Author: cwsadmin

  • ड्राईविंग स्किल टैस्ट नही फिर टैस्ट के नाम की फीस क्यों ?

    ड्राईविंग स्किल टैस्ट नही फिर टैस्ट के नाम की फीस क्यों ?

    माननीय उपराज्यपाल दिल्ली द्वारा भारत की माननीया राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के विचारों और दिशा निर्देश को दिल्ली में लागू करवाने की पहल करते हुए महिलाओं के रोजगार और सशक्तिकरण के लिए लोनी क्षेत्र में फ्री ड्राईविंग स्किल डेवलपमेंट कोर्स की शुरुआत करवाई ।

    एक अच्छी पहल पर क्या माननीय उपराज्यपाल द्वारा की गई पहल के प्रति वह एनजीओ जो परिवहन विभाग की फ्री के दाम पर जमीन पर ड्राइविंग ट्रैनिंग स्किल डेवलपमेंट सैंटर चला रहा है इसके काबिल था एक बड़ा सवाल ?

    माननीय उपराज्यपाल द्वारा जारी दिशा निर्देश के अनुसार महिलाएं जो दिल्ली में ड्राईविंग स्किल पाकर व्यवसायिक वाहनों को चला कर रोजी रोटी कमाना चाहती हैं उन सभी को बिना पैसा खर्च किए ड्राइविंग स्किल और नौकरी दिल्ली परिवहन विभाग दिलवाएगा और उनकी स्किल डेवलपमेंट कोर्स का खर्चा दिल्ली परिवहन विभाग और कम्पनी 50% 50% के आधार पर करेंगी, महिलाओ को इस स्किल डेवलपमेंट कोर्स के लिए कोई खर्चा नहीं करना होगा।

    जो सबूत सामने आ रहे हैं वह अपने आप में एक बहुत बड़ी जांच का विषय है क्योंकि हम आपको इसी ब्लॉग के साथ इन महिलाओ के लर्निंग लाइसेंस की फीस की रसीद और महिलाओ द्वारा दिए गए पेमेंट का एक प्रिन्ट आपकी जानकारी हेतु स्लगन कर रहे है। जिसके आधार पर यह तो साफ हो गया कि परिवहन विभाग द्वारा इन महिलाओ से लर्निंग ड्राइविंग टैस्ट के नाम पर जो पैसा चार्ज किया है उसमे ड्राईविंग टैस्ट के पैसे चार्ज नहीं होने चाहिए थे जबकि नोटीफिकेशन के अनुसार इन महिलाओ को जो ड्राईविंग स्किल डेवलपमेंट कोर्स करवाया जा रहा है उसके बाद टैस्ट देने की जरूरत ही नहीं है।

    जब टैस्ट देने की जरूरत नहीं तो उसके नाम की फीस महिलाओ द्वारा जमा करवाने का कारण, सोचनीय बात?

    फीस की रसीद रुपए 500 पर महिलाओ द्वारा दिए गए लर्निंग लाइसेंस की फीस के नाम पर 950 रुपए, आख़िर बाकी पैसे किस बात के थे, सोचनीय बात?

    अब मुख्य बात जो जानने योग्य :- दिल्ली में अनगिनत ड्राइविंग ट्रैनिंग स्कूल परिवहन विभाग के ऑपरेशन ब्रांच द्वारा मान्यता प्राप्त है और ड्राइविंग स्किल डेवलपमेंट कोर्स करवा रहें हैं और प्रमाण पत्र भी जारी करते हैं फिर भी इनके द्वारा दी गई स्किल के बाद टैस्ट अनिवार्य पर यहां की दी गई ट्रैनिंग स्किल के बाद नही, आखिर क्यों ?

