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  • *दिल्ली की विश्वस्तरीय सड़कें, कितनी सुखद और सुरक्षित*

    *दिल्ली की विश्वस्तरीय सड़कें, कितनी सुखद और सुरक्षित*

    दिल्ली सरकार और परिवहन विभाग दिल्ली द्वारा बिना गिनती का रुपया विज्ञापनों पर खर्च कर के विश्व को दिल्ली की इंटरनेशनल सड़को की तारीफ़ करते हुए तो आपने रोज ही देखा और सुना ही होगा।

    दिल्ली की जनता को तो अपने क्षेत्र और जहा तक उनका दिल्ली की सड़कों पर आना जाना होता होगा वहा तक की सड़कों की खूबियां तो अच्छी तरह पता ही है, बताने की आवश्यकता ही नहीं ।

    दिल्ली की विश्वस्तरीय सड़को की लिए अगर बताने की आवश्यकता किसी को है तो वह है, दिल्ली सरकार, परिवहन आयुक्त, परिवहन मंत्री और उप मुख्यमंत्री दिल्ली, क्योंकि इनकी बातो से यह पता चलता है की यह Delhi की सड़कों पर कभी चले ही नहीं!!!

    दिल्ली में परिवहन मंत्री के क्षेत्र की सड़के तो इतनी विश्व स्तरीय है जो अपने ऊपर चलते वाहनों को कब अपने अन्दर समा ले इसका तो शायद भगवान को भी नहीं पता होगा तो इन्सान की तो क्या औकात जो सोच भी सके, इतनी इंटरनेशनल तकनीक से बनी है यहां की सड़के, द्वारका क्षेत्र की इंटरनेशनल तकनीक सड़क भी अपनी इच्छा से चलते वाहनों को अपने में समेट लेती हैं और कोई भी वाहन चालक किसी भी क्षेत्र की इंटरनेशनल तकनीक की सड़कों पर बिना झटके खाए निकलते या चलते पाए गए होंगे ऐसा आज तक की तारीख में तो किसी से सुनने में नही आ पाया।

    आजकल वाहनों की सर्विस भी इन इंटरनैशनल लेवल की सड़के फ्री में करती हैं क्योंकी इसमें पानी जमा करने की इतनी क्षमता है की आधी बस तो समा जी सकती हैं, तो छोटे वाहनों के लिए तो सोचना ही क्या।

    हैं ना दिल्ली की सड़कें विज्ञापनों में विश्व ख्याति प्राप्त करने वाली, और आप सभी के जानने योग्य है कि हमारी सरकार के उप मुख्यमंत्री ओर परिवहन मंत्री क्या बोलते हैं इसको और अधिक इंटरनैशनल लेवल पर पहुंचाने के लिए उन्ही के ट्विटर अकाउंट के लिंक सी जाने,

    https://www.facebook.com/100044281126741/posts/pfbid02eXKtzb4faKKSQBHfB2TDK9HhxnJvKTLTHb5X1pia9RYM6JyZzxWRj2srMoYeJYf7l/

    वाहा मेरी दिल्ली सरकार और परिवहन आयुक्त

    जनहित में जारी
    संजय बाटला

  • ई वाहनों पर गोवा राज्य में सब्सिडी बंद, उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण द्वारा ज़ारी ई.वी. कंपनियों को नोटिस पर दिल्ली की बात अजब,

    ई वाहनों पर गोवा राज्य में सब्सिडी बंद, उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण द्वारा ज़ारी ई.वी. कंपनियों को नोटिस पर दिल्ली की बात अजब,

    पांच इलेक्ट्रिक वाहन निर्माताओं को केन्द्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण ने भेजा नोटिस, एक राज्य में बंद हुई ई वाहनों पर सब्सिडी पर दिल्ली में दिया जा रहा है 15 श्रेणियों में स्विच दिल्ली ईवी अवार्ड

    केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण ने इलेक्ट्रिक वाहनों में आग लगने की घटनाओं पर स्वत: संज्ञान लेते हुए चार-पांच इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण कंपनियों को नोटिस जारी कर दिया है।

    सीसीपीए की मुख्य आयुक्त निधि खरे ने मंगलवार को कहा कि प्राधिकरण इस मामले में जल्द ही सुनवाई शुरू करेगा। इलेक्ट्रिक वाहन में आग लगने का कारण पूछा गया है। यह भी पूछा गया है कि नियामक को उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं करनी चाहिए।

    निधि खरे ने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहन में आग लगने की घटना में भी लोगों की जान चली गई है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या बाजार में बिकने वाले उत्पाद मानक परीक्षण मानकों पर खरे उतरते हैं।

    उन्होंने कहा कि इस संबंध में सीसीपीए को कई शिकायतें मिली थीं और उन्होंने स्वत: संज्ञान लेते हुए यह कदम उठाया है। सीसीपीए प्रमुख ने कहा कि उन्होंने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन से भी इस संबंध में अपनी रिपोर्ट सौंपने को कहा है।

