ट्रेन का लाभ लेने वाले यात्रियों के लिए सुखद खबर आई है। ट्रेन फिर से यात्रियों को अंब और ऊना के रेलवे स्टेशनों पर चलते हुए मिलेगी।

    वंदे भारत फिलहाल अगले दो दिन ऊना आएगी। ट्रेन के यहां निरंतर आने को लेकर मौसम साफ रहना भी जरूरी है। अन्यथा कम गति का प्रतिबंध ट्रेन को चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन पर ही रूकने को मजबूर कर रहा है। – रोहदाश सिंहअधीक्षकरेलवे स्टेशन ऊना

    ट्रेनों के देरी से आने का क्रम जारी 
    ऊना रेलवे स्टेशन पर वर्तमान में तीन ट्रेनें आ रही हैं। दिल्ली से चलकर दौलतपुर चौक जाने वाली हिमाचल एक्सप्रेस सुबह करीब एक घंटा देरी से आई। इससे यात्रियों को अपने गंतव्य की ओर जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। जबकि साबरमती एक्सप्रेस और दौलतपुर चौक से वाया चंडीगढ़ होकर अंबाला जाने वाली पैसेंजर ट्रेन अपने सही समय से गईं।

  • एक दिन राहत, अगले चार दिन फिर येलो अलर्ट,  – 696 सड़कें बंद, 1052 बिजली ट्रांसफार्मर ठप

    एक दिन राहत, अगले चार दिन फिर येलो अलर्ट, – 696 सड़कें बंद, 1052 बिजली ट्रांसफार्मर ठप

    शिमला

    हिमाचल प्रदेश में रविवार को बारिश थमने से राहत तो मिली, लेकिन अगले चार दिन बादल बरसने का दौर जारी रहेगा। 27 जुलाई तक का येलो अलर्ट जारी हुआ है। 29 तक पूरे प्रदेश में मौसम खराब रहेगा। इससे दुश्वारियां फिर बढ़ेंगी। उधर, पिछले दिनों खराब रहे मौसम के चलते जिला कुल्लू समेत प्रदेश के कई क्षेत्रों में अभी भी जनजीवन पटरी पर नहीं लौटा है। बिजली और पानी की आपूर्ति कई क्षेत्रों में बाधित है।

    प्रदेश में 696 सड़कें, 1,052 बिजली के ट्रांसफार्मर और 370 पेयजल योजनाएं अभी ठप हैं। मनाली-कुल्लू नेशनल हाईवे क्लाथ तक बहाल हो गया है। अब कुल्लू से मनाली तक सिर्फ आठ किमी में हाईवे की बहाली का कार्य शेष है। हालांकि, शिमला से किन्नौर और डलहौजी-पठानकोट राष्ट्रीय राजमार्ग बहाल हो गए हैं। रविवार को शिमला जिला के अलावा मंडी, सुंदरनगर, बल्ह, नाचन, सराज और धर्मपुर में हल्की हुई। कुल्लू में धूप खिलने से लोगों ने राहत की सांस ली। शनिवार रात को भूतनाथ पुल के समीप एक पेट्रोल पंप को भूस्खलन से क्षति पहुंची है।

    दारचा-शिंकुला मार्ग, नेशनल हाईवे-505 ग्रांफू से काजा वाहनों के लिए अभी बंद हैं। कुल्लू में ब्यास नदी में बही पंजाब रोडवेज की बस को दूसरे दिन भी नहीं निकाला जा सका है। आईएमडी के उपनिदेशक ने बताया कि कई इलाकों में पिछले 24 घंटों में भारी बारिश हुई। रविवार को न्यूनतम तापमान भरमौर में 10 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया तो अधिकतम तापमान धौलाकुआं में 29.9 डिग्री सेल्सियस रहा।