    जनहित में जारी
    *संजय बाटला*

  • *परिवहन मंत्री और परिवहन विभाग द्वारा प्रतिदिन घोषणा सभी बसे अब लाइन में, जाने सच*

    *परिवहन मंत्री और परिवहन विभाग द्वारा प्रतिदिन घोषणा सभी बसे अब लाइन में, जाने सच*

    दिल्ली में जहा भी परिवहन मंत्री या परिवहन विभाग के आला अधिकारी जांच के लिए पूरा ढिंढोरा पीट कर जाते हैं तो वहा उतने समय के लिए सभी लाईन में चलते नजर आ जाते हैं पर क्या दिल्ली की जनता जो दिल्ली की सड़को पर चलते हैं जरूर जानते ही हैं की कितने प्रतिशत बसे लाईन में चलती है।

    हमने कुछ दिन पहले भी कुछ बसों की विडियो क्लिप प्रस्तुत किए थे कितने कलस्टर कम्पनियों की बसे लाईन में चलती है। हम आज परिवहन मंत्री और परिवहन विभाग के आला अधिकारियों को खुला दावा करते हैं की दिल्ली में किसी भी क्षेत्र में बिना पूर्व सूचना के सिर्फ एक घंटा खड़े होकर निकलने वाली बसों में से सिर्फ़ 60 प्रतिशत बसे ही लाईन में चलते दिखा दे, दिल्ली में आज भी करोड़ों रुपए खर्च कर दिल्ली सरकार अपने फ़ोटो लगाकर जो विज्ञापन लगा रहें हैं वह सिर्फ ली हुई फोटो के विज्ञापन के अलावा कुछ नहीं।

    यह एक अच्छी बात है कि दिल्ली सरकार और परिवहन विभाग दिल्ली की सड़को को जाम मुक्त, दुर्घटना मुक्त और प्रदुषण मुक्त बनाने की बात करते हैं पर सिर्फ विज्ञापनों या पूर्व सूचना के आधार पर यह सब करवाना असंभव है।

    इसके लिए बसों में कानून के अनुसार लगे सभी उपकरणों का सुचारू रूप से कार्य करना आवश्यक है जो शायद डीटीसी या क्लस्टर बसों में उपल्ब्ध नही है क्योंकि अगर उपल्ब्ध होते और सुचारू रूप से कार्य में हो तो किसी भी जगह से किसी भी बस की जांच सम्भव है और गलत तरीके से चलने वाली बसों को भी कहीं से भी चेक कर चालान भेजा जा सकता है।

    दिल्ली की सड़को को जाम मुक्त, दुर्घटना मुक्त और प्रदुषण मुक्त करने के लिए विज्ञापनों की नही सही प्रक्रिया अपनाने की जरूरत है, सच को देखना बहुत आसान है लेकिन अगर देखने की इच्छा हो।

    जनहित में जारी
    संजय बाटला

  • क्या दिल्ली सरकार और परिवहन विभाग सच में चाहते है महिला सशक्तिकरण या इस दिखावे के पीछे है कोई और छुपा कारण, बड़ा सवाल???

    क्या दिल्ली सरकार और परिवहन विभाग सच में चाहते है महिला सशक्तिकरण या इस दिखावे के पीछे है कोई और छुपा कारण, बड़ा सवाल???

    दिल्ली के सरकारी विभागों उनकी शाखाओं एवम् निकायों में जहां भी महिलाए कार्यरत हैं सभी जगह महिलाओ को जो मान सम्मान और सरकारी सहयोग मिलना चाहिए वह दिल्ली में मांगने के बाद भी नहीं मिलता यह बात सदा सामने आती रहीं हैं ।

    दिल्ली में
    मेडिकल सेवा में महिलाओ का हाल,
    आंगन वाड़ी में महिलाओ का हाल,
    डीटीसी में कार्यरत महिलाओ का हाल, और अन्य सभी विभागों की महिलाओं द्वारा लगातार सरकार से मांग सामने आती रहीं हैं।

    दिल्ली में जब से आम आदमी पार्टी की सरकार बनी है उस दिन से आज तक तो दिल्ली सरकार और उसके किसी भी विभाग में एक भी नियमित नौकरी दिल्ली में किसी को ना तो दी गई है और ना ही मिलने की उम्मीद नज़र आ रही है।

    ऐसे में दिल्ली परिवहन विभाग द्वारा महिला सशक्तिकरण के प्रति इतनी जागरूकता दिखाना दिल्ली की महिलाओं के लिए सोच का कारण बनता जा रहा है।

    दिल्ली के व्यवसायिक वाहनों में रोजगार के प्रति महिलाओ को जागरुक करना और उसके लिए मदद के लिए सामने आना एक अच्छा कदम है पर इन महिलाओ जो परिवहन विभाग के विज्ञापनों से प्रभावित होकर आगे आ रही है की सुरक्षा के प्रति अभी तक परिवहन विभाग द्वारा कोई दिशा निर्देश या आदेश पारित नही किया, आख़िर क्यों ?