    सड़क परिवहन मंत्रालय ने ईवी में आग लगने की घटनाओं की जांच का जिम्मा डीआरडीओ को सौंपा है।

    भारत का एक राज्य अपने यहा से खत्म करने जा रही है इलेक्ट्रिक वाहन पर सब्सिडी पॉलिसी

    ईवी से सब्सिडी हटाने का निर्णय लेते ही गोवा भारत का पहला राज्य बन गया है। डिपार्टमेंट ऑफ न्यू एंड रिन्यूवल ने सूचित किया है कि सरकार 31 जुलाई, 2022 से “गोवा राज्य में इलेक्ट्रिक वाहन को बढ़ावा देने” की योजना को बंद कर रही है। दिसंबर, 2021 के बाद से और 31 जुलाई, 2022 तक खरीदे गए इलेक्ट्रिक दोपहिया, तीन पहिया और चार पहिया वाहन योजना में दिए गए सब्सिडी के लिए पात्र होंगे।

    इस घोषणा के साथ ही गोवा में कोई भी इलेक्ट्रिक स्कूटर, बाइक, तीन पहिया और चार पहिया खरीदने पर किसी भी तरह की कोई सब्सिडी नहीं मिलेगी। मौजूदा ऑफर केवल 31 जुलाई, 2022 तक मान्य है।

    गोवा सरकार द्वारा वित्त वर्ष 2021-2022 में दी जाने वाली गोवा राज्य ईवी सब्सिडी के तहत इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने पर 10,000 रुपये प्रति किलोवाट तक की सब्सिडी दी जाती थी। वित्त वर्ष 2022-2023 में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों के लिए सब्सिडी को कम करके 8,000 रुपये प्रति किलोवाट तक कर दिया गया था। इस सब्सिडी को अधिकतम 30,000 रुपये तक सीमित कर दिया गया था और केवल 3,000 इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन हर महीने इस सब्सिडी का लाभ उठा सकते थे।

    आगामी 10 अगस्त को एनडीएमसी कन्वेंशन सेंटर में चौथे दिल्ली इलेक्ट्रिक वाहन फोरम का आयोजन

    दिल्ली की केजरीवाल सरकार द्वारा दिल्ली में इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी को सफलतापूर्वक लागू हुए दो वर्ष पूरे होने के अवसर पर जश्न मनाने के लिए चौथे दिल्ली इलेक्ट्रिक वाहन फोरम की मेजबानी करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

    आगामी 10 अगस्त को एनडीएमसी कन्वेंशन सेंटर में चौथे दिल्ली इलेक्ट्रिक वाहन फोरम का आयोजन किया जाएगा।

    2020 में स्थापित दिल्ली ईवी फोरम रचनात्मक संवाद को बढ़ावा देने और दिल्ली की ईवी पॉलिसी के प्रभावी और सहयोगी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए सरकारी एजेंसियों, उद्योग प्रतिनिधियों, स्टार्ट-अप, शिक्षाविदों, थिंक टैंक, आरडब्ल्यूए समेत दिल्ली भर में ईवी इको सिस्टम में 200 से अधिक हितधारकों को एक साथ लाने की एक अनूठी पहल की शुरुआत करने जा रही है।

    दिल्ली डायलॉग एंड डेवलपमेंट कमीशन (डीडीसी) 10 अगस्त 2022 को आरएमआई इंडिया के सहयोग से एनडीएमसी कन्वेंशन सेंटर में इस फोरम की मेजबानी करेगा। फोरम में परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत, डीडीसी दिल्ली के उपाध्यक्ष जस्मिन शाह और परिवहन विभाग के प्रमुख सचिव आशीष कुंद्रा समेत कई प्रतिष्ठित लोग उपस्थित रहेंगे।

    ईवी पॉलिसी के लागू होने के दो वर्षों के अनुभवों पर एक रिपोर्ट आयोजित होने वाले फोरम में प्रस्तुति के साथ उस पर चर्चा की जाएगी।

    दिल्ली सरकार, दिल्ली को भारत की ईवी राजधानी के रूप में पहचान दिलाने में योगदान देने वालों को 15 श्रेणियों में सम्मानित करने के लिए ‘स्विच दिल्ली ईवी अवार्ड्स’ भी प्रदान करेगी।

    पुरस्कारों के लिए आवेदन और नामांकन से संबंधित जानकारी वेबसाइट ev.delhi.gov.in पर उपलब्ध हैं।

    परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में दिल्ली का भारत में अग्रणी राज्य के रूप में उभरना, विशेषज्ञों और उद्योग हितधारकों के साथ परामर्श व चर्चा करना भी अहम वजह है।

