Category: Transport

  • उसलापुर से सकरी खस्ताहाल सड़क से आमजनता परेशान..देखकर भी अनजान बने तखतपुर विधायक व महापौर

    उसलापुर से सकरी खस्ताहाल सड़क से आमजनता परेशान..देखकर भी अनजान बने तखतपुर विधायक व महापौर

    बिलासपुर/स्वराज टुडे:  जिस प्रकार पूरे प्रदेश की सड़कों का हाल बेहाल है उसी प्रकार बिलासपुर की उसलापुर से सकरी पहुचने वाली सड़क का हाल है डेढ़ किलोमीटर की सड़क को पार करने में लगते है लगभग पौंन घण्टा, इतनी खराब सड़क है कि आये दिन दुर्घटना होती रहती है सड़क जाम आये दिन का किस्सा बन गया है जाम में फंसे तो निकलने में एक घण्टे से ऊपर भी लग सकता है इस क्षेत्र के लोगो के अलावा तखतपुर,मुंगेली से आने वालों को बिलासपुर शहर आने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

    बढ़ता ट्रैफिक को देखते हुए भाजपा के शासन में सड़क चौड़ीकरण की योजना बनी थी

    इस सड़क को भाजपा शासन में चौड़ा करने का प्लान बना था उस समय तखतपुर के विधायक राजू क्षत्री थे बिलासपुर के विधायक अमर अग्रवाल थे और उस समय ये क्षेत्र नगर निगम में शामिल नही हुआ था लेकिन उस समय भाजपा के दो नेता एक केबिनेट मंत्री दूसरा राज्य मंत्री दर्जा प्राप्त थे तभी इस उसलापुर से सकरी की रोड चौड़ी करने का अमर अग्रवाल पूर्वमंत्री का प्लान था कि शहर बढ़ रहा है उसके अनुसार टट्राफिक भी बढ़ रहा है सड़को का चौड़ीकरण करना आवश्यक है क्योकि उन्होंने ही नेहरू चोक से लेकर उसलापुर तक सड़क को चौड़ीकरण किया था हा उस समय पर्यावरण प्रेमियों ने सड़क किनारे वर्षो पुराने पेड़ो को काटने को लेकर विरोध किया था लेकिन सड़क का चौड़ीकरण आज लगता है कि ज्यादा जरूरी थी लेकिन पूर्व मंत्री ने पेड़ो के बदले सड़क किनारे पेड़ भी लगवाए थे जो आज सड़क किनारे दिखाई दे रहे है।यदि भाजपा की सरकार रहती तो शायद ये सड़क का भी चौड़ीकरण हो गया होता ।

    सरकार क्या बदली सड़को की स्थिति भी बदल गई बद से बत्तर हो गई

    सरकार बदली ओर सड़क सरकार के चार वर्ष पूरे हो गए मरम्मत तक नही हुई है सड़क का चौड़ीकरण तो दूर की बात है सड़क का हाल इतना बुरा हो गया है कि आयेदिन कोई न कोई दुर्घटना हो रही है पुल से लगे पांच सौ मीटर का रास्ता इतना खराब है कि सड़कों में गढ्ढे ही गढ्ढे नजर आते है जाम अलग से इतना लगता है कि डेढ़ किलोमीटर के रास्ते को पौन घण्टा लग जाता है ।

    जिम्मेदार जनप्रतिनिधि को आखिर कब दिखाई देगी ये सड़क 

    तखतपुर की विधायक रश्मि सिंह राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त इसी सड़क को पार करके ही अपने क्षेत्र में संपर्क के लिए जाती होंगी लेकिन उन्हें ये सड़क क्यो नही दिखाई दे रही है सड़क इतनी खराब हो चुकी है कि इस पर अच्छी से अच्छी लग्जरी गाड़ी में भी यदि विधायक जाती होंगी तब भी उन्हें सड़क के खस्ता हाल का पता चलता होगा ,उन्ही के विधानसभा के अधिकांश लोग इसी सड़क से होकर शहर में आते है सड़क का मरम्मत होना अत्यंत आवश्यक हो गया नही तो आये दुर्घटना ,जाम बना रहेगा।

    पूर्व सरपंच अशोक ठाकुर उसलापुर का कहना है

    अशोक ठाकुर उसलापुर के पूर्व सरपंच रहे है उन्होंने कहा कि सड़क की मरम्म्त के साथ चौड़ीकरण के लिए एक प्रतिनिधि मण्डल पीडब्ल्यूडी ऑफिस गया था और उसे जल्द से जल्द बनाने की मांग की उन्होंने बताया कि 12 करोड़ रुपये इस रोड के सेन्शन हुआ है लेकिन पीडब्ल्यूडी का कहना है कि इतने में काम नही हो सकता तो उन्होंने विधायक रश्मि सिंह को 32 करोड़ रुपये का प्रपोजल दिया हुआ है राशि आने के बाद ही सड़क का निर्माण हो पायेगा ।

  • दिल्ली सरकार और परिवहन विभाग जो ना कर सके वह कर दिखाया बैंगलोर परिवहन विभाग ने

    दिल्ली सरकार और परिवहन विभाग जो ना कर सके वह कर दिखाया बैंगलोर परिवहन विभाग ने

    गोवा और बैंगलोर में ओला उबर बैन फिर दिल्ली में क्यों नहीं?

