Category: Desh Videsh

  • बाराबंकी में हाहाकार: मोहल्ले बने टापू, हर तरफ पानी ही पानी, लोग भूख प्यास से बेहाल, रेस्क्यू हुआ मुश्किल

    बाराबंकी में हाहाकार: मोहल्ले बने टापू, हर तरफ पानी ही पानी, लोग भूख प्यास से बेहाल, रेस्क्यू हुआ मुश्किल

    बाराबंकी में हाहाकार: मोहल्ले बने टापू, हर तरफ पानी ही पानी, लोग भूख प्यास से बेहाल, रेस्क्यू हुआ मुश्किल

    चौबीस घंटे की बारिश के बाद बाराबंकी शहर के हालात बेकाबू हो गए हैं। शहर के हजारों घरों में जहां पानी भर गया है वहीं सैकड़ों परिवार सड़क पर आ गए हैं। लोग दुकान के बरामदों, ओवरब्रिज के नीचे आश्रय लिए हुए हैं। मुख्य सड़क समेत आधा दर्जन सड़कों पर आवागमन बंद कर दिया गया है जबकि अधिकतर सड़कें पहले से जलमग्न है। रेल और बस सेवाएं भी प्रभावित हैं। पूरी रात रेस्क्यू चलता रहा। ढाई सौ से अधिक लोगों को जवानों द्वारा निकाला गया।

    बारिश थमने के बाद भी बाहरी क्षेत्र से आए पानी से शहर में हालात और बिगड़ते जा रहे हैं। सोमवार को रात और फिर पूरा दिन ही बारिश के बाद पूरे शहर में जलभराव हो गया था। जमुरिया नाला के किनारे बसे 500 घरों में पानी भर गया था। सोमवार को दिन भर 600 लोगों को स्टीमर से रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया लेकिन रात में हालात और बिगड़ते चले गए।

    सोमवार शाम तेज बारिश बंद होने के बाद हालात सुधरने की बजाय बिगड़ते चले गए। रात में शहर के बीच से गुजरा जमुरिया नाले का पानी पुलों के ऊपर से बहने लगा। कमरियाबाग, अभयनगर, हड्डीगंज, नईबस्ती, सत्य प्रेमी नगर समेत शहर के आधे से अधिक मोहल्ले टापू बन गए हैं।
    पानी लगातार बढ़ता ही जा रहा है। सभी सड़के पानी में डूबी हुई है। शहर के बीच से गुजरे लखनऊ अयोध्या हाईवे पर पानी भरने से आवागमन पर रोक लगा दी गई है। देवा रोड खुला है मगर इस रोड से शहर के अंदर जाने वाली सभी सड़कों पर आवागमन रोक दिया गया है।
    छाया चौराहा, राजकमल रोड, कमरियाबाग, सत्यप्रेमीनगर, पीरबटावन, दशहराबाग खलारिया, श्रीनगर जैसी कॉलोनी में जाने वाली सड़कों पर बैरियर लगाकर आवागमन बंद कर दिया गया है। पुलिस तैनात कर दी गई है। शहर के सभी स्कूलों में पानी भरा है और स्कूल पहले से ही बंद है। भीषण जलप्लावन के कारण सुबह शहर के मुख्य बाजार की इक्का दुक्का दुकानें खुली है। लोग दूध और अन्य जरूरी सामान के लिए भटकते रहे। शहर का कमरियाबाग का मुख्य कब्रिस्तान जलमग्न हो गया है।

    राहत और बचाव कार्य भी मुश्किल हो रहे हैं। वहीं, बाढ़ से ज्यादा प्रभावित हुए मोहल्ले के लोग सड़क पर आ गए हैं। तमाम लोग देवा रोड पर ओवर ब्रिज के नीचे मकान के बरामदों और दुकानों में शरण लिए हैं।
  • हरतालिका तीज की पूजा में दिखना है सबसे खूबसूरत तो पहनें इस तरह के लहंगे

    हरतालिका तीज की पूजा में दिखना है सबसे खूबसूरत तो पहनें इस तरह के लहंगे

    हरतालिका तीज की पूजा में दिखना है सबसे खूबसूरत तो पहनें इस तरह के लहंगे

     हरतालिका तीज का त्योहार हर सुहागिन महिला के लिए काफी अहम होता है। इस दिन महिलाएं करवाचौथ की तरह ही निर्जला व्रत रखकर अपने पति की लंबी उम्र के साथ-साथ उनकी तरक्की की कामना करती हैं। मान्यताओं के अनुसार हरतालिका तीज भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है।

    इसी क्रम में इस बार हरतालिका तीज 18 सितंबर यानी कि सोमवार को मनाई जाएगी। इस दिन महिलाएं पूरे दिन व्रत रखकर शाम में महादेव और माता गौरी की पूजा करती हैं। इस पूजा में वो 16 श्रृंगार करके तैयार होती हैं। महिलाएं इस दिन एथनिक वियर पहनती हैं।

    अगर आप भी इस बार हरतालिका की पूजा में लहंगा पहनने का सोच रही हैं तो आज के लेख में हम आपको लहंगे के कुछ लेटेस्ट लुक दिखाने जा रहे हैं। इन्हें देखकर आप भी अलग तरीके के स्टाइलिश लहंगे अपने लिए बनवा सकती हैं और त्योहार के दिन अपना जलवा दिखा सकती हैं।

    लहंगे में कैरी करें स्टाइलिश लुक

    लहंगा लेने से पहले ये जरूर तय कर लें कि आप उसे किस तरह के कैरी करना चाहती हैं। अगर आप इस तरह से लहंगे को पहनना चाहती हैं तो इसका दुपट्टा काफी लंबा होना चाहिए।

    सिल्क लहंगा

    आजकल इस तरह के सिल्क के लहंगे काफी चलन में हैं। ये आपको ऑनलाइन के साथ-साथ आसानी से बाजार तक में भी मिल जाते हैं। तीज के दिन ऐसा लहंगा पहनकर आप जलवा दिखा सकती हैं।

    नेट वाला लहंगा

    स्लीवलेस ब्लाउज के साथ इस तरह का नेट वाला लहंगा देखने में काफी प्यारा लगता है। इस तरह के लहंगे के साथ ब्लाउज हमेशा अलग रंग का लेना चाहिए। ये आपके लुक को और खूबसूरत बनाता है।

    हैवी वर्क सिल्क लहंगा

    अगर आपको सिल्क के फैब्रिक का लहंगा पसंद है लेकिन आप तीज पर कुछ हैवी पहनना चाह रही हैं तो इस तरह का लहंगा आपके लिए परफेक्ट है। इसे पहनकर आपका लुक काफी ग्लैमरस दिखेगा।

     

  • कहीं बेस्ट फ्रेंड को हमसफर तो नहीं समझते? इन संकेतों से करें सोलमेट की पहचान

    कहीं बेस्ट फ्रेंड को हमसफर तो नहीं समझते? इन संकेतों से करें सोलमेट की पहचान

    कहीं बेस्ट फ्रेंड को हमसफर तो नहीं समझते? इन संकेतों से करें सोलमेट की पहचान

    :अक्सर लोग बेस्ट फ्रेंड को ही सोलमेट मानने लगते हैं, लेकिन क्या वास्तव में ये दोनों एक ही होते हैं, या फिर दोनों के बीच कोई अंतर भी होता है?
    सोलमेट का शाब्दिक अर्थ होता है, आत्मा से साथी। इस रिश्ते का कोई नाम होने से ज्यादा आपको दिल से फीलिंग आती है। आप दोनों एक-दूसरे के साथ खुश रहते हैं और ज्यादा से ज्यादा समय बिताना पसंद करते हैं। आप दोनों भावनात्मक रूप से एक-दूसरे के साथ अत्यधिक जुड़े होते हैं। बिना कंडीशन वाला प्यार आपको आपके सोलमेट तक पहुंचाता है। इस तरह के प्यार में आपके सामने कोई कंडीशन नहीं होती है और यहीं से आपके सोलमेट की तलाश धीरे-धीरे खत्म हो जाती है, क्योंकि यही वह शख्स होता है, जो पूरी जिंदगी आपका साथ देता है। वैसे तो सच्ची दोस्ती में भी कंडीशन नहीं होती है, मगर फिर भी उससे कुछ अपेक्षाएं तो होती ही हैं। सोलमेट के साथ ऐसा नहीं होता है।
    कैसे करें पहचान

    एक तरफ दोस्त जहां आपको आपकी पूर्व की घटनाओं के साथ जज करते हुए स्वीकारते हैं, वहीं आपका सोलमेट आपकी हर कमजोरी, अक्षमता और डर, सबके साथ आपको स्वीकार करता है। सोलमेट कभी भी आपको जज नहीं करता, बल्कि आपकी सारी कमजोरियों में आपकी ताकत बन कर आपके साथ खड़ा होता है।

    दोस्त बनने में कई बार कई दिन या कई महीने या तो कई साल लग जाते हैं। लेकिन सोलमेट के आते ही जीवन में कई घंटों में ही आपकी आत्मा को एक अलग-सा जुड़ाव महसूस होने लगता है। एक भावनात्मक-सा जुड़ाव, जो आपने इतनी जल्दी कभी किसी के लिए महसूस न किया हो। जिसके साथ सहजता से बिना कोई आवरण ओढ़े आप जैसी हैं, वैसी ही खुद को उसके सामने प्रस्तुत कर पाती हैं।

    कुल मिलाकर हम यह मान सकते हैं कि सोलमेट वह व्यक्ति होता है, जो हमारे जीवन में हमारा व्यक्तित्व निखारने का कार्य करता है और सुख हो या दुख, तटस्थ होकर आपके जीवन में सदा आपके साथ रहता है। कई बार लड़ाइयों के बाद दोस्त आपको सदा के लिए छोड़ जाते हैं, लेकिन सोलमेट लाख लड़ाइयों के बाद भी सदा आपके साथ बना रहता है।

    कुछ संकेत करेंगे मदद
    • पहला संकेत यह है कि जब आप उनसे बात करते हैं तो कभी लगता ही नहीं कि आप उनसे अभी-अभी ही मिले हैं। यूँ लगता है जैसे काफी वक्त पहले से आप एक-दूसरे को जानते हैं।
    • आपको बहुत सुकून और शांति मिलती है सिर्फ उनसे बात करके नहीं, बिना बात किए भी बस उनके आस-पास रहने पर।
    • आप दोनों एक-दूसरे को बहुत अच्छी तरह समझ पाते हैं। जैसे इसके पूर्व आपकी बातों और स्थिति को शायद किसी ने इतना समझा नहीं होगा। वो भी बिना जजमेंटल हुए।
    • आप उनकी ग्रोथ में वो आपकी ग्रोथ में बहुत ज्यादा मदद करते हैं। भावनात्मक ही नहीं हर प्रकार से वो आपकी मदद के लिए हमेशा खड़े होते हैं। किसी भी चीज से अपना रिश्ता प्रभावित होने नहीं देते हैं।
    • आप दोनों एक-दूसरे की कमजोरी और दुर्गुणों को स्वीकारते हुए अपने रिश्ते में एक संतुलन बनाए रखते हो हमेशा।
    • कोई शख्स जिस के साथ आप कंफर्टेबल, ओरिजिनल, पीसफुल और सिक्योर महसूस करते हैं। आप खुश रहते हैं। उसके आते ही आप के मन की बेचैनी दूर हो जाती है और हर तरह के काम में आपका मन लगने लगता है तो समझिए वही है आपका सोलमेट।

  • वित्त विहीन शिक्षकों के मानदेय के लिए आंदोलन करेगी कांग्रेस

    वित्त विहीन शिक्षकों के मानदेय के लिए आंदोलन करेगी कांग्रेस

    वित्त विहीन शिक्षकों के मानदेय के लिए आंदोलन करेगी कांग्रेस

    यूपी कांग्रेस ने कहा है कि सरकार शिक्षा का निजीकरण करना चाहती है। इसका हर स्तर पर विरोध किया जाएगा। भाजपा शिक्षकों के भविष्य को खतरे में डालना चाहती है।

    कांग्रेस के प्रदेश महासचिव एवं प्रभारी प्रशासन दिनेश कुमार सिंह ने कहा कि पार्टी वित्त विहीन शिक्षकों के मानदेय को लेकर आंदोलन करेगी और शिक्षकों के हितों के लिए संघर्ष करेगी। वे पार्टी कार्यालय में शिक्षक कांग्रेस की बैठक को संबोधित कर रहे थे।

    उन्होंने कहा कि उप्र. सेवा शिक्षा चयन आयोग का गठन कर भाजपा सरकार संविधान की अवहेलना कर रही है। सरकार सेवा सुरक्षा को समाप्त कर शिक्षकों की नौकरी खत्म करना चाहती है। शिक्षक कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय सिंह ने कहा कि भाजपा शिक्षकों के भविष्य को खतरे में डाल रही है। सरकार की नीतियां सिर्फ और सिर्फ निजीकरण की तरफ है। इसका हर स्तर पर विरोध किया जाएगा।

    इस दौरान शिक्षकों के बीच में कांग्रेस के संगठन विस्तार पर भी रणनीति बनी। पुरानी पेंशन बहाली को लेकर भी बात रखी गई। बैठक का संचालन डॉ. प्रमोद कुमार ने किया। बैठक में यशपाल सिंह, डॉ मार्तंड सिंह डा. पीके पचौरी, संजीव कुमार, प्रमोद कुमार सिंह समेत कई शामिल हुए। 

  • PDA की आवाज बन, अगड़ों का साथ ले आगे बढ़ेगी सपा, घोसी उपचुनाव के प्रयोग होंगे INDIA की रणनीति का अहम पार्ट

    PDA की आवाज बन, अगड़ों का साथ ले आगे बढ़ेगी सपा, घोसी उपचुनाव के प्रयोग होंगे INDIA की रणनीति का अहम पार्ट

    PDA की आवाज बन, अगड़ों का साथ ले आगे बढ़ेगी सपा, घोसी उपचुनाव के प्रयोग होंगे INDIA की रणनीति का अहम पार्ट

    सपा ने घोसी में न सिर्फ क्षत्रिय समाज का प्रत्याशी दिया, जो स्थानीय होने के नाते मतदाताओं के बीच जाना-पहचाना चेहरा था, बल्कि चुनाव प्रचार के दौरान भी पीडीए का राग नहीं अलापा। स्थानीय मुद्दों, दारा सिंह के दलबदल, आम मतदाताओं से उनकी दूरी और सरकार के कामकाज पर अपने नजरिये पर ही अखिलेश समेत सभी प्रमुख नेताओं ने खुद को केंद्रित रखा।

    घोसी उपचुनाव ने जश्न के साथ सपा को नए सिरे से रणनीति तय करने का मौका दिया है। माना जा रहा है कि सपा पिछड़े, दलित व अल्पसंख्यक यानी पीडीए के मुद्दे तो प्रमुखता से उठाएगी, साथ ही अगड़ों को साथ लेने में भी कसर नहीं छोड़ेगी। सपा मुखिया अखिलेश यादव घोसी के इस सबक के मुताबिक आगे की रणनीति तय करेंगे।

    रामपुर का गढ़ गंवाने के बाद सपा नेतृत्व ने राजनीतिक रणनीति के लिहाज से फूंक-फूंककर कदम आगे बढ़ाने शुरू किए। अखिलेश ने घोसी में टिकट फाइनल करने से पहले मऊ और आजमगढ़ के प्रमुख नेताओं व कार्यकर्ताओं को पार्टी कार्यालय पर बुलाया था। साथ ही टिकट के दोनों दावेदार सुधाकर सिंह और रामजतन राजभर भी उसी दिन पार्टी मुख्यालय पर आए थे।

    अखिलेश ने पहले हॉल में कार्यकर्ताओं के साथ मंथन किया। फिर सुधाकर व रामजतन और उनके प्रमुख समर्थकों को अपने साथ अलग कमरे में बैठाया। गुणा-गणित ऐसे समझाया कि सर्वसम्मति से सुधाकर का नाम तय हो गया, जिसकी सूचना कुछ ही मिनटों के बाद पार्टी ने आधिकारिक तौर से सार्वजनिक कर दी।

    जिस तरह से टिकट देने से पहले क्षेत्र के लोगों से रायशुमारी की गई, उसने एक तरह से विजय की नींव रख दी। हालांकि, बताते हैं कि अखिलेश अपने चाचा शिवपाल सिंह के साथ वहां के समीकरणों पर होमवर्क पहले ही कर चुके थे।

    खास रणनीति के साथ जंग में उतरे
    समाजवादी खास रणनीति के साथ जंग में उतरे। उनके समर्थक मतदाताओं का नाम मतदाता सूची में होना सुनिश्चित हो, इसके लिए एक टीम लगा दी गई। सपा मुख्यालय से घोसी के कार्यकर्ताओं और प्रमुख नेताओं को फोन करके चुनाव में जुटने के लिए प्रेरित करने के लिए भी एक टीम लगाई गई, जिसकी जिम्मेदारी मुख्य रूप से सपा नेतृत्व के भरोसेमंद व पूर्व राज्यसभा सांसद अरविंद सिंह को सौंपी गई।

    स्वामी प्रसाद का न जाना भी सोचा-समझा फैसला
    सपा ने घोसी में न सिर्फ क्षत्रिय समाज का प्रत्याशी दिया, जो स्थानीय होने के नाते मतदाताओं के बीच जाना-पहचाना चेहरा था, बल्कि चुनाव प्रचार के दौरान भी पीडीए का राग नहीं अलापा। स्थानीय मुद्दों, दारा सिंह के दलबदल, आम मतदाताओं से उनकी दूरी और सरकार के कामकाज पर अपने नजरिये पर ही अखिलेश समेत सभी प्रमुख नेताओं ने खुद को केंद्रित रखा।

    यह यूं ही नहीं था कि घोसी में प्रचार से सपा के फायर ब्रांड नेता स्वामी प्रसाद मौर्य को दूर रखा गया। इसकी एक वजह यह भी मानी जाती है कि चुनाव का प्रबंधन संभाल रहे शिवपाल सिंह, मौर्य को लेकर ज्यादा सहज नहीं रहते। दूसरे, सपा नेतृत्व अच्छी तरह से समझ गया था कि स्वामी प्रसाद के जाने का मतलब है कि चुनाव ”सनातन बनाम गैर सनातन” हो जाएगा और यह समीकरण उसके मुफीद नहीं रहेगा।

    सर्वसमाज को लेकर भावी रणनीति की ओर इशारा
    पीडीए का नारा बुलंद करने वाले अखिलेश यादव ने भी जीत के बाद श्रेय न्यूनाधिक रूप में सर्वसमाज को देने से परहेज नहीं किया। कहा, यह उस अच्छी सोच वाले सर्वसमाज और पीडीए के साथ आने की जीत है, जो समाज के हर वर्ग को बराबर का हक देकर हर किसी की तरक्की को मकसद मानकर चलती है। यह सपा की भावी रणनीति की ओर इशारा कर रही है।

    यहां करना होगा पुनर्विचार
    सपा ने वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए जारी घोषणापत्र में कहा था कि देश के 10 फीसदी सामान्य वर्ग के लोग 60 फीसदी राष्ट्रीय संपत्ति पर काबिज हैं। राजनीतिक विश्लेषक प्रो. संजय गुप्ता मानते हैं कि इसे लेकर भाजपा को सामान्य वर्ग को सपा के खिलाफ खड़ा करने में मदद मिली। उनके बीच यह संदेश गया कि सपा सर्वसमाज की बात नहीं करती है और परिणाम सपा के विपरीत आए। जबकि, वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में सपा को सर्वसमाज का समर्थन मिला था, जिसके दम पर वो सत्ता तक पहुंची।

    नाम में शामिल समावेशी शब्द को करना होगा चरितार्थ
    यूपी के राजनीतिक मामलों के जानकार प्रो. रवि श्रीवास्तव भी मानते हैं कि घोसी में इंडिया गठबंधन के प्रत्याशी के रूप में सपा के सुधाकर सिंह की ऐतिहासिक जीत के कारणों पर मंथन की सबसे ज्यादा जरूरत एकसूत्र में बंधने का प्रयास कर रहे विपक्षी दलों के लिए ही है। घोसी की जीत से प्रेरणा ले अति उत्साह के साथ आगे बढ़े तो भाजपा विरोधी धारा के लिए यह घातक साबित हो सकता है।

    प्रो. श्रीवास्तव कहते हैं कि घोसी में सपा प्रत्याशी की ऐतिहासिक जीत बिना सर्वसमाज के समर्थन के मुमकिन नहीं थी। इसलिए जिस तरह से इंडिया गठबंधन के पूरे नाम में समावेशी शब्द है, उसे चरितार्थ करते हुए सर्व समाज को लेकर आगे बढ़ना होगा, तभी लोकसभा चुनाव में वे अपने लिए स्थान बना पाएंगे।
  • एक पृथ्वी-एक परिवार-एक भविष्य के भाव की सिद्धि में मील का पत्थर साबित होगी जी 20 समिट

    एक पृथ्वी-एक परिवार-एक भविष्य के भाव की सिद्धि में मील का पत्थर साबित होगी जी 20 समिट

    एक पृथ्वी-एक परिवार-एक भविष्य के भाव की सिद्धि में मील का पत्थर साबित होगी जी 20 समिट

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विश्व कल्याण के लिए सभी राष्ट्रों को ”वसुधैव कुटुंबकम्” दर्शन को आत्मसात कर मानव केंद्रित सोच के साथ आगे बढ़ना होगा।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विश्व कल्याण के लिए सभी राष्ट्रों को ”वसुधैव कुटुंबकम्” दर्शन को आत्मसात कर मानव केंद्रित सोच के साथ आगे बढ़ना होगा। मुख्यमंत्री ने रविवार को एक्स पर पोस्ट कर कहा कि एक पृथ्वी-एक परिवार और एक भविष्य के भाव की सिद्धि में यह समिट ”मील का पत्थर” साबित होगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हुई जी-20 समिट अपने लक्षित उद्देश्यों की प्राप्ति की दिशा में मजबूती के साथ आगे बढ़ चली है। कहा कि जी-20 के सदस्यों की ओर से भारत की अध्यक्षता में नई दिल्ली लीडर्स डिक्लेरेशन को सर्वसम्मति से अपनाना ऐतिहासिक है। उन्होंने समृद्ध भविष्य के लिए सहयोग की भावना के साथ किए गए इन प्रयासों के लिए प्रधानमंत्री और जी-20 के सदस्यों का आभार जताया है।

    योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का ”सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास” मंत्र मानवता के लिए एक उज्ज्वल मार्गदर्शिका बन गया है। उन्होंने कहा कि भोजन, जल, शिक्षा, चिकित्सा, आतंकवाद, अस्थिर अर्थव्यवस्था, अशांति, अविश्वास जैसी अनेक समस्याओं का स्थायी समाधान भी इसी मंत्र में अंतर्निहित है। उन्होंने कहा कि भारत के विशेष प्रयास से अफ्रीकी संघ को प्राप्त जी-20 की स्थायी सदस्यता इसी सर्वसमावेशी भावना का सुफल है। 

  • अयोध्या: 22 जनवरी को हो सकती है रामलला की प्राण प्रतिष्ठा, पीएमओ लगाएगा तिथि पर अंतिम मुहर

    अयोध्या: 22 जनवरी को हो सकती है रामलला की प्राण प्रतिष्ठा, पीएमओ लगाएगा तिथि पर अंतिम मुहर

    अयोध्या: 22 जनवरी को हो सकती है रामलला की प्राण प्रतिष्ठा, पीएमओ लगाएगा तिथि पर अंतिम मुहर

    लखनऊ
    अयोध्या के राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी को हो सकती है। हालांकि इस बारे में अंतिम फैसला प्रधानमंत्री कार्यालय को लेना है।

    रामलला के दर्शन करते प्रधानमंत्री मोदी. फाइल फोटो

    रामनगरी में तैयार हो रहे भव्य मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी को हो सकती है। काशी के विद्वानों ने प्राण प्रतिष्ठा के लिए जो तीन मुहूर्त निकाले हैं उनमें से 22 जनवरी सर्वोत्तम है। इसी के आधार पर अनुमान लगाया जा रहा है कि उसी दिन प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी। हालांकि तारीख पर अंतिम मुहर प्रधानमंत्री कार्यालय से ही लगेगी।

     

    प्राण प्रतिष्ठा को लेकर शनिवार को अयोध्या में पूरे दिन बैठकों का दौर चला। जन्मभूमि परिसर में मंदिर निर्माण समिति की बैठक में निर्माण कार्यों की समीक्षा की गई। दूसरी तरफ रामकोट स्थित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के कार्यालय में विहिप के शीर्ष मंडल की बैठक में प्राण प्रतिष्ठा की तैयारियों पर मंथन किया गया। यहां प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में पूरे भारत से लोगों को अयोध्या लाए जाने पर चर्चा हुई।

    ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कहा कि प्राण प्रतिष्ठा का महोत्सव 5 लाख गांव तक कैसे पहुंच सके इसको लेकर विचार चल रहा है। उन्होंने कहा कि समारोह में सबसे ज्यादा फोकस भीड़ नियंत्रण को लेकर है। अयोध्या में इतनी भीड़ आएगी तो अनुशासन बना रहे इस पर क्या रूपरेखा तैयार की जाय इस पर विचार हुआ।

    बताया कि विहिप की केंद्रीय टोली व प्राण प्रतिष्ठा प्रबंधन समिति की बैठक 10 व 11 को भी होगी। इसके लिए विहिप के बड़े पदाधिकारी अयोध्या आ रहे हैं। विहिप की बैठक में शनिवार को संघ के सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले व पूर्व सरकार्यवाह भैयाजी जोशी भी शामिल रहे।

  • मुख्यमंत्री योगी ने यूपी के पहले सीएम पंडित गोविंद बल्लभ पंत को दी श्रद्धांजलि, इस तरह किया याद

    मुख्यमंत्री योगी ने यूपी के पहले सीएम पंडित गोविंद बल्लभ पंत को दी श्रद्धांजलि, इस तरह किया याद

    मुख्यमंत्री योगी ने यूपी के पहले सीएम पंडित गोविंद बल्लभ पंत को दी श्रद्धांजलि, इस तरह किया याद

    लखनऊ
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पंडित गोविंद बल्लभ एक महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। उन्होंने प्रदेश की तरक्की और देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए सतत प्रयास किया था।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री व देश के पूर्व गृहमंत्री भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत की 136वीं जयंती पर लोक भवन परिसर स्थित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर उन्होंने कहा कि पