Category: Transport

  • दिल्ली सरकार ने दिल्ली को लंदन बनाने का अपना वायदा किया पूरा

    दिल्ली सरकार ने दिल्ली को लंदन बनाने का अपना वायदा किया पूरा

    आम आदमी पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल द्वारा सभी क्षेत्रों में अपने भाषणों में दिल्ली की जनता को जो वायदा किया था उसे पूरा कर दिखाया।

    दिल्ली को लंदन बनाने का जो उनका सपना था और दिल्ली की जनता को वायदा वह कुदरत द्वारा प्रदुषण रोकने के प्रति लगातार बारिश करने से उजागर हो गया की दिल्ली लंदन बन गईं। नीचे दिए गए लिंक द्वारा आप दिल्ली में जल विभाग के टैंकर द्वारा पेड़ पौधों को बारिश में भी पानी देना, सड़को पर सड़को की जगह नदी का आनंद पा सकते हैं।

    [embedyt] https://www.youtube.com/watch?v=BufG-9sKC94[/embedyt]

    दिल्ली के अंदर कोई भी क्षेत्र ऐसा देखने को नहीं मिला जहा नदी ना बह रही हो। वह अलग बात है की उसमे बहने वाला पानी शुद्ध है या विशुद्ध।

    दिल्ली को नदियों और नालों के साथ सुरक्षित सड़के, जाम मुक्त सफर, सार्वजनिक सवारी सेवा की जगह उद्योगपतियो द्वारा संचालित सवारी सेवा, फेस फ्री कार्यशैली, पक्की सरकारी नौकरियां उपल्ब्ध करवाने के सभी वायदे पूरे कर दिखाएं।

    जनहित में जारी
    संजय बाटला

  • सवारियों से वसूल रहे थे मनमाना किराया, अब इस शहर में तीन दिनों में बंद हो जाएगी ओला-उबर की ऑटो सर्विस

    सवारियों से वसूल रहे थे मनमाना किराया, अब इस शहर में तीन दिनों में बंद हो जाएगी ओला-उबर की ऑटो सर्विस

    एजेंसी डेस्क

    केंद्र सरकार ने बेंगलुरू में उबर, ओला, रैपिडो के खिलाफ मिल रही ओवरचार्जिंग की शिकायतों के बाद इन्हें तीन दिनों में ऑटो सेवाएं बंद करने का आदेश दिया है।ऑटोरिक्शा की सवारियों से अधिक किराया वसूलने की कई शिकायतों के बाद सरकार ने यह फैसला किया है।

    परिवहन विभाग ने उबर, ओला और रैपिडो को तीन दिनों के भीतर सेवा बंद करने का आदेश दिया है।

    क्या है पूरा मामला

    ऐप आधारित एग्रीगेटर्स जैसे उबर और ओला द्वारा ऑटोरिक्शा की सवारियों से अधिक किराया वसूलने की कई शिकायतों के बाद कर्नाटक परिवहन विभाग ने शहर में ऑटोरिक्शा सेवा को रोकने के लिए बेंगलुरु में प्रमुख वाहन एग्रीगेटर्स को नोटिस जारी किया है। अधिकारियों ने इसे एक अवैध तरीका करार दिया है।

    एएनआई टेक्नोलॉजीज को एक नोटिस जारी किया जो कि ओला, उबर और रैपिडो चलाती है। उन्हें तीन दिनों में ऑटो सेवाएं बंद करने के लिए कहा गया है। विभाग ने उन्हें अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने के लिए भी कहा है।

    दरअसल कई यात्रियों ने परिवहन विभाग से शिकायत की है कि ओला और उबर एग्रीगेटर दो किलोमीटर से कम की दूरी के बावजूद कम से कम 100 रुपये चार्ज करते हैं।

    शहर में न्यूनतम ऑटो किराया पहले 2 किमी के लिए 30 रुपये और उसके बाद प्रत्येक किलोमीटर के लिए 15 रुपये तय किया गया है।

    परिवहन आयुक्त के अनुसार राज्य के ऑन-डिमांड परिवहन प्रौद्योगिकी एग्रीगेटर्स नियम इन कंपनियों को ऑटो-रिक्शा सेवाएं चलाने की अनुमति नहीं देते हैं क्योंकि यह केवल टैक्सियों तक ही सीमित है।