    दिल्ली सरकार ई-मोबिलिटी इकोसिस्टम को लगातार ईवी पॉलिसी में शामिल कर रही है और हम हितधारकों को दिल्ली ईवी पॉलिसी को अभी तक अनुकरणीय सफलता दिलाने की दिशा में उनके दिए गए योगदान के लिए आगामी फोरम में सम्मानित करेंगे।

    उल्लेखनीय है कि डीडीसी दिल्ली द्वारा दिसंबर 2020 में दिल्ली ईवी फोरम की स्थापना के बाद से ही द्वि-वार्षिक बैठकों का आयोजन करता है और इसके माध्यम से दिल्ली ईवी पॉलिसी को लागू करने के लिए हितधारकों के व्यापक समूह के साथ लगातार जुड़ाव रखने के लिए एक मंच प्रदान करना चाहता है।

    जनहित में जारी
    संजय बाटला

  • राजनीतिक दलों द्वारा प्रलोभन मे दी जा रही फ्री स्कीमो पर माननीय उच्चतम न्यायालय सख्त, जल्द आ सकता है फैसला

    राजनीतिक दलों द्वारा प्रलोभन मे दी जा रही फ्री स्कीमो पर माननीय उच्चतम न्यायालय सख्त, जल्द आ सकता है फैसला

    सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव के दौरान मुफ्त की योजनाओं पर रोक लगाने की बात कही है। इसके लिए केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि जल्द से जल्द इस दिशा में कोई रास्ता निकालें। इस मामले में अगली सुनवाई 3 अगस्त 2022 को होगी।

    वोटर्स को लुभाने के लिए मुफ्त की योजनाओं की घोषणाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने 3 मार्च 2022 को आपत्ति जताई थी, जिस पर याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका वापस ले ली थी, लेकिन मंगलवार को कोर्ट ने इसी तरह के एक दूसरे पेंडिंग मामले में सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया।

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    सुनवाई के दौरान क्या कुछ हुआ ? 

    • सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि वित्त आयोग से बात करें। मुफ्त में खर्च किए गए पैसे को ध्यान में रखकर जांच करें।
    • चुनाव आयोग ने सुझाव दिया कि सरकार इस मुद्दे से निपटने के लिए एक कानून ला सकती है।
    • सरकार का यह तर्क था कि यह मामला चुनाव आयोग के क्षेत्र में आता है।
    • सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार इस पर स्टैंड लेने से क्यों झिझक रही है।

    माननीय उच्चतम न्यायालय ने 3 अगस्त तक का समय दिया है केन्द्र सरकार को अपना जवाब दाखिल करने के लिए।

    श्रीलंका देश में जो हुआ वह भारत देश में ना हो, इसके लिए भारत देश की अर्थव्यवस्था बनाए रखने के लिए जनता को भी अपना दायित्व निभाना होगा और फ्री की घोषणा करने वाले राजनीतिक दलों को राजनिति के खेल से बाहर का रास्ता दिखाना होगा।

    जनहित में जारी :- संजय बाटला

  • महामंडलेश्वर महंत नवल किशोर दास को किया गया नियुक्त अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के प्रवक्ता

    महामंडलेश्वर महंत नवल किशोर दास को किया गया नियुक्त अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के प्रवक्ता

    महामंडलेश्वर महंत नवल किशोर दास अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के प्रवक्ता नियुक्त

    महामंडलेश्वर महंत नवल किशोर दास (रामायणी) जी को अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद की तरफ से प्रवक्ता नियुक्त किए जाने पर सभी ने उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी।

    सभी अखाड़ों की सहमति और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और महामंत्री व 13 अखाड़ों के देश के सभी संतो की तरफ से महाराज जी को अखिल भारतीय संतो का पक्ष रखने के लिए अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद का प्रवक्ता बनाया गया है ।

    महामंडलेश्वर महंत नवल किशोर दास जी ने अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत राजेंद्र दास महाराज और महामंत्री महंत रविंद्र पूरी जी महाराज , समस्त अखाड़ा परिषद व संत समाज का आभार व्यक्त किया ।

    महंत नवल किशोर दास हमेशा अपनी जिम्मेदारियों का निर्वाह पूरे मन से करते रहे इसलिए अखाड़ा परिषद के कार्यों एवं उसकी नीतियों का प्रचार प्रसार तथा सोशल मीडिया समाचार पत्र एवं टीवी पर प्रवक्ता के तौर पर उन्हें अखाड़ों की बात रखने तथा समाज की कुरीतियों एवं विसंगतियों पर धार्मिक पक्ष रखने की जिम्मेदारी का निर्वाह करेंगे।

    महंत नवल किशोर दास महान विद्वान एवं धर्म के ज्ञाता है जो अपने विचारों से समाज को नई दिशा देने का काम करेंगे ।