    रविवार को भी सुक्खू सक्रियओकओवर बुलाए तीन मंत्री

    मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने रविवार को मंत्रियों के साथ राहत कार्यों पर चर्चा की और अपडेट लेते रहे। सीएम ने अपने सरकारी आवास ओकओवर में मंत्री बुलाए। सीएम सुक्खू ने मंत्रियों से कहा कि सेब की फसल को मंडियों तक पहुंचाने में किसी तरह की समस्या न हो। उन्होंने इस संबंध में अधिकारियों को भी निर्देश जारी करने को कहा। संपर्क सड़कों की शीघ्र बहाली के आदेश भी दिए।

    इस दौरान शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर, बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी और उद्योग मंत्री हर्षवर्धन मौजूद रहे। मंत्रियों ने अपने-अपने महकमों के कार्यों पर भी सीएम ने चर्चा की। मुख्यमंत्री में फल मंडियों में उपजे विवाद पर भी चर्चा की। कैबिनेट बैठक में अपने महकमों से संबंधित महत्वपूर्ण एजेंडे लाने को कहा सीएम ने मंत्रियों से कैबिनेट बैठक में अपने महकमों से संबंधित महत्वपूर्ण एजेंडे लाने को कहा है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिमंडल की बैठक 25 जुलाई को बुलाई गई है।

    5115 करोड़ के नुकसान का प्रारंभिक अनुमान निरीक्षणकर दिल्ली लौट गई केंद्र से आई टीम

    हिमाचल में नुकसान का जायजा लेने आई केंद्रीय टीम लौट गई है। प्रारंभिक आकलन में अब तक 5115.83 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान है। हालांकि, जिलों से नुकसान की विस्तृत रिपोर्ट आने का सिलसिला जारी है। इसे देखते हुए अनुमान लगाया जा रहा है कि यह नुकसान का आंकड़ा आठ हजार करोड़ से ऊपर जाएगा।

    सोमवार को टीम केंद्र सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। बताया जा रहा है कि प्रदेश में आपदा से हुए नुकसान के मामले में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू भी गृह मंत्री अमित शाह से मिलेंगे। हिमाचल में आपदा से भारी नुकसान हुआ है। सरकार चाहती है कि जल्द ही आपदा से हुए नुकसान की भरपाई के लिए राहत राशि की पहली किस्त जारी हो जाए।

    जल प्रलय से सबसे ज्यादा नुकसान लोक निर्माण विभाग को हुआ है। अब तक विभाग ने 1666.58 करोड़ रुपये नुकसान का आकलन कर लिया है। वहीं, जल शक्ति विभाग को भी अब तक 1475.69 करोड़ रुपये नुकसान का आकलन कर लिया गया है। इसके अलावा अन्य विभागों को भी भारी नुकसान हुआ है। बाढ़ से 158 लोगों की मौत हुई है। 606 घर ढह गए जबकि, 5363 घर क्षतिग्रस्त हुए हैं। 1648 गोशलाएं भी ढहने से सैकड़ों पशुओं की मौत हुई है।

    आपदा राहत कोष में अंशदान 16.50 करोड़ रुपये के पार

    हिमाचल प्रदेश आपदा राहत कोष-2023 में 16 जुलाई से 22 जुलाई तक प्रदेशवासियों, विभिन्न सरकारी व गैर सरकारी संस्थाओं ने 16.50 करोड़ रुपये से अधिक का अंशदान किया है। यह जानकारी राज्य सरकार के एक प्रवक्ता ने दी है। उन्होंने कहा कि राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने सभी उपायुक्तों को राहत कार्यों के लिए 188.50 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है।

    शुरुआती आकलन के अनुसार आपदा के कारण प्रदेश को लगभग 8,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने उदाहरण प्रस्तुत करते हुए प्रभावित लोगों को सम्मानजनक राशि प्रदान करने का ऐतिहासिक फैसला लेते हुए वित्तीय सहायता राशि में कई गुणा वृद्धि की है। तत्काल सहायता के तौर पर एक-एक लाख रुपये देने की घोषणा की है।