    आयुक्त के पत्र में कहा गया है कि एग्रीगेटर सरकारी नियमों के उल्लंघन करके ऑटोरिक्शा सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। साथ ही यह विभाग के संज्ञान में आया है कि ग्राहकों से सरकार द्वारा निर्धारित दरों से अधिक शुल्क लिया जा रहा है।

  • दिल्ली सरकार के दिशा निर्देश:- सरकारी विभाग प्रयोग करेगें अब सिर्फ इलैक्ट्रिक वाहन,

    दिल्ली सरकार के फाइनेस विभाग की पालिसी शाखा द्वारा 25 फ़रवरी 2021 को आफिस मेमोरेंडम द्वारा बताया गया था की दिल्ली सरकार के अन्तर्गत कार्यरत सभी सरकारी विभाग इलेक्ट्रिक वाहन खरीदेंगे / प्रयोग के लिए किराए पर लेंगे।

    दिल्ली सरकार के अन्तर्गत सभी सरकारी विभाग अपने पेट्रोल डीजल और सीएनजी से चलने वाले वाहनों के स्थान पर इलैक्ट्रिक वाहनों का प्रयोग करेगें। इस कार्य के लिए परिवहन विभाग दिल्ली को नोडल डिपार्टमेंट घोषित कर सभी अन्य सरकारी विभागों की मॉनिटरिंग का जिम्मा सौंपा गया ।

    दिल्ली में प्रदुषण रोकने के प्रति यह एक कारगार दिशा निर्देश थे पर क्या दिल्ली के सरकारी विभागों ने इस पर अमल किया यह बड़ा सवाल ?

    दिल्ली सरकार द्वारा जनता को इस बात से अवगत करवाना चाहिए की दिल्ली के सरकारी विभागों द्वारा इस आफिस मेमोरेंडम जारी होने के बाद
    1. पेट्रोल, डीजल, सीएनजी और इलेक्ट्रिक के कितने वाहन खरीदे और
    2. पैट्रोल, डीजल, सीएनजी और इलेक्ट्रिक के कितने वाहन लीज / हायर पर लिए?

    इस बात की सही जानकारी को जनता के समक्ष प्रस्तुत करने से दिल्ली की जनता में इलेक्ट्रिक वाहनों को खरीदने की इच्छा शक्ति में वृद्धि होगी ।

    जनहित में जारी,
    *संजय बाटला*

  • *दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहनों को व्यवसायिक कार्य करने के लिए परमिट चाहिए या नहीं*

    *दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहनों को व्यवसायिक कार्य करने के लिए परमिट चाहिए या नहीं*

    दिल्ली भारत देश की राजधानी, जहां सभी राज्यों से लोग अपने परिवार के भरण पोषण के लिए रोजगार की उम्मीद लेकर आते

    *सबसे तेज* दिल्ली भारत देश का पहला राज्य है जहां सभी कार्य सबसे पहले शुरु किए जाते है और वह भी जनहित में, यह तो आज पुरा विश्व देख सुन और पड़ ही रहा है विज्ञापनों में,

    दिल्ली राज्य का परिवहन विभाग जो हमेशा दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार की तरह सुर्खियों मे रहने और जनहित के नाम पर आदेश पारित करने के लिए पूरे संसार का पहला सरकारी विभाग हैं।

    यह ही पहला ऐसा सरकारी विभाग है जिसके अधिकारियो, आला अधिकारियों को जनता से मिलने की कोई इच्छा नहीं जिसके लिए बिना किसी की आज्ञा प्राप्त किए अपने कार्यरत कर्मचारियों द्वारा जेड प्लस सुरक्षा व्यवस्था अपने चारो तरफ़ लगा ली,

    यह ही संसार का पहला सरकारी विभाग है जिसने फेस फ्री आनलाइन कार्यशैली लागू करने का श्रेय प्राप्त किया,

    यह ही संसार का पहला सरकारी विभाग है जिसने जनता की सुरक्षा हेतु सुरक्षा कवच में बांधित वाहन परमिट (स्टेज कैरेज परमिट) को बिना शर्त सुरक्षा कवच से मुक्त कर के देना शुरु करने की प्रक्रिया जारी करी।

