देहरादून। उत्तराखण्ड राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा की हमारे राज्य उत्तराखण्ड में तीसरी जी-20 इंफ्रास्ट्रक्चर कार्यसमिति की बैठक आयोजित हो रही है। उत्तराखण्ड ने जी- 20 की दो बैठकों की सफल मेजबानी के साथ पूरी दुनिया को अपनी समृद्ध परंपरा, संस्कृति और चौमुखी विकास से रूबरू कराया है। भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में वर्ल्ड क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर आज उत्तराखण्ड नये भारत की तस्वीर बन रहा है। यहां “ऑल वेदर रोड” से पर्यटन के क्षेत्र में तेजी से विकास हुआ है। हाईवे, एक्सप्रेस वे, फ्लाईओवर, रोपवे और नये पुलों के निर्माण से यातायात सुगम हो रहा है। वंदे भारत ट्रेन की सौगात के साथ “ऋषिकेश- कर्णप्रयाग रेल लाइन” पहाड़ों में रेल के सपने को साकार करने जा रही है। टनकपुर- बागेश्वर रेल लाइन पर भी काम जल्द शुरू होने जा रहा है। हर घर बिजली और जल के कनेक्शन देने जैसी लोक कल्याणकारी योजनाओं के साथ ही राज्य की आधारभूत अवस्थापना सुविधाओं के विकास के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। उत्तराखण्ड राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा की हम सब मिलकर उत्तराखण्ड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने का प्रण लेते हैं।
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वाराणसी नगर निगम का फेसबुक का ऑफिशियल पेज हुआ हैक, हैकरों ने अपलोड किया पोर्न वीडियो,,,।
वाराणसी नगर निगम के ऑफिशियल फेसबुक पेज पर पिछले कुछ घंटों से एडल्ट्स वीडियो अपलोड किए जा रहे हैं। वाराणसी नगर निगम के ऑफिशियल फेसबुक पेज हैक करके ये हरकत की जा रही है। वाराणसी के नगर निगम आयुक्तशिपू गिरी ने बताया कि पेज हैक की जानकारी पुलिस को दे दी है। वाराणसी नगर निगम के फेसबुक पेज पर इस तरह का कंटेंट देखकर सब हैरान हैं और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।पोर्न कंटेंट शेयर होते ही मचा हड़कंपसाइबर हैकरों ने वाराणसी नगर निगम का ऑफिशियल पेज हैक करते हुए पोर्न वीडियो अपलोड कर दिया।जिसके बाद जैसे ही लोगों ने फेसबुक पेज खोला तो उसपर पोर्न विडियो दिखने लगा। जिसके बाद नगर निगम की तरफ से पुलिस को लिखित कंप्लेंट किया गया। फिलहाल सिगरा पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है। वही इस पूरे मामले पर जानकारी करने के लिए नगर आयुक्त को फोन किया गया तो हमेशा की तरह नगर आयुक्त का मोबाइल नॉट रिचेबल पर चला गया। -

परिवहन आयुक्त किस पर चाहते हैं नियंत्रण :- वाहन मालिक या प्रदुषण
उच्चतम न्यायालय के आदेश का नाम लेकर पक्षपात पूर्ण डीजल वाहनों के पंजीकरण खोलने के आदेश के खिलाफ़ वाहन मालिकों की बगावत शुरू
परिवहन विभाग द्वारा दिल्ली में डीजल वाहनों के पंजीकरण को जिन शर्तों के साथ शुरू करने के आदेश पारित किए हैं उससे दिल्ली के अधिकतर परिवहन क्षेत्र से जुड़े मालिको, संस्थाओं, यूनियन, एनजीओ एवम् ट्रस्टों में रोष है।
बड़ा सवाल:- क्या परिवहन विभाग द्वारा दिल्ली में प्रदुषण पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से डीजल वाहनों का व्यवसायिक गतिविधियों के लिए पंजीकरण बंद किया था ?
अगर दिल्ली में डीजल वाहनों का पंजीकरण प्रदुषण नियंत्रण के उद्देश्य से लगाया गया था तो यूरो VI डीजल इंजन के वाहनों से निकलने वाला प्रदुषण सीएनजी से चलने वाले वाहनों से भी कम है की रिपोर्ट उजागर होने के साथ ही दिल्ली परिवहन विभाग ने दिल्ली में प्रदुषण नियंत्रण की गंभीरता को समझते हुए तत्काल प्रभाव से दिल्ली में डीजल वाहनों का पंजीकरण क्यो नही शूरू किया ?
इसके बावजूद दिल्ली परिवहन विभाग के द्वारा कुछ महीनों पहले दिल्ली से अंतरराजकिय बस रूट पर डीजल बसों द्वारा प्रीमियम बस सेवा शुरू करने के उद्देश्य से कानूनी राय ली गई थी और उसमे भी डीजल यूरो VI वाहनों के पंजीकरण को हरी झंडी मिल गई थी,
अब पिछले महीने एक एसोसिएशन द्वारा उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर कर डीजल बसों के पंजीकरण शुरू करने के आदेश पारित करवाए गएइन सभी बातों को ध्यान में रखकर देखा जाए तो दिल्ली में डीजल वाहनों के पंजीकरण में किसी प्रकार की रुकावट /शर्त नही होनी चाहिए पर दिल्ली के परिवहन आयुक्त द्वारा शर्तो के साथ आदेश पारित करवाना यह सिद्ध करता है की वह नही चाहते की दिल्ली का वाहन मालिक जो दिल्ली की जनता और बाहरी राज्यों / विदेशी पर्यटकों को सुरक्षित और विश्वसनीय सेवा प्रदान करते आ रहे हैं वह दिल्ली में अपना निजी डीजल वाहन पंजीकरण करवा पाए ।
परिवहन आयुक्त आशीष कुंद्रा को दिल्ली के सभी पर्यटक स्थलों, धार्मिक स्थलों, अन्य सभी घूमने- देखने के स्थलों और व्यवसायिक बाजारों में दिल्ली से बाहर के राज्यो के व्यवसायिक नम्बर के पंजीकृत अनगिनत डीजल वाहनों का खड़ा होना और दिल्ली की सड़को पर 24 घंटे 12 महीनों तक बेखौफ चलते रहना नही दिखता या देखना नही चाहते ?