    आप सभी की जानकारी के लिए बता दे आज के युग में एप बेस्ड वाहन उपलब्ध होना अति आवश्यक है क्योंकि सभी आज इस सेवा को लेने का प्रयास करते हैं, पर ऐसी एप बेस्ड कम्पनी जिस पर राज्य सरकार की लगाम या कोई कानून लागु नहीं ऐसी एप बेस्ड कम्पनी से राज्य की जनता को सुरक्षित और प्रभावी सेवा उपलब्ध हो सकती है यह सोच कर भी दिल घबरा जाता हैं।

    दिल्ली सरकार और परिवहन विभाग क्या जान बूझ कर जनता की सुरक्षा को ताक पर रखकर ओला उबर जैसी कंपनियों से दोस्ती निभाने में लगी है और दिखावे के लिए उनके खिलाफ़ कार्यवाही की बात करके दिखाना पर कार्यवाही नही करना।

    अभी कुछ समय पहले ओला कम्पनी के साथ मिलकर बुराड़ी में एक बड़ा प्रोग्राम रखकर ऑटो ड्राइवरों से संबंध स्थापित करने का प्रयास भी किया था ऐसे है दिल्ली का परिवहन विभाग और सरकार।

    आपकी जानकारी हेतु बता दें गोवा में ऑटो वालो के साथ मिलकर गोवा परिवहन विभाग ने एप बेस्ड प्रोग्राम बना और चला रखा है जिस कारण गोवा में ओला, उबर जैसी कंपनियों को इजाजत नहीं अब इसी तर्ज पर बैंगलोर परिवहन विभाग भी ऑटो एवम् अन्य वाहन मालिकों के साथ मिलकर अपना एप बेस्ड प्रोग्राम बना कर और शुरु करने जा रहा है और साथ ही बैंगलोर परिवहन विभाग ने ओला उबर कंपनियों की सेवा बैन कर दी जाएगी।

    जब गोवा और बैंगलोर परिवहन विभाग अपने राज्य में ओला और उबर जैसी कंपनियों की सेवा बैन कर सकते हैं तो दिल्ली परिवहन विभाग और दिल्ली सरकार उनसे दोस्ती क्यों निभा रहे हैं क्यों दिल्ली की जनता की सुरक्षा को दरकिनार और लुटवाने में लगे हैं।

    दिल्ली परिवहन विभाग और सरकार दिल्ली की जनता की सुरक्षा के प्रति तत्काल प्रभाव से ओला उबर की सेवा दिल्ली में बैन के आदेश पारित करे

    जनहित में जारी
    संजय बाटला

  • दिल्ली में त्यौहारो के समय में, वाहनों की हड़ताल क्या रंग दिखाएगी

    दिल्ली में त्यौहारो के समय में, वाहनों की हड़ताल क्या रंग दिखाएगी

    दिल्ली में सभी व्यवसायिक वाहन चालक और मालिक सीएनजी पर सब्सिडी ना मिलने के विरोध में कर सकते हैं हड़ताल, कौन कहलाएगा जिम्मेदार ?

    दिल्ली सरकार और परिवहन विभाग द्वारा दिल्ली में चल रही कलस्टर कम्पनियों से किए गए एग्रीमेंट के अनुसार प्रति किलो मीटर की देय राशी से 100 प्रतिशत से भी अधिक राशी पर पेमेंट कर रहे हैं, आख़िर क्यों ?

    एग्रीमेंट के अनुसार इसे वायबल्टी फंडिंग गैप कहते हैं और बड़े हुए खर्चों के अनुसार प्रति किलो मीटर देय राशि को बड़ा कर देना जरूरी है। इसका अर्थ साफ है की परिवहन विभाग और दिल्ली सरकार भली भांति परिचित हैं की कब दिल्ली के व्यवसायिक वाहन मालिको को कितने प्रतिशत के अनुसार किराया बढ़ाना जरूरी था पर दिल्ली में सभी वाहन मालिकों को बर्बाद करने की अपनी ख्वाहिशों को पूरा करने के कारण ना तो किराया बढ़ाया और ना ही किसी प्रकार की सब्सिडी दी और ऊपर से जबरदस्ती वाहन मालिकों से सभी सरकारी देय राशि ब्याज समेत वसूलने और अन्य अपने साथ जुड़ी कंपनियों जिन्होंने अपना दायित्व भी नही निभाया के लिए भी देय राशि ब्याज समेत मांग रहे हैं।