    यह ही संसार का पहला सरकारी विभाग है जिसके आला अधिकारियों ने माननीय उच्चतम न्यायालय, माननीय उच्च न्यायालय, माननीय कैट, सड़क एवम् राजमार्ग मंत्रालय, गृह मंत्रालय भारत सरकार के आदेशों / दिशा निर्देशों को दरकिनार कर अपने आदेश पारित कर दिखाए।

    यहां जानने योग्य प्रश्न यह है, दिल्ली की सड़को पर इलैक्ट्रिक वाहन को व्यवसायिक गतिविधि/ कार्य करने के लिए परमिट चाहिए या नहीं चाहिए ।

    दिल्ली परिवहन विभाग के अपने ही ब्यान किसी के लिए कुछ और किसी के कुछ और है।

    दिल्ली में इलेक्ट्रिक बस के लिए परिवहन विभाग परमिट जारी नही करता।
    दिल्ली में इलैक्ट्रिक वाहन (मिडी बस) द्वारा स्टेज कैरेज बस सेवा रूट पर बस स्टैंड से सवारी उतार और बैठा कर चलने वाले वाहनों के लिए भी परमिट जारी नही करता ।
    मेट्रो द्वारा संचालित ऑटो के लिए भी परमिट जारी नही करता पर दिल्ली की जनता को इलेक्ट्रिक ऑटो के नाम पर परमिट जारी करने की प्रक्रिया लागू रखता है।

    जनहित में जारी,
    *संजय बाटला*

  • घर से घर तक अब उपल्ब्ध होंगे सवारी वाहन – मेट्रो प्रवक्ता

    घर से घर तक अब उपल्ब्ध होंगे सवारी वाहन – मेट्रो प्रवक्ता

    *दिल्ली मेट्रो द्वारा जनता को सूचना “घर से घर तक सेवा”*

    दिल्ली मेट्रो ने लिया फैसला अब मेट्रो में सफर करने वालो को मिलेगी घर से घर तक छोड़ने की सेवा वह भी एसी वाहनों द्वारा,

    दिल्ली मैट्रो ने कहा कि मेट्रो स्टेशन से लास्ट माइल कनेक्टविटी देने के लिए डीएमआरसी मिनी बस के रूप में फीडर बसों की संख्या बढ़ाने जा रहा है। इसके लिए 40 नई वातानुकूलित सस्ती मिनी बस चलाई जाएंगी। जबकि दिल्ली मैट्रो द्वारा पहले से चल रही 174 मिडी बसों में से अंदाजन 68 बसों की सेवा को पूर्ण रूप से बंद करने के लिए मेट्रो द्वारा दिल्ली परिवहन विभाग के एसटीए ब्रांच में पत्र लिखकर उनके परमिट स्थाई रूप से जमा करने का अनुरोध किया हुआ है। बाकी 106 मिडी बसे भी बिना फिटनेस के मेट्रो बस टर्मिनल में ही खड़ी है। कुछ समय पहले मैट्रो द्वारा निजी संचालकों के माध्यम से इलेक्ट्रिक मिनी बसें परिचालित करवाई है जिनकी गिनती शायद 54 हैं और मैट्रो के अनुसार 9 मैट्रो स्टेशन से 4 रूट पर चालित है।

    आपकी जानकारी हेतु बता दें मैट्रो ने दिल्ली में लास्ट माइल कनेक्टिविटी के लिए दिल्ली में 300 फीडर मिडी बसों के परमिट का टैंडर किया था जिसमे से कुल 174 बसे आई थी और उसमे से भी 68 बसों के परमिट मेट्रो द्वारा रद्द करवाने की प्रक्रिया जारी है।

    मैट्रो द्वारा लास्ट माइल कनेक्टिविटी के लिए अपने कई मैट्रो स्टेशन से ई रिक्शे चलवाए है और अब मैट्रो ई रिक्शे के साथ इलेक्ट्रिक ऑटो, इलैक्ट्रिक मिडी और मिनी बसों के साथ एसी मिनी बसें चलवाने के लिए तत्पर है। इन सभी वाहनों का किराया मेट्रो द्वारा तय किया जाएगा ।

