Author: News Editor

  • वोल्वो C40 रिचार्ज इलेक्ट्रिक कूपे एसयूवी भारत में होगी लॉन्च

    वोल्वो C40 रिचार्ज इलेक्ट्रिक कूपे एसयूवी भारत में होगी लॉन्च

    Volvo Auto India (वोल्वो ऑटो इंडिया) अपनी अगली ऑल-इलेक्ट्रिक पेशकश C40 Recharge (C40 रिचार्ज) कूपे एसयूवी 4 सितंबर, 2023 को लॉन्च करेगी। कंपनी ने आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि की है। इस लग्जरी एसयूवी को इस साल जून के महीने में भारत में प्रदर्शित किया गया था और बुकिंग अब से कुछ दिनों में ऑनलाइन शुरू होने वाली है। लॉन्च के तुरंत बाद सितंबर में ही डिलीवरी शुरू होने की उम्मीद है।

    लुक और डिजाइन
    वोल्वो C40 रिचार्ज से पहले कंपनी XC40 रिचार्ज को देश में पहले से ही बेच रही है। वोल्वो C40 रिचार्ज में एक कूपे रूफलाइन मिलता है जिससे यह XC40 रिचार्ज से खुद को अलग करती है। इसके अलावा इसमें रेक्ड विंडस्क्रीन और नए सिरे से काम किए गए एलईडी टेललाइट्स मिलते हैं जो इसके लुक को अलग बनाते हैं। इसके अलावा, टेलगेट को भी रीडिजाइन करना पड़ा है, जबकि टेललाइट्स नई रिवर्स लाइट्स के साथ रैपराउंड इफेक्ट के साथ पतली और चौड़ी हैं।

    फ्रंट स्टाइलिंग XC40 रिचार्ज के जैसी है। नया C40 अपनी अलग पहचान बनाने में कामयाब होता है, खासकर जब इसे प्रोफाइल में देखा जाता है। कूपे एसयूवी नई पिक्सेल एलईडी हेडलाइट्स पाने वाली वोल्वो की पहली पेशकश होगी। हालांकि यह थोर के हथौड़ा एलईडी डीआरएल डिजाइन को बरकरार रखती हैं। यह मॉडल डुअल-टोन फिनिश के साथ 19 इंच के अलॉय व्हील के साथ आता है।

    ड्राइविंग रेंज
    C40 रिचार्ज ब्रांड के CMA (कॉम्पैक्ट मॉड्यूलर आर्किटेक्चर) प्लेटफॉर्म पर आधारित है और नई पीढ़ी के बैटरी पैक से पावर लेता है। 78 kWh यूनिट एक बार चार्ज करने पर 530 किमी (WLTP चक्र) की रेंज प्रदान करती है, जो कि XC40 रिचार्ज पर 418 किमी की रेंज से काफी ज्यादा है, जो अभी भी पुरानी बैटरी का इस्तेमाल करती है।

    पावर और स्पीड
    पावरट्रेन की बात करें तो, वोल्वो सी40 रिचार्ज डुअल मोटरों के साथ आएगी। हर एक्सल पर एक मिलेगा, जो कंबाइंड 402 बीएचपी का पावर और 660 एनएम का पीक टॉर्क विकसित करता है। यह इलेक्ट्रिक एसयूवी सिर्फ 4.7 सेकंड में 0-100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ सकती है। इस कूपे एसयूवी को 150 किलोवाट डीसी फास्ट चार्जर के जरिए सिर्फ 27 मिनट में 0 से 100 प्रतिशत तक चार्ज किया जा सकता है।