    दिल्ली सरकार और परिवहन विभाग की मिली जुली कार्यशेली और नीतियां सिर्फ क्लस्टर कंपनियों और एप बेस्ड कंपनियों जिन पर इनका रूतबा या ताकत काम नहीं कर रहीं को पूर्ण फायदा देने और बाकी सभी को बर्बाद करने के लिए लागू है।

    दिल्ली में सार्वजनिक वाहन सेवा प्रदान करने वाली अधिकतर श्रेणियां (आरटीवी, ग्रामीण सेवा, ईको फ्रेंडली सेवा, फटफट सेवा) अब दिल्ली की जनता को सड़कों पर बहुत कम नज़र आ रहे होगें और अब दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार बनवाने वाले ऑटो, टैक्सी आदि वाहन भी जल्द कम दिखने लगेंगे क्योंकि लगातर सब दिल्ली सरकार और परिवहन विभाग से सीएनजी पर सब्सिडी या सभी वाहनों को क्लस्टर कंपनियों की तरह प्रति किलो मीटर की देय राशी पर चलवाने की मांग कर रहे थे पर दिल्ली सरकार और परिवहन विभाग ने अपना क्लस्टर कंपनियों के लगाव में किसी की भी मांग पर ध्यान नहीं दिया और सभी मांगों को रद्दी की टोकरी दिखा दी।

    अब दिल्ली के सभी व्यवसायिक वाहन मालिको ने आपस में बातें कर दिल्ली में चक्का जाम करने का फैसला लेने का विचार व्यक्त किया है।

    यह बिलकुल सच है की अगर दिल्ली के व्यवसायिक वाहन मालिको ने दिल्ली में चक्का जाम और हड़ताल का फैसला कर लिया तो दिल्ली में जनता को परेशानी उत्पन्न होगी और उसके लिए ज़िम्मेदार होंगे दिल्ली सरकार और परिवहन विभाग।

    जनहित में जारी
    संजय बाटला

  • दिल्ली में सभी व्यवसायिक वाहन चालक और मालिक सीएनजी पर सब्सिडी ना मिलने के विरोध में कर सकते हैं हड़ताल, कौन कहलाएगा जिम्मेदार ?

    दिल्ली में सभी व्यवसायिक वाहन चालक और मालिक सीएनजी पर सब्सिडी ना मिलने के विरोध में कर सकते हैं हड़ताल, कौन कहलाएगा जिम्मेदार ?

    दिल्ली सरकार और परिवहन विभाग द्वारा दिल्ली में चल रही कलस्टर कम्पनियों से किए गए एग्रीमेंट के अनुसार प्रति किलो मीटर की देय राशी से 100 प्रतिशत से भी अधिक राशी पर पेमेंट कर रहे हैं, आख़िर क्यों ?

    एग्रीमेंट के अनुसार इसे वायबल्टी फंडिंग गैप कहते हैं और बड़े हुए खर्चों के अनुसार प्रति किलो मीटर देय राशि को बड़ा कर देना जरूरी है। इसका अर्थ साफ है की परिवहन विभाग और दिल्ली सरकार भली भांति परिचित हैं की कब दिल्ली के व्यवसायिक वाहन मालिको को कितने प्रतिशत के अनुसार किराया बढ़ाना जरूरी था पर दिल्ली में सभी वाहन मालिकों को बर्बाद करने की अपनी ख्वाहिशों को पूरा करने के कारण ना तो किराया बढ़ाया और ना ही किसी प्रकार की सब्सिडी दी और ऊपर से जबरदस्ती वाहन मालिकों से सभी सरकारी देय राशि ब्याज समेत वसूलने और अन्य अपने साथ जुड़ी कंपनियों जिन्होंने अपना दायित्व भी नही निभाया के लिए भी देय राशि ब्याज समेत मांग रहे हैं।

    दिल्ली सरकार और परिवहन विभाग की मिली जुली कार्यशेली और नीतियां सिर्फ क्लस्टर कंपनियों और एप बेस्ड कंपनियों जिन पर इनका रूतबा या ताकत काम नहीं कर रहीं को पूर्ण फायदा देने और बाकी सभी को बर्बाद करने के लिए लागू है।