    सौजन्य से :- स्वतंत्र सिंह भुल्लर

    प्रस्तुतकर्ता :- संजय बाटला

  • परिवहन विभाग दिल्ली को प्रदुषण मुक्त बनाना चाहता है या प्रदुषण ग्रस्त

    परिवहन विभाग दिल्ली को प्रदुषण मुक्त बनाना चाहता है या प्रदुषण ग्रस्त

    दिल्ली परिवहन विभाग द्वारा बुराड़ी से 350 हरे भरे पेड़ सिर्फ इसलिए कटवा दिए गए थे क्योंकि वहा दिल्ली परिवहन विभाग को इलेक्ट्रिक वाहन डिपो शुरु करना है। वन विभाग और माननीय उपराज्यपाल द्वारा आज्ञा भी प्राप्त हो गई वह भी ऐसे समय में जब दिल्ली प्रदुषण का चैंबर बनी हुई हैं। इस समय शुद्ध वायु के लिए पेड़ों की सख्त आवश्यकता है और उसके बावजूद हरे भरे पेड़ों को काटा जाना और वह भी स्वयं सरकारी विभाग जो दिल्ली को प्रदुषण मुक्त करने के लिए सबसे अधिक मेहनत कर रहा है उसके द्वारा, थोड़ा सोचने का विषय बनता है।

    ऐसा नहीं की इन 350 हरे भरे लहलहाते पेड़ों को काटने के बदले में परिवहन विभाग ने नए पेड़ ना लगाए हो। विश्वस्त सूत्रों की माने तो दिल्ली परिवहन विभाग ने इसके बदले 1000 नए वृक्ष लगवाए थे, पर कहा और आज उनमें से कितने पेड़ जिन्दे है इसका जवाब देने वाला कोई नहीं।

    विश्वस्त सूत्रों की माने तो दिल्ली परिवहन द्वारा फिर से अन्य कई हजार हरे भरे लहलहाते पेड़ों को काटने की इजाजत के लिए फाइल चला रखी है और उन्हें काटने की इजाजत भी प्राप्त कर ही लेगा क्योंकी परिवहन विभाग कोई कार्य करने का फैसला कर ले या दिल मना ले तो उसे पूरा करके ही मानता है उसमे चाहें माननीय उच्चतम न्यायालय, माननीय उच्च न्यायालय, माननीय कैट, भारत सरकार के मंत्रालय या दिल्ली सरकार के मंत्रालयों का विरोधी आदेश ही पारित क्यो नही हो।

    दिल्ली परिवहन विभाग स्वयं यह सिद्ध करने में नही चुकता की दिल्ली में प्रदुषण का मुख्य कारण दिल्ली में चलने वाले वाहन हैं जबकि दिल्ली में चलने वाले सभी वाहन जिस पेट्रोलियम पदार्थ से चलते हैं वह जिस कैटेगरी में आता है उसके अनुसार वाहनों से प्रदुषण उत्पन्न होना ही नहीं चाहिए पर फिर भी वाहन है प्रदुषण उत्पन्न होने का मुख्य ज़िम्मेदार।

    दिल्ली में जब सीएनजी और उच्च मानक के पेट्रोलियम पदार्थ उपल्ब्ध नही थे तब भी दिल्ली का प्रदुषण इतना कभी नही पाया गया था उल्टा दिल्ली को ग्रीन सिटी का अवार्ड प्राप्त हुआ था।

    आज दिल्ली का पूरा व्यवसायिक वाहन सीएनजी वर्जन में है और अन्य सभी उच्च श्रेणी के पेट्रोलियम से चालित है फिर उनसे प्रदुषण का कारण, शायद किसी के पास नही है जवाब।

    ऐसे में परिवहन विभाग द्वारा ही हरे भरे लहलहाते पेड़ों को कटवाना कितना दिल्ली को प्रदुषण मुक्त करने का प्रयास है आप स्वयं सोचे समझे।

    जनहित में जारी :- संजय बाटला

  • परिवहन विभाग द्वारा ड्राइविंग ट्रैनिंग के नाम पर घोषणा 4800 रुपए सब्सिडी कितनी तथ्यपूर्ण,

    परिवहन विभाग द्वारा ड्राइविंग ट्रैनिंग के नाम पर घोषणा 4800 रुपए सब्सिडी कितनी तथ्यपूर्ण,

    दिल्ली परिवहन आयुक्त द्वारा आज ट्वीट (कापी इसी ब्लॉग के साथ) कर कहा की दिल्ली में जो महिलाएं ई वाहन व्यवसायिक चलाने की उत्सुक हैं वह परिवहन विभाग की साइट पर सब्सिडी के लिए अप्लाई करें, यह एक अच्छी खबर है।

     

     

    परिवहन विभाग द्वारा बताया गया की विभाग ड्राइविंग ट्रैनिंग के लिए 50 प्रतिशत की सब्सिडी जो 4800 रुपए बनती हैं दी जाएगी।

    उल्लेखनीय बात यह है कि दिल्ली में बेहतरीन ड्राइविंग ट्रैनिंग देने के लिए बहुत से ट्रस्ट, एनजीओ एवम् ट्रैनिंग देने में सक्षम स्कूल है जो दिल्ली परिवहन विभाग द्वारा दिए तीन ड्राइविंग ट्रैनिंग स्कूल (बुराड़ी, सराय काले खां और लोनी) जो परिवहन विभाग की जमीन पर चल रहे हैं से बेहतरीन नई तकनीक के साथ सिर्फ 4000 रुपए में बिना महिलाओ है एक भी रुपया लिए महिलाओ को ड्राइविंग स्किल में माहिर करने को तैयार हैं फिर सरकारी ज़मीन का प्रयोग करने वाले स्कूल को इतनी अधिक फीस लेने की इजाजत क्यों?

