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  • जाति जनगणना पर गर्मायी राजनीति: बीजेपी के सहयोगी दलों ने भी उठा दी मांग, भाजपा ने ओढ़ी ‘राजनीतिक चुप्पी’

    जाति जनगणना पर गर्मायी राजनीति: बीजेपी के सहयोगी दलों ने भी उठा दी मांग, भाजपा ने ओढ़ी ‘राजनीतिक चुप्पी’

    जाति जनगणना पर गर्मायी राजनीति: बीजेपी के सहयोगी दलों ने भी उठा दी मांग, भाजपा ने ओढ़ी ‘राजनीतिक चुप्पी’

    लखनऊ बिहार में जातीय जनगणना की रिपोर्ट आने के बाद उत्तर प्रदेश में जातीय जनगणना कराने के मुद्दे पर भाजपा ने चुप्पी साध ली है। अलबत्ता पार्टी ने बिहार में जातीय जनगणना की रिपोर्ट पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार और आरजेडी के अध्यक्ष लालू यादव पर पलटवार किया है।

    बिहार सरकार द्वारा जातीय जनगणना के आंकड़े जारी किए जाने के बाद यूपी में भी इस मुद्दे पर सियासत शुरू हो गई है। विपक्ष ही नहीं बल्कि सत्ता पक्ष में शामिल भाजपा के सहयोगी दल भी जातीय जनगणना की मांग को फिर से उठाने लगे हैं।

    एनडीए के घटक दल अपना दल (एस) और सुभासपा ने भी जातीय जनगणना कराने की मांग उठाकर भाजपा पर दबाव बढ़ा दिया है। जबकि निषाद पार्टी ने जातीय जनगणना को भरमाने का प्रयास बताया है। अपना दल (एस) की अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल का कहना है कि उनकी पार्टी हमेशा से जातीय जनगणना कराने की पक्षधर रही है और इस मुद्दे को सड़क से लेकर संसद तक भी उठाती रही है। रायबरेली में सोमवार को कार्यकर्ता सम्मेलन में उन्होंने जातीय जनगणना को समय की मांग बताया। वहीं, सुभासपा के राष्ट्रीय मुख्य प्रवक्ता अरुण राजभर का कहना है कि उनकी पार्टी का गठन ही इस मुद्दे की लड़ाई को लेकर हुआ है। पार्टी विधानसभा में इस मुद्दे को कई बार उठा चुकी है। हर वर्ग के हिस्सेदारी की लड़ाई सत्ता के भीतर और बाहर रहकर भी लड़ती रही है। सुभासपा रोहिणी आयोग की रिपोर्ट को लागू करने की भी मांग कर चुकी है।

    वर्ष 1961 की सेंसस के आधार पर हो गणना
    निषाद पार्टी के अध्यक्ष और प्रदेश के कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद का कहना है कि नीतिश सरकार जातीय जनगणना के नाम पर जातियों को भरमाना चाहती है। इनके वोट को बांटकर ओबीसी और एससी, एसटी की संख्या को छोटा करना चाहते हैं। हम चाहते हैं संवैधानिक रूप से गिनती होनी चाहिए। यदि जातीय जनगणना कराना है तो वर्ष 1961 की सेंसस के आधार पर जातीय जनगणना होनी चाहिए।

    जातीय जनगणना पर भाजपा ने साधी चुप्पी
    बिहार में जातीय जनगणना की रिपोर्ट आने के बाद उत्तर प्रदेश में जातीय जनगणना कराने के मुद्दे पर भाजपा ने चुप्पी साध ली है। अलबत्ता पार्टी ने बिहार में जातीय जनगणना की रिपोर्ट पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार और आरजेडी के अध्यक्ष लालू यादव पर पलटवार किया है।

    भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी ने सोमवार को कहा कि बिहार सरकार ने किस नियम के आधार पर जातीय जनगणना कराई है। कहा कि कांग्रेस, सपा, आरजेडी परिवारवाद की राजनीति करते हैं। विपक्षी दलों के नेता जातीय जनगणना के नाम पर राजनीतिक रोटियां सेंक रहे हैं। आरजेडी में लालू के बाद तेजस्वी और तेजप्रताप ही आगे रहेंगे, कांग्रेस में सोनिया गांधी के बाद राहुल गांधी ही सर्वोपरि रहेंगे, सपा मे भी मुलायम सिंह यादव के बाद अखिलेश यादव ही पार्टी की कमान संभाल रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि ये दल बताएं कि इनकी सरकारों के कार्यकाल में पिछड़ों और दलितों के उत्थान के लिए क्या किया गया। संगठन और सरकार में कितनी भागीदारी दी गई। अपना दल और निषाद पार्टी की ओर से जातीय जनगणना की मांग के सवाल पर चौधरी ने कहा कि वह हमारे सहयोगी दल हैं। उनका राजनीतिक एजेंडा अलग है, भाजपा का अलग है। मामले पर भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता आलोक अवस्थी ने कहा कि जातीय जनगणना के मुद्दे पर मुख्यमंत्री विधानसभा में पहले ही कह चुके हैं कि जनगणना कराना केंद्र सरकार का अधिकार है। राज्य सरकार जनगणना नहीं करा सकती है।

     

    हर हाल में होनी चाहिए जातीय जनगणना: अजय राय
    लखनऊ। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि जातीय जनगणना हर हाल में होनी चाहिए ताकि उसी हिसाब से आगे की रणनीति बनाई जा सके। लोगों को योजनाओं का लाभ दिलाया जा सके। कांग्रेस लगातार इसकी मांग कर रही है। पार्टी जातीय जनगणना कराने की मांग को लेकर सम्मेलन भी करा रही है। उन्होंने कहा कि बिहार में हुई जातीय जनगणना के आंकड़ें वहां वस्तुस्थिति से वाकिफ करा रहे हैं। उत्तर प्रदेश ही नहीं सभी राज्यों में यह गणना होनी चाहिए।