क्या परिवहन आयुक्त आशीष कुंद्रा का यह मानना है की दिल्ली से बाहर के राज्यो के यूरो-II और यूरो-IV के पंजीकृत हजारों की तादाद के डीजल वाहन जो बेखौफ दिल्ली की सड़को पर चल रहे हैं से प्रदूषण नही होता ?
क्या प्रदुषण सिर्फ दिल्ली के पंजीकृत डीजल वाहनों से ही निकलता है इसलिए दिल्ली में डीजल वाहनों का पंजीकरण बंद कर रखा हैं चाहें वह यूरो VI इंजन के डीजल वाहन ही क्यों ना हो जिनका प्रदूषण सीएनजी वाहनों से भी कम है (गूगल सर्च कंपेरिजन रिपोर्ट की कॉपी स्लगन)
स्पेशल कमिश्नर शिल्पा शिंदे द्वारा हस्ताक्षरित आदेश NO. F.DTO(HQ)/ 2022/11/CD No. 075689410/59404 Dated June, 23, 2023. जारी हुआ। इस आदेश में कहा गया है दिल्ली में बीएस 6 डीजल बसें उन्ही वाहन मालिकों की पंजीकृत होंगी जिनके पास विदेश मंत्रालय, दूतावास या किसी मंत्रालय या अन्य अथॉरिटी द्वारा वाहनों का मांग पत्र (एग्रीमेंट) उपल्ब्ध होगा और पंजीकृत करे गए वाहन G 20 शिखर सम्मेलन में चलेंगे । 7+1 एवम् उससे अधिक सवारी क्षमता के डीजल यूरो 6 वाहनों को दिल्ली परिवहन विभाग द्वारा पंजीकृत करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है । पंजीकरण करने से पहले परिवहन विभाग का शाखा प्रबंधक इस बात की जांच करेगा की यह वाहन G20 शिखर सम्मलेन से जुड़ा है, (आदेश की कापी स्लगन)
दिल्ली के छोटे बड़े ट्रांसपोर्टर्स को ना तो G20 शिखर सम्मलेन में काम मिला है और ना ही मिलेगा, लेकिन हर साल देश और विदेश से लाखों पर्यटक दिल्ली में आते है और दिल्ली के पंजीकृत वाहनों के ना उपल्ब्ध होने पर अन्य राज्यों के पंजीकृत डीजल वाहनों का प्रयोग करने को मजबूर रहते हैं । दिल्ली के साधन संपन्न ट्रांसपोर्टर्स दुसरे राज्यों में डीजल बसें पंजीकृत करवा कर दिल्ली में चलाते हैं और अन्य ट्रांसपोर्टर अपने रोजगार को बनाए रखने के लिए बाहरी राज्यों के डीजल वाहनों को किराए पर लेने के लिए मजबूर रहते है ।
अब सवाल यह उठता है बाहरी राज्यों के पंजीकृत डीजल वाहनों के बेखौफ दिल्ली की सड़को पर 24 घंटे चलन के बावजूद कैसे परिवहन विभाग करता है प्रदुषण नियंत्रण? यह बात आज तक दिल्ली की जनता और वाहन क्षेत्र के व्यवसाई नही समझ पाए ।
यहां एक बात समझ आती है दिल्ली परिवहन विभाग और दिल्ली सरकार ग्रीन टैक्स के नाम पर जो करोड़ों रुपए बटोर रहे हैं अगर दिल्ली में डीजल वाहनो का पंजीकरण शुरू कर देंगे तो बटोरे जाने वाले करोड़ों रुपए में गिरावट आ जाएगी जो किसी भी क़ीमत पर परिवहन आयुक्त आशीष कुंद्रा को गवारा नहीं होगा, प्रदूषण नियत्रण का नाम लेकर डीजल वाहनों का पंजीकरण रोकना तो सिर्फ एक दिखावा है।
दिल्ली परिवहन विभाग की जब इच्छा होती है वायु गुणवता पर्यावरण के नाम पर दिल्ली के पंजीकृत बीएस 4 डीजल टैक्सियों को बंद करने के आदेश पारित कर बीएस 6 डीजल टैक्सी को चलने की इजाजत दे देता हैं। जब दिल्ली में यूरो 6 डीजल वाहनों का पंजीकरण ही बंद हैं तो बाहरी राज्यों के पंजीकृत वाहनों के लिए दिल्ली में चलने के लिए छूट क्यों?
कुछ महीनों पहले स्वयं दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने यह स्वीकार किया और बयान दिया था बीएस 6 डीजल वाहन पर्यावरण के अनूकूल है और पर्यावरण के लिए सीएनजी वाहनों से बेहतर है.
सबसे बड़ा सवाल G 20 शिखर सम्मेलन अक्टूबर 2023 में खत्म हो जायेगा क्या दिल्ली परिवहन विभाग जिन वाहनों को जी20 के लिए पंजीकृत कर रहा है उनका पंजीकरण अक्टूबर में रद्द करेगा?