    दिल्ली परिवहन विभाग को महिलाओ को ड्राइविंग स्किल डेवलपमेंट ट्रैनिंग देने की लिए अन्य सभी रजिस्टर्ड ट्रस्ट, एनजीओ और ड्राइविंग ट्रैनिंग देने की स्किल रखने वालों से भी पहली इस ट्रैनिंग को देने की दर प्राप्त करनी चाहिए।

    इससे दिल्ली परिवहन विभाग का पैसा भी कम खर्च होगा और महिलाओं को सब्सिडी के अलावा एक रूपया भी नही देना पड़ेगा।

    जनहित में जारी :- संजय बाटला

  • परिवहन विभाग द्वारा सरकारी खजाने में इजाफा करवाने और आप पार्टी के वोट बैंक बनवाने का परिणाम है क्या “दिल्ली परिवहन निगम का निजीकरण”

    परिवहन विभाग द्वारा सरकारी खजाने में इजाफा करवाने और आप पार्टी के वोट बैंक बनवाने का परिणाम है क्या “दिल्ली परिवहन निगम का निजीकरण”

    परिवहन विभाग द्वारा दिल्ली सरकार के राजस्व में इज़ाफ़ा और आप पार्टी के वोट बैंक बनवाने की नीतियों का परिणाम / हिस्सा है क्या ???””दिल्ली परिवहन निगम का निजीकरण”” ?

    पिछले कुछ सालों से दिल्ली परिवहन विभाग द्वारा जारी आदेश/ दिशा निर्देश/ नीतियां स्वयं यह सिद्ध करती रही है की इनके पीछे मुख्य कारण सिर्फ आप पार्टी दिल्ली सरकार के लिए वोट बैंक और राजस्व में इज़ाफ़ा करना है, इस बारे में किसी को सिद्ध करने के प्रमाण देने की जरूरत नहीं।

    दिल्ली में ऑटो की फिटनेस फीस और डिम्ट्स माफ करना और अन्य सभी वाहन मालिकों द्वारा उठाई गई मांग बढ़ी हुई फिटनेस जुर्माने की बढोतरी को कम करने को मना कर देना यह कह कर की यह भारत सरकार के आदेश है हम कुछ नहीं कर सकते फिर बिना भारत सरकार द्वारा माफ के आदेश प्राप्त किए ऑटो के लिए माफ कर देना!?
    कोरोना वायरस के बुरे दौर में सिर्फ उन्ही वाहन मालिकों और ड्राइवरों को मदद देने की घोषणा करना और अन्य के लिए मदद के लिए मना कर देना!!?
    ई रिक्शे की रजिस्ट्रेशन करवाने पर बिना पक्के लाईसेंस होते हुए भी सब्सिडी देना!!?
    ऑटो का किराया कई बार बढ़ाने के आदेश पारित कर देना!!?
    दिल्ली सरकार और परिवहन विभाग द्वारा स्वयं खड़े करवाए गए वाहनों से रोड टैक्स वसूलना
    दिल्ली में चलने वाली क्लस्टर कंपनियों को एग्रीमेंट की शर्त बता कर प्रति वर्ष किलो मीटर की देय राशि बढ़ा कर देना और अन्य सभी स्टेज कैरेज परमिट पर चलने वाले वाहनों को अनदेखा करना
    धाटे पर होने के बाद भी महिला फ्री, मजदूर फ्री जैसी स्कीमों को लागू करना,

    इन जैसे अनगिनत दिशा निर्देश/ आदेश और नीतियां हैं जो स्वयं इस बात का प्रमाण है कि परिवहन विभाग सिर्फ और सिर्फ दिल्ली की आप पार्टी के वोट बैंक और राजस्व में इज़ाफ़ा करने में संलिप्त हैं।

    आम आदमी की परेशानियों को जनहित के कार्यों में व्यस्त बताकर टालते रहना या ठंडे बस्ते में डाल देना, बैंको, एनबीएफसी कंपनियों, व्यापारियों, एवम् अन्य रोजगार में लिप्त व्यक्तियो पर अलग ढंग के आदेश/ दिशा निर्देश जारी कर और दबाव बना कर दिल्ली सरकार के मंत्री/ मुख्यमंत्री के द्वार पर दस्तक लगाने के रास्ते बनाना आज परिवहन विभाग का मुख्य उद्देश्य और कार्य है।