    जातिगत जनगणना से ही योजनाओं का लाभ: संजय सिंह
    आम आदमी पार्टी के यूपी प्रभारी और राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने कहा कि आरक्षण और सरकार की लाभकारी नीतियों का लाभ वांछित लोगों तक तभी पहुंचेगा, जब जातिगत जनगणना होगी। इसलिए हर राज्य में जातिगत जनगणना होनी चाहिए। मध्य प्रदेश के सियासी हालात पर उन्होंने कहा कि यह भाजपा का दुर्भाग्य है कि वहां उनके नेता दिन-रात प्रार्थना कर रहे है कि उनका टिकट कट जाए। यानि वह चुनाव लड़ने से बच रहे हैं क्योंकि उनको पता है कि भाजपा चुनाव हारने जा रही है।

     

     

     

  • घाटे व बजट के गणित में उलझी मेट्रो के विस्तार की रफ्तार, छह साल में शासन तक ही पहुंच पाई फाइल

    घाटे व बजट के गणित में उलझी मेट्रो के विस्तार की रफ्तार, छह साल में शासन तक ही पहुंच पाई फाइल

    घाटे व बजट के गणित में उलझी मेट्रो के विस्तार की रफ्तार, छह साल में शासन तक ही पहुंच पाई फाइल

    लखनऊ सितंबर 2017 में जब पहली बार लखनऊ मेट्रो ने यात्रियों के संग विस्तार पकड़ी थी तब लोगों को उम्मीद थी कि इसका दायरा शहर के अन्य हिस्सों तक भी पहुंचेगा पर फाइल के मेट्रो दफ्तर से शासन तक पहुंचने में छह साल लग गए।

    उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के लिए ‘लाइफलाइन’ के तौर पर शुरू की गई लखनऊ मेट्रो पिछले पांच साल से जहां की तहां अटकी हुई है। मेट्रो का विस्तार न हो पाने व कई अन्य कारणों से मेट्रो का घाटा बढ़ता जा रहा है और शहर में सुगम यातायात की समस्या दिनोंदिन जटिल होती जा रही है। मेट्रो विस्तार में जहां वित्तीय प्रबंधन रोड़ा बना है, वहीं सपा सरकार द्वारा डीपीआर को मंजूरी देने में हुई चूक को भी एक वजह बताया जा रहा है। माना जा रहा है कि अगर कानपुर की तरह लखनऊ मेट्रो रेल परियोजना के भी दोनों कॉरिडोर को एक साथ मंजूरी दे दी गई होती तो पहले कॉरिडोर (रेड लाइन ) का काम समाप्त होने के साथ ही दूसरे कॉरिडोर (ब्लू लाइन) का भी काम शुरू हो गया होता। ऐसा करके मेट्रो सेवा को जहां घाटे से उबारा जा सकता था, वहीं शहर के घनी आबादी वाले लोगों को भी इस सेवा का लाभ मिलता।

    बता दें कि छह साल पहले सितंबर 2017 को जब पहली बार लखनऊ मेट्रो ने यात्रियों के संग रफ्तार पकड़ी थी, तब लखनऊ वासियों में यह उम्मीद जगी थी कि इसका दायरा शहर के अन्य हिस्सों में भी बढ़ेगा। पर, उच्च स्तर पर हुई कई बैठकों के बाद भी चारबाग से बसंतकुंज तक प्रस्तावित मेट्रो के पूरब-पश्चिम कॉरिडोर पर खर्च होने वाले बजट की गुत्थी नहीं सुलझ सकी है। करीब 11.98 किमी. लंबे 12 स्टेशन वाले दूसरे चरण की परियोजना पर काम शुरू होना तो दूर, डीपीआर तक को मंजूरी नहीं दी जा सकी है। राज्य स्तर पर हो रही लेटलतीफी का नतीजा है कि दूसरे चरण का काम शुरू नहीं होने से पूरे शहर को मेट्रो से जोड़ने के लिए प्रस्तावित सात अन्य रूटों के लिए भी होमवर्क शुरू नहीं हो पा रहा है।

     

    सूत्रों के अनुसार मेट्रो के विस्तार में सबसे बड़ी अड़चन परियोजना पर आने वाला खर्च और मेट्रो से होने वाली आय में भारी अंतर है। सूत्रों का यह भी कहना है कि यूपीएमआरसी के लिए विश्व बैंक के लोन की किस्तें चुका पाना भी मुश्किल हो गया है। पहले से ही कोरोना के चलते मेट्रो की हालात और खस्ता हो गई थी, जिससे घाटा और ज्यादा बढ़ गया। मेट्रो पर सैकड़ों करोड़ रुपये का कर्ज चढ़ गया है। लखनऊ में मेट्रो के घाटे में पहुंचने का बड़ा कारण रूट का विस्तार नहीं होना है। विशेषज्ञों का मानना है कि नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर पर 23 किलोमीटर की दूरी में मेट्रो का संचालन किया जा रहा है, लेकिन इस रूट पर बड़ी संख्या में यात्री नहीं मिल रहे हैं। वहीं, अगर दूसरे चरण का काम भी पूरा हो जाए और चारबाग से बसंतकुंज के बीच मेट्रो दौड़ने लगे तो इस रूट पर बड़ी संख्या में यात्री मिल सकते हैं।

    इसलिए कानपुर, आगरा मेट्रो की रफ्तार तेज
    उप्र मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (यूपीएमआरसी) के उच्च तकनीकी अधिकारी के मुताबिक 2014 में तत्कालीन सरकार के एक अव्यावहारिक फैसले की वजह से लखनऊ में मेट्रो की रफ्तार थमी हुई है। पहले चरण के साथ ही दूसरे चरण की डीपीआर भी मंजूर करा ली जानी चाहिए थी। ऐसा नहीं होने की वजह से पहले चरण के 22 स्टेशनों के बीच मेट्रो का संचालन शुरू होने के बावजूद दूसरे चरण का डीपीआर अब तक मंजूर नहीं हो पाया है। देखा जाए तो इस लिहाज आगरा मेट्रो परियोजना की प्रगति की रफ्तार भी लखनऊ से आगे है। वहां पर पहले चरण का काम अंतिम चरण में है और दूसरे चरण के प्रारंभिक कार्य शुरू हो चुके हैं। इसी तरह लखनऊ मेट्रो परियोजना से करीब पांच साल बाद फरवरी 2019 में शुरू हुए कानपुर मेट्रो परियोजना के दूसरे चरण का काम भी शुरू हो चुका है और अगले साल इसे पूरा करने का लक्ष्य है।