    दिल्ली में सार्वजनिक वाहन सेवा प्रदान करने वाली अधिकतर श्रेणियां (आरटीवी, ग्रामीण सेवा, ईको फ्रेंडली सेवा, फटफट सेवा) अब दिल्ली की जनता को सड़कों पर बहुत कम नज़र आ रहे होगें और अब दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार बनवाने वाले ऑटो, टैक्सी आदि वाहन भी जल्द कम दिखने लगेंगे क्योंकि लगातर सब दिल्ली सरकार और परिवहन विभाग से सीएनजी पर सब्सिडी या सभी वाहनों को क्लस्टर कंपनियों की तरह प्रति किलो मीटर की देय राशी पर चलवाने की मांग कर रहे थे पर दिल्ली सरकार और परिवहन विभाग ने अपना क्लस्टर कंपनियों के लगाव में किसी की भी मांग पर ध्यान नहीं दिया और सभी मांगों को रद्दी की टोकरी दिखा दी।

    अब दिल्ली के सभी व्यवसायिक वाहन मालिको ने आपस में बातें कर दिल्ली में चक्का जाम करने का फैसला लेने का विचार व्यक्त किया है।

    यह बिलकुल सच है की अगर दिल्ली के व्यवसायिक वाहन मालिको ने दिल्ली में चक्का जाम और हड़ताल का फैसला कर लिया तो दिल्ली में जनता को परेशानी उत्पन्न होगी और उसके लिए ज़िम्मेदार होंगे दिल्ली सरकार और परिवहन विभाग।

    जनहित में जारी
    संजय बाटला

  • परिवहन विभाग द्वारा क्यों नही की गईं कार्यवाही, आखिर क्या है कारण ?

    परिवहन विभाग द्वारा क्यों नही की गईं कार्यवाही, आखिर क्या है कारण ?

    परिवहन विभाग द्वारा कार्यवाही क्यों नहीं, आखिर क्या है कारण ?

    दिल्ली की जनता को ड्राईविंग स्किल प्राप्त करवाने के उद्देश्य से परिवहन विभाग द्वारा कई एकड़ जमीन फ्री में मारूति उद्योग लिमिटेड को दे रखी है जो इंस्टीयूट ऑफ ड्राइविंग एंड ट्रैफिक रिसर्च (आई डी टी आर) के नाम से प्रसिद्ध है।

    दिल्ली परिवहन विभाग की मेहरबानी इस पर कुछ हद से ज्यादा ही है क्योंकी इनके द्वारा जनता से ली जाने वाली फीस अन्य अपनी जमीन पर खोले हुए मान्यता प्राप्त ड्राइविंग स्कूल से ज्यादा है ऊपर से इन्हे ही सिर्फ हैवी ड्राईविंग स्किल प्रदान करने की आज्ञा देकर कारोबार और कमाई का दर्जा दिया हुआ है।

    इतनी सब छूट मिलने के बाबजूद यहां ट्रैनिंग प्राप्त करने आने वालो को जिन परेशानियों से जूझना पड़ रहा है उसके प्रति ना तो यहां का मैनेजमेंट कुछ कर रहा है और ना ही परिवहन विभाग उसके लिए इनके खिलाफ़ कोई कार्यवाही कर रहा है।

    कारण क्या है यह तो परिवहन विभाग ही जानता होगा पर परिवहन विभाग की इस मेहरबानी के कारण आज यहां ड्राइविंग स्किल प्राप्त करने आने वालो को बीमारी होने और चोट लगने की आशंका जताई जा रही हैं। नीचे दिए गए लिंक द्वारा विडियो क्लिप में देखें वहा का पूरा हाल

    [embedyt] https://www.youtube.com/watch?v=LYF3t8eLbw8[/embedyt]

    कारण आप स्वयं इस ख़बर के साथ स्लगन विडियो क्लिप और फोटो देखकर समझ जाएंगे।

    इस ट्रैनिंग सैंटर के बाहर और अंदर गंदगी और पानी का भराव इसकी पुष्टि कर रहा है।

    दिल्ली सरकार और परिवहन विभाग के आला अधिकारियों से हाथ जोड़ कर प्रार्थना है आई.डी.टी.आर. वजीराबाद रोड़ पर लोगों को कार और स्कूटर परमानेनट लाईसेंस के लिए टैस्ट देने के लिए जाना एक टेढ़ी खीर है । अन्दर बाहर कीचड़ और पानी भरा हुआ है डेंगू के मच्छर पनप रहे हैं इस और ध्यान देने का कष्ट करें और जनता के हित को ध्यान में रखते हुए जल्दी से जल्दी ठीक करवाने की तरफ ध्यान देने की कृपा करें ।

    जनहित में जारी
    संजय बाटला l

     

  • दिल्ली परिवहन विभाग का आदेश, सुरक्षा हेतु या ?

    दिल्ली परिवहन विभाग का आदेश, सुरक्षा हेतु या ?