  • पुरोला में बादल फटा, सैलाब में बहीं गाड़ियां, जान बचाने के लिए घरों से भागे लोग, उफानाए नदी-नाले

    पुरोला में बादल फटा, सैलाब में बहीं गाड़ियां, जान बचाने के लिए घरों से भागे लोग, उफानाए नदी-नाले

    देहरादून

    बीते रात पुरोला क्षेत्र के अकरु जंगल में बादल फटने के कारण छाड़ा खड्ड, कमल नदी, माल गाड़ सहित अन्य गदेरे अचानक उफान पर आ गए। इसके चलते खेतों, सेब के बगीचों को भारी नुकसान पहुंचा है। वहीं नगर क्षेत्र में कई घरों पानी और मलबा घुस गया। कई लोगों ने घरों से भाग कर अपनी जान बचाई। नहरें, सड़क और पुल क्षतिग्रस्त हो गए। गाड़ियां व मोटर साइकिल बह गए। प्रदेशभर में बारिश से नुकसान हुआ है।

    धनारी क्षेत्र में धनपति नदी के उफान पर आने के कारण देवीधार में मोक्ष घाट बह गया। तो वहीं बड़कोट के गंगनानी में भारी मलबा आने के कारण 19 घरों और दुकानों सहित कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में घुसा। उधर, टिहरी के घनसाली में भी मलबा आने से बारिश के कारण 14 मकानों को खतरा पैदा हो गया है। थौलधार ब्लाक के चापड़ा गांव में एक आवासीय मकान ढह गया। गनीमत यह रही कि उस वक्त घर में कोई नहीं था। पीड़ित के घर का अधिकतर सामान मलबे में दब गया।

    यमुनोत्री हाईवे सहित 299 सड़कें बंद

    प्रदेश में यमुनोत्री हाईवे समेत 299 सड़कें बंद हैं। बदरीनाथ हाईवे पीपलकोटी, पागलनाला, छिनका, नंदप्रयाग में अवरुद्ध हुआ था, जिसे दोपहर एक बजे खोल दिया गया। हाईवे में करीब आठ घंटे तक पांच हजार से अधिक यात्री फंसे रहे। शाम छह बजे नंदप्रयाग के पास बंद हुआ था, जिसे करीब आठ बजे खोल दिया गया। केदारनाथ हाईवे पर भी कई जगह मलबा आया है, लेकिन भूस्खलन क्षेत्रों में तैनात जेसीबी ने मलबा हटाकर हाईवे खोल दिया। यमुनोत्री हाईवे कई जगह अवरुद्ध हुआ है। कुछ स्थानों में तो खोल दिया, लेकिन गंगनानी में भारी मात्रा में मलबा आने के कारण मशीनें अब तक काम कर रही है। ओजरी डाबरकोट में लगातार पत्थर गिरने के कारण हाईवे खोलने का काम भी नहीं शुरू हो पाया है।

    प्रदेशभर में भारी बारिश का अलर्ट

    प्रदेश भर में 23 जुलाई को भारी बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग ने रविवार को पूरे प्रदेश में भारी बारिश का यलो अलर्ट जारी किया गया है।

  • भतरौंजखान-रामनगर हाईवे गड्ढों से पटा

    भतरौंजखान-रामनगर हाईवे गड्ढों से पटा

    भतरौंजखान। पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण भतरौंजखान-रामनगर हाईवे गड्ढा मुक्त सड़कों के दावों की पोल खोल रहा है। यह सड़क गड्ढों से पटी है और इस पर यात्री और पर्यटक जान जोखिम में डालकर आवाजाही करने के लिए मजबूर हैं।