    यह भी बड़ी वजह: जानकारों की नजर में पहले चरण में शुरू की गई लखनऊ मेट्रो का बढ़ता घाटा और दूसरे चरण के निर्माण की बढ़ती लागत भी परियोजना के विस्तार को रोकने की एक बड़ी वजह है। इसके चलते पहले चरण का काम पांच वर्ष पहले पूरा होने के बाद भी लखनऊ मेट्रो के दूसरे चरण का काम अब तक शुरू नहीं हो पाया है। जबकि यूपीएमआरसी ने दूसरे चरण की परियोजना की डीपीआर एक साल पहले ही शासन को भेज दी थी। परियोजना की बढ़ी लागत के आधार पर बजट की फाइल अभी तक शासन स्तर पर ही लटकी है। लागत को लेकर वित्त विभाग का सहमत न होना मुख्य कारण बताया जा रहा है।

    आगे नहीं बढ़ा इन 7 नए रूटों का काम (लंबाई 92.30 किमी.)
    – जानकीपुरम से मुंशी पुलिया (6.5 किमी.)
    – आईआईएम से राजाजीपुरम (21.5 किमी.)
    – चारबाग से पीजीआई (11 किमी.)
    – इंदिरानगर से इकाना स्टेडियम (8.7 किमी.)
    – इकाना स्टेडियम से सीसीएस हवाई अड्डा (19.6 किमी.)
    – सचिवालय से चक गंजरिया सिटी (12 किमी.)
    – आईआईएम से अमौसी (13 किमी.)
    एक साल में बढ़ी 475 करोड़ से अधिक लागत
    सूत्रों के मुताबिक यूपीएमआरसी ने दूसरे चरण का डीपीआर तैयार करके पिछले साल 9 सितंबर को ही आवास विभाग को भेज दिया था। इसमें परियोजना की बढ़ी लागत 4264 करोड़ प्रस्तावित की गई थी। जबकि 2017 में यह 3789 करोड़ थी। छह साल में लागत में 475.286 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हो गई है, इसलिए वित्त विभाग के स्तर पर इससे संबंधित प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिल पाई है। इस वजह से ब्ल्यू लाइन (पूरब-पश्चिम कॉरिडोर) का काम शुरू नहीं हो पा रहा है।

    जमीन न मिलने से भी विस्तार अटका
    सीजी सिटी में एलडीए से जमीन नहीं मिलने और दूसरी लाइन शुरू नहीं हो पाने से लखनऊ मेट्रो का रेवेन्यू मॉडल फेल हो गया है। सीजी सिटी में करीब 150 एकड़ जमीन मिलनी थी, पर पांच साल में ऐसा नहीं हो सका है। घाटे में चल रही मेट्रो अब यूरोपियन इन्वेस्टमेंट बैंक (ईआईबी) की किस्तें तक नहीं चुका पा रही है।

    329 करोड़ तक पहुंच चुका है घाटा
    यूपीएमआरसी की रिपोर्ट के मुताबिक पहले चरण के रूट पर मेट्रो का घाटा 329 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। एयरपोर्ट से मुंशीपुलिया के करीब 23 किमी. लंबे रूट पर प्रतिदिन एक लाख से अधिक यात्री मिलने का आकलन किया गया था, लेकिन संख्या 70 हजार तक ही पहुंच पाई है।

    इन वजहों से भी नहीं बढ़ रही यात्रियों की संख्या
    – पहले चरण के रूट का घनी आबादी से न जुड़ना।
    – मेट्रो की आय का जरिया सिर्फ यात्रियों को बनाना।
    – स्टेशन और मेट्रो में विज्ञापन डिस्प्ले की व्यवस्था न होना।
    – मेट्रो स्टेशन आदि के पास वाहनों के लिए सुरक्षित पार्किंग की व्यवस्था नहीं होना।

    खर्च की तुलना में कम है आय
    – यूपीएमआरसी को वर्ष 2017-2018 में यात्री आय सिर्फ 4.35 फीसदी थी, जो वर्ष 2018-2019 में बढ़कर 10.80 फीसदी और 2019-2020 में आय का ग्राफ 54.73 फीसदी तक पहुंच गया था। इससे कुछ हद तक मेट्रो रेल कॉरपोरेशन की वित्तीय स्थिति कुछ सुधरी ही थी कि इसी बीच कोविड की लहर आ गई और मेट्रो के पहिये थम गए। इसका नतीजा ये हुआ कि 2020-21 में आय का आंकड़ा 15.94 पर आ गया। 2022-23 में मेट्रो में यात्रियों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है, जिसका फायदा आय पर भी दिख रहा है। हालांकि मेट्रो के संचालन पर हो रहे खर्च और आय में अभी भारी अंतर बना हुआ है।

    विज्ञापन मद से कम ही रही आय
    स्टेशनों पर विज्ञापन, स्टेशन व संबंधित व्यावसायिक संपत्तियों के किराये, पार्किंग व अन्य मदों से आय होने लगी। मेट्रो की कमाई स्टाॅलों व अन्य वाणिज्यिक गतिविधियों से बहुत ज्यादा नहीं बढ़ सकी। यही नहीं जो शासन स्तर से लविप्रा की ओर से जमीन दिए जाने का मसौदा था, आज तक वह भी पूरा नहीं हो सका। ऐसे में लखनऊ मेट्रो अपनी आर्थिक स्थिति बहुत ज्यादा मजबूत नहीं कर सकी।
    महज दो साल में कानपुर में दौड़ने लगी मेट्रो
    दोनों कॉरिडोर की डीपीआर एक साथ मंजूर होने की वजह से लखनऊ की तुलना में कानपुर में मेट्रो का तेज गति से पूरा किया गया। 15 नवंबर 2019 को मेट्रो परियोजना का शुभारंभ हुआ था और 28 दिसंबर 2021 को इसका उद्घाटन हो गया था। इस प्रकार महज दो वर्ष के भीतर ही कानपुर में मेट्रो का संचालन शुरू हो गया। यही नहीं इसके साथ ही दूसरे कॉरिडोर का काफी काम हो चुका है और तीसरे चरण के लिए भी नापजोख शुरू हो चुकी है। इससे इस परियोजना पर लागत कम आई। माना जा रहा है कि अगले साल दूसरे कॉरिडोर पर भी मेट्रो का संचालन शुरू कर दिया जाएगा। ऐसे में कानपुर मेट्रो परियोजना को घाटे से बचाया जा सकता है।