    मेट्रो ने इसके परिचालन के लिए निजी संचालकों को निविदा जारी करके आमंत्रित किया है। निजी संचालकों के पास इसके परिचालन से लेकर मरम्मत और रखरखाव की जिम्मेदारी होगी। मेट्रो संचालकों को मेट्रो फीडर बसों के लिए डिपो में पार्किंग की सुविधा उपलब्ध कराएगी। यह बसें अलग-अलग रूट पर चलेंगी।

    मेट्रो द्वारा बताया गया जल्द ही मेट्रो द्वारा द्वारका उप शहर में ई-ऑटो का परिचालन शुरू होगा। शुरूआत में द्वारका में 50 ई-ऑटो से शुरूआत की गई है, जो कि बाद में बढ़ाकर 136 किए जाएंगे। पूरी दिल्ली में अलग-अलग स्टेशन से आने वाले दिनों में 799 ई-ऑटो चलाएं जाएंगे।

    मैट्रो द्वारा लास्ट माइल कनेक्टिविटी के लिए घोषित सभी वाहन ई रिक्शे, इलैक्ट्रिक ऑटो, इलैक्ट्रिक मिडी और मिनी बसें, एसी बसें, और बिना फिटनेस के खड़ी बसे अगर समय से परिचालन में आ जाती हैं तो दिल्ली की जनता को सुरक्षित सवारी सेवा की कुछ उपलब्धता सुनिश्चित हो जाएगी क्योंकि दिल्ली में सुरक्षित सवारी सेवा प्रदान करने वाले वाहन जल्द ही समय सीमा पूर्ण करके या दिल्ली सरकार और परिवहन विभाग की गलत नीतियों के कारण सड़को से हटने वाले हैं।

    डीटीसी की अपनी सभी बसे अगले साल तक समय पूरा कर जाएगी और दिल्ली सरकार ने अपने कार्यकाल में एक भी बस नही खरीदी और आरटीवी वालो को दिल्ली सरकार और परिवहन विभाग की गलत नीतियों ने बर्बाद कर दिया है एवम् अन्य सवारी सेवा प्रदान करने वाले वाहन भी अब आपको सड़को पर कम ही नज़र आते होंगे।

    डूबते को तिनके का सहारा कहावत यहां चरितार्थ होती हैं अगर सच मे दिल्ली मैट्रो इन वाहनों को सड़को पर लाकर जनता को सेवा प्रदान करने में सफल होता है तब।

    जनहित में जारी,
    संजय बाटला

  • दिल्ली परिवहन विभाग द्वारा परमिट फीस के साथ गलत ली जा रही पोस्टल फीस लेनी की बंद

    दिल्ली परिवहन विभाग द्वारा परमिट फीस के साथ गलत ली जा रही पोस्टल फीस लेनी की बंद

    टोलवा द्वारा लगातार परिवहन विभाग से परमिट और फिटनेस फीस के साथ गलत ली जाने वाली पोस्टल फीस को बंद करने की बात उठाते रहने के बाद आज परिवहन विभाग द्वारा परमिट फीस के साथ गलत तरीके से ली जाने वाली फीस लेना किया बंद पर आज भी फिटनेस फीस के साथ गलत तरीके से ली जाने वाली पोस्टल फीस रही जारी

    आप लोगों को बता दें दिल्ली परिवहन विभाग ने दिल्ली में जिस दिन फेस फ्री कार्यशैली लागू करी थी उसी दिन से परमिट और फिटनेस सर्टिफिकेट नेटबैंकिंग यानी मैसेज के माध्यम से वाहन मालिक को भेजना शुरु कर दिया गया था ।

    परिवहन विभाग द्वारा जब परमिट और फिटनेस सर्टिफिकेट पोस्ट से भेजना बंद कर दिया तो पोस्टल फीस का चार्ज करना कैसे न्यायिक । इस बात को टोलवा द्वारा लगातार उठाया जाता रहा था और न्यूज ट्रांसपोर्ट विशेष द्वारा भी इस पर ख़बर निकाली गई थी।