    फीचर्स
    इंटीरियर की बात करें तो, नई वोल्वो C40 रिचार्ज 9-इंच टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम, एक डिजिटल इंस्ट्रूमेंट कंसोल, स्लिम, वर्टिकली-स्टैक्ड एसी वेंट, लकड़ी के इन्सर्ट के साथ एक ब्लैक फिनिश केबिन और प्रीमियम लेदर अपहोल्स्ट्री के साथ XC40 रिचार्ज की नकल करता है। वोल्वो अपनी कारों में एंड्रॉइड-आधारित इंफोटेनमेंट सिस्टम का विकल्प चुनती है और इसे C40 रिचार्ज में भी दिया गया है। यूनिट के लिए आपको किसी भी एंड्रॉइड डिवाइस की तरह अपनी गूगल आईडी से साइन इन करना होगा, जिससे आप गूगल मैप्स और गूगल असिस्टेंट जैसे फीचर्स का सीधे इस्तेमाल कर सकेंगे। साथ ही कार के सिस्टम पर प्लेस्टोर से एप डाउनलोड भी कर सकेंगे। इसमें एक ई-सिम भी लगा हुआ है।

    ADAS टेक्नोलॉजी
    C40 रिचार्ज की अन्य फीचर्स में ऑटोनॉमस ड्राइविंग क्षमता के साथ सेंसर-आधारित ADAS टेक्नोलॉजी, एक पैनोरमिक सनरूफ, एक 360-डिग्री कैमरा, ड्राइवर के लिए मेमोरी फंक्शन के साथ इलेक्ट्रिक एडजस्टेबल फ्रंट सीटें, डुअल-जोन क्लाइमेट कंट्रोल, एक प्रीमियम हरमन कार्डन साउंड सिस्टम और बहुत कुछ शामिल हैं। कूपे बॉडी स्टाइल में सामान रखने की जगह 413 लीटर है, जबकि XC40 रिचार्ज में 452 लीटर है। इसके अलावा आपको फ्रंट में 31-लीटर फ्रंक स्टोरेज स्पेस मिलता है।

    कीमत और मुकाबला
    वोल्वो C40 रिचार्ज लॉन्चिंग के बाद भारतीय बाजार में Kia EV6, Hyundai Ioniq 5, Mercedes-Benz EQB जैसी कारों से मुकाबला करेगी। इलेक्ट्रिक कूपे एसयूवी की कीमतें 60 लाख रुपये से शुरू होने की उम्मीद है। इसकी अनूठी बॉडी स्टाइल इसे सेगमेंट में अपने प्रतिद्वंद्वियों पर बढ़त दिलाती है।

  • रॉयल एनफील्ड इलेक्ट्रिक बाइक कब होगी लॉन्च!

    रॉयल एनफील्ड इलेक्ट्रिक बाइक कब होगी लॉन्च!

    परफॉर्मेंस बाइक बनाने के लिए मशहूर चेन्नई स्थित Royal Enfield (रॉयल एनफील्ड) की इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन सेगमेंट में एंट्री करने के लिए काफी महत्वाकांक्षी योजना है। कंपनी इस समय एक नई इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल विकसित करने के शुरुआती चरण में है। आयशर मोटर्स (रॉयल एनफील्ड की मूल कंपनी) के प्रबंध निदेशक और सीईओ सिद्धार्थ लाल के मुताबिक कंपनी सक्रिय रूप से प्रोटोटाइप की टेस्टिंग कर रही है और इसके फाइनल वर्जन की अगले दो वर्षों के भीतर भारतीय सड़कों पर आने की उम्मीद है। ई-बाइक की विकास प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए रॉयल एनफील्ड ने अपने ईवी कारोबार के व्यावसायिक पहलुओं को संभालने के लिए एक डेडिकेटेड टीम बनाई है।

    इलेक्ट्रिक दोपहिया बाजार में अपने लक्ष्यों को हासिल करने के लिए रॉयल एनफील्ड ने भविष्य के उत्पादों को विकसित करने और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बिक्री बुनियादी ढांचे के निर्माण में लगभग 1,000 करोड़ रुपये का निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई है। यह निवेश 2023-24 की समयावधि के दौरान होने की योजना है। कंपनी का लक्ष्य 1.5 लाख इलेक्ट्रिक यूनिट्स की उत्पादन क्षमता तक पहुंचना है और वह इस योजना को पूरी रफ्तार और दक्षता के साथ लागू करने की तैयारी में हैं।