    डीपीआर का हो रहा है परीक्षण, जल्द शुरू होगा कामः गोकर्ण
    अपर मुख्य सचिव आवास नितिन रमेश गोकर्ण का कहना है कि ये सही है कि दूसरे रूट पर काम शुरू होने में विलंब हो रहा है। यूपीएमआरसी ने चारबाग-वसंतकुंज रूट का डीपीआर शासन को उपलब्ध करा दिया है। इस परियोजना पर आने वाले खर्च को लेकर वित्त विभाग के साथ चर्चा भी हो रही है। साथ ही डीपीआर का तकनीकी परीक्षण कराया जा रहा है। बजट और डीपीआर का परीक्षण करने के बाद जल्द ही इस रूट पर का काम शुरू कराया जाएगा ।

    विस्तार से बढ़ेगी राइडरशिपः कुमार केशव
    यूपीएमआरसी के एमडी रहे कुमार केशव का कहना है कि आने वाले 5 वर्षों में लखनऊ की जनसंख्या 45 लाख से अधिक हो जाएगी। उस समय तक मेट्रो के 2 कॉरिडोर तैयार हो गए तो लाखों लोगों को जहां सुगम सफर की सुविधा मुहैया हो सकेगी, वहीं राजधानी की घनी आबादी वाले क्षेत्र में रहने वाले लोगों को मेट्रो रेल सेवा से जोड़ा सकेगा। ऐसा करने से मेट्रो की राइडरशिप के साथ ही आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।

  • बागेश्वर बाबा ने काशी विश्वनाथ मंदिर में लगाई हाजिरी, बोले- देश का सोया हुआ हिंदू अब जाग रहा है

    बागेश्वर बाबा ने काशी विश्वनाथ मंदिर में लगाई हाजिरी, बोले- देश का सोया हुआ हिंदू अब जाग रहा है

    बागेश्वर बाबा ने काशी विश्वनाथ मंदिर में लगाई हाजिरी, बोले- देश का सोया हुआ हिंदू अब जाग रहा है

    वाराणसी बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री सोमवार सुबह वाराणसी पहुंचे। काशी विश्वनाथ धाम में दर्शन-पूजन किया। बारिश के बीच विश्वनाथ धाम के बाहर बाबा भक्तों की भीड़ उमड़ी।
    बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने सोमवार को काशी विश्वनाथ धाम में हाजिरी लगाई। पांच ब्राह्मणों के नेतृत्व में वैदिक मंत्रों के बीच बागेश्वर बाबा ने काशी विश्वनाथ का षोडशोपचार पूजन किया। गंगा जल और दूध से बाबा का अभिषेक किया। गर्भगृह से बाहर आने के बाद बाबा के शिखर को नमन किया।

    दर्शन कर बाहर निकले बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने काशी विश्वनाथ धाम को अद्भुत बताया। कहा कि यहां आकर बहुत अच्छा लगा। एक सवाल के जवाब में बताया कि बाबा विश्वनाथ से भारत के हिंदू राष्ट्र होने की कामना की है। मीडिया के सवालों पर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि देश का सोया हुआ हिंदू अब जाग रहा है।
    हर-हर गंगे का किया उद्घोष
    इसका परिणाम है कि अब जगह-जगह रामराज्य की स्थापना हो रही है। उन्होंने हर-हर गंगे का उद्घोष किया। इससे पहले मंदिर परिसर में बागेश्वर बाबा को देख उनके भक्तों में खुशी की लहर दौड़ पड़ी। धाम के बाहर भी उनकी एक झलक पाने के लिए भारी भीड़ उमड़ी थी।

    एयरपोर्ट पर बागेश्वर बाबा का भव्य स्वागत

    वाराणसी एयरपोर्ट पर बागेश्वर बाबा का भव्य स्वागत – फोटो : अमर उजाला
    अर्चन-पूजन के बाद मंदिर के मुख्य कार्यपालक ने पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को अंग वस्त्रम और स्मृति चिन्ह भेंट किया। एसडीएम शम्भू शरण ने रुद्राक्ष की माला से स्वागत किया। पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री बाबा के भोग आरती के बाद 12:30 पर आए थे और दर्शन-पूजन के बाद 12:50 को अपने गन्तव्य को रवाना हो गए। कतार में लगे श्रद्धालुओं ने हर-हर महादेव के उद्घोष के साथ बागेश्वर धाम के जयकारे लगाए। झमाझम बारिश के बीच हर किसी में बाबा बागेश्वर को एक झलक देखने की ललक थी।

    इससे पहले सुबह करीब 11 बजे बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री निजी विमान से वाराणसी एयरपोर्ट पहुंचे। पोर्टिको परिसर के बाहर बाबा बागेश्वर का भव्य स्वागत हुआ। इसके बाद सड़क मार्ग से काशी विश्वनाथ धाम पहुंचे।

     

  • बागेश्वर बाबा ने काशी विश्वनाथ मंदिर में लगाई हाजिरी, बोले- देश का सोया हुआ हिंदू अब जाग रहा है

    बागेश्वर बाबा ने काशी विश्वनाथ मंदिर में लगाई हाजिरी, बोले- देश का सोया हुआ हिंदू अब जाग रहा है