    आप लोगो को याद होगा दिल्ली परिवहन निगम की एक कंडक्टर की हत्या और कुछ दिन पहले ही बस में कार्यरत सिविल डिफेंस के पद की महिला द्वारा आत्महत्या की कोशिश हो चुकी है।

    ऐसे में परिवहन विभाग को महिलाओ की सुरक्षा, नौकरी और वेतन की गारंटी के प्रति दिशा निर्देश और आदेश जारी करने चाहिए।

    जनहित में जारी :- संजय बाटला

  • आईडीटीआर नाम की एनजीओ के प्रति इतना अपनापन क्यों ? क्या जनता को बताएंगे दिल्ली परिवहन विभाग के आला अधिकारी !

    आईडीटीआर नाम की एनजीओ के प्रति इतना अपनापन क्यों ? क्या जनता को बताएंगे दिल्ली परिवहन विभाग के आला अधिकारी !

    फाउंडेशन टू असिस्ट इन एलोकेटिड ट्रैफिक हैबिट्स (फेथ) के नाम से दिल्ली परिवहन विभाग द्वारा वर्ष 1995 में एक एनजीओ रजिस्टर्ड करवा कर दिल्ली में अलग व्यक्तियों द्वारा 2 एनजीओ रजिस्टर्ड करवाकर उनसे मैनेजमेंट एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए जिसमे परिवहन विभाग की कई एकड़ जमीन दिल्ली की जनता को ड्राइविंग ट्रैनिंग स्किल डेवलपमेंट करवाने के लिए मात्र 100 जेड 150 रुपए महीने पर दे दी।

    इन दो एनजीओ को दिल्ली में तीन अलग अलग ज़मीन दी गई जिनका हाउस टैक्स ही लाखों रुपए परिवहन विभाग द्वारा भरा जाता होगा अगर परिवहन विभाग अपनी संपति का कर भरता होगा। यहां आपकी जानकारी हेतु बताना आवश्यक है की इन दो एनजीओ में से एक एनजीओ आईडीटीआर को लोनी क्षेत्र और सराय काले खां क्षेत्र में दो जगह दी गई और दूसरे एनजीओ एसडीटीआई को बुराड़ी क्षेत्र में एक जगह दी गई।

    वर्ष 2020 में परिवहन विभाग द्वारा जब इनके लाइसेंस रिन्यू किए गए तब टोलवा द्वारा इनके एग्रीमेंट की कॉपी की मांग की गई और पता चला की उसकी तरफ़ तो विभाग का ध्यान ही नही गया।

    टोलवा के पदाधिकारियों द्वारा जब विभाग से इनको दी गई जगह के बारे मे पूछा गया तब पता चला कि इन्हे यह पूरी जमीन मात्र 100 – 150 रुपए महीने पर दी गई थी और आज तक उसी दर पर है जब की एग्रीमेंट के अनुसार हर बार एग्रीमेंट रिन्यू होने से पहले इस पर फैसला लेना अनिवार्य था।

    जिस एनजीओ को दो अलग ज़मीन दी गई है उसके प्रति दिल्ली की जनता के विचार भी कभी परिवहन विभाग के आला अधिकारियों ने जानना उचित नहीं समझा, आख़िर क्यों ?
    दिल्ली में सिर्फ इन्ही तीन ड्राइविंग ट्रैनिंग स्किल डेवलपमेंट स्कूलों को हैवी की ट्रैनिंग की परिवहन विभाग द्वारा इजाजत, आख़िर क्यों ?
    इनको इनकी इच्छा के अनुसार जनता से फीस के नाम पर पैसा लेने की छूट, आख़िर क्यों ?
    दिल्ली में ड्राईविंग स्किल डेवलपमेंट टैस्ट के लिए इन्हें फीस के अलावा जनता से अलग पैसे चार्ज करने की छूट, आख़िर क्यों ?