दिल्ली सरकार और परिवहन विभाग अगर दिल्ली के छोटे ट्रांसपोर्टर्स के साथ भेद भाव करेगें तो G20 शिखर सम्मेलन पर विरोध प्रदर्शन होगा और इस विरोध प्रदर्शन के लिए जिम्मेदार होगें दिल्ली सरकार और परिवहन विभाग दिल्ली
दूसरा बड़ा सवाल:- दिल्ली की जनता और ट्रांसपोर्टर्स के हित के सारे फैसलो को करवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट जाना ही जरूरी है तो फिर लोकतंत्र या दिल्ली में चुनाव से बनी सरकार और सरकारी विभाग खास तौर से परिवहन विभाग दिल्ली की क्या है जरुरत ?
तीसरा सवाल:- दिल्ली बॉर्डर से अंदाजन आधा किलोमीटर की दूरी पर लाखों डीजल वाहन पंजीकरण करवाकर लोग दिल्ली में चलाते है, फिर दिल्ली में पंजीकरण पर रोक क्यों ?
परिवहन आयुक्त आशीष कुंद्रा जवाब दें क्या हमारा दिल्ली का नागरिक होना और वाहन क्षेत्र मे काम करना ही सबसे बड़ा कसूर और जुर्म है?



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प्रतिबंधित प्लास्टिक एवं कचरा फैलाने वालों पर लगातार कार्यवाही
भिलाईनगर/ नगर पालिक निगम भिलाई क्षेत्र में प्लास्टिक मुक्त अभियान को लेकर कार्रवाई निरंतर जारी है, निगम के सभी जोन कार्यालयों में स्वास्थ्य विभाग की टीम शहर में प्लास्टिक एवं झिल्ली पन्नी के कचरों के रोकथाम के लिए बाजार व व्यवसायिक क्षेत्र में कार्रवाई कर रहे है। टीम के द्वारा निरीक्षण के दौरान कहीं भी प्लास्टिक या अन्य कचरा फैलाते हुए पाए जाने पर उनसे जुर्माना भी लिया जा रहा है। बाजार क्षेत्र में प्रतिबंधित झिल्ली, पन्नी विक्रय एवं उपयोग करते हुए पाए जाने पर प्रतिबंधित सामग्री को जप्त किया जा रहा है। आज निगम की टीम ने 6300 का जुर्माना वसूल किए। भिलाई शहर को झिल्ली, पन्नी के कचरों को समाप्त कर प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए लगातार बाजार तथा व्यवसायिक क्षेत्रों एवं दुकानों में निरीक्षण कर प्रतिबंधित प्लास्टिक एवं सिंगल यूज प्लास्टिक पर जप्ती बनाने की कार्रवाई की जा रही है, ताकि हमारा शहर साफ सुथरा हो और झिल्ली पन्नी के कचरों से फैलने वाले दुष्प्रभाव की रोकथाम हो सके। इसके लिए निगम प्रशासन द्वारा सभी 5 जोन कार्यालयों में गठित टीम द्वारा अलग-अलग जगहों पर दुकानों, व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में छापेमार कार्रवाई की जा रही है। जहां भी सिंगल यूज प्लास्टिक व प्रतिबंधित प्लास्टिक, पानी पाउच, गिलास, प्रतिबंधित झिल्ली, पन्नी, प्लास्टिक का दोना, पत्तल व प्लास्टिक अन्य सामग्री जो प्रतिबंधित है उस पर कार्रवाई की जा ही है। महापौर व निगम आयुक्त ने प्रतिबंधित प्लास्टिक एवं सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग तथा विक्रय नहीं करने की अपील शहरवासियों से की है। शहर को स्वच्छ और स्वस्थ रखने के लिए यह आवश्यक है कि प्रतिबंधित प्लास्टिक एवं सिंगल यूज प्लास्टिक का बहिष्कार करें। किसी भी प्रकार की सामग्री लेने के लिए कपड़े से बने थैले इत्यादि का उपयोग करें। भिलाई निगम ने सभी जोन में अभियान चलाकर बड़ी कार्रवाई प्रतिबंधित प्लास्टिक एवं सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ की है। प्लास्टिक से पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंचता है जिसको देखते हुए इस पर भिलाई निगम क्षेत्र में कड़ाई से कार्यवाही की जा रही है। रात्रि के समय भी सड़क किनारे ठेला या स्टॉल लगाकर व्यवसाय करते हुए प्रतिबंधित प्लास्टिक का उपयोग व विक्रय करने वालो पर लगाम लगाया जा रहा है। इसके अलावा कचरे को इधर उधर फेंकते वाले, बिल्डिंग मटेरियल डंप कर सड़क बाधा, सीएनडी वेस्ट इत्यादि पर लगातार कार्यवाही की जा रही है।

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महमूद कबाड़ी के फरार रहने से मोहन नगर पुलिस पर उठ रही उंगलियां