    बागेश्वर बाबा ने काशी विश्वनाथ मंदिर में लगाई हाजिरी, बोले- देश का सोया हुआ हिंदू अब जाग रहा है

    वाराणसी बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री सोमवार सुबह वाराणसी पहुंचे। काशी विश्वनाथ धाम में दर्शन-पूजन किया। बारिश के बीच विश्वनाथ धाम के बाहर बाबा भक्तों की भीड़ उमड़ी।
    बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने सोमवार को काशी विश्वनाथ धाम में हाजिरी लगाई। पांच ब्राह्मणों के नेतृत्व में वैदिक मंत्रों के बीच बागेश्वर बाबा ने काशी विश्वनाथ का षोडशोपचार पूजन किया। गंगा जल और दूध से बाबा का अभिषेक किया। गर्भगृह से बाहर आने के बाद बाबा के शिखर को नमन किया।

    दर्शन कर बाहर निकले बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने काशी विश्वनाथ धाम को अद्भुत बताया। कहा कि यहां आकर बहुत अच्छा लगा। एक सवाल के जवाब में बताया कि बाबा विश्वनाथ से भारत के हिंदू राष्ट्र होने की कामना की है। मीडिया के सवालों पर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि देश का सोया हुआ हिंदू अब जाग रहा है।
    हर-हर गंगे का किया उद्घोष
    इसका परिणाम है कि अब जगह-जगह रामराज्य की स्थापना हो रही है। उन्होंने हर-हर गंगे का उद्घोष किया। इससे पहले मंदिर परिसर में बागेश्वर बाबा को देख उनके भक्तों में खुशी की लहर दौड़ पड़ी। धाम के बाहर भी उनकी एक झलक पाने के लिए भारी भीड़ उमड़ी थी।

    एयरपोर्ट पर बागेश्वर बाबा का भव्य स्वागत

    अर्चन-पूजन के बाद मंदिर के मुख्य कार्यपालक ने पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को अंग वस्त्रम और स्मृति चिन्ह भेंट किया। एसडीएम शम्भू शरण ने रुद्राक्ष की माला से स्वागत किया। पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री बाबा के भोग आरती के बाद 12:30 पर आए थे और दर्शन-पूजन के बाद 12:50 को अपने गन्तव्य को रवाना हो गए। कतार में लगे श्रद्धालुओं ने हर-हर महादेव के उद्घोष के साथ बागेश्वर धाम के जयकारे लगाए। झमाझम बारिश के बीच हर किसी में बाबा बागेश्वर को एक झलक देखने की ललक थी।

    इससे पहले सुबह करीब 11 बजे बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री निजी विमान से वाराणसी एयरपोर्ट पहुंचे। पोर्टिको परिसर के बाहर बाबा बागेश्वर का भव्य स्वागत हुआ। इसके बाद सड़क मार्ग से काशी विश्वनाथ धाम पहुंचे।

     

  • अवैध खनन से हुआ हादसा, अपार्टमेंट के मालिक और ठेकेदार पर एफआईआर दर्ज , पिता-पुत्री की गई थी जान

    अवैध खनन से हुआ हादसा, अपार्टमेंट के मालिक और ठेकेदार पर एफआईआर दर्ज , पिता-पुत्री की गई थी जान

    अवैध खनन से हुआ हादसा, अपार्टमेंट के मालिक और ठेकेदार पर एफआईआर दर्ज , पिता-पुत्री की गई थी जान

    लखनऊ
    लखनऊ में पीजीआई के वृंदावन सेक्टर-11 में हुए हादसे के मामले में शुक्रवार को मृतक के पिता की तहरीर पर पुलिस ने अंतरिक्ष अपार्टमेंट के मालिक और ठेकेदार पर एफआईआर दर्ज की गई। आरोप है कि अवैध खोदाई की वजह से हादसा हुआ।

    लखनऊ में पीजीआई के वृंदावन सेक्टर-11 में हुए हादसे के मामले में शुक्रवार को मृतक के पिता की तहरीर पर पुलिस ने अंतरिक्ष अपार्टमेंट के मालिक और ठेकेदार पर एफआईआर दर्ज की गई। आरोप है कि अवैध खोदाई की वजह से हादसा हुआ। पुलिस ने छानबीन शुरू कर दी है। उधर अस्पताल में भर्ती 12 लोगों में से 11 को डिस्चार्ज कर दिया गया। केवल एक घायल का इलाज जारी है। पोस्टमार्टम कराने के बाद शव परिजनों को सौंपे गए। जिलाधिकारी सूर्यपाल गंगवार ने घायलों के साथ मृतक के परिजनों से मुलाकात कर हर संभव मदद का आश्वासन दिया।

     

    वृंदावन सेक्टर-11 में अंतरिक्ष अबरिल ग्रीन अपार्टमेंट का निर्माण चल रहा है। अपार्टमेंट परिसर में एक साइड में मजदूर झोपड़ी डालकर रह रहे थे। उससे सटकर मल्टीलेवल पार्किंग की खोदाई चल रही थी। खोदाई की वजह से बृहस्पतिवार रात करीब साढ़े 11 बजे जमीन धंस गई और झोपड़ी समेत मजदूर परिवार समेत उसमें समा गए थे। पुलिस और दमकल के जवानों ने मिट्टी में दबे 14 लोगों को निकालकर ट्रामा-2 में भर्ती कराया था। जहां पर 26 वर्षीय मुकादम व उनकी दो माह की बच्ची आयशा की मौत हो गई थी। एडीसीपी पूर्वी सैयद अली अब्बास ने बताया कि मुकादम के पिता शब्बीर की तहरीर पर अपार्टमेंट के मालिक व ठेकेदार पर धारा 304ए(लापरवाही से किसी की जान जाना) व 288(निर्माण कार्य से किसी की जान जोखिम पड़ना) में एफआईआर दर्ज की गई है। जांच की जा रही है। आरोपियों के बयान दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    इसलिए समा गए लोग
    शब्बीर ने तहरीर में लिखा है कि झोपड़ियों के पीछे अधिक जमीन खोदकर मिट्टी निकाली गई। झोपड़ी तक पूरा जेसीबी से मिट्टी हटा दी गई थी। इसी वजह से जमीन धंस गईं और लोग उसमें समा गए। पिता और उसकी मासूम बेटी की जिंदगी चली गई। ये परिवार 25 सितंबर को ही काम करने आए थे। दो दिन बाद ही हादसा हो गया।

    एक भर्ती, अन्य को अस्पताल से छुट्टी
    हादसे में मुकादम की पत्नी रुखसाना, पिता शब्बीर, बेटी अफसाना व बहन फैजाना के अलावा प्रतापगढ़ निवासी बनारसी, उनका बेटा इरफान व गोली व बेटियां सोनम व मुस्कान, इस्लाम का बेटा गुलशन, दरोगा व लाल बाबू भी घायल हुए थे। दरोगा का इलाज जारी है। उनको अधिक चोटें आई हैं। हालांकि डॉक्टरों ने उनको खतरे से बाहर बताया है।

  • संघ के अनुषांगिक संगठन दूर करेंगे चुनावी राह के कील कांटे, प्रत्येक संगठन को मिला माहौल बनाने का जिम्मा

    संघ के अनुषांगिक संगठन दूर करेंगे चुनावी राह के कील कांटे, प्रत्येक संगठन को मिला माहौल बनाने का जिम्मा

    संघ के अनुषांगिक संगठन दूर करेंगे चुनावी राह के कील कांटे, प्रत्येक संगठन को मिला माहौल बनाने का जिम्मा

    लखनऊ
    राजधानी में 19 सितंबर को संघ, अनुषांगिक संगठनों, सरकार और भाजपा की मैराधन समन्वय बैठक चली थी। बैठक में विभिन्न अनुषांगिक संगठनों ने अपनी समस्याएं रखने के साथ जमीनी फीडबैक भी सरकार व भाजपा के शीर्ष लोगों को बताया था।

    राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के अनुषांगिक संगठन लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा की राह के कील कांटे दूर करेंगे। संघ के सह सर कार्यवाह अरुण कुमार की मौजूदगी में हुई संघ, भाजपा, प्रदेश सरकार और अनुषांगिक संगठनों की बैठक में तय एजेंडे के बाद इसकी कवायद शुरू हो गई है।

    राजधानी में 19 सितंबर को संघ, अनुषांगिक संगठनों, सरकार और भाजपा की मैराधन समन्वय बैठक चली थी। बैठक में विभिन्न अनुषांगिक संगठनों ने अपनी समस्याएं रखने के साथ जमीनी फीडबैक भी सरकार व भाजपा के शीर्ष लोगों को बताया था।

    बैठक में हुए निर्णय के तहत अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद छात्रों के बीच, लघु उद्योग भारती लघु उद्यमियों के बीच, सेवा भारती बस्तियों में, शैक्षिक महासंघ शिक्षकों के बीच, विहिप और बजरंग दल हिन्दू धर्म से जुड़े सामाजिक संगठनों, किसान संघ किसानों और अधिवक्ता परिषद वकीलों के बीच केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के पक्ष में माहौल बनाएंगे।

    अनुषांगिक संगठन ग्रामीण और शहरी समस्याओं के समाधान के लिए सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयास की जानकारी देकर छोटी मोटी नाराजगी दूर करने का भी प्रयास करेंगे। संघ का प्रयास है कि चुनाव नजदीक आते आते सभी अनुषांगिक संगठन उनसे जुड़े क्षेत्रों में भगवा चुनावी माहौल तैयार कर दें।

    सरकार की योजनाओं को धरातल पर उतारने में करेंगे मदद
    सीएम योगी आदित्यनाथ ने समन्वय बैठक में अनुषांगिक संगठनों के जरिये सरकार की योजनाओं का अधिक से अधिक लोगों को लाभ पहुंचाने, योजनाओं के लाभार्थियों से संवाद करने और नीचे तक योजनाओं की जानकारी पहुंचाने का सुझाव दिया था। सूत्रों के मुताबिक सहकार भारती, लघु उद्योग भारती, विद्या भारती, अभाविप, विहिप, बजरंग दल सहित सभी संगठन इस पर काम करेंगे।

    मंत्रियों और सांसदों को व्यवहार सुधारने की सलाह
    सूत्रों का कहना है कि समन्वय बैठक में कुछ सांसद और मंत्रियों के जनता के साथ व्यवहार को लेकर नाराजगी जताई गई थी। सांसद और मंत्रियों की ओर से काडर के कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज कर समानांतर अपनी टीम खड़ी करने जैसी शिकायतें भी मिली थीं। अनुषांगिक संगठनों के फीडबैक के बाद अब सांसद और मंत्रियों को भी अनुषांगिक संगठनों के कार्यकर्ताओं के साथ व्यवहार सुधारने को कहा जाएगा।
    इतना ही नहीं बैठक में जिन विभागों से जुड़ी समस्याएं बताई गई थी उनके समाधान के लिए संबंधित मंत्री को भी सरकार और भाजपा प्रदेश मुख्यालय की ओर से निर्देशित किया जा रहा है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी का कहना है कि समन्वय बैठक में हुए निर्णयों पर कार्रवाई की जा रही है।

  • योगी सरकार ने किए ताबड़तोड़ तबादले, कई जिलों के डीएम और सीडीओ बदले, देखें लिस्ट

    योगी सरकार ने किए ताबड़तोड़ तबादले, कई जिलों के डीएम और सीडीओ बदले, देखें लिस्ट

    योगी सरकार ने किए ताबड़तोड़ तबादले, कई जिलों के डीएम और सीडीओ बदले, देखें लिस्ट

    लखनऊ
    उत्तर प्रदेश में कई जिलों के डीएम और सीडीओ बदले गए हैं। 2013 बैच के आईएएस सत्येन्द्र कुमार महाराजगंज से बाराबंकी का जिलाधिकारी बनाया गया है। इनके अलावा 2015 बैच के आईएएस अनुनय झा, जो कि नगर आयुक्त मथुरा थे, उन्हें महाराजगंज का जिलाधिकारी बनाया गया है।

    उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने ताबड़तोड़ तबादले करते हुए कई जिलों के जिलाधिकारी और सीडीओ के तबादले किए गए हैं। फतेहपुर, सुल्तानपुर, महाराजगंज, बाराबंकी, झांसी व बरेली के जिलाधिकारी बदले गए हैं। बताया जा रहा है कि सुल्तानपुर में चिकित्सक हत्याकांड के बाद जिले के जिलाधिकारी का तबादला कर दिया गया है।

    2013 बैच के आईएएस सत्येन्द्र कुमार को महाराजगंज से हटाकर बाराबंकी का जिलाधिकारी बनाया गया है। इनके अलावा 2015 बैच के आईएएस अनुनय झा, जो कि नगर आयुक्त मथुरा थे, उन्हें महराजगंज का जिलाधिकारी बनाया गया है।

    बलिया के सीडीओ आईएएस प्रवीण वर्मा को बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण का सीईओ बनाया गया है। 2011 बैच के आईएएस रवींद्र कुमार-II को झांसी के डीएम पद से हटाकर बरेली के जिलाधिकारी की जिम्मेदारी दी गई है। 2013 बैच के अविनाश कुमार को बाराबंकी डीएम के पद से हटाकर झांसी का जिलाधिकारी बनाया गया है।

    आईएएस सी इंदुमती को फतेहपुर और आईएएस कृतिका ज्योत्सना को सुल्तानपुर का जिलाधिकारी नियुक्त किया गया है।

     

  • अंडे की दुकान पर मार्फीन बेच रहा था युवक, पुलिस ने जाल बिछाकर दबोचा

    अंडे की दुकान पर मार्फीन बेच रहा था युवक, पुलिस ने जाल बिछाकर दबोचा

    अंडे की दुकान पर मार्फीन बेच रहा था युवक, पुलिस ने जाल बिछाकर दबोचा

    लखनऊ
    अंडे की दुकान पर मार्फीन बेच रहे दुकानदार को पुलिस ने जाल बिछाकर गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने अपने मुखबिरों की मदद से कारोबारी को दबोचा।

    राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच -27 पर स्थित मियां का पुरवा ओवरब्रिज के किनारे स्थित एक दुकानदार अंडे के साथ में मार्फीन बेच रहा था। इसकी भनक लगते ही पुलिस ने ऐसा जाल बिछाया कि अंडा बेचने वाला दुकानदार रंगे हाथ मार्फीन की पुड़िया बेंचते दबोच लिया गया। मामला पटरंगा थाना क्षेत्र अंतर्गत मियां पुरवा चौराहे के समीप का है।

    बताते चले कि मियां पुरवा चौराहा निवासी अरमान (25) की ओवरब्रिज के किनारे अंडे की दुकान है। पुलिस के अनुसार दुकानदार अरमान अपनी दुकान में अंडे की आड़ में मार्फीन की पुड़िया बेचने का कारोबार करता था। इसकी भनक पुलिस को लगी। पुलिस द्वारा अपने मुखबिरों को सक्रिय कर अवैध कारोबारी को दबोचने के लिए जाल बिछाया गया।

     

    निर्धारित प्लान के तहत एक व्यक्ति ग्राहक बनकर दुकानदार से अंडे खरीदता है फिर मार्फीन की पुड़िया मांगता है। दुकानदार अरमान जैसे ही माचिस की डिबिया से एक पुड़िया निकाल कर देता है जिसे देखते ही वहीं पास में खड़ी पुलिस ने उसे रंगे हाथ दबोच लिया। पुलिस की इस कार्रवाई को देख चौराहे पर अफरा तफरी मच गई।

    एसओ ओम प्रकाश ने बताया कि इस दुकानदार द्वारा मार्फीन बेचने की शिकायत कई दिनों से मिल रही थी जिसे शुक्रवार की देर शाम रंगे हाथ दबोच लिया गया। जिसके पास से 25 पुड़िया मार्फीन बरामद हुई है। इन्होंने बताया गिरफ्तार अभियुक्त के विरुद्ध धारा 8/21 एनडीपीएस के तहत मुकदमा दर्ज कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

  • डॉ. भीमराव आंबेडकर भारत के पहले कामध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव: सपा-कांग्रेस के बीच होगा गठबंधन! शीर्ष नेतृत्व के बीच बातचीत, जल्द हो सकता है एलान

    डॉ. भीमराव आंबेडकर भारत के पहले कामध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव: सपा-कांग्रेस के बीच होगा गठबंधन! शीर्ष नेतृत्व के बीच बातचीत, जल्द हो सकता है एलान

    डॉ. भीमराव आंबेडकर भारत के पहले कामध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव: सपा-कांग्रेस के बीच होगा गठबंधन! शीर्ष नेतृत्व के बीच बातचीत, जल्द हो सकता है एलान

    लखनऊ

    मध्य प्रदेश में 25-30 सीटों पर यादव मतदाता निर्णायक माने जाते हैं। हालांकि, करीब 50 सीटों पर इनकी ठीक-ठाक संख्या है। वहां मुस्लिमों का रुझान कांग्रेस के प्रति है, पर यादव मतदाताओं पर भाजपा की अच्छी पकड़ मानी जाती है।

    मध्य प्रदेश के मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने पूरी ताकत के साथ चुनाव मैदान में उतरने की रणनीति बनाई है। इसके तहत वोट प्लस करने वाले अन्य दलों को साथ लाने की उसकी योजना है।
    यूं तो मध्य प्रदेश में सपा का कोई बड़ा जनाधार नहीं है, लेकिन यादव बहुल कई सीटों पर उसका पहले से ही अच्छा दखल रहा है।

    साल 2003 के विधानसभा चुनाव में सपा सात सीटें जीत भी चुकी है। पिछले विधानसभा चुनाव में सपा ने बिजावर सीट जीती थी, जबकि पांच सीटों पर दूसरे नंबर पर रही थी। सूत्रों के मुताबिक, इन छह सीटों के अलावा चार अन्य सीटें सपा गठबंधन के तहत मांग रही है।
    2018 के चुनाव में सपा ने कुछ सीटों पर किया था बेहतर प्रदर्शन
    सपा के रणनीतिकारों का मानना है कि 2018 के चुनाव में सपा के बेहतर प्रदर्शन वाली सीटों को देने में कांग्रेस को कोई दिक्कत भी नहीं होनी चाहिए, क्योंकि पिछले चुनाव में इन सीटों पर मुख्य मुकाबला सपा व भाजपा के बीच रहा था। कांग्रेस आमने-सामने की लड़ाई में नहीं थी।
    दोनों पार्टियों के प्रमुख नेता साझा करेंगे मंच
    राज्य में सपा व कांग्रेस गठबंधन के पैरोकारों का कहना है कि दोनों पार्टियों के साथ आने पर अखिलेश यादव समेत सभी प्रमुख नेता साझा मंच से प्रचार करेंगे तो यादव मतदाताओं को साथ लाने में मदद मिलेगी। इससे अंततः कांग्रेस को ही फायदा होगा। दूसरी ओर सपा राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा पाने की ओर बढ़ेगी।
    मध्य प्रदेश में गठबंधन की चल रही बात: जावेद
    विपक्षी गठबंधन इंडिया की समन्वय समिति में सपा की ओर से सदस्य व राज्यसभा सांसद जावेद अली खान स्वीकार करते हैं कि मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनाव में साझेदारी के लिए सपा और कांग्रेस के बीच बात चल रही है। अगर बातचीत नतीजे पर पहुंचती है तो यह दोनों दलों के लिए फायदेमंद होगा।
    दबाव की रणनीति के साथ आगे बढ़ रही सपा
    सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव 27 व 28 सितंबर को मध्य प्रदेश के दौरे पर रहे थे। उन्होंने वहां जातीय जनगणना के कांग्रेस के समर्थन को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ना बताया था। साथ ही यह भी कहा था कि जिसे कांग्रेस टिकट न दे, उसे सपा चुनाव लड़ा सकती है।

    राजनीतिक हलकों में इसे दबाव की राजनीति माना जा रहा है, ताकि कुछ खास हिस्सों में अपनी पकड़ दिखाते हुए यह भी अहसास करा दिया जाए कि गठबंधन पर बात न बनने पर मध्य प्रदेश में सपा किस हद तक जा सकती है। इसी रणनीति के तहत सपा छह सीटों पर अपने उम्मीदवार घोषित कर चुकी है।

  • अगर दिखना है खूबसूरत तो गाउन पहनते वक्त ना करें ये गलतियांं

    अगर दिखना है खूबसूरत तो गाउन पहनते वक्त ना करें ये गलतियांं

    अगर दिखना है खूबसूरत तो गाउन पहनते वक्त ना करें ये गलतियांं
    नई दिल्ली शादी विवाह के कार्यक्रमों में महिलाओं को गाउन पहनना काफी पसंद होता है। गाउन एक ऐसा परिधान होता है, जिसे कम उम्र की लड़कियों के साथ-साथ महिलाएं तक काफी मन से पहनती हैं। ये पहनने में काफी कंर्फटेबल होता है। महिलाओं के लिए साड़ी को संभालना बेहद मुश्किल होता है और वहीं सूट का दुपट्टा संभालना काफी कठिन होता है, इसलिए महिलाओं को गाउन पहनना पसंद होता है।

    वैसे तो गाउन पहनना बेहद आसान होता है लेकिन कई महिलाएं गाउन पहनते वक्त भी कुछ ऐसी गलतियां कर देती हैं, जिससे उनका लुक खराब हो जाता है। दरअसल, जिस प्रकार से साड़ी और सूट पहनने का सही तरीका होता है, ठीक उसी प्रकार गाउन पहनते वक्त भी कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है। ऐसे में आज के लेख में हम आपको उन बातों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनका ध्यान आपको गाउन पहनते वक्त रखना है।

    बहुत सी महिलाएं ऐसी होती हैं जो लहंगे और गाउन को दोनों को एक ही तरह से कैरी करती हैं। उन्हें लगता है कि अगर गाउन के साथ लहंगे के जैसा दुपट्टा कैरी कर लेंगी तो उन का लुक एथनिक हो जाएगा। जबकि गाउन और लहंगे दोनों के साथ अलग तरीके की ज्वेलरी पहनी जाती है और अलग तरह से ही मेकअप किया जाता है।

    गाउन पहनते वक्त ये ध्यान रखें कि आप इसके साथ लहंगे की तरह हैवी ज्वेलरी कैरी नहीं कर सकतीं। गाउन के साथ हैवी ज्वेलरी आपके लुक को बिगाड़ सकती है। ऐसे में गाउन के लुक को परफेक्ट बनाने के लिए हल्की ज्वेलरी का ही चयन करें।

    हील्स पर दें ध्यान

    गाउन के साथ परफेक्ट लुक पाने के लिए आपको हील्स पहनते वक्त कई बातों का ध्यान रखना है। अगर आपका गाउन काफी ज्यादा हैवी है तो ध्यान रखें कि हाई हील्स आपको परेशानी में डाल सकती हैं। ऐसे में गाउन के हिसाब से ही फुटवियर का चयन करें।

    हेयर स्टाइल को गाउन के हिसाब से करें सेट

    गाउन पहनने के बाद ये कुछ प्यारी सी हेयर स्टाइल जरूर बनाएं। अगर आप ऐसा करेंगी तो आपका लुक काफी खूबसरत लगेगा। हर जगह खुले बाल रखने से लुक खराब हो सकता है। कई बार खुले बाल आपके गाउन में अटक भी सकते हैं।

    मेकअप का रखें ध्यान

    अक्सर महिलाएं खूबसूरत दिखने के लिए डार्क मेकअप कर लेती हैं, जबकि आपको मेकअप करते वक्त अपने गाउन के रंग और कढ़ाई पर खास ध्यान रखना चाहिए। ताकि आपका लुक बिगड़े ना।