    दिल्ली परिवहन विभाग दिल्ली परिवहन निगम की जमीन पर परिवहन विभाग के कार्यालय बनाने के लिए, ऑटोमेटिक ड्राईविंग टैस्ट ट्रैक बनाने के लिए और क्लस्टर कंपनियों की बसों को खड़ा करवाने के लिए कब्जा करता आ रहा हैं ।

    अब प्रश्न यह उठता है कि

    1. दिल्ली परिवहन निगम को दिल्ली सरकार और परिवहन विभाग द्वारा ज़रुरत अनुसार सभी रूट पर चलने के लिए बस ही उपल्ब्ध नही करवाना,
    2. परिवहन निगम के अनुरोध के बाद भी दिल्ली परिवहन विभाग और दिल्ली सरकार द्वारा किराया वृद्धि की घोषणा नही करना,
    3. अंतराजकीय रूट पर चलाने के लिए परिवहन विभाग और दिल्ली सरकार द्वारा बस ही उपल्ब्ध नही करवाना,
    4. डीटीसी की बसों में महिला और मजदूरो को दिल्ली परिवहन विभाग और दिल्ली सरकार द्वारा फ्री चलवाना,
    5. परिवहन विभाग और दिल्ली सरकार द्वारा कलस्टर कम्पनियों के संचालन करने वाली कंपनी से डीटीसी के किसी भी रूट पर चलने वाले परिचालन के समय पर उसी समय पर साथ में कलस्टर बसों को चलवाना,

    ऐसे हालात बनाने और बनवाने के बाद जनता के समक्ष प्रस्तुत अपनी सफाई में यह प्रकट करना की दिल्ली परिवहन निगम घाटे में चल रही है इसलिए निजीकरण करने का विचार किया जा रहा है, कितना न्यायपूर्ण है दिल्ली की जनता स्वयं फैसला ले।

    किसी भी राज्य सरकार और परिवहन विभाग का पहला दायित्व है अपने राज्य की जनता को सुरक्षित, सुगम और प्रभावी सार्वजनिक सेवा उपल्ब्ध करवाना और दिल्ली सरकार और परिवहन विभाग दिल्ली क्या कर रहे है आप स्वयं करे फैसला।

    कितना जनहित में लगे हैं
    दिल्ली सरकार और परिवहन विभाग दिल्ली फैसला आपका ?

    जनहित में जारी,
    संजय बाटला

  • परिवहन विभाग ने नहीं लिया जनता के हित मे फैसला, आखिर क्यों ?

    परिवहन विभाग ने नहीं लिया जनता के हित मे फैसला, आखिर क्यों ?

    दिल्ली परिवहन विभाग द्वारा एनबीएफसी कंपनियों और बैंकों को एचपी एडिशन के लिए अपने दिए निर्देश पर खरा नहीं उतरने पर कानूनी प्रक्रिया की धज्जियां उड़ाते हुए आज भी जनता की परेशानी पर कोई हल नहीं निकाला,

    कल हमने बताया था कैसे दिल्ली में प्रदुषण रोकने के लिए माननीय उच्चतम न्यायालय ने 2010 में दिल्ली में डीजल से चलने वाले व्यवसायिक वाहनों पर पाबन्दी के आदेश पारित किए थे पर जनहित में लोगो को इस आदेश के कारण व्यवसायिक वाहनों की कमी होने की वजह से परेशानी नहीं महसूस हो को नजर में रखते हुए डीजल वाहन मालिको पर जुर्माना अदा कर चलाने की इजाजत दी थी, यह था जनहित,

    परिवहन विभाग अपनें आदेशों को जनहित का नाम देकर जनता को ही परेशानी के समुंद्र में धकेल रहा है। यह जनहित है या हठधर्म अब आप ही फैसला कर के बताए।

    दिल्ली में पहले ही दिल्ली सरकार और परिवहन विभाग की नीतियों के कारण अधिकतम व्यवसायिक वाहन सड़कों से हट चुके हैं और परिवहन विभाग की हठधर्मी के कारण जो अपने कारोबार को करना चाहते है वह भी परेशान हो रहे हैं।

    परिवहन विभाग की हठधर्मी के साथ परिवहन विभाग की शाखाओं में कार्यरत अधिकारी भी जनता को परेशान करने में जुटे हैं। जिन बैंको और एनबीएफसी कंपनियों ने परिवहन विभाग की बात मान कर आनलाइन कार्य शुरू कर दिया है उनके भी एचपी एडिशन को बहाने बना कर रोक लगा कर बैठे हैं।

    परिवहन विभाग के आला अधिकारियों को आदेश पारित करने के साथ इतना समय उसे लागू करने के लिए देना चाहिए जिससे जनता परेशान नहीं हो ।

    परिवहन विभाग के दबाव में 80 से ज्यादा बैंको / एनबीएफसी द्वारा अपना आनलाइन कार्य शुरू कर दिया गया है फिर अन्य पर दबाव बनाने के लिए ऐसा तरीका अपनाएं जिससे जनता प्रभावित नही हो और परिवहन विभाग का दबाव भी बने।

    परिवहन विभाग जनता की मदद के लिए हैं ना कि जनता को परेशान करने के लिए।

    जनहित में परिवहन विभाग को वाहनों की एचपी एडिशन को पुराने और नए दोनो तरीको से शुरू रखना चाहिए ।

    जनहित में जारी

    संजय बाटला

  • दिल्ली परिवहन विभाग अपने वर्चस्व और हठधर्मी के लिए क्या नही कर सकता, जाने !!!