दुर्ग//पिछले दिनों एस पी शलभ कुमार सिन्हा के द्वारा दुर्ग और भिलाई के तमाम बड़े छोटे कबाड़ीयो पर ताबड़तोड़ कार्यवाही की गई इन कबाडियो के पास से लाखों का कबाड़ भी बरामद हुआ वहीं मोहन नगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सिकोला बस्ती आलू गोदाम के पास कबाड़ का काम करने वाला महमूद कबाड़ी अब तक फरार है आपको बता दें कि जिस स्थान पर महमूद कबाड़ी अपनी दुकान संचालित करता है उससे महज तीन सौ मीटर की दूरी पर मोहन नगर पुलिस थाना है बावजूद इसके पुलिस अन्य कबाड़ी यो को तो पकड़ कर ऊनपर कार्यवाही कर रही है लेकिन यह बात समझ से परे है कि मोहन नगर पुलिस की गिरफ्त से अब तक महमूद कबाड़ी कैसे फरार है महमूद कबाड़ी के इस तरह फरार होने से ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं की कहीं मोहन नगर पुलिस ने महमूद कबाड़ी के साथ सांठगांठ तो नहीं कर ली है जिसके कारण हफ्ते भर पहले कबाड़ीयो पर हुई कार्यवाही के बाद भी महमूद कबाड़ी अब तक सलाखों के पीछे नहीं पहुंचा और महमूद की दुकान संचालित चल रही है और महमूद फरार है यह बात मोहन नगर पुलिस की कार्यवाही पर सवालिया निशान लगा रही है
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कांग्रेस का एक-एक कार्यकर्ता महत्वपूर्ण : डॉ. चोलेश्वर चन्द्राकर; कांग्रेस की सत्ता वापसी के लिए पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ ने कसी कमर
छत्तीसगढ़
कोरबा/स्वराज टुडे: प्रदेश कांग्रेस कमेटी पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. चोलेश्वर चन्द्राकर ने जिला कांग्रेस कार्यालय में जिला कांग्रेस पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ की गुरुवार को अहम बैठक ली। जिले भर के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता इस बैठक में भारी संख्या में उपस्थित होकर संगठन की एकता का परिचय दिया।
बैठक को संबोधित करते हुए डॉ. चन्द्राकर ने कार्यकर्ताओं से आह्वान करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार ने ऐसी ऐसी योजनाएं निकाली, जिससे इन साढ़े 4 सालों में प्रदेश की तरक्की दिखी और आम जनता का विश्वास बढ़ा और सर्वहारा वर्ग खुशहाल हुआ।डॉ. चन्द्राकर ने कहा कि हमें फिर से कांग्रेस को जितानी है और दोबारा सत्ता वापसी के लिए सभी कार्यकर्ता कमर कस लें। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पिछड़ा वर्ग की जनसंख्या सबसे अधिक है और यदि हम एकता का परिचय दें तो कोई भी कांग्रेस को हरा नहीं सकता। उन्होंने कहा कि भूपेश सरकार ने प्रदेश में विकास के साथ प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाया जो विलुप्त हो रही थी। उन्होंने सवा करोड़ प्रदेश की जनता का मान बढ़ाया और उसमें आत्मविश्वास जागा। प्रदेश उपाध्यक्ष श्यामसुंदर सोनी ने भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा कि हमने प्रदेश में राम की जननी कौशिल्या के मंदिर को भव्यता प्रदान की और हर साल कौशिल्या महोत्सव के माध्यम से नारी शक्ति के मान को बढ़ाया। राम वनपथ गमन परिपथ के माध्यम से प्रदेश के आध्यात्म को नई पहचान दी, वहीं हमारे विधायक एवं राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने कोरबा में अद्वितीय रामदरबार का निर्माण कर कोरबा को धार्मिक नगरी बनाने महत्वपूर्ण कार्य किया। भाजपा ने अपने 15 साल के कार्यकाल में ऐसा कुछ नहीं किया, जिससे प्रदेश की पहचान बनी हो। राजीव गांधी किसान न्याय योजना, गोधन न्याय योजना, रीपा आदि के माध्यम से किसानों और ग्रामीणों की तरक्की हुई। इन साढ़े 4 सालों में प्रदेश की तस्वीर बदली है और प्रदेश की नई पहचान बनी।
शहर जिला अध्यक्ष गजानंद प्रसाद साहू ने कहा कि कोरबा में इस बार चारों सीट जितने के लिए सभी कार्यकर्ता एकजुट हो जाएं और भूपेश सरकार की योजना को लेकर जनता के पास जायें। उन्होंने कहा कि कोरबा शहर को ही देख लीजिए, हमारे विधायक एवं राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल के नेतृत्व में हर क्षेत्र में विकास झलक रहा है। प्रकोष्ठ के सलाहकार मुकेश राठौर ने कहा कि कांग्रेस ही प्रदेश की सही तरक्की कर सकती है और कांग्रेस किसानों, आदिवासियों, अनुसूचित वर्ग की तरक्की के लिए मार्ग प्रशस्त कर सकती हैं, इसलिए सभी वर्ग की खुशहाली के लिए संगठन को मजबूत करें और चुनाव में फिर से कांग्रेस को जिताने की पूरी कोशिश में लग जायें। ग्रामीण जिलाध्यक्ष राजेश मानिकपुरी ने कहा कि आज गांव गांव की तस्वीर बदली है।
नरवा, गरवा, घुरवा और बाड़ी योजना से किसानों को सिंचाई सुविधा और पशुधन की वृद्धि हुई है और किसानों की रूचि खेती किसानी की ओर बढ़ी हैं। ग्रामीण उपाध्यक्ष चन्द्रकुमार निर्णेजक ने कहा कि भूपेश सरकार ने खेती किसानी और ग्रामीणों को ध्यान में रखकर अर्थ व्यवस्था बनाई, जिससे ग्रामीणों और ग्रामों की तस्वीर बदली। शासकीय विभागों में हजारों भर्तियां निकाली जा रही है और हताश युवाओं में नई उम्मीद जागी है। बेरोजगारी भत्ता भी युवाओं को कैरियर सुधारने के लिए संजीवनी का काम रहा है। प्रदेश महामंत्री गोपाल यादव सहित अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे।
बैठक में प्रमुख रूप से ग्रामीण उपाध्यक्ष रामकुमार वर्मा, शहर उपाध्यक्ष प्रेमलाल साहू, जिला प्रवक्ता अमरू दास महंत, हाजी एकलाख दयाला, गणेश दास महंत, दुर्गा प्रसाद महतो, निर्मल कुमार साहू, विरेन्द्र राठौर, दिलशाद अली, राजेन्द्र सोनी, छतराम यादव, छोटेलाल पटेल, युवराज धीवर, कन्हैया राठौर, बद्री प्रसाद साहू, हरपाल सिह राठौर, डॉ. एचके राठौर, अनिल यादव, महेन्द्र निर्मलकर, शेखर यादव, द्वास राम साहू, रविकुमार, लक्ष्मी प्रसाद, धनेश्वर निर्मलकर, भरतदास वैष्णव, कृष्णी राठौर, कीर्तन बरेठ, ज्योति कौशिक, आरती सिंह, बबीता दिवान, सविता महंत, रमला महंत, गिरिजा बरेठ, संतोषी बरेठ, चित्ररेखा चन्द्रा, चन्द्रकांत कश्यप, लक्ष्मी विश्वकर्मा, रामगोपाल यादव, कृष्ण कुमार चौकसे, कार्तिक राम कैवर्त, जगेश्वर दास महंत, जितेन्द्र कुमार साहू, प्रदीप जायसवाल, जीवन यादव, श्याम कुमार यादव, शिवा जायसवाल, गंगा प्रसाद टंडन, गजेन्द्र कुमार राठौर, मनहरण यादव, सुखसागर मानिकपुरी, हेमंत कुमार चन्द्रा सहित बड़ी संख्या में जिले भर के कार्यकर्ता उपस्थित थे।
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सलमान खान और सोनाक्षी ने चुपचाप कर ली शादी, वायरल हो रही शादी की तस्वीरें
बॉलीवुड इंडस्ट्री के भाईजान यानी सलमान खान की फैन फॉलोइंग बहुत ज्यादा है। फैंस उनकी एक्टिंग के दीवाने हैं। एक्टर ने एक से बढ़कर एक कलाकारों के साथ काम किया है। आपको बता दें कि सलमान खान आए दिन सुर्खियों में रहते हैं।
एक्टर कभी अपनी तस्वीरों के चलते चर्चा में रहते हैं तो कभी अपनी फिल्मों के चलते। लेकिन इस बार वो अपनी शादी के चलते सुर्खियों में हैं। दरअसल, बीते दिनों एक्टर सलमान खान की एक तस्वीर वायरल हुई थी। जिसमें वो एक्ट्रेस सोनाक्षी सिन्हा के साथ नज़र आ रहे थे।
तस्वीर में साफतौर से देखा जा सकता है कि भाईजान सोनाक्षी सिन्हा को अंगूठी पहनाते नज़र आ रहे हैं। एक तरफ जहां सलमान ने शेरवानी पहन रखी है वहीं सोनाक्षी भी लाल साड़ी में सिंदूर लगाए दिख रही हैं।
बता दें कि दोनों की ये तस्वीर असली नहीं है। दोनों के चहरों को दूसरी तस्वीर पर फोटोशॉप किया गया है। जिसे देखकर साफ पता लगता है कि ये तस्वीर एडिटेड है।
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हिंदुत्व में शादी एक संस्कार है, कोई अनुबंध या आनंद की चीज नहीं- संघ
देश में समलैंगिक विवाह को लेकर चल रही बहस के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने केंद्र का समर्थन किया है। उन्होंने सामाजिक सरोकार से जुड़े समलैंगिक विवाह के विषय में स्पष्ट किया कि विवाह संस्कार है, अनुबंध नहीं।
विवाह दो विपरीत लिंग वालों के बीच ही होता हैदत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि भारतीय हिंदू दर्शन में विवाह एक संस्कार है। यह कोई कांट्रेक्ट या दो इंडीविजुअल लोगों के आनंद की चीज नहीं है। भारत में विवाह संस्कार है, अनुबंध नहीं। विवाह केवल अपने लिए नहीं, परिवार और समाज लिए भी है। विवाह दो विपरीत लिंग वालों के बीच ही होता है। दत्तात्रेय होसबाले का यह बयान केंद्र द्वारा अपने हलफनामे में समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने वाली याचिका का विरोध करने के बाद आया है।
केंद्र ने याचिकाओं का किया विरोध
केंद्र ने समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने की विभिन्न याचिकाओं के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट हलफनामा दायर किया है। हलफनामे में, केंद्र ने मांग का विरोध करते हुए कहा, समलैंगिकों के विवाह को कानूनी मान्यता देने वाली याचिकाओं को खारिज किया जाना चाहिए।
ट्रांसजेंडर समुदाय के लोगों ने भी दाखिल की याचिकाएं
सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं लंबित हैं जिनमें समलैंगिक विवाह को मान्यता देने की मांग की गई है। कुछ याचिकाएं ट्रांसजेंडर समुदाय के लोगों ने भी दाखिल की हुई हैं। केंद्र सरकार ने मामले में हलफनामा दाखिल कर याचिकाओं का विरोध किया है। सरकार ने हलफनामे में कहा है कि इसको मान्यता से पर्सनल ला और स्वीकार्य सामाजिक मूल्यों में संतुलन प्रभावित होगा। समान लिंग के व्यक्तियों के पार्टनर्स के रूप में साथ रहने और यौन संबंध रखने की भारतीय परिवार इकाई की अवधारणा के साथ तुलना नहीं की जा सकती।
देश में समलैंगिक विवाह पर चल रही बहस के बीच, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने मंगलवार को केंद्र की लाइन का समर्थन करते हुए कहा कि वह हिंदू जीवन में विवाह को ‘संस्कार’ मानता है जो न तो आनंद या अनुबंध के लिए है। लेकिन सामाजिक भलाई के लिए। यह केंद्र द्वारा अपने हलफनामे में समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने वाली याचिका का विरोध करने के बाद आया है, जिसमें कहा गया है कि समान लिंग वाले व्यक्तियों द्वारा भागीदारों के रूप में एक साथ रहना, जिसे अब डिक्रिमिनलाइज़ किया गया है, भारतीय परिवार इकाई के साथ तुलनीय नहीं है और वे स्पष्ट रूप से अलग-अलग वर्ग हैं जिन्हें समान रूप से नहीं माना जा सकता है।
“शादियां दो विपरीत लिंगों के बीच हो सकती हैं। हिंदू जीवन में विवाह ‘संस्कार’ है, यह आनंद के लिए नहीं है, न ही यह एक अनुबंध है। साथ रहना अलग है, लेकिन जिसे विवाह कहा जाता है वह हिंदू जीवन में एक ‘संस्कार’ है।” हजारों सालों से, जिसका अर्थ है कि दो व्यक्ति विवाह करते हैं और न केवल अपने लिए बल्कि परिवार और सामाजिक भलाई के लिए एक साथ रहते हैं। विवाह न तो यौन आनंद के लिए है और न ही एक अनुबंध के लिए, “उन्होंने कहा।
केंद्र ने अपने हलफनामे में कहा कि भारतीय लोकाचार के आधार पर इस तरह की सामाजिक नैतिकता और सार्वजनिक स्वीकृति का न्याय करना और लागू करना विधायिका के लिए है और कहा कि भारतीय संवैधानिक कानून न्यायशास्त्र में किसी भी आधार पर पश्चिमी निर्णयों को इस संदर्भ में आयात नहीं किया जा सकता है। हलफनामे में, केंद्र ने सर्वोच्च न्यायालय को अवगत कराया कि समान-लिंग वाले व्यक्तियों द्वारा भागीदारों के रूप में एक साथ रहना, जिसे अब डिक्रिमिनलाइज़ किया गया है, पति, पत्नी और बच्चों की भारतीय परिवार इकाई अवधारणा के साथ तुलनीय नहीं है।
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भारतीय सिनेमा ने एक स्वर्णिम इतिहास रचते हुए पहली बार दो ऑस्कर जीत कर जश्न का अभूतपूर्व अवसर प्रदत्त किया
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- भारतीय सिनेमा ने एक स्वर्णिम इतिहास रचते हुए पहली बार दो ऑस्कर जीत कर जश्न का अभूतपूर्व अवसर प्रदत्त किया है। आजादी के अमृत महोत्सव की अमृत बेला में 95वें ऑस्कर पुरस्कारों ने भारत सिनेमा में विशेष रूप से अमृतकाल को जन्म दिया है। अंतरराष्ट्रीय सिनेमा के सबसे चमकदार भव्य मंच पर एक साथ दो अलग अलग भारतीय फिल्मों ने बाजी मार कर हर भारतीय को गौरवान्वित किया है।तेलुगु फिल्म “आरआरआर” और डॉक्यूमेंट्री ‘द एलिफेंट विस्पर्स’ ने दो अलग-अलग श्रेणियों में ऑस्कर पुरस्कार जीत लिए हैं। हालांकि 91 साल के ऑस्कर इतिहास में अब तक किसी भी भारतीय फिल्म को ऑस्कर नहीं मिल सका है। कुछ ऐसे भारतीय कलाकार भानु अथैया, सत्यजीत रे, एआर रहमान एवं गुलजार जरूर रहे हैं, जिन्होंने अपने बेहतरीन प्रदर्शन के दम पर अकादमी पुरस्कार प्राप्त कर देश को गौरवान्वित करने का मौका दिया है।
फिल्म ‘स्लमडॉग मिलियनेयर’ के लिए ही रेसुल पोक्कुट्टी को ऑस्कर अवॉर्ड मिला था। उन्हें यह पुरस्कार ‘बेस्ट साउंड मिक्सिंग’ कैटेगरी में दिया गया था। वर्ष 2023 के ऑस्कर अवार्ड ने दुनियाभर में भारतीय फिल्म उद्योग की बढ़ती धमक का अहसास करा दिया है। लेकिन यह अनंत अथाह की एक लहर भर है। फिर भी यह अवसर है विजेताओं को बधाई देते हुए जश्न बनाने का एवं भविष्य में और अधिक ऑस्कर पुरुस्कार जीतने के लिये कमर कसने एवं संकल्पित होने का।
सच यह है कि आस्कर 2023 में भारत ने बेहतरीन सिनेमा के मामले में अपने स्तर पर एक अहम इतिहास दर्ज किया है। फिर भी यह अपने आप में एक सवाल है कि हर साल भारत में संख्या के लिहाज से करीब डेढ़ हजार फिल्में बनने के बावजूद उनमें से गिनती की कुछ फिल्मों को ही स्थायी महत्त्व की और वैश्विक स्तर पर प्रशंसा हासिल कर पाने वाली कृतियों के रूप में दर्ज किया जाता है।
इससे पहले भारतीय संदर्भों के साथ बनी ‘स्लमडाग मिलियनेयर’, ‘गांधी’ और ‘लाइफ आफ पाइ’ जैसी फिल्मों को आस्कर में अच्छी उपलब्धियां मिलीं थीं। खासतौर पर ‘स्लमडाग मिलियनेयर’ में ‘जय हो’ गाने के लिए एआर रहमान को पुरस्कार मिला था, लेकिन यह भी तथ्य है कि इन फिल्मों को भारतीय निर्देशकों ने नहीं बनाया था। हो सकता है कि ऑस्कर में भारत के हिस्से कम उपलब्धियां आई हों, लेकिन दुनिया भर में इन पुरस्कारों को जिस स्तर का माना जाता है, उसमें कुछ हासिल करना बहुत बड़ी चुनौती होती है। अब इस बार की कामयाबी के बाद उम्मीद की जानी चाहिए वैश्विक स्तर पर टक्कर देने वाली कुछ बेहतरीन फिल्में भी बनेंगी।
सिनेमा जगत का सबसे बड़ा अवार्ड ऑस्कर दुनिया में अपनी एक अलग पहचान रखता है। सिनेमा से जुड़े लगभग सभी कलाकार इस अवार्ड को जीतने की चाहते रखते हैं। दुनिया में वैसे तो सिनेमा के क्षेत्र में सैंकड़ों पुरस्कार दिये जाते हैं। लेकिन ऑस्कर को मनोरंजन के क्षेत्र में दिया जाने वाला विश्व का सबसे बड़ा पुरस्कार माना जाता है।
इस बार ऑस्कर अवार्ड से भारतीय फिल्म उद्योग को दुनियाभर में नई पहचान मिली है, दुनिया का ध्यान अपनी ओर खिंचा है। सवाल मुंबई फिल्म उद्योग और दक्षिण भारतीय फिल्म उद्योग के बीच अंतर करने का नहीं है। सवाल भारतीय सिनेमा को सार्थक बनाने का है। दशकों पहले विश्व सिनेमा से भारतीय दर्शकों को इतना भर परिचय था कि हॉलीवुड के बड़े स्टार्स के प्रेम-संबंध और स्कैंडल अखबारों में जगह पा जाते थे या कुछ फिल्मों के नाम सुनाई पड़ जाते थे। विश्व-सिनेमा अब भारतीय दर्शक के जीवन का एक कोना है। यही कारण है कि अब सार्थक सिनेमा की दृष्टि से भारत में प्रगति हो रही है।
भारतीय सिनेमा को ऑस्कर में लगातार खनक पैदा करने एवं अपनी उपस्थिति का अहसास कराने के लिये विश्व-सिनेमा के अनुरूप फिल्मों का निर्माण करना होगा, जो एक बिल्कुल अलग परिघटना है। इस सिनेमा में विषयों का अपार विस्तार है, भावों की विस्मित करती दुनिया है, इंसानी संबंधों के गहनतम आख्यान है। इनमें देश हैं, समाज हैं, संस्कृतियों और इतिहास है।
यह बड़ा ही विराट लोक है। विश्व इतिहास के चरित्रों और घटनाओं पर बनी स्पार्टाकस, ग्लैंडिएटर, नीरो, ट्रॉय, रोम, जैसी वृहत कैनवास पर रची महत गाथाएं हैं, तो समकालीन इतिहास को टटोलती नाजी कैंपों और विश्वयुद्धों की अनगिनत घटनाएं हैं। विश्व साहित्य की शायद ही कोई ऐसी महत्वपूर्ण कृति हो, जिस पर बेहतरीन फिल्म न बनी हो।
विश्व सिनेमा आज विश्व संस्कृति का एक नुमाइंदा है, भारत जिसका अभिन्न हिस्सा है, जिसके परिवेश, इतिहास, कला, साहित्य एवं संस्कृति पर दुनिया रोमांचित है। सारी दुनिया आज एक वैश्विक नागरिकता तलाश रही है। इस दृष्टि से सिनेमा की महत्वपूर्ण भूमिका है, भारतीय सिनेमा को इसमें कुछ अनूठे, खोजपूर्ण एवं सार्थक उपक्रम करने चाहिए।
अफसोस यह है कि हमारी खोज एवं उपक्रम आर्थिक और उपभोगगत दायरे में सिमटे हैं। हालांकि इसी आर्थिक राह से चलती संस्कृति भी अपने पंख फैलाती सारे विश्व में विचरण कर रही है। पर विश्व साहित्य, किसी पराए संसार के प्रतिनिधि हैं। पर वास्तव में ऐसा है नहीं। विश्व सिनेमा पर रचे गए पात्र समूची मानवता के दुख-सुख के प्रतिनिधि हैं। वे मनुष्य की सामूहिक पीड़ा और सामूहिक स्वप्नों से मिलकर बने हैं।
जैसे फिल्म ‘द एलिफेंट विस्पर्स’ हाथियों के संरक्षण पर बनी मार्मिक फिल्म है। ऑस्कर का विश्व-सिनेमा, मानव-हृदय का विशाल दर्पण है। हमें अपनी सोच को बदलना होगा। हजारों अविस्मरणीय किरदार और जिंदगी की असंख्य सच्चाइयों को खोलती हजारों कहानियां हमारे अपने मन और जीवन के आयाम बनने के रास्ते में खड़ी हैं। विश्व-सिनेमा के विशाल सागर में ऑस्कर से सम्मानित होने का अवसर सिर्फ एक लहर है, एक छोटी-सी झलक मात्र जो यह संदेश देना चाहती है कि जिंदगी उतनी ही नहीं हैं,
जितनी हमने जी या देखी-जानी है। भारतीय जिंदगी के रंग बेशुमार हैं, कला-संस्कृति की अविस्मरणीय धाराएं हैं, अनूठा एवं बेजोड़ इतिहास और उसकी कहानियां भी अनंत-अथाह। भारतीय सिनेमा अपना अजेंडा बदले एवं भारत की खिड़की से विश्व को देखने एवं विश्व को भारत दिखाने की पहल करें तो यही ऑस्कर की सीढ़ियां बन जायेगा।
- भारतीय सिनेमा ने एक स्वर्णिम इतिहास रचते हुए पहली बार दो ऑस्कर जीत कर जश्न का अभूतपूर्व अवसर प्रदत्त किया है। आजादी के अमृत महोत्सव की अमृत बेला में 95वें ऑस्कर पुरस्कारों ने भारत सिनेमा में विशेष रूप से अमृतकाल को जन्म दिया है। अंतरराष्ट्रीय सिनेमा के सबसे चमकदार भव्य मंच पर एक साथ दो अलग अलग भारतीय फिल्मों ने बाजी मार कर हर भारतीय को गौरवान्वित किया है।तेलुगु फिल्म “आरआरआर” और डॉक्यूमेंट्री ‘द एलिफेंट विस्पर्स’ ने दो अलग-अलग श्रेणियों में ऑस्कर पुरस्कार जीत लिए हैं। हालांकि 91 साल के ऑस्कर इतिहास में अब तक किसी भी भारतीय फिल्म को ऑस्कर नहीं मिल सका है। कुछ ऐसे भारतीय कलाकार भानु अथैया, सत्यजीत रे, एआर रहमान एवं गुलजार जरूर रहे हैं, जिन्होंने अपने बेहतरीन प्रदर्शन के दम पर अकादमी पुरस्कार प्राप्त कर देश को गौरवान्वित करने का मौका दिया है।
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Women’s WC: 23 फरवरी को सेमीफाइनल में चैंपियन ऑस्ट्रेलिया से भिड़ेगा भारत, PAK-इंग्लैंड मैच के बाद का पूरा समीकरण यहां पढ़ें,,,।
सेमीफाइनल के समीकरण इंग्लैंड ने ग्रुप-बी का अंत चार मैचों में चार जीत और आठ अंक के साथ किया। टीम अपने ग्रुप में शीर्ष स्थान पर रही। वहीं, भारतीय टीम ग्रुप-बी में दूसरे स्थान पर रही। टीम इंडिया ने सोमवार को आयरलैंड को हराकर अंतिम-चार में अपनी जगह पक्की की थी। हालांकि, तब ग्रुप पोजिशन फाइनल नहीं हुआ था। ग्रुप-बी से वेस्टइंडीज तीसरे, पाकिस्तान चौथे और आयरलैंड की टीम पांचवें स्थान पर रहते हुए विश्व कप से बाहर हो गई। अब सेमीफाइनल के मुकाबलों के समीकरण लगभग सामने आ चुके हैं।

भारत का सामना ऑस्ट्रेलिया से,,

ग्रुप-ए से डिफेंडिंग चैंपियन ऑस्ट्रेलियाई टीम चार में से चारों मुकाबले जीतकर आठ अंक के साथ शीर्ष पर है। उसका नेट रन रेट +2.149 है। हालांकि, इस ग्रुप से दूसरी टीम पर अब तक मुहर नहीं लग सका है। इसके लिए न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका के बीच जंग है। न्यूजीलैंड के चार मैचों में दो जीत और दो हार के साथ चार अंक हैं। वहीं, दक्षिण अफ्रीका के तीन मैचों में एक जीत और दो हार के साथ दो अंक हैं।
दक्षिण अफ्रीका को ग्रुप स्टेज का आखिरी मैच बांग्लादेश के खिलाफ खेलना है।अगरअफ्रीकी टीम अच्छे अंतर से जीतने में कामयाब होती है तो अंतिम-चार में पहुंच जाएगी। हारने पर न्यूजीलैंड की टीमसेमीफाइनल में पहुंचेगीहालांकि,इससेऑस्ट्रेलिया के पोजिशन पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। उसके आठ अंक की बराबरी न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका में से कोई टीम नहीं कर सकता। यानी भारत का सेमी फाइनल में सामना वर्ल्ड चैंपियंस ऑस्ट्रेलिया से होगा।
ग्रुप-बी में दूसरे स्थानपर रही टीम इंडिया दरअसल,सेमीफाइनल में ग्रुप-ए पर शीर्ष पर रहने वाली टीम का मुकाबला ग्रुप-बी में दूसरे स्थान पर रहने वाली से होना है। वहीं, ग्रुप-बी में शीर्ष पर रहने वाली टीम ग्रुप-ए में दूसरे स्थान पर रहने वाली टीम से भिड़ेगी।
यानी इंग्लैंड का सामना न्यूजीलैंड या दक्षिण अफ्रीका में से किसी एक टीम से होगा। भारतीय टीम अगर ग्रुप स्टेज के दौरान इंग्लैंड को हराने में कामयाब होती तो अपने ग्रुप में शीर्ष पर जगह बना सकती थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। भारत ने चार में से तीन मैचों में जीत हासिल की। छह अंक के साथ टीम इंडिया दूसरे स्थान पर रही।

ऑस्ट्रेलिया से 2020 का बदला लेने उतरेगी टीम इंडिया महिला टी20 विश्व कप का पहला सेमी फाइनल भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच 23 फरवरी को केपटाउन के न्यूलैंड्स स्टेडियम में खेला जाएगा। वहीं, दूसरा सेमीफाइनल 24 फरवरी को केपटाउन में खेला जाएगा। खिताबी मुकाबला 26 फरवरी को केपटाउन में खेला जाएगा।
हरमनप्रीत कौर के नेतृत्व में टीम इंडिया ऑस्ट्रेलिया को सेमी फाइनल में हराकर 2020 टी20 विश्व कप के फाइनल में मिली हार का बदला भी लेना चाहेगी। दोनों टीमों के बीच अब तक 30 टी20 मुकाबले खेले गए हैं। इनमें से सिर्फ छह मैचों में भारतीय टीम को जीत मिली है, जबकि 22 में ऑस्ट्रेलिया ने जीत हासिल की है। एक मैच टाई और एक मैच बेनतीजा रहा।
भारत-ऑस्ट्रेलिया टीमों के बीच के आंकड़े,,,,,,,
महिला टी20 विश्व कप में दोनों टीमें पांच बार आमने-सामने आ चुकी हैं। इनमें से टीम इंडिया ने दो मैच और ऑस्ट्रेलिया ने तीन मैचों में जीत हासिल की है। भारत के लिए अच्छी बात यह है कि महिला टी20 विश्व कप में खेले गए पिछले तीन मैचों में से दो में टीम ने जीत हासिल की है।
2018 में भारत ने ऑस्ट्रेलिया को 48 रन से हराया था। 2020 में फाइनल से पहले ग्रुप स्टेज में भारत ने ऑस्ट्रेलिया को 17 रन से शिकस्त दी थी। इससे पहले 2010 और 2012 टी20 विश्व कप में ऑस्ट्रेलियाई टीम ने जीत हासिल की थी।