    दिल्ली सरकार द्वारा समाचारों और डिजिटल तरीकों से जनता को अवगत करवाया की दिल्ली में सड़क सुरक्षा को लेकर हम पूर्ण रूप से प्रयासरत हैं और उसके लिए किसी भी गलती करने वाले को बिना दंड के नही छोड़ा जाएगा।

    दंड के रूप में सरकार ने जनता को बताया की बस लेन का तीन बार उल्लघंन करने वाले ड्राईवर का ड्राइविंग लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा,
    सड़क सुरक्षा के प्रति सुनने में यह एक अच्छा फैसला हैं पर
    १. क्या दिल्ली सरकार और परिवहन विभाग सड़कों पर चलने वाले वाहनों को उनकी लेन खाली दिलवाने की ज़िम्मेदारी निभाएंगे, यह बहुत बड़ा सवाल ?
    २. क्या दिल्ली सरकार और परिवहन विभाग सड़कों पर खड़े होने वाले अनाधिकृत वाहनों को हटवाने की ज़िम्मेदारी निभाएंगे, दूसरा बड़ा सवाल ?
    ३. क्या दिल्ली सरकार और परिवहन विभाग दिल्ली की सड़को पर अवैध रूप से रेहड़ी, खोमचे, और खोखों को सड़को से हटवाने की ज़िम्मेदारी निभाएंगे, तीसरा बड़ा सवाल ?
    ४. क्या दिल्ली सरकार और परिवहन विभाग दिल्ली में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा आदेश के अंतर्गत ई रिक्शे, रिक्शे को बाधित सड़को पर बेखौफ खड़े होने और चलने से रुकवाएगा, सबसे महत्वपूर्ण सवाल ?

    जब किसी ड्राईवर को उसकी लेन ही उपल्ब्ध नही होगी और ऊपर से दिल्ली सरकार और परिवहन विभाग की सबसे बेहतरीन सवारी सेवा कलस्टर बसों को लेफ्ट लाईन में चलने की आदत ही नहीं होगी तो किसके लाइसेंस रद्द होंगे , किसको सजा मिलेगी ओर उससे होगा क्या ?
    A. सरकारी खजाने में इजाफा,
    B. सड़को पर सरकार द्वारा छोड़े गए व्यक्तियों की ऊपरी कमाई

    या कुछ और, बड़ा सवाल ?

    जनहित में जारी
    *संजय बाटला*

  • दिल्ली परिवहन विभाग 16 सितंबर 2022 को जारी गैजेट नोटिफिकेशन को पूर्ण रूप से लागू करने में क्यों कर रहा आनाकानी,

    दिल्ली परिवहन विभाग 16 सितंबर 2022 को जारी गैजेट नोटिफिकेशन को पूर्ण रूप से लागू करने में क्यों कर रहा आनाकानी,

    सड़क एवम् राजमार्ग मंत्रालय भारत सरकार द्वारा 16 सितम्बर 2022 को जारी गैजेट नोटिफिकेशन के एक हिस्से को दिल्ली परिवहन विभाग के आला अधिकारियों द्वारा दरकिनार करना क्या न्याय संगत ? (गैजेट नोटिफिकेशन की फोटो कॉपी स्लगन)

    यह सच है कि दिल्ली भारत देश का पहला ऐसा राज्य है जिसने गैजेट नोटिफिकेशन जारी होने से पूर्व ही दिल्ली में अपनी हठधर्मी से सभी सेवाएं ऑनलाईन फेस फ्री कार्यशैली से लागु कर रखी थी, लेकिन विधि विधान से आए गैजेट नोटिफिकेशन के जारी होने के बाद उस हिस्से को लागू नहीं करना जिसे परिवहन विभाग के आला अधिकारी लागू करना पसन्द नहीं करते क्या न्यायिक प्रक्रिया मानी जा सकती हैं।

    यहां इसका एक सरल सा तरीका है जिससे परिवहन विभाग के आला अधिकारियों की बात भी रह जाएगी और गैजेट नोटिफिकेशन में जारी प्रक्रिया में कार्यशैली भी शुरु हो जाएगी
    ऐसे व्यक्ति जो सीएमवीआर 1989 के अनुसार प्राधिकरण के कार्यालय में अपने सभी दस्तावेज़ लेकर उपस्थित हो कर कार्य करवाना चाहते हैं उन्हें उसी ब्रांच के अधिकारी द्वारा पूरे कागजातो की जांच पड़ताल के बाद अगर उचित लगता हैं तब ऑनलाईन फीस भरने के लिए ब्रांच द्वारा लिंक जारी कर दिया जाए जिससे सभी कार्य विधि विधान से संपन्न हो जाएंगे और परिवहन विभाग के आला अधिकारियों की बात भी पूरी हो जाएगी और गैजेट नोटिफिकेशन पर भी अमल हो जाएगा।

    संजय बाटला

     

  • बस में आग लगने से 11 जिंदा जले, 38 जख्मी : मृतकों के परिजन को पांच लाख रुपए देने का ऐलान