    मिड-साइज मोटरसाइकिल सेगमेंट में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बावजूद, जहां रॉयल एनफील्ड के पास इस समय 90 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी है, कंपनी इससे चिंतित नहीं है। ट्रायम्फ स्पीड 400 और हार्ले-डेविडसन X440 जैसे प्रतिस्पर्धी क्रमशः बजाज ऑटो और हीरो मोटोकॉर्प के साथ मिलकर बनाए गए हैं और बाजार में एंट्री कर चुके हैं। सिद्धार्थ लाल ने आत्मविश्वास से कहा कि रॉयल एनफील्ड अपने प्रतिद्वंद्वियों से कई कदम आगे है और मध्यम से लंबी अवधि में लगभग 80 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी बनाए रखने के लिए तैयार है।

    उन्होंने यह भी भविष्यवाणी की है कि नए प्रतिस्पर्धियों के आगमन के साथ मिड-साइज मोटरसाइकिल बाजार में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी का अनुभव होगा। उम्मीद है कि आने वाले दशक में इसका विस्तार 10 लाख यूनिट्स से बढ़कर लगभग 15 लाख से 20 लाख यूनिट्स हो जाएगा। रॉयल एनफील्ड का हालिया प्रदर्शन काफी आशाजनक है। जैसा कि 2023 की पहली तिमाही में 50 प्रतिशत के इजाफे से जाहिर होता है, पिछले वित्तीय वर्ष की समान अवधि में 611 करोड़ रुपये की तुलना में 918 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ है।

  • जीप कंपास और मेरिडियन फिर हुईं महंगी

    जीप कंपास और मेरिडियन फिर हुईं महंगी

    Stellantis Group (स्टेलंटिस ग्रुप) का हिस्सा Jeep India (जीप इंडिया) ने अपनी Compass (कम्पास) और Meridian (मेरिडियन) एसयूवी की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है। दोनों मॉडल की कीमतों में काफी इजाफा हुआ है। जहां जीप कंपास 43,000 तक महंगी हो गई है, वहीं मेरिडियन की कीमत में 3.14 लाख रुपये तक का इजाफा किया गया है। वैरिएंट के आधार पर कीमतें अलग-अलग हैं। अपडेटेड कीमतें अब कंपनी की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।

    Jeep Compass
    जीप कंपास अब सिर्फ तीन ट्रिम्स – स्पोर्ट, लिमिटेड और मॉडल-एस में उपलब्ध है। इसमें लिमिटेड और मॉडल-एस ट्रिम्स पर 4×2 और 4×4 ड्राइव ऑप्शंस मिलते हैं। एंट्री-लेवल स्पोर्ट 4×2 एमटी की कीमत में सबसे कम 29,333 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। जबकि टॉप-स्पेक कंपास मॉडल-एस (ओ) 4×4 एटी ट्रिम पर 43,000 रुपये तक का इजाफा हुआ है। जीप कंपास की कीमत अब 21.73 लाख रुपये से शुरू होती है जो टॉप मॉडल के लिए 32.07 लाख रुपये तक जाती है। दोनों कीमतें एक्स-शोरूम, भारत है।

  • आत्मसम्मान के खिलाफ काम नहीं करूंगा, खुली अदालत में बॉम्बे हाई कोर्ट के जज ने दिया इस्तीफा

    आत्मसम्मान के खिलाफ काम नहीं करूंगा, खुली अदालत में बॉम्बे हाई कोर्ट के जज ने दिया इस्तीफा

    बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर पीठ की एक अदालत की अध्यक्षता कर रहे न्यायमूर्ति रोहित देव ने शुक्रवार को इस्तीफा दे दिया। जस्टिस रोहित देव ने खुली अदालत में घोषणा करते हुए कहा कि वह अपने आत्मसम्मान के खिलाफ काम नहीं कर सकते। न्यायमूर्ति देव ने अदालत में मौजूद वकीलों से कहा कि मुझे आपको यह बताते हुए दुख हो रहा है कि मैंने अपना इस्तीफा सौंप दिया है। मैं अपने आत्मसम्मान के खिलाफ काम नहीं कर सकता।

    आप लोग कड़ी मेहनत करें। हालांकि, न्यायमूर्ति देव ने फैसले के पीछे का कारण नहीं बताया। उन्होंने कई मौकों पर वकीलों के साथ सख्ती बरतने के लिए उनसे माफ़ी मांगी।

