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  • कॉम्पैक्ट एसयूवी सेगमेंट में लॉन्च हुई नई कार, जानें पावर-माइलेज-फीचर्स और पूरी डिटेल्स

    कॉम्पैक्ट एसयूवी सेगमेंट में लॉन्च हुई नई कार, जानें पावर-माइलेज-फीचर्स और पूरी डिटेल्स

    कॉम्पैक्ट एसयूवी सेगमेंट में लॉन्च हुई नई कार, जानें पावर-माइलेज-फीचर्स और पूरी डिटेल्स
    नई दिल्ली आधिकारिक तौर पर भारत में लॉन्च कर दिया गया है। जापानी ऑटो दिग्गज ने होंडा एलिवेट के साथ कॉम्पैक्ट एसयूवी सेगमेंट में एंट्री की है, जहां वह ह्यूंदै क्रेटा, मारुति सुजुकी ग्रैंड विटारा और किआ सेल्टोस जैसी कारों को टक्कर देगी। एलिवेट एसयूवी चार वैरिएंट्स – एसवी, वी, वीएक्स और जेडएक्स में उपलब्ध है। एलिवेट के लिए बुकिंग जुलाई से चालू है। कार निर्माता सोमवार से ग्राहकों को डिलीवरी शुरू करेगा।

    होंडा की उम्मीदें
    होंडा को भारत में अपनी एसयूवी एलिवेट से काफी उम्मीदें हैं। सीआरवी, बीआर-वी और डब्ल्यूआर-वी की बिक्री संख्या बढ़ाने में नाकाम रहने के बाद, होंडा ने स्थिति को बदलने के लिए एलिवेट के साथ फिर से दांव खेला है। कार निर्माता ने कहा कि बुकिंग संख्या उत्साहजनक रही है, यह संकेत देते हुए कि एलिवेट उसे अपनी बिक्री बढ़ाने में मदद करेगी, कम से कम अभी के लिए। एलिवेट को खास तौर पर भारतीय बाजार को ध्यान में रखते हुए एक वैश्विक शहरी एसयूवी के रूप में डिजाइन किया गया है। होंडा बाद में वैश्विक बाजारों के लिए भी एलिवेट एसयूवी लॉन्च करेगी।

    इंजन, गियरबॉक्स और माइलेज
    होंडा एलिवेट एसयूवी में 1.5-लीटर DOHC i-VTEC पेट्रोल इंजन मिलता है। यह इंजन होंडा सिटी सेडान में भी इस्तेमाल की जाती है। यह इंजन 119 bhp का मैक्सिमम पावर और 145.1 Nm का पीक टॉर्क जेनरेट करता है। यह इंजन 6-स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स और एक एडवांस्ड सीवीटी गियरबॉक्स के साथ आएगा। होंडा का कहना है कि एलिवेट एसयूवी का मैनुअल वैरिएंट 15.31 किमी प्रति लीटर का माइलेज देता है। जबकि सीवीटी वर्जन 16.92 किमी प्रति लीटर का माइलेज देगा।

    लुक और डिजाइन
    डिजाइन की बात करें तो एलिवेट एसयूवी बॉक्सी फ्रंट प्रोफाइल के साथ आती है। इसमें एक बड़ा ब्लैक रेडिएटर ग्रिल, एलईडी हेडलाइट्स, इंटीग्रेटेड एलईडी डीआरएल, एलईडी टेललाइट्स, ब्लैक फॉग लैंप हाउसिंग और बड़े व्हील आर्च हाउसिंग स्पोर्टी 17-इंच अलॉय व्हील हैं। ब्लैक क्लैडिंग के साथ-साथ साइड में कैरेक्टर लाइन्स इसकी लुक को और आकर्षक बनाते हैं। एसयूवी में 220 मिमी का बड़ा ग्राउंड क्लीयरेंस भी मिलता है, जो सेगमेंट में सबसे ज्यादा है।

    कलर ऑप्शंस
    एलिवेट एसयूवी 7 सिंगल कलर ऑप्शंस में उपलब्ध है। इनमें प्लैटिनम व्हाइट पर्ल, लूनर सिल्वर मेटैलिक, ओब्सीडियन ब्लू पर्ल, रेडिएंट रेड मेटैलिक, गोल्डन ब्राउन मेटैलिक, मेटियोरॉइड ग्रे मेटैलिक और फीनिक्स ऑरेंज पर्ल जैसे रंग शामिल हैं। टॉप-एंड वेरिएंट में तीन डुअल-टोन विकल्प भी उपलब्ध होंगे – क्रिस्टल ब्लैक पर्ल रूफ के साथ फीनिक्स ऑरेंज पर्ल, क्रिस्टल ब्लैक पर्ल रूफ के साथ प्लैटिनम व्हाइट पर्ल और क्रिस्टल ब्लैक पर्ल रूफ के साथ रेडिएंट रेड मेटैलिक।