    बस में आग लगने से 11 जिंदा जले, 38 जख्मी : मृतकों के परिजन को पांच लाख रुपए देने का ऐलान

    नासिक : महाराष्ट्र के नासिक में शनिवार सुबह एक भीषण हादसा हो गया। बस और आयशर ट्रक के बीच टक्कर हुई, जिससे बस के डीजल टैंक में ब्लास्ट हुआ और उसके अगले हिस्से में आग लग गई। देखते ही देखते 20 मिनट में बस धू-धूकर जल गई।

    हादसे में बस में सवार 11 लोग जिंदा जल गए। इनके अलावा, 38 यात्री जख्मी हुए हैं। बस यवतमाल से मुंबई जा रही थी। दुर्घटना सुबह 4:30 बजे की है। कुछ यात्रियों ने बस से कूदकर जान बचाई। महाराष्ट्र के CM एकनाथ शिंदे ने मृतकों के परिजन को पांच-पांच लाख रुपए देने का ऐलान किया है। घायलों को फ्री में इलाज करवाया जाएगा।

    हादसा नासिक-औरंगाबाद रूट पर नंदूरनाका के पास हुआ। बस चिंतामणि ट्रेवल्स की थी। इसमें 45-50 लोग सवार थे। पुलिस उपायुक्त अमोल तांबे ने हादसे की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि 10 लोगों की मौत हुई है। महाराष्ट्र के CM एकनाथ शिंदे ने कहा है कि घायलों के इलाज का खर्च सरकार उठाएगी।

    बस ने कंटेनर को मारी टक्कर

    सड़क हादसे को लेकर नासिक पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, दुर्घटना औरंगाबाद रोड पर शनिवार सुबह करीब 5 बजे हुई है। एक प्राइवेट बस ने कंटेनर को टक्कर मार दी, जिसके तुरंत बाद बस में आग लग गई। हादसे में घायल हुए लोगों को अस्पताल पहुंचाया गया है। साथ ही उन्‍होंने बताया कि मरने वालों की संख्या बढ़ने की आशंका है, क्‍योंकि कई लोग गंभीर रूप से भी घायल हुए हैं।

    हादसे को लेकर पुलिस कर रही है जांच

    हालांकि, अभी तक यह साफ नहीं है कि नासिक में हुई सड़क दुर्घटना में मारे गए और घायल हुए लोग बस सवार थे या कंटेनर में बैठे लोग। वहीं, उत्तर प्रदेश के गजरौला में दिल्ली-लखनऊ राष्ट्रीय राजमार्ग पर ट्रक और रोडवेज बस में टक्कर हो गई। बताया जा रहा है कि यह हादसा हाईवे पर गांव कांकाठेर के नजदीक हुआ है। हादसे में बस में सवार करीब 20 यात्रियों के घायल होने की खबर है। घायलों को  इलाज के लिए इलाके के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जिनमें से दो की हालत फिलहाल नाजुक है, उन्हें जिला अस्पताल के रेफर किया दिया गया है।

  • दिल्ली के ऑटो मालिको को कब मिलेगा परेशानियों से छुटकारा

    दिल्ली के ऑटो मालिको को कब मिलेगा परेशानियों से छुटकारा

    *दिल्ली परिवहन विभाग के ऑटो शाखा से आख़िर क्यों है ऑटो मालिक परेशान*

    सच्चाई तो यह है की ऑटो शाखा में पिछले कई सालों से ऐसे अधिकारियो को मुख्य यानी डीटीओ के पद पर आसीन किया जाता गया है जिनकी छवि काफी अच्छी रही है और जनता के लिए हितकारी कहलाते रहे हैं पर अफसोस की बात फिर भी ऑटो के परमिट चालकों की परेशानियां दूर ही नहीं हो पा रही।

    *आख़िर कौन है इस परेशानी का जिम्मेदार* ?

    प्रथम दृष्टि से ऑटो के मालिको की परेशानियों के जिम्मेदार परिवहन विभाग के आला अधिकारी ही लगते हैं क्योंकि उनकी जानकारी में एक शिकायत आने के बाद उस से संबंधित अन्य सभी समस्याओं का पूरा विवरण मंगा कर सबकी समस्याओं का कारण जांच कर ऑटो मालिको को उनकी परशानियो से मुक्त कर देना चाहिए पर ऐसा हो नहीं रहा और दूसरी सबसे बड़ी सच्चाई यह भी है की आम ऑटो मालिक अपनी परेशानी लेकर आला अधिकारियों तक पहुंच ही नहीं पाते क्योंकि आला अधिकारी तो अपने चारो और जेड प्लस सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर के बैठे हैं।

    आप सभी यह तो जानते ही होंगे कि आम आदमी पार्टी को दिल्ली में सरकार बनवाने में अगर किसी का श्रेय हैं तो वह हैं ऑटो चालक और कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी।

    सबसे महत्वपूर्ण बात आज अन्य तो परेशान हैं ही पर यह दोनों (ऑटो मालिक और कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी) सबसे ज्यादा परेशान, ऐसा नहीं की आम आदमी पार्टी ने ऑटो चालकों के लिए मदद में कोई कमी नहीं रखी पर फिर भी है परेशान, आख़िर क्यों। बड़ा सवाल ?