    क्या है ऐसा खास जो सिर्फ आईडीटीआर या एसडीटीआइ की करवा सकता है अन्य कोई पंजीकृत सस्था, एनजीओ या ट्रस्ट नही करवा सकते।

    जिस दर पर इन्हें जनता को ड्राईविंग स्किल डेवलपमेंट करवाने की छूट दी गई है उस से कम दर पर तो अन्य सभी परिवहन विभाग द्वारा पंजीकृत बिना किसी फायदे को प्राप्त किए सेवा प्रदान कर रहे है।

    परिवहन विभाग के आला अधिकारियों और आप की जानकारी हेतु हम कुछ लोगो के विचार प्रस्तुत कर रहे हैं, जिसके बाद आप भी समझ जाएंगे की परिवहन विभाग और दिल्ली सरकार इन पर कितने मेहरबान है, पर क्यों !!! यह तो परिवहन विभाग के आला अधिकारी ही बता सकते हैं।

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    *परिवहन विभाग के आला अधिकारी कृप्या जनता को बताए की जनता की जायज शिकायतों के बाद भी विभाग इन्ही पर इतना मेहरबान क्यों है ?*

  • हरियाणा में पढ़ने वाली बेटियों को मिलेगी फ्री बस सेवा, प्रदेश सरकार ने की घोषणा

    हरियाणा में पढ़ने वाली बेटियों को मिलेगी फ्री बस सेवा, प्रदेश सरकार ने की घोषणा

    आपकों याद करवा दे दिल्ली में बहुत पहले से ही दिल्ली के सभी विद्यार्थियों को मात्र रुपए 12.50 पर आल रूट बस पास दिया जाता था जिससे पढ़ने वाले बच्चों को कही भी आने जाने के लिए समय और पैसा खराब ना करना पड़े।

    अब उसी तर्ज पर हरियाणा प्रदेश सरकार द्वारा महिला सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में शिक्षा प्राप्त कर रहीं लड़कियों और महिलाओं को हरियाणा सरकार से परमिट प्राप्त करने वाली सभी बसों में निशुल्क यात्रा की सुविधा देने की घोषणा की। जल्दी ही सभी पात्र लड़कियों व महिलाओं को निशुल्क बस पास उपलब्ध करवाये जाएंगे।

    आपकों यह भी बता दें की यह दिल्ली की आम आदमी पार्टी की तरह फ्री की राजनीति का खेल नही है यह शिक्षा और स्वास्थ्य में जनता के प्रति सरकार का दायित्व है।

    एक तरफ दिल्ली सरकार डीटीसी के बेड़े में एक भी बस शामिल नहीं करी और इसी बात को राजनीति का खेल में डीटीसी को घाटे में बताकर निजीकरण करना चाहतीं हैं और दूसरी तरफ महिला फ्री का खेल रच कर दुनियां को दिखाने में लगी हैं।

    फ्री की राजनीति के खेल को समझे कही देर ना हो जाए और दिल्ली में श्रीलंका वाला हाल ना बन जाए। गलत राजनीतिज्ञ को पहचाने और दुध से मक्खी की तरह निकाल कर फैंक दो फिर वो किसी भी राजनीति पार्टी से संबंधित क्यों नहीं हो।

    जागो, जागो जागो, जनहित में :- संजय बाटला

  • Faith एनजीओ में कौन हैं फैसले लेने के हकदार ओर क्यों आईडीटीआर एनजीओ की गलतियां नही देखी जाती, जाने

    Faith एनजीओ में कौन हैं फैसले लेने के हकदार ओर क्यों आईडीटीआर एनजीओ की गलतियां नही देखी जाती, जाने

    फाउंडेशन टू असिस्ट इन इंकुलकेटिंग ट्रैफिक हैबिट्स (फेथ) एनजीओ की संचालक समिति में शामिल हैं

    1. प्रिंसिपल सेक्रेटरी कम कमिश्नर परिवहन जीएनसीटीडी :- चेयरमैन
    2. मैनेजिंग डायरेक्टर मैसर्स श्री मारुति सुजुकी इण्डिया लिमिटेड :- वाइस चेयरपर्सन
    3. स्पैशल कमिश्नर परिवहन जीएनसीटीडी :- जनरल सेक्रेटरी
    4. डिप्टी कंट्रोलर ऑफ अकाउंट्स परिवहन :- ट्रेजरर
    5. सीएमडी दिल्ली परिवहन निगम :- मेम्बर
    6. मैनेजिंग डायरेक्टर अशोका लीलैंड लिमिटेड चेन्नई :- मेम्बर
    7. डायरेक्टर आईडीटीआर :- मेम्बर
    8. डायरेक्टर डीटीआई :- मेम्बर

    अब आपको बता दें आईडीटीआर को क्यों पक्ष दिया जाता हैं, क्यों आईडीटीआर कुछ भी करे उस पर कोई रोक नहीं लगाएगा!!!

    नंबर 2 वाइस चेयरपर्सन ही है आईडीटीआर के चेयरमेन।

    यहां आपकी जानकारी के लिए एक और जरूरी बात है नम्बर 5 सीएमडी दिल्ली परिवहन निगम यानी मंत्री परिवहन दिल्ली सरकार (मेम्बर)

    अब आपको कुछ तो समझ आ गया होगा की क्यों और कैसे दिल्ली परिवहन विभाग और दिल्ली सरकार आईडीटीआर के खिलाफ़ उठी आवाज पर भी कार्यवाही नहीं कर सकते ओर उसकी सभी मांगों को मानने के लिए मजबूर हैं और इसीलिए आईडीटीआर को परिवहन विभाग द्वारा 2 सैंटर और इसके लिए फ्री जमीन वो भी उनकी इच्छा के अनुसार दे दी ।

    अब दिल्ली की जनता स्वयं फैसला ले की आखिर क्यों परिवहन विभाग ने सिर्फ इन्हे ही हैवी लाइसेंस ट्रैनिंग सर्टिफिकेट देने की इजाजत दी और किसी को नहीं।

    जनहित में जारी
    संजय बाटला

  • दिल्ली सरकार और परिवहन विभाग द्वारा सार्वजनिक सवारी वाहन सेवा प्रदान करने से पीछे खींचे अपने हाथ, अब क्या होगा दिल्ली वासियों का

    दिल्ली सरकार और परिवहन विभाग द्वारा सार्वजनिक सवारी वाहन सेवा प्रदान करने से पीछे खींचे अपने हाथ, अब क्या होगा दिल्ली वासियों का

    दिल्ली परिवहन निगम के लिए अपने पूरे कार्यकाल में एक भी बस नही खरीद कर दिल्ली की आम आदमी पार्टी ने अपने दिल की बात जनता के समक्ष पेश कर ही दी थी, अब परिवहन विभाग द्वारा भी दिल्ली की जनता को सुरक्षित सार्वजनिक सवारी वाहन सेवा प्रदान करने से अपना हाथ खींचना शुरू कर दिया है।

    परिवहन आयुक्त ने जनता के समक्ष अपनी बात प्रस्तुत कर दी है और दिल्ली की जनता को बता दिया की अगर दिल्ली की जनता सुखद सवारी वाहन सेवा चाहती हैं तो दिल्ली परिवहन विभाग दिल्ली में एप बेस्ड प्रीमियम बस सर्विस एग्रीगेटर को इजाजत दे देगी।

    यहां हम आपको याद करवा दे दिल्ली परिवहन विभाग द्वारा पहले भी दिल्ली में एप बेस्ड ईको फ्रेंडली सेवा एग्रीगेटर लाइसेंस जारी किए थे और कुछ ही समय में सब हवा हो गया और सारे एग्रीगेटर अपने वाहनों को चलवाने की जगह बेचने को मजबूर हो गए थे।

    दिल्ली में ओला, उबर जैसे एप बेस्ड एग्रीगेटर सेवा प्रदान कर रहे है जिन पर आज तक तो दिल्ली परिवहन विभाग और दिल्ली सरकार गलत कार्यवायियो के बाद भी पाबंदी लगाने में असमर्थ रही हैं और दिन प्रतिदिन शिकायतों के बाद भी उनकी गुंडागर्दी अपनी चरम सीमा पर है और अब परिवहन आयुक्त दिल्ली में जनता को सुरक्षित सेवा प्रदान करने वाली स्टेज़ कैरेज परमिट सवारी वाहनों की जगह जनता को प्राइवेट एग्रीगेटर की वाहन सेवा लेने को मजबूर करने को तैयार हैं।

    परिवहन विभाग और दिल्ली सरकार जब पहले के एप बेस्ड वाहन एग्रीगेटर कंपनियो पर अभी तक कोई कंट्रोल नहीं कर पाए तो आगे क्या करेंगे यह आप स्वयं सोच सकते हैं।