    एलिवेट एसयूवी का केबिन काफी स्पेशियस और सिंपल है। इसमें 10.25 इंच का टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम है जो वायरलेस स्मार्टफोन कनेक्टिविटी को सपोर्ट करता है। इसमें 7 इंच का एचडी कलर टीएफटी ड्राइवर डिस्प्ले भी है। इसमें ऑटोमैटिक क्लाइमेट कंट्रोल जैसी कई फीचर्स भी मिलते हैं।

     

     

  • बिज़ली बिल पर 5% Extra Tax और गाँव के ज़मीन पर भी लगेगा Property Tax. जानिए अपना महँगा जीवन

    बिज़ली बिल पर 5% Extra Tax और गाँव के ज़मीन पर भी लगेगा Property Tax. जानिए अपना महँगा जीवन

    बिज़ली बिल पर 5% Extra Tax और गाँव के ज़मीन पर भी लगेगा Property Tax. जानिए अपना महँगा जीवन
    पिछले कुछ वर्षों से आम आदमी के ऊपर, प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तरीके से करारोपण किया जा रहा है। सरकारों ने आम जनता को कामधेनु की गाय मान लिया है। जो सरकारों की हर इच्छा को पूरी करने में सक्षम है। इस करारोपण के दायरे में अब गरीब से गरीब व्यक्ति भी आ रहा है। भारत की अर्थतंत्र में करीब 32 फीसदी टैक्स अभी तक मध्यमवर्ग देता आया है।

    28% GST स्लैब में जी रहा अब INDIA.
    हाल ही के वर्षों में मध्यम वर्ग पर केंद्र सरकार तथा राज्य सरकारों और स्थानीय संस्थाओं द्वारा लगातार टेक्स, शुल्क एवं उपकर के नाम पर टेक्स का दायरा बढ़ाया जा रहा है । GST के माध्यम से अब गरीबों को भी भारी टैक्स के दायरे में ले लिया गया है। जीएसटी की बढ़ी हुई दरें 8, 12, 18 और 28 फीसदी अब गरीब आदमी को भी परेशान कर रही हैं। मजदूर हो, बेरोजगार हो, पेंशन से गुजारा करता हो । सभी को खाने-पीने एवं नियमित जरुरतों पर भारी टेक्स देना पड़ रहा है।

    वर्तमान में गरीब सबसे ज्यादा टेक्स दे रहा है.
    चाहे रेलवे की टिकट हो चाहे पेट्रोल डीजल का उपकर हो, खाने पीने का केंद्र एवं राज्य सरकारों ने यह मान लिया है, कि जनता के पास बहुत पैसा है। कोई भी टैक्स लगाते हैं, जनता उसको देने लगती है। जब तक जनता विरोध नहीं कर रही है। कोई भी सामान हो, किसी भी प्रकार की सेवाएं हो, सभी पर जीएसटी लागू है। इसकी मार सबसे ज्यादा गरीब और मध्यम वर्ग पर पड़ रही है। अब टैक्स की मार गांव-गांव तक पहुंच रही है।

    गाँव के ज़मीन पर टैक्स.
    गांव में प्रॉपर्टी टैक्स, जल कर, प्रकाश कर इत्यादि लगना शुरू हो गए हैं पिछले 8 वर्षों में जितने टैक्स बढ़े हैं। वह पिछले 50 सालों में नहीं लगे । सरकार ने सब्सिटी लागू कर दी। टेक्स बड़ा दिये । जिससे मंहगाई बड़ी। आय कम हो गई है। खर्च बड़ गये हैं।

    सरकार ने जानता को बनाया दुधारू गाय.
    केंद्र एवं राज्य सरकारों ने यह मान लिया है, कि जनता के पास बहुत पैसा है। कोई भी टैक्स लगाते हैं, जनता उसको देने लगती है। जब तक जा विरोध नहीं कर रही है, तब तक जनता की क्षमता टैक्स चुकाने की है। इसी को आधार बनाकर पिछले 8 वर्षों से लगातार टैक्स बढ़ाया जा रहा है। केंद्र एवं राज्य सरकारें अपना बोझ आम जनता के ऊपर धीरे-धीरे करके डाल रही हैं।

    आपसे वसूली और प्राइवेट को डिलीवरी.
    सरकारों के अपने खर्चे बहुत बढ़ रहे हैं. इंफ्रास्ट्रक्चर में सरकार जो खर्च कर रही है। उसका पैसा आम जनता से पैसा वसूल किया जा रहा है। सरकारी पैसा खर्च करके उसे निजी क्षेत्र को सौंपा जा रहा है। निजी क्षेत्र भी भारी कमाई कर रहे हैं। जनता के ऊपर बड़े पैमाने पर कर्ज बड़ रहा है। उसकी नियमित जिंदगी बहुत तनावपूर्ण हो गई है। जगह-जगह आत्महत्या, लड़ाई – झगड़े, लूट, चोरी, नशाखोरी इत्यादि की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।

    अब बिजली पर भी 5% Tax उपकर के रूप में.
    इसके बाद भी सरकारों का ध्यान इस ओर नहीं जा रहा है। मध्य प्रदेश सरकार अब बिजली के बिलों पर 5 फीसदी का बिजली उपकर लगाने जा रही है ।