    भतरौंजखान से चौड़ी घट्टी तक पूरी सड़क गड्ढों से पटी है। गड्ढों में पानी भरने से दुर्घटना का खतरा कई गुना बढ़ गया है। कई दोपहिया चालक रपटने से चोटिल हो चुके हैं लेकिन इसके सुधारीकरण के अब तक प्रयास नहीं हुए। विभाग की इस लापरवाही के चलते लोगों में खासा आक्रोश है। व्यापार मंडल उपाध्यक्ष हरीश भट्ट सहित अन्य लोगों ने कहा कि कई बार सड़क सुधारीकरण की मांग के बाद भी इस पर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। वहीं लोनिवि रानीखेत के सहायक अभियन्ता बीसी भट्ट ने कहा कि डामरीकरण के लिए टेंडर हो चुके हैं। बारिश के बाद डामरीकरण होगा।

  • जौरासी सड़क में झाड़ियों से दुर्घटना का खतरा

    जौरासी सड़क में झाड़ियों से दुर्घटना का खतरा

    चौखुटिया (अल्मोड़ा)।गनाई-जौरासी सड़क में दोनों ओर झाडि़यों के कारण लोगों को परेशानी हो रही है। चालक की थोड़ी से चूक बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। सामाजिक कार्यकर्ता गणेश ढौंडियाल का कहना है कि संबंधित अधिकारियों से गुहार लगाने के बावजूद झाड़ियों का कटान नहीं हो पा रहा है।

  • दोपहिया वाहन चालकों पर लगाम लगाने की मांग

    दोपहिया वाहन चालकों पर लगाम लगाने की मांग

    द्वाराहाट। वरिष्ठ नागरिकों ने नगर की यातायात व्यवस्था पर नाराजगी जताते हुए इसे बेहतर करने की मांग की। उन्होंने थानाध्यक्ष राजेश कुमार यादव को ज्ञापन दिया। उन्होंने कहा कि नगर में बिना हेलमेट के कई लोग दोपहिया वाहन अनियंत्रित गति से दौड़ा रहे हैं जिससे दुर्घटना का खतरा बना हुआ है। ऐसे में बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा अधिक है। सड़क पर निर्माण सामग्री डालने, बगैर दस्तावेजों के बाहरी राज्यों से खरीदे गए वाहनों के संचालन पर रोक लगाने की मांग भी की। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए बाहरी लोगों का सत्यापन कराया जाना भी बेहद जरूरी है। इस मौके पर केपीएस अधिकारी, पीएस मेहरा, जेएस बिष्ट सहित कई वरिष्ठ नागरिक शामिल रहे।

  • बदरीनाथ हाईवे कमेड़ा में 20 मीटर ध्वस्त, 1000 तीर्थयात्री फंसे, यमुनोत्री हाईवे तीसरे दिन भी बंद

    बदरीनाथ हाईवे कमेड़ा में 20 मीटर ध्वस्त, 1000 तीर्थयात्री फंसे, यमुनोत्री हाईवे तीसरे दिन भी बंद

    बीती रात हुई भारी बारिश के बाद बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग कई जगहों पर बाधित हो गया है। गोचर के कमेड़ा में हाईवे करीब 20 मीटर तक ध्वस्त हो गया है। यहां भारी मात्रा में हाईवे पर मलबा आ गया है। इसके अलावा छिनका में भी पहाड़ी से मलबा और पत्थर आने से हाईवे बाधित है।

    हाईवे बंद होने पर जगह-जगह 1000 से अधिक तीर्थयात्री फंसे हुए हैं। स्थानीय लोगों को भी आवाजाही में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। दूसरी तरफ यमुनोत्री हाईवे पर ओजरी डाबरकोट पर लगातार बोल्डर और मलबा आने के कारण पिछले तीन दिनों से बंद है।

    यमुनोत्री धाम सहित गीठ पट्टी के कई गांव का सम्पर्क कट गया है। हाईवे बंद होने के कारण करीब 300 यात्री स्यानाचट्टी से लेकर जानकीचट्टी के बीच में फंसे हैं। प्रशासन का कहना सबको सुरक्षित स्थानों पर रुकवाया गया है।

    रविवार रात हुई भारी बारिश से चमोली जिले में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। ऋषिकेश-बदरीनाथ हाईवे कमेड़ा के पास करीब 200 मीटर से अधिक भूस्खलन से क्षतिग्रस्त हो गया है। वहां पर 2011 में बनाई गई लाहे की पुलिया भी बह गई है। वहीं, कर्णप्रयाग-ग्वालदम हाईवे सिमलसैंण, बैनोलीबैंड, हरमनी, मल्यापौड़ में मलबा आने से बंद है।

    ऋषिकेश-बदरीनाथ हाईवे मलबा आने से उमट्टा के पास बंद हो गया है। उमट्टा में सड़क बंद होने से कर्णप्रयाग, गौचर व सिमली क्षेत्र से आने वाले स्कूली बच्चे एसजीआरआर जयकंडी नहीं जा सके।

    इन दोनों राजमार्गों पर कई वाहन फंसे हैं। साथ ही बारिश से गौचर में हवाई पट्टी के आसपास के घरों में पानी भर गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकांश सड़कें बंद हो गई है।

    कर्णप्रयाग बाजार में मलबा व कीचड़ आने से वाहनों और पैदल आवाजाही करने वाले लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, गैरसैंण के पास कालीमाटी में कर्णप्रयाग-रानीखेत हाईवे अभी तक नहीं खुल पाया है।

    धारचूला (पिथौरागढ़): पहाड़ी से गिरे पत्थरों की चपेट में आने से जीप चालक घायल
    रविवार देर शाम बूंदी से धारचूला को लौट रहा एक जीप चालक कैलाश खंपा धारचूला तवाघाट मोटर मार्ग में  पहाड़ी से गिरे पत्थरों की चपेट में आने से घायल हो गया। सूचना मिलने पर धारचूला से पुलिस एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीम घायल की मदद के लिए रवाना हुई लेकिन रास्ता बंद होने के कारण समय से मौके पर नहीं पहुंच पाई। इसके बाद पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य दान सिंह और प्रेम सिंह ने घायल को अपने कमरे में रखा। घायल को धारचूला लाया जा रहा है और उसकी हालत खतरे से बाहर है।

  • Mumbai के कई हिस्सों में भारी बारिश, आईएमडी ने ‘येलो’ अलर्ट जारी किया

    Mumbai के कई हिस्सों में भारी बारिश, आईएमडी ने ‘येलो’ अलर्ट जारी किया

    मुंबई। मुंबई में पिछले 24 घंटे में कई जगहों पर भारी बारिश हुई और मौसम विभाग ने सोमवार को मध्यम से भारी बारिश का अनुमान जताते हुए शहर के लिए ‘येलो’ अलर्ट जारी किया है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के एक अधिकारी ने कहा कि सोमवार सुबह आठ बजे समाप्त हुई 24 घंटे की अवधि में मुंबई और पूर्वी एवं पश्चिमी उपनगरों में क्रमश: औसतन 58.42 मिलीमीटर, 69.15 मिलीमीटर और 70.41 मिलीमीटर बारिश हुई। सुबह मुंबई में कुछ जगहों पर हल्की वर्षा या रुक-रुककर भारी वर्षा हुई, जबकि कुछ जगहों पर बारिश नहीं हुई।

    भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के मुंबई केंद्र ने सोमवार के लिए ‘येलो अलर्ट’ जारी किया है और मुंबई में मध्यम से भारी बारिश होने का अनुमान जताया है। बीएमसी के अधिकारियों ने कहा कि आईएमडी मुंबई ने सोमवार सुबह के अपने दैनिक मौसम पूर्वानुमान में अगले 24 घंटे में मध्यम से भारी बारिश होने का अनुमान जताया है। नगर निगम के एक अधिकारी ने कहा कि मुंबई में कहीं भी जलजमाव की सूचना नहीं है। अधिकारियों के मुताबिक, मध्य रेलवे एवं पश्चिम रेलवे और बृहन्मुंबई विद्युत आपूर्ति एवं यातायात (बेस्ट) उपक्रम की बस सेवाएं सामान्य रहीं।

  • गोरखपुर-लखनऊ रूट की 80 फीसदी सीटें रहती हैं खाली, वजह किराया या कुछ और?

    गोरखपुर-लखनऊ रूट की 80 फीसदी सीटें रहती हैं खाली, वजह किराया या कुछ और?

    लखनऊ

    लखनऊ से गोरखपुर के बीच चलने वाली सेमी हाईस्पीड ट्रेन वंदे भारत एक्सप्रेस भले ही सुविधाओं से लैस हो, पर महंगे किराये की वजह से यात्री इस ट्रेन से किनारा कर रहे हैं। यही वजह है कि इसकी 80 प्रतिशत तक सीटें खाली हैं।

    पूर्वोत्तर रेलवे की पहली वंदे भारत एक्सप्रेस का संचालन 9 जुलाई से गोरखपुर से लखनऊ के बीच शुरू हुआ है। ट्रेन नंबर 22549 गोरखपुर से लखनऊ वाया अयोध्या सुबह 6.05 बजे गोरखपुर से चलकर सुबह 10.20 बजे लखनऊ पहुंचती है। वापसी में 22550 लखनऊ-गोरखपुर वंदे भारत शाम को चारबाग से सवा सात बजे रवाना होती है।

    पहले हफ्ते में ट्रेन को गोरखपुर से लखनऊ आने के दौरान ठीकठाक यात्री मिलते रहे। पर, अब स्थिति बदल रही है। माना जा रहा है महंगे किराये के कारण यात्री वंदे भारत में सफर से कतरा रहे हैं। यही वजह है कि गोरखपुर से लखनऊ आने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस की चेयरकार में सोमवार को 221, मंगलवार को 312, बुधवार को 340, गुरुवार को 364, शुक्रवार को 361 सीटें खाली हैं। एग्जीक्यूटिव क्लास में इन दिनों में क्रमशः 23, 28, 27, 37, 28 सीटें रिक्त हैं। इसी क्रम में लखनऊ से गोरखपुर जाने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस की चेयरकार में इन दिनों में 317, 362, 379, 374, 387 तथा एग्जीक्यूटिव क्लास में नौ, 25, 33, 34, 30 सीटें रिक्त हैं। यह हाल तब है, जब ट्रेन में कुल 530 सीटें हैं।

    इंटरसिटी को बेहतर विकल्प मान रहे हैं लोग 

    गोरखपुर से लखनऊ के बीच चलने वाली इंटरसिटी व वंदे भारत एक्सप्रेस की सुविधाओं के लिहाज से कोई तुलना नहीं है। पर, टाइमिंग एक ऐसी वजह है, जिसकी वजह से यात्री महंगी वंदे भारत में सफर से बच रहे हैं। गोरखपुर से सुबह पौने छह बजे चलने वाली इंटरसिटी का चेयरकार में किराया 475 रुपये है और ट्रेन लखनऊ पहुंचने में 5.25 घंटे लेती है। वहीं वंदे भारत एक्सप्रेस सुबह 6.05 बजे चलती है और उसकी चेयरकार का किराया 890 रुपये है तथा समय 4.15 घंटे लगते हैं। ऐसे में यात्री एक-दो घंटा बचाने के लिए वंदे भारत के महंगे सफर की जगह इंटरसिटी पकड़ रहे हैं। वंदे भारत में गोरखपुर से लखनऊ आने पर 890 रुपये व वापसी का 1000 रुपये से अधिक चेयरकार का किराया है, जबकि एग्जीक्यूटिव क्लास का किराया 1700 रुपये से अधिक है। यात्रियों का स्पष्ट कहना है कि किराया कम होने पर ही वंदे भारत में लोगों की संख्या बढ़ेगी।