    दिल्ली परिवहन विभाग अपने वर्चस्व और हठधर्मी के लिए क्या नही कर सकता, जाने !!!

    दिल्ली परिवहन विभाग अपने वर्चस्व को कायम करने के लिए जनहित का नाम लेकर दिल्ली के वाहन मालिकों को परेशान करने की हठ पर अड़ा हैं, क्या जनता को परेशानी में देखकर ही खुशी मिलती हैं या हैं कोई अंदरूनी कारण ?

    मोटर वाहन नियम अधिनियम के अलावा भारत देश के सविधान के तहत मौलिक अधिकार के अंदर किसी की संपत्ति/वाहन/ अधिकारिक सामानों पर कर्जा लेना या कर्जा उतारना या उस पर किसी के लिए जमानत देना मालिक की इच्छा पर निर्भर करता है, क्या परिवहन विभाग को इसकी जानकारी नहीं।

    दिल्ली परिवहन विभाग अपने स्वयं के कानून / नियम
    वह भी बिना कानूनी प्रक्रिया पूरी करे,
    बिना नियमों कानून में संशोधन करे,
    बिना गैजेट नोटीफिकेशन में जारी किए, जनहित का नाम लेकर जनता को परेशानी में डालने के आदेश जारी कर रहा है। आखिर क्यों ? क्या दिल्ली और भारत सरकार ने दिल्ली परिवहन विभाग को निधि एवम् कानून मंत्रालय का कार्यभार भी सौप दिया है ?

    दूसरे के निजी मामलो और व्यवसाय में दखलंदाजी करना और जनता को परेशानी में डालना क्या परिवहन विभाग के कार्य शैली में निमित है?

    बैंको द्वारा अपनी निजी वाहनों पर लोन लेना आज की नई प्रक्रिया नही है ऐसे में अपने निजी फायदे के लिए वाहन मालिक और फाइनेस करने वालों के बीच में अपना वर्चस्व स्थापित करना क्या परिवहन विभाग का कार्य है ?

    जनता को मदद करने के नाम से जनता को ही परेशान करना कहा का ओचित्य है वह भी सिर्फ अपने वर्चस्व कायम करने के लिए, किस कानून में ऐसे किए जाने वाले कार्य को जनहित में कहा गया है।

    परिवहन विभाग एनबीएफसी कंपनियों और बैंकों में अपना वर्चस्व स्थापित करना चाहता है तो जरूर करे पर जनता को जरिया बनाकर यह कहा का इंसाफ है?

    कुछ दिन पहले परिवहन विभाग द्वारा जनहित में आदेश पारित किया गया था । वाहनों में लगे स्पीड गवर्नर डिवाइस की एएमसी के लिए कोई भी अधिकृत डीलर 500 रुपए से ज्यादा नही लेगा पर आज तक उस पर परिवहन विभाग अमल नही करवा सका आखिर क्यों ?

    क्या परिवहन विभाग देगा जनता को जवाब ???

    दिल्ली परिवहन विभाग द्वारा इस आदेश के पारित होने के बाद परेशान जनता हुई और आज भी हो रही है और जब जनता को समझ आया परिवहन विभाग कुछ नहीं करेगा तो चुप चाप डीलर द्वारा मांगे जाने वाले पैसे देने शूरू कर दिए । क्या यह ही होता है जनहित का आदेश?

    अब परिवहन विभाग बैंको और एनबीएफसी कंपनियों में अपना वर्चस्व स्थापित करने के लिए जनहित का नाम लेकर आदेश पारित कर जनता को खून के आसू निकलवाने में लगा है, आखिर क्यों?

    बैंको और एनबीएफसी कंपनियों के द्वारा आनलाइन कार्य परिवहन विभाग के दिशा निर्देश से शूरू ना करने वालों को अपनी ताकत दिखाने के चक्कर मे जो लोग वाहन खरीद चुके उनके वाहन पंजीकृत करने से बंद करवा दिए, आखिर इससे कोन होगा परेशान?

    परिवहन विभाग बताएगा:- आखिर कहा है गैजेट नोटीफिकेशन जिसमे यह कहा गया है दिल्ली में जो एनबीएफसी कंपनी या बैंक परिवहन विभाग के आदेश को नही मानेगा उसकी एचपी एडीशन नही की जाएगी, क्या परिवहन विभाग बताएगा कब मोटर वाहन नियम अधिनियम में इसे बदलने के लिए जनता के समक्ष जनता की राय के लिए प्रस्तुत किया गया था,

    क्या दिल्ली परिवहन विभाग को किसी की राय की आवश्कता ही नहीं जो दिल में आया वह आदेश जारी कर लागू कर दिया। क्या यह जनहित है ?

    दिल्ली परिवहन विभाग को जनता को परेशान करने का कारण नही बनना चाहिए इसलिए जो व्यक्ति अपने वाहनों पर एचपी एडिशन करवाना चाहता है उसके लिए बिना विलम्ब एचपी एडिशन करने के आदेश कर देने चाहिए ।

    दिल्ली परिवहन विभाग को अपने वर्चस्व कायम करने की प्रक्रिया बैंकों और एनबीएफसी कंपनियों पर चलानी चाहिए ना कि दिल्ली की जनता पर!!!

    दिल्ली परिवहन विभाग क्या जनता को बताएगा दिल्ली सरकार की अपनी फाइनेस कंपनियों ने अभी तक आनलाइन कार्य परिवहन विभाग के साथ शुरू क्यों नहीं किया ??? डीएफसी, डीएफआईडीसी जैसे जो वाहनों पर लोन देते हैं और एससी एसटी एवम् अन्य बहुत जनता के वाहन वहा से लोन पर है।

    इसके लिए परिवहन विभाग को जैसे दिल्ली में माननीय उच्चतम न्यायालय ने डीजल वाहन चलने से बंद के आदेश पारित कर दिए थे पर फिर भी चलाने वालों को पहले कुछ दिन 500 रुपए जुर्माना फिर कुछ दिन 1000 रुपए जुर्माना और फिर 2000 जुर्माना भरने के बाद चलने की इजाजत देने के आदेश साथ में पारित किए थे जनहित में वैसे ही परिवहन विभाग को जो बैंक और एनबीएफसी कंपनी परिवहन विभाग का दबाव / वर्चस्व नही मानते उसके द्वारा करे जाने वाले हर लोन एचपी एडिशन पर उससे जुर्माना जमा करवाने के आदेश पारित करने चाहिए और अन्त में भी नहीं माने तो रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को पत्र लिखकर उसको दिल्ली में वाहनों पर लोन देने के लिए ब्लैक लिस्ट करवाने का प्रयास करना चाहिए।

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    इस प्रक्रिया से जनता भी परेशान नही होगी और परिवहन विभाग के द्वारा राजस्व में इज़ाफ़ा भी करवाया जाएगा और अपना दबाव सभी बैंको और एनबीएफसी कंपनियों पर स्थापित करने में कामयाब हो जाएंगे और सभी आनलाइन कार्य जैसा परिवहन विभाग चाहता है शुरू करने लगेगे।

    जनहित में जारी
    संजय बाटला

  • *परिवहन निगम के अधिकारी और उनकी टीम को भ्रष्टाचार में लिप्त की जांच के लिए उठाया सीबीआई ने,*

    *परिवहन निगम के अधिकारी और उनकी टीम को भ्रष्टाचार में लिप्त की जांच के लिए उठाया सीबीआई ने,*

    परिवहन निगम के अधिकारी और उनकी टीम को उठाया सीबीआई ने,

    पूर्व परिवहन मंत्री एवम् स्वास्थ्य मंत्री को भ्रष्टाचार में लिप्त कि जांच में उठाने के बाद अब सीबीआई की जांच की दृष्टि परिवहन निगम और विभाग के आला अधिकारियों की और,

    परिवहन निगम में राजनीतिक दल के चहेते और कदवार अधिकारी को उनके सेवा मुक्त होने से दो दिन पहले उनकी टीम के साथ सीबीआई ने भ्रष्टाचार में लिप्त की जांच के लिए शाम को उनके कार्यालयों से उठा लिया।

    आने वाले समय मे अब परिवहन निगम और विभाग के अन्य अधिकारियों से भी पूछताछ जल्द होने की उम्मीद बनी है जो राजनीतिक दल के चहेते और कदवार अधिकारी कहलाते आए हैं।

    डीटीसी के सभी कर्मचारी सीबीआई के इस कार्य के लिए बहुत खुश हैं और उम्मीद करने लगे हैं की सीबीआई की जांच में अन्य भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारी भी जल्द सीबीआई की नजर में आ जाएंगे और निगम भ्रष्टाचार से मुक्त।

    दिल्ली परिवहन निगम के चैयरमैन और परिवहन मंत्री को नैतिकता के आधार पर तत्काल प्रभाव से अपने पदो से इस्तीफा दे देना चाहिए ऐसा दिल्ली की जनता और परिवहन विभाग से जुड़े सभी की सोच और मांग है।

    जनहित में जारी
    संजय बाटला