    परिवहन विभाग ने आज दिनाक 09/ 09/ 2022 से परमिट के साथ ली जाने वाली पोस्टल फीस लेना बंद करवा दिया पर अचंभे की बात यह कि फिटनेस के साथ ली जाने वाली पोस्टल फीस आज भी लेना रहा जारी।

    जनहित में जारी
    संजय बाटला

  • परिवहन विभाग के एसटीए ब्रांच और एमएलओ (एच क्यू) आज से पूर्ण रूप से डिजिटल फेस फ्री

    परिवहन विभाग के एसटीए ब्रांच और एमएलओ (एच क्यू) आज से पूर्ण रूप से डिजिटल फेस फ्री

    परिवहन विभाग के एसटीए ब्रांच और एमएलओ (एच क्यू) आज से पूर्ण रूप से डिजिटल फेस फ्री*

    दिल्ली भारत का पहला राज्य जहा व्यवसायिक वाहनों के सभी कार्य आज से ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया द्वारा संचालित,

    वाहनों के सभी कार्य अब इन दो शाखाओं में जहां सिर्फ व्यवसायिक वाहनों से संबंधित कार्य किए जाते हैं आज से ऑनलाइन फेस फ्री आवेदन प्रक्रिया से शुरु।

    परिवहन आयुक्त की जनहित की सोच हुई कामयाब और इस कामयाबी के लिए आईटी ब्रांच परिवहन विभाग, एनआईसी, और अन्य सभी को टोलवा की और से धन्यवाद ।

    टोलवा धन्यवाद के साथ परिवहन आयुक्त से निवेदन करता है की फेस फ्री आनलाइन आवेदन प्रक्रिया कार्यशैली में वाहन मालिको को आने वाली परेशानी से छुटकारा दिलवाने के लिए दिशा निर्देश जारी करे जिससे सभी को ऑनलाइन फेस फ्री प्रक्रिया का सुखद अनुभव प्राप्त हो।

    ऑनलाइन फेस फ्री आवेदन प्रक्रिया से गुजरने से अभी बहुत परेशानियां उत्पन होगी जैसे
    1. किसी वाहन मालिक का एड्रेस आधार कार्ड में और आरसी में अगर अलग हुआ तब ?
    2. किसी वाहन मालिक के आधार पर दिल्ली की जगह अन्य राज्य का एड्रेस हुआ तब ?
    3. किसी के आधार कार्ड और आरसी के नाम के अक्षरों में फर्क पाया गया तब ?

    इन जैसे बहुत सारे कारण हैं जिनके कारण परेशानियां उत्पन हों रही हैं। जिसके लिए परिवहन आयुक्त को ज्ञापन लेकर एक समय सीमा के तहत बिना जुर्माने और बिना फीस के आरसी को आधार के अनुसार कराने की छुट देनी चाहिए।

    जनहित में जारी,
    *संजय बाटला*

     

  • 15 साल पूरे कर चुके वाहनों को अब नही उठा सकती एनफोर्समेंट एजेंसीज

    15 साल पूरे कर चुके वाहनों को अब नही उठा सकती एनफोर्समेंट एजेंसीज

    अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश वृंदा कुमारी साकेत कोर्ट की अदालत ने दिल्ली की जनता को राहत देते हुए शर्तो के साथ अपने समय सीमा तय कर चुके वाहनों को यादगार के तौर पर घर में रखने के किए आदेश पारित।

    इस आदेश में माननीय न्यायालय ने कहा

    1. वाहन को रखने के लिए निजी परिसर में स्थान होना चाहिए
    2. वाहन सड़को पर चलते हुए नही पाया जाना चाहिए
    3. वाहन को घर में रखने के लिए अदालत से मंजूरी लेनी जरूरी,

    न्यायालय ने यह भी कहा कि अगर वाहन सड़क पर चलते या सार्वजनिक पार्किंग में पाया गया तो वाहन मालिक के खिलाफ़ भारतीय दंड संहिता की धारा 177के तहत कार्यवाही की जा सकती है।

    इस आदेश के साथ ही एक बड़ा सवाल और उठ खड़ा हुआ की जब भारत देश में विंटेज कारों के लिए कोई नियम और शर्तें लागू नहीं तो किसी भी अन्य नागरिक जो अपने वाहन स्क्रैप नही करवाना चाहते उन पर शर्त क्यों ?