    यह फैसला दिल्ली के परिवहन आयुक्त का है जो अपने फैसले को लागु करने के लिए किसी भी कानून, सरकारी विभाग ओर माननीय उच्चतम न्यायालय के दिशा निर्देशों को दरकिनार करने से नही घबराता। ऐसे में अब दिल्ली की जनता को आने वाले समय मे कितना सुरक्षित सवारी सेवा उपल्ब्ध होगी इसके बारे मे बताने की आवश्यकता नहीं।

    जनहित में जारी

    संजय बाटला

  • बी एस-6 कार में लगवा सकेंगे सीएनजी और एलपीजी किट,

    बी एस-6 कार में लगवा सकेंगे सीएनजी और एलपीजी किट,

    बीएस-6 मानक कार में लगवा सकेंगे अब सीएनजी किट, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण कारों में सीएनजी किट लगवाने वालों की संख्या बढ़ रही है. इससे गाड़ियों को चलाने की लागत कम हो जाती है.

    भारत सरकार ने 3.5 टन से कम के डीजल और पेट्रोल इंजनों को सीएनजी इंजन / सीएनजी किट से बदलने की मंजूरी आखिर दे दी . अभी तक सिर्फ बीएस-4 उत्सर्जन मानदंड वाले वाहनों में इस तरह की किट लगाई जा सकती थी.

    सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने अधिसूचना में कहा, ‘मंत्रालय ने बीएस-6 पेट्रोल वाहनों में सीएनजी किट लगाने और बीएस-6 में 3.5 टन से कम डीजल इंजनों को सीएनजी इंजन से बदलने की मंजूरी दे दी है.

    सीएनजी एक पर्यावरण अनुकूल ईंधन है और पेट्रोल और डीजल इंजन की तुलना में कार्बन मोनोऑक्साइड, हाइड्रोकार्बन और धुएं आदि के उत्सर्जन स्तर को कम करता है.

    पैट्रोल या डीजल की तुलना में एक स्वच्छ ईंधन समाधान हैं. पेट्रोल और डीजल की आसमान छूती कीमतों के साथ देश भर में सीएनजी की बिक्री में वृद्धि हुई है. हालांकि, फैक्ट्री फिटेड सीएनजी कारों की उपलब्धता की कमी और सीएनजी के लिए ईंधन भरने वाले स्टेशनों की कमी वाहन मालिकों के सामने आने वाली कुछ बाधाएं हैं.

    जनहित में जारी :- संजय बाटला

  • *दिल्ली सरकार राजस्व से एक बस खरीद कर सड़क पर नही लाई उसका दावा कितना सच्चा, जाने!*

    *दिल्ली सरकार राजस्व से एक बस खरीद कर सड़क पर नही लाई उसका दावा कितना सच्चा, जाने!*

    दिल्ली सरकार राजस्व से एक बस खरीद कर सड़क पर नही लाई उसका दावा कितना सच्चा, जाने!

    आम आदमी पार्टी सरकार दिल्ली के राजस्व और भारत सरकार द्वारा 300 बसों के खरीदने के लिए सब्सिडी लेने के बाद भी जनता के सार्वजनिक सेवा के प्रति एक भी बस खरीद कर सड़क पर नही लाई उसका दावा दिल्ली में देंगे दुनियां की सबसे बेहतरीन परिवहन व्यवस्था

    1. दिल्ली सरकार दावों को करने में नम्बर वन,
    2. विज्ञापनों में अपने आप को श्रेष्ठ बना कर दिखाने में नम्बर वन,
    3. वायदा करने और उससे मुकर जाने में नम्बर वन,

    आम आदमी पार्टी जो पहले उतराखंड में, अब हिमाचल और गुजरात में जाकर लोगो को जो वायदे करके अपना वोट बैंक कायम करना चाहतीं हैं उन को दिल्ली में जहा पूर्ण बहुमत से सरकार है और जिसके बल और पैसों की ताकत पर दूसरे राज्यों में सरकार बनाने के प्रयास में जुटी है में तो लागू करे।

    अपने द्वारा कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को नियमित करने का वायदा कर भुल जाना और दूसरे राज्यों में फिर वही वायदे करना यह सिर्फ आम आदमी पार्टी ही कर सकती हैं।

    दिल्ली की सार्वजनिक वाहन सेवा को पूर्ण रूप से बर्बाद करने के बाद भी जनता को विज्ञापनों और समाचारों के माध्यम से बोलना की दिल्ली में दुनियां की सबसे बेहतरीन परिवहन व्यवस्था । यह बोलने की क्षमता भी सिर्फ आम आदमी पार्टी के पास ही है।

    दिल्ली की सड़को को पूर्ण रूप से गावों से भी गई गुजरी सड़को में बदलवा कर उसकी तुलना लंदन से करने की बोलने की क्षमता भी सिर्फ आम आदमी पार्टी मे है।

    सबसे बड़ी बात आखों से सब कुछ देखते हुए भी भारत सरकार, माननीय उच्चतम न्यायालय, माननीय उच्च न्यायालय दिल्ली और सभी सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों का मुंह बंद रखवाने की क्षमता भी सिर्फ आम आदमी पार्टी की पास है।

    धन्य है दिल्ली की जनता जिसने पूरी ईमानदारी से आम आदमी पार्टी को राजनीति में आगे आने और सक्रिय होने का मौका दिया और दुनियां को एक और राजनीति के गुण से अवगत करवाया।

    दिल्ली में कितने सरकारी पद है और उनमें कितने पद खाली है, क्या आप जानते है?
    दिल्ली में आम आदमी पार्टी सरकार के बनने से लेकर आज तक कितने व्यक्तियों को नियमित नौकरी दी गई, क्या आप जानते हैं ?
    दिल्ली में सरकारी राजस्व से कितनी सार्वजनिक सवारी वाहन खरीदे गए, क्या आप जानते हैं?

    अगर हां तो अच्छी बात और अगर नहीं तो मात्र 10 रुपए खर्च कर आरटीआई में जाने, आपकी आंखे स्वयं खुल जाएगी और मन प्रसन्न हो जाएगा।

    जनहित में जारी
    संजय बाटला

  • परिवहन विभाग की नज़र में आईडीटीआर ही सर्वोपरी क्यों ?

    परिवहन विभाग की नज़र में आईडीटीआर ही सर्वोपरी क्यों ?

    चेयरमैन फेथ द्वारा बैठक में दिए गए आईडीटीआर के पक्ष मे अधिकतम फैसले, आख़िर क्यों ?

    आपकों हम बता ही चुके हैं की फेथ एनजीओ परिवहन विभाग द्वारा परिवहन आयुक्त, सीएमडी परिवहन निगम, एमडी मारुति और एमडी अशोक लीलैंड को लेकर 2005 में सैक्शन 1860 में पंजीकृत कराई गई थी जिसका मुख्य उद्देश्य दिल्ली की जनता को जरुरत के आधार पर सही ड्राइविंग स्किल डेवलपमेंट कम कीमत पर उपल्ब्ध करवाना था।

    इसके लिए फेथ एनजीओ ने मारूति को दो जमीन और अशोक लीलैंड को एक जमीन परिवहन विभाग की मात्र 100 – 150 रुपए महीने की दर पर दी थीं।

    परिवहन विभाग द्वारा इन कंपनियों को इस ड्राइविंग ट्रैनिंग स्किल सैंटर से फायदा पहुंचे इसके लिए दिल्ली में हैवी ड्राईवर लाइसेंस स्किल की मान्यता सिर्फ इन्ही तीन सेंटरों को दी और अन्य सभी जिनके द्वारा भी हैवी ड्राईविंग स्किल डेवलपमेंट कोर्स की अनुमति मांगी गई कोई भी कारण बता कर मना करते रहें। आख़िर परिवहन विभाग द्वारा इन्ही सैंटरो को मान्यता प्रदान करना न्यायिक प्रक्रिया है वह भी अधिकतम फीस दर के साथ, जवाब और सोच आपका है।

    अन्य एनजीओ और ट्रस्ट जो दिल्ली की जनता को इनसे भी ज्यादा प्रभावी ढंग से ड्राइविंग ट्रैनिंग स्किल डेवलपमेंट कोर्स करवाने की क्षमता रखते हैं को परिवहन विभाग इस कार्य के लिए अपने साथ क्यों नहीं जोड़ना पसन्द करता बड़ा सवाल

    आपकी जानकारी के लिए बता दे सड़क परिवहन एवम् राजमार्ग मंत्रालय द्वारा 07 / 06 / 2021 को विधि विधान से गैजेट नोटिफिकेशन जारी कर सभी राज्य परिवहन विभागों को अपने राज्यो मे एक्रीडिटिड ड्राईविंग ट्रैनिंग सैंटर को मान्यता देने की बात कही थी जिसके अंतर्गत कोई भी व्यक्ति इस सैंटर से ड्राईविंग स्किल डेवलपमेंट प्राप्त करके सीधा अपना ड्राईविंग लाईसेंस बिना टैस्ट दिए प्राप्त कर सकता है।

    दिल्ली की जनता का दुर्भाग्य कहे या परिवहन विभाग दिल्ली की हठ , दिल्ली परिवहन विभाग दिल्ली में आईडीटीआर और एसडीटीआई के अलावा एक्रीडिटिड ड्राईविंग ट्रैनिंग सैंटर की मान्यता किसी और को देना ही नहीं चाहता, आख़िर क्यों ? यह बात तो सिर्फ परिवहन विभाग ही जनता को बता सकता है और कोई नहीं।

    आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें दिल्ली परिवहन विभाग ने आईडीटीआर की मांग पर नई फीस दर इन सेंटरों पर जनता से लेने के लिए अपनी सहमति प्रदान कर दी है और अब यहां से ड्राइविंग स्किल डेवलपमेंट कोर्स के लिए जनता को एचएमवी:- 11500 +जीएसटी, एलएमवी :- 8400+ जीएसटी और टू व्हीलर:- 2500+जीएसटी देनी होगी । आईडीटीआर द्वारा उठाई गई इस मांग को मान कर परिवहन विभाग ने यह सिद्ध कर दिया की दिल्ली में मारूति कम्पनी द्वारा संचालित ड्राइविंग ट्रैनिंग स्कूल जो दर चाहे उसे जनता पर लागू करवा कर ले सकता है, जनता से ज्यादा जरूरी….?

    25 जुलाई 2022 को परिवहन आयुक्त के नेतृत्व में बैठक में यह फैसला लिया गया है और साथ ही इस बैठक में परिवहन आयुक्त ने एक कमेटी का गठन कर उसे दिशा निर्देश जारी किए हैं की दिल्ली में अन्य जिन्हें भी टू व्हीलर और एलएमवी ड्राईविंग ट्रैनिंग सैंटर की मान्यता दी हुई है उनकी जांच करे और जो नियमों में पूरा ना पाया जाए की मान्यता रद्द करें यानी सीधा संबंध आईडीटीआर की अधिक फीस होने पर भी जनता इसी सैंटर में ट्रैनिंग लेने को मजबूर हो और आईडीटीआर को फायदा,

    इसी बैठक में परिवहन आयुक्त द्वारा दो और दिशा निर्देश पारित किए गए हैं पहला महिलाओ को इलैक्ट्रिक वाहनों को चलाने की ट्रैनिंग प्रदान करना और दूसरा विदेश में ड्राइवरों की नियुक्ति हेतु वहा के स्टैंडर्ड पर ट्रेनिंग उपल्ब्ध करवाना। एक अच्छा कदम अच्छा दिशा निर्देश पर जानने योग्य प्रश्न यह है कि की इन तीनो सैंटर में कहीं भी कोई इलेक्ट्रिक वाहन और विदेशों की ड्राइविंग स्किल के लिए बाए हाथ के स्टेरिंग वाहन उपल्ब्ध है जो यह इलेक्ट्रिक वाहनों की ड्राइविंग स्किल और विदेश की सड़कों पर वाहन चलाने की ड्राइविंग स्किल डेवलपमेंट व्यक्ति विशेष को सही तरीके से करवा सके।

    अब दिल्ली की जनता स्वयं फैसला करे की जिसकी शिकायत जनता के अलावा सरकारी विभाग भी करते रहें हैं परिवहन विभाग आपकों उसी के दर पर ड्राईविंग स्किल डेवलपमेंट कोर्स करने के लिए बाध्य कर रहा है।

    जनहित में जारी
    संजय बाटला