    दिल्ली परिवहन विभाग के आला अधिकारियों से टोलवा की और से नरम निवेदन प्रार्थना है
    ऑटो चालको और मालिको को अपने परमिट को नए वाहनों पर आने वाली परेशानियों की जांच करवाएं की आख़िर पिछले 6 सालों से ऑटो मालिक नया वाहन पूर्ण कानूनी कार्यवाही करके खरीद कर वाहन के रजिस्ट्रेशन नंबर के इंतजार में धक्के खा रहे हैं आख़िर क्यों, क्या आला आधिकारी जनता को बताना पसन्द करेगें।
    ऑटो मालिक अपने ही नाम के परमिट को नए ऑटो पर पाने के लिए धक्के खाते रहते हैं क्या आला अधिकारी जनता को बताना पसन्द करेगें क्यों ?

    जनहित में जारी
    संजय बाटला

  • अगर आप दिल्ली के निवासी हैं तो आपके जानने और समझने योग्य, अति आवश्यक बात

    अगर आप दिल्ली के निवासी हैं तो आपके जानने और समझने योग्य, अति आवश्यक बात

    *दिल्ली परिवहन विभाग और सरकार द्वारा आज से दिल्ली में प्रदुषण अलर्ट,* नए नियम लागू, रहें बच कर।

    दिल्ली से मानसून की बिदाई हो चुकी है और अब आम आदमी पार्टी दिल्ली सरकार और परिवहन विभाग द्वारा दिल्ली की जनता पर नकेल कसने वाला समय आ गया है।

    दिल्ली जो ग्रीन सिटी के अवार्ड से सम्मानित थी उस दिल्ली में जिस दिन से आम आदमी पार्टी ने अपनी सरकार बनाई उसी दिन से दिल्ली को ग्रीन सिटी की जगह प्रदुषण के चैंबर नाम देकर दिल्ली की जनता को अलग अलग नियमो और पाबंदियों में बाधना शुरु कर रखा है।

    *सच क्या था, क्या है और यह सब क्या लीलाएं है यह तो दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार और परिवहन विभाग के आला अधिकारी ही बेहतर जानते हैं।*

    पर आप सभी दिल्ली वासियों और भारत देश में परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोगों को बता देना मेरा कर्तव्य है कि आज 1 अक्टूबर है और आज से दिल्ली परिवहन विभाग आपके ऊपर कई नए नियमों के तहत आने वाले चार महीनों तक कार्यवाही करने के लिए सड़को पर बाज की तरह दृष्टि गड़ाए मिलेगा, ध्यान रखें अपने वाहनों को दिल्ली की सड़को पर उतारने से पहले अपने वाहन के सभी दस्तावेजो की जांच के साथ यह अवश्य जान लेना की आपका वाहन दिल्ली में प्रवेश हेतू वर्जित तो नही किया हुआ। क्योंकि यह दिल्ली सरकार और उसका सबसे प्रिय परिवहन विभाग हैं जो सरकारी खजाने में इजाफा करवाने के लिए कुछ भी कर सकता हैं आपका वाहन जब्त कर जुर्माना वसूल कर वाहन सुपुर्द करने की जगह जबरदस्ती स्क्रैप भी करवा सकता है।

    यहां सबसे मुख्य जानने योग्य बात यह है की पर्यावरण मंत्रालय द्वारा 2017 में दिल्ली के प्रति जी.आर.ए.पी. ज़ारी किया था और इसे 15 अक्टूबर से लागू करने की बात कही थी। सी.ए.क्यू.एम. के निर्देशो के तहत इसे 15 दिन पहले से भी लागू किया जा सकता है जिससे हवा में प्रदुषण बढ़ाने वाले तत्वों को रोका जा सके।

    आपकी जानकारी हेतु बता देना जरूरी है सी.ए.क्यू.एम. के अनुसार जी.आर.ए.पी. को चार श्रेणियों में लागू किया गया है,
    1. ए.क्यू.आई. का स्तर :- 201 से 300 के बीच
    2. ए.क्यू.आई. का स्तर :- 301 से 400 के बीच
    3. ए.क्यू.आई. का स्तर :- 401 से 450 के बीच
    4. ए.क्यू.आई. का स्तर :- 450 से ऊपर

    यहां आपकी जानकारी हेतु यह बताना भी अनिवार्य है और आपके लिए जानना भी की सभी स्टेज के लिए अलग अलग पाबंदियां भी घोषित हैं जिसके अंतर्गत ही दिल्ली सरकार और और उसके अंतर्गत कार्यालय जैसे परिवहन विभाग इत्यादि कार्यवाही कर सकते हैं, जाने किस स्टेज पर क्या पाबंदियां लागू हैं :-

    *स्टेज 1 पर लगती हैं ये पाबंदियां*

    कंस्ट्रक्शन और डिमोलिशन से निकलने वाली धूल और मलबे के प्रबंधन को लेकर निर्देश लागू होंगे.
    सड़कों पर जमी धूल को उड़ने से रोकने के लिए पानी का छिड़काव किया जाएगा.
    खुले में कचरा जलाने पर प्रतिबंध रहेगा. ऐसा करने पर जुर्माना वसूला जाएगा.
    जहां ट्रैफिक ज्यादा होता है, वहां ट्रैफिक पुलिस की तैनाती होगी.
    पी.यू.सी. के नियमों को सख्ती से लागू किया जाएगा. गाड़ियां बिना पी.यू.सी. के नहीं चलने दी जाएंगी.
    एनसीआर में कम से कम बिजली कटौती होगी. डिजल जनरेटर का इस्तेमाल बिजली के लिए नहीं होगा.

    *स्टेज 2 पर लगती हैं ये पाबंदियां*

    हर दिन सड़कों की सफाई होगी. हर दूसरे दिन पानी का छिड़काव किया जाएगा.
    होटल या रेस्टोरेंट में कोयले या तंदूर का इस्तेमाल नहीं होगा.
    अस्पतालों, रेल सर्विस, मेट्रो सर्विस जैसी जगहों को छोड़कर कहीं और डिजल जनरेटर का इस्तेमाल नहीं होगा.
    लोग पब्लिक ट्रांसपोर्ट का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करें, इसके लिए सरकार पार्किंग फीस बढ़ाने के दिशा निर्देश जारी कर सकती है .
    इलेक्ट्रिक या सीएनजी बसें और मेट्रो सर्विस के फेरे बढ़ाए जाएंगे.

    *स्टेज 3 पर लगती हैं ये पाबंदियां*

    हर दिन सड़कों की सफाई के साथ पानी का छिड़काव होगा.
    अस्पताल, रेल सर्विस, मेट्रो सर्विस जैसी कुछ जगहों को छोड़कर पूरे दिल्ली-एनसीआर में कंस्ट्रक्शन और डिमोलिशन एक्टिविटी बंद रखी जाएगी.
    इंडस्ट्रियां बंद कर दी जाएंगी. मिल्क-डेरी यूनिट, दवा और मेडिसिन बनाने वाली इंडस्ट्रियों-फैक्ट्रियों को छूट रहेगी.
    दिल्ली-एनसीआर में माइनिंग बंद करवा दी जाएगी. स्टोन क्रशर और ईंट भट्टियों का काम बंद कर दिया जाएगा.
    बीएस III पेट्रोल और बीएस IV डीजल पर चलने वाली कारों को लेकर प्रतिबंध लाया जा सकता हैं.

    *स्टेज 4 पर होती हैं ये पाबंदियां*

    दिल्ली में ट्रकों की एंट्री बंद कर दी जाएगी. सिर्फ जरूरी सामान लाने-ले जाने वाले ट्रक आ सकेंगे.
    दिल्ली में रजिस्टर्ड मीडियम और हेवी गुड व्हीकल्स के चलने पर प्रतिबंध. जरूरी सामान ढोने वाले व्हीकल को छूट रहेगी.
    दिल्ली में रजिस्टर्ड डीजल पर चलने वाली कारों पर प्रतिबंध रहेगा. सिर्फ बीएस VI इंजन गाड़ियों और जरूरी सेवा में लगी गाड़ियों को छूट रहेगी.
    इंडस्ट्री और फैक्ट्रियां बंद रहेंगी. कंस्ट्रक्शन और डिमोलिशन एक्टिविटी पर भी रोक रहेगी. सिर्फ हाईवे, सड़क, फ्लाईओवर, ब्रिज, पाइपलाइन बनाने का काम चलता रहेगा.
    एनसीआर में राज्य सरकार के दफ्तरों में सिर्फ 50% कर्मचारी ही आ सकेंगे. बाकी घर से काम करेंगे. केंद्र के कर्मचारियों का फैसला केंद्र सरकार करेगी.
    स्कूल, कॉलेज या शिक्षण संस्थान और गैर-जरूरी कमर्शियल एक्टिविटी को बंद या चालू रखने पर सरकार फैसला लेगी.

    जनहित में जारी
    *संजय बाटला*