    उन्होंने कहा कि जो लोग अदालत में मौजूद थे, मैं आप सभी से माफी मांगता हूं। मैंने आपको डांटा क्योंकि मैं चाहता हूं कि आप सुधर जाएं। मैं आप में से किसी को भी ठेस नहीं पहुंचाना चाहता क्योंकि आप सभी मेरे लिए एक परिवार की तरह हैं। अचानक आए इस फैसले से कोर्ट में मौजूद वकील हैरान रह गए। इस्तीफे के बाद, पूरे बोर्ड को, उस दिन के लिए उनकी अदालत के समक्ष सूचीबद्ध सभी मामलों सहित, बरी कर दिया गया। न्यायमूर्ति देव को जून 2017 में बॉम्बे उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया था और वह दिसंबर 2025 में सेवानिवृत्त होने वाले थे।

    न्यायमूर्ति देव के कुछ प्रसिद्ध फैसलों में 2022 में कथित माओवादी लिंक मामले में दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर जीएन साईबाबा को बरी करना शामिल है। प्रोफेसर साईबाबा को आजीवन कारावास की सजा को रद्द करते हुए, न्यायमूर्ति देव ने कहा कि मुकदमे की कार्यवाही शून्य थी। गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत वैध मंजूरी का अभाव। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश पर रोक लगा दी और हाई कोर्ट की नागपुर पीठ को मामले की नए सिरे से सुनवाई करने का आदेश दिया।

  • 112 छोटे निवेशकों के खातों में 10-10 हजार रुपये भेजे गए, अमित शाह ने कही ये बात

    112 छोटे निवेशकों के खातों में 10-10 हजार रुपये भेजे गए, अमित शाह ने कही ये बात

    नई दिल्ली

    सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सहारा समूह की चार सहकारी समितियों के करोड़ों जमाकर्ताओं की करोड़ों रुपये की गाढ़ी कमाई लौटाने की प्रक्रिया शुक्रवार को शुरू कर दी। इस दौरान 112 छोटे निवेशकों को 10 हजार रुपये की पहली किस्त हस्तांतरित की गई। शाह ने कहा कि अब तक 18  लाख जमाकर्ताओं ने 18 जुलाई को लॉन्च किए गए ‘सीआरसीएस-सहारा रिफंड पोर्टल’ पर पंजीकरण कराया है।

    उन्होंने कहा, “अब तक 18 लाख निवेशकों ने पोर्टल पर पंजीकरण कराया है। … आज 112 निवेशकों के बैंक खाते में करीब 10000 रुपये हस्तांतरित किए गए हैं।” शाह ने कहा कि ऑडिट पूरा होने के बाद धन की अगली किस्त जल्द ही हस्तांतरित की जाएगी। उन्होंने जमाकर्ताओं को बधाई देते हुए कहा, ‘मैं आश्वस्त करना चाहता हूं और मुझे पूरा विश्वास है कि आने वाले दिनों में सभी जमाकर्ताओं को उनका धन मिल जाएगा। शाह ने कहा कि कई बार ऐसी घटनाएं होती हैं जो सहकारिता पर विश्वास को हिला देती हैं। हालांकि, यह सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है कि निवेशकों का पैसा सुरक्षित रहे और उन्हें वापस मिले।

    उन्होंने कहा कि सहारा के जमाकर्ताओं को प्रबंधन की गलती और अदालती मुकदमों में देरी के कारण पिछले 12-15 साल से उनका पैसा वापस नहीं मिल रहा था। शाह ने सेबी-सहारा कोष से 5,000 करोड़ रुपये हासिल करने के लिए सहकारिता मंत्रालय की ओर से किए गए प्रयासों को रेखांकित करते हुए कहा कि मंत्रालय ने इस मुद्दे पर सीबीआई और आयकर विभाग सहित सभी संबंधित सरकारी निकायों को लाने की पहल की और उच्चतम न्यायालय के समक्ष एक साझा अपील की कि छोटे निवेशकों को धन पर पहला अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने कहा, “अगर हमें देश में सहकारी आंदोलन को मजबूत करना है, तो हमें सहकारी समितियों में विश्वास को मजबूत करना होगा।”

  • सत्य की हमेशा जीत होती है, मैं समर्थन के लिए लोगों को धन्यवाद देता हूं: राहुल गांधी

    सत्य की हमेशा जीत होती है, मैं समर्थन के लिए लोगों को धन्यवाद देता हूं: राहुल गांधी

    नयी दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने ‘मोदी उपनाम’ वाली टिप्पणी से जुड़े आपराधिक मानहानि के मामले में उच्चतम न्यायालय से राहत मिलने के बाद शुक्रवार को कहा कि सच्चाई की हमेशा जीत होती है। गांधी ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘आज नहीं तो कल, कल नहीं तो परसों सच्चाई की जीत होती ही है। मुझे क्या करना है, उसे लेकर मेरे मन में स्पष्टता है।’’ उन्होंने लोगों को उनका समर्थन करने के लिए धन्यवाद दिया। इससे पहले गांधी ने कहा कि चाहे कुछ भी हो जाए, वह भारत की अवधारणा (आइडिया ऑफ इंडिया) की रक्षा करने का अपना कर्तव्य निभाते रहेंगे।

    उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘चाहे कुछ भी जाए, मेरा कर्तव्य वही रहेगा। भारत की अवधारणा की रक्षा करना।’’ उच्चतम न्यायालय ने ‘मोदी उपनाम’ को लेकर की गई कथित विवादित टिप्पणी के संबंध में 2019 में दायर आपराधिक मानहानि मामले में राहुल गांधी की दोषसिद्धि पर रोक लगाते हुए शुक्रवार को उनकी लोकसभा की सदस्यता बहाल करने का रास्ता साफ कर दिया।

    शीर्ष अदालत ने गुजरात उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली राहुल गांधी की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया। उच्च न्यायालय ने ‘मोदी उपनाम’ से जुड़े मानहानि के मामले में कांग्रेस नेता की दोषसिद्धि पर रोक लगाने के अनुरोध वाली उनकी याचिका खारिज कर दी थी। गुजरात के पूर्व मंत्री पूर्णेश मोदी ने 13 अप्रैल 2019 को कर्नाटक के कोलार में एक चुनावी सभा में ‘मोदी उपनाम’ के संबंध में की गई कथित विवादित टिप्पणी को लेकर राहुल के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मुकदमा दायर किया था।

  • एक या दो नहीं बल्कि 180 अपराधों में जेल की सजा से छुट्टी

    एक या दो नहीं बल्कि 180 अपराधों में जेल की सजा से छुट्टी

    नई दिल्लीलोकसभा में पास हो चुके जन विश्वास बिल को राज्यसभा में भी मंजूरी मिल चुकी है। इस विधेयक ने कई अपराधों में जेल की सजा को खत्म कर दिया है। यह बिल 19 मंत्रालयों से जुड़े 42 कानूनों के 183 प्रावधानों को जेल की सजा से मुक्त करेगा और इज ऑफ डूइंग बिजनेस को प्रमोट करेगा।

    आसान शब्दों में कहे तो, यदि कोई व्यक्ति अनजाने में कोई कृत्य करता है और उसके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हो जाते हैं और लोगों को जेल की सजा तक होती थी, उन्हें अब अपराध नहीं माना जायेगा और उनमें मिलने वाली सजा कम या खत्म कर दी जाएगी। पहले जिन गड़बड़ी को अपराध की श्रेणी रखा गया था वो अब जुर्माने तक सीमित हो जाएंगे।

    बिल में साफतौर पर कहा गया कि देश के लोग सरकार और अलग-अलग संस्थानों पर भरोसा करें, यही लोकतंत्र का आधार है। इस खबर में हम आपको बताएंगे कि जन विश्वास बिल क्या है और इसके तहत किन कानूनों में अपराध के प्रावधान को हटाया गया या कम किया गया है। साथ ही, बताएंगे कि इसके पीछे क्या कारण है।

    जन विश्वास बिल क्या है?

    कई पुराने प्रावधानों में संशोधन करके उसे एक बिल के रूप में पेश किया गया है, इसे जन विश्वास बिल कहा गया है। जन विश्वास बिल का लक्ष्य है कि 19 मंत्रालयों के 42 कानूनों के 180 अपराधों को गैर-अपराधिक घोषित कर देना यानी 180 अपराधों को अब अपराध नहीं माना जाएगा। इनकी सजा में बदलाव किया जाएगा, जिसमें कई अपराधों को जुर्माने तक सीमित कर दिया जाएगा, तो कई मामलों में सजा खत्म कर दी जाएगी।

    किन क्षेत्रों में दिखेगा बदलाव?

    इस बिल के पास हो जाने से अब तक क्षेत्रों में बदलाव देखने को मिलेगा, जिसमें पर्यावरण, कृषि, मीडिया, उद्योग, व्यापार, प्रकाशन और कई अन्य क्षेत्र के हैं। जन विश्वास विधेयक से Ease of doing Business और Ease of Living आसान होगी।

    क्या-क्या बदलाव होगा?

    बिल के कानून में तब्दील होने पर कई बड़े बदलाव होंगे। कई अपराधों में जेल के प्रावधान को समाप्त किया जाएगा, जैसे- इंडियन पोस्ट ऑफिस एक्ट, 1898 के तहत जो अपराध आते हैं और उन पर जो जुर्माना लगाया जाता है उसे हटाया जाएगा। शिकायत करने की व्यवस्था में भी बदलाव किया जाएगा।

    इसके अलावा, जुर्माना तय करने के लिए अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी। यदि कानून का उल्लंघन होता है, तो स्थिति जांच होगी और समन जारी होंगे। किसी भी अपराध के लिए लगने वाले जुर्माने में बदलाव होगा और राशि को हर तीन साल में एक बार बढ़ाया जाएगा।

    जन विश्वास बिल क्यों लाया गया?

    इस बिल का उद्देश्य है कि भारत की व्यापार प्रणाली में सहजता आ सके। दरअसल, वर्तमान में व्यापार करने के लिए कई नियमों का पालन करना होता है। इन नियमों का उल्लंघन होने पर भारी जुर्माना लगता है और यहां तक कि कई मामलों में जेल की सजा होती है।

    फिलहाल, देश में 1,536 कानून हैं, जिसमें 70 हजार प्रावधान है। इनमें से अधिकतर नियम एमएसएमई सेक्टर के विकास में बाधा बनते हैं। बिल के मुताबिक, इसका मुख्य लक्ष्य, व्यवस्थाओं की उलझनों का कम करना और पुराने नियमों में वर्तमान की स्थिति के मुताबिक बदलाव करना है। बिल में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि, “सरकार देश के लोगों और विभिन्न संस्थानों पर भरोसा करें, यही लोकतांत्रिक शासन की आधारशिला है।”

    दरअसल, इस बिल का सीधा-सीधा लक्ष्य है कि लब्बोलुआब नियमों में कमी लाई जाए, ताकि लोगों का डर कम किया जा सके। कई लोग छोटे-छोटे अपराधों के कारण जेल की सजा और जुर्माने से डरते हैं, लेकिन इसमें बदलाव होते ही व्यवसायों को बढ़ावा मिलेगा और व्यवसाय करने और जीवन यापन में आसानी होगी।

    इन कानूनों में होगा बदलाव

    जन विश्वास बिल के तहत 19 मंत्रालयों के 42 कानूनों के 180 अपराधों को गैर-अपराधिक घोषित कर दिया जाएगा। इसमें सार्वजनिक ऋण अधिनियम, 1944; मोटर वाहन अधिनियम, 1988; फार्मेसी अधिनियम, 1948; सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952; खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006; कॉपीराइट अधिनियम, 1957; ट्रेड मार्क्स अधिनियम, 1999 शामिल है।

    इसके अलावा, मनी लांड्रिंग निरोधक अधिनियम, 2002; रेलवे अधिनियम, 1989; सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000; औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940; पेटेंट अधिनियम, 1970; पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम 1986, मोटर वाहन अधिनियम, 1988 समेत 42 अधिनियम शामिल हैं।

  • सिर्फ Rahul Gandhi ही नहीं, कभी इन नेताओं की भी हुई थी संसद और विधानसभा से छुट्टी

    सिर्फ Rahul Gandhi ही नहीं, कभी इन नेताओं की भी हुई थी संसद और विधानसभा से छुट्टी

    नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने मोदी सरनेम मामले में राहुल गांधी की सदस्यता को बहाल कर दिया। कोर्ट ने सूरत सेशन कोर्ट द्वारा दी गई सजा पर अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा कि निचली अदालत के न्यायाधीश द्वारा अधिकतम सजा देने का कोई कारण नहीं बताया गया है। कोर्ट ने आगे कहा कि अंतिम फैसला आने तक दोषसिद्धि के आदेश पर रोक लगाने की जरूरत है।

    कब रद्द होती है संसद या विधायक की सदस्यता

    जनप्रतिनिधि कानून के अनुसार, अगर सांसदों और विधायकों को किसी भी मामले में दो साल से ज्यादा की सजा हुई हो तो ऐसे में उनकी सदस्यता (संसद और विधानसभा से) रद्द हो जाती है। वहीं, सजा की अवधि पूरी करने के बाद छह वर्ष तक चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य भी होते हैं।

    सिर्फ राहुल गांधी ही नहीं, देश के कई नेताओं को निचली अदालत से सजा मिलने के बाद उनकी संसद और विधानसभा सदस्यता रद्द हो चुकी है। हालांकि, कई नेताओं को सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट से राहत भी मिली है। आइए आज जरा उन नेताओं की बात करें, जिन्हें निचली अदालत से सजा मिलने के बाद हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल चुकी है।

    हिमाचल हाई कोर्ट ने प्रदीप चौधरी को वापस दिलाई थी विधानसभा की सदस्यता

    हिमाचल प्रदेश की बद्दी की एक अदालत ने कांग्रेस विधायक प्रदीप चौधरी को तीन साल की सजा सुनाई थी। साल 2011 में एक युवक की मौत के बाद हिमाचल प्रदेश के बद्दी चौक पर जाम लगाने और सरकार के काम में बाधा डालने के मामले में कोर्ट ने उन्हें तीन साल की सजा सुनाई था।

    सजा सुनाने के बाद उनकी विधानसभा की सदस्यता चली गई। उस समय वो हरियाणा के कालका विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक थे। इसके बाद प्रदीप ने हिमाचल हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और कोर्ट ने उनके खिलाफ निचली अदालत की सजा को रोक लगा दी।

    केरल हाई कोर्ट से मिली थी मोहम्मद फैजल को राहत

    लक्षद्वीप के राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) सांसद मोहम्मद फैजल को कवारती के सेशन कोर्ट ने हत्या की कोशिश के मामले में 10 साल की सजा सुनाई थी। कोर्ट के इस फैसले के बाद उनकी संसद सदस्यता रद्द हो गई थी। हालांकि, केरल हाई कोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराये जाने और सजा के फैसले को निलंबित कर दिया था, जिसके बाद उनकी संसदीय सदस्यता एक बार फिर बहाल हो गई।

    जब ‘आप‘ के 20 विधायकों की दोबारा सदस्यता हुई बहाल

    चुनाव आयोग ने आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों को लाभ के पद रखने के कारण अयोग्य करने की सिफारिश कर दी थी। दो दिन बाद तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अयोग्यता को मंजूरी दे दी थी। इस फैसले के खिलाफ आप ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

  • बेंगलुरु में प्रिंसिपल ने 10 साल की डिस्लेक्सिक लड़की से किया दुष्कर्म

    बेंगलुरु में प्रिंसिपल ने 10 साल की डिस्लेक्सिक लड़की से किया दुष्कर्म

    बेंगलुरु । बेंगलुरु के एक स्कूल परिसर के अंदर 10 वर्षीय डिस्लेक्सिक लड़की से उसके प्रिंसिपल ने कथित तौर पर दुष्कर्म किया। पुलिस ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 65 साल के आरोपी, जो स्कूल का मालिक भी है, को घटना के सिलसिले में गिरफ्तार कर लिया गया है। यह घटना गुरुवार सुबह करीब 11.30 बजे वरथुर पुलिस स्टेशन की सीमा में स्थित स्कूल की एक खाली कक्षा के अंदर हुई।

    पुलिस ने आरोपित प्रिंसिपल को किया गिरफ्तार

    पुलिस के अनुसार, लड़की को उसका प्रिंसिपल फुसलाकर कक्षा में ले गया और कथित तौर पर उसके साथ दुष्कर्म किया। घर लौटने के बाद पीड़िता ने अपनी आपबीती अपनी मां को बताई जो उसे मेडिकल जांच के लिए नजदीकी अस्पताल ले गई। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि पीड़िता की मां की शिकायत के आधार पर, घटना के संबंध में यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण अधिनियम (POCSO) और भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (दुष्कर्म) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।

    उन्होंने कहा, “हमारी टीम ने स्कूल प्रिंसिपल को गुरुवार को गिरफ्तार कर लिया।” पुलिस ने कहा कि पीड़िता की मां एक गृहिणी हैं और उनके पिता का 2020 में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण निधन हो गया।

  • शारीरिक प्रशिक्षण के नाम पर एनसीसी कैडेट की पिटाई, इंटरनेट पर वायरल हुआ वीडियो

    शारीरिक प्रशिक्षण के नाम पर एनसीसी कैडेट की पिटाई, इंटरनेट पर वायरल हुआ वीडियो

    ठाणे। महाराष्ट्र के ठाणे शहर के एक कॉलेज के एक छात्र द्वारा राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) के कुछ कैडेट को पीटने का वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित होने के बाद विभिन्न छात्र संगठनों ने दोषी के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए शुक्रवार को कॉलेज के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। शिवसेना (शिंदे गुट) तथा शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) से संबद्ध छात्र संगठनों ने जोशी बेडेकर कॉलेज के बाहर प्रदर्शन किया, जहां यह घटना हुई थी।

    कॉलेज प्रबंधन ने बताया कि संस्थान ने दोषी छात्र को निलंबित कर दिया है। जोशी बेडेकर कॉलेज में बारिश के बीच एक शारीरिक प्रशिक्षण सत्र के दौरान एक छात्र को एनसीसी के कुछ कैडेट की पिटाई करते हुए देखा जा सकता है। माना जा रहा है कि प्रशिक्षण सत्र का यह वीडियो साथी छात्र द्वारा रिकॉर्ड किया गया था। शिंदे समूह की छात्र शाखा के नितिन लांडगे ने बताया कि पीड़ित और उनके अभिभावक पर कॉलेज प्रबंधन का दोषी के खिलाफ शिकायत न करने को लेकर ‘बहुत’ दबाव हैं। उन्होंने कहा कि कॉलेज प्रशासन को इस घटना को गंभीरत से लेना चाहिए और दोषी के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करानी चाहिए। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) की छात्र शाखा के सदस्यों ने कॉलेज प्रबंधन को एक ज्ञापन सौंपकर वरिष्ठ छात्र पर सख्त कार्रवाई की मांग की।

    वहीं, शिवसेना (यूबीटी) से जुड़े छात्र समूह का नेतृत्व किरण जाधव ने किया था। इस दौरान प्रदर्शनकारियों को कॉलेज में घुसने से रोकने के लिए मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। विश्वविद्यालय के एक सीनेट सदस्य ने कहा, इस यूनिट के एनसीसी प्रशिक्षक का हाल ही में तबादला हुआ था। शिक्षकों की अनुपस्थिति में वरिष्ठ कैडेट के कार्यभार संभालने के कारण यह घटना हुई। ठाणे का जोशी बेडेकर कॉलेज दो अन्य सहयोगी संस्थानों-बंदोडकर कॉलेज और वीपीएम पॉलिटेक्निक के साथ मिलकर एनसीसी इकाई का संचालन करता है। बंदोडकर कॉलेज के आरोपी छात्र को निलंबित कर दिया गया है।