    जनहित में जारी
    संजय बाटला

  • दिल्ली में परिवहन संबंधित कार्यों में प्रयोग होने वाला मेडिकल सर्टिफिकेट असली या फर्जी, कौन लेने को तैयार ज़िम्मेदारी

    दिल्ली में परिवहन संबंधित कार्यों में प्रयोग होने वाला मेडिकल सर्टिफिकेट असली या फर्जी, कौन लेने को तैयार ज़िम्मेदारी

    दिल्ली में परिवहन संबंधित कार्यों में प्रयोग होने वाला मेडिकल सर्टिफिकेट असली हैं या फर्जी, है कोई लेने को तैयार इसकी ज़िम्मेदारी

    दिल्ली राज्य भारत देश में इकलौता ऐसा राज्य था जहा अपना ड्राईविंग लाईसेंस बनवाने वालों को सबसे अधिक मेहनत करनी पड़ती थी और लर्निंग लाइसेंस भी पूर्ण जांच पड़ताल के बिना नही मिल पाता था।

    दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार और वर्तमान के परिवहन आयुक्त द्वारा जनहित का नाम लेकर लर्निंग लाइसेंस को ऑनलाइन प्रक्रिया में शूरू करने के आदेश पारित नही किए गए थे तब तक दिल्ली में कलर ब्लाइंड व्यक्ति अपना लाइसेंस बनवाने में सक्षम नहीं था यह एक बहुत बड़ा सच है।

    दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार और परिवहन आयुक्त को शायद कलर ब्लाइंड व्यक्तियो के लाइसेंस ना बनना रास नहीं आ रहा था इसी लिए जनहित का नाम लेकर इस आदेश को पारित कर सबका दिल जीत लिया।

    ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया में डॉक्टर द्वारा जारी सर्टिफिकेट की सत्यता लुप्त हो गई यह हम नहीं आप सभी भली भांति जानते है ।

    अभी कुछ दिनों पहले इंदौर मध्यप्रदेश में आरटीओ की शिकायत पर जांच में अनगिनत आरटीओ एजेंटों के पास नकली डॉक्टर की मोहर और खाली सर्टिफिकेट बरामद हुए कही ऐसा तो नही दिल्ली में यह कार्य पूरी तेजी में हो क्योंकि परिवहन विभाग में ना तो आरटीओ कार्य करवाने के लिए कोई मान्यता प्राप्त एजेंट नियुक्त किए हैं और ना ही डॉक्टर।

    सबसे बड़ी बात परिवहन विभाग द्वारा डॉक्टर प्रमाण पत्र यानी मेडिकल सर्टिफिकेट की जांच का कोई ओचित्य ही नहीं है और ना ही कोई डीटीओ इसकी जांच करते हैं।

    कही दिल्ली परिवहन विभाग के द्वारा की गई ऑनलाइन फेस फ्री प्रक्रिया में प्रयोग होने वाले मेडिकल सर्टिफिकेट भी इंदौर में प्रयोग होने वाले नकली डॉक्टर सर्टिफिकेट जैसे तो नहीं, क्या परिवहन विभाग के आला अधिकारियों और परिवहन मंत्री के पास है इसका जवाब ! अगर है तो कृप्या जनता की समक्ष उपस्थित करे ।
    प्रश्न सिर्फ इतना है कि जनहित का नाम लेकर ऐसे कितने आदेश दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार और परिवहन आयुक्त पारित करना चाहते हैं जिन से दिल्ली की सड़को पर दुर्घटना पहले से काफ़ी अधिक होने लगे पर सजा कम, क्योंकि कानून में जिसके पास ड्राईविंग लाईसेंस उपल्ब्ध है उसकी गलती से जनता को पहुचे नुकसान की कानूनी सजा उससे बहुत अलग है जिसके पास ड्राइविंग लाइसेंस नहीं।

    धन्यवाद दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार और परिवहन आयुक्त को उन सभी को सजा से बचवाने का रास्ता देने के लिए।

    जनहित में जारी
    संजय बाटला

  • परिवहन विभाग कितना महिलाओ के साथ, आप भी समझें

    परिवहन विभाग कितना महिलाओ के साथ, आप भी समझें

    परिवहन विभाग कितना महिलाओ के साथ, आप भी समझें,

    परिवहन विभाग और परिवहन मंत्री लगातार विज्ञापनो द्वारा अपनी आप को महिला सशक्तिकरण और महिला सुरक्षा की बातें जनता के समक्ष प्रस्तुत करते रहे है और इस विषय में परिवहन विभाग की विज्ञापनो के आधार पर हमने भी धन्यवाद के साथ प्रशंसा करी थी पर सब कुछ सामने आनी पर पता चला कि वह सब तो सिर्फ आखों का धोखा ही था।

    1. महिलाओ की लिए ऑटो परमिट पर कोटा, जांच में पता चला की ई वाहनों को टू दिल्ली परिवहन विभाग परमिट देता ही नहीं है यानी किसी भी ई वाहन को परमिट की आवश्यकता है ही नहीं, जब परमिट की जरुरत नहीं तो कोटा कैसा?
      इस बात के लिए उदाहरण और सबूत में मेट्रो फीडर ई बस हैं जो दिल्ली की सड़को पर स्टेज कैरेज परमिट की तरह स्टेज़ से और डीटीसी बस स्टैंड से सवारी उठाती हुए चलती है वह भी बिना परमिट। दूसरा उदाहरण और सबूत दिल्ली की सड़को पर डीटीसी के नाम से चलने वाली ई बसे।
      निष्कर्ष:- जब परमिट की आवश्यकता ही नहीं टू किस प्रकार का कोटा?

    दिल्ली की सड़क पर दुर्भाग्य पुर्ण दुर्घटना होने के बाद गृह सचिव कमेटी भारत सरकार द्वारा जारी आदेश के तहत दिल्ली परिवहन विभाग को दिल्ली में व्यवसायिक सवारी वाहनों पर चलने वाले सभी वाहन मालिकों का दिल्ली पुलिस की स्पैशल ब्रांच द्वारा जांच करवाना ओर वहा से जांच रिपोर्ट की साथ बार कोड प्राप्त करना था और उसी कोड द्वारा जांच बनाए रखना अनिवार्य था जिसे परिवहन विभाग ने अपनी ड्यूटी से मुक्त होने के लिए वाहन मालिको को ही पुलिस वेरिफिकेशन सर्टिफिकेट अनिवार्य कर दिया।
    निष्कर्ष:- परिवहन विभाग द्वारा महिला सुरक्षा की अहमियत जीरो हैं।

    वाहनों में पैनिक बटन और उसका संबंध सीधा दिल्ली पुलिस विभाग के अंतर्गत, जिससे अगर कोई महिला सुरक्षा हेतु पैनिक बटन का प्रयोग करें तो जल्द से जल्द पुलिस सेवा उपल्ब्ध हो सके पर बसो में पैनिक बटन तो लगा दिए गए पर उसका संबंध कही भी नहीं जिसके तहत पैनिक बटन का प्रयोग करने वाले को मदद मिल सके।
    निष्कर्ष:- सिर्फ दिखावा, महिला सुरक्षा नही

    महिलाओ के सशक्तिकरण हेतु महिलाओ को ड्राईवर ट्रैनिंग फ्री, पर जिस कैटेगरी के लिए ट्रैनिंग फ्री उस कैटेगरी में दिल्ली परिवहन विभाग और दिल्ली सरकार में कोई स्थाई या अस्थाई नौकरी ही नहीं और प्राइवेट सवारी वाहनों में कार्य करना कितना सुरक्षित, यह तो आप जानते ही हैं।
    निष्कर्ष:- सिर्फ दुनियां में दिखावे का माध्यम और कुछ नहीं।

    यह तो कुछ उदाहरण और सबूत है अभी और भी बहुत है जो सत्य ओर तथ्य का सच बताने में सक्षम है, अब आप ही सोच ले परिवहन विभाग के आला अधिकारी मुख्य रूप में परिवहन आयुक्त एवम् परिवहन मंत्री कितने महिला सशक्तिकरण और सुरक्षा के प्रति जागरूक है।

    जनहित में जारी
    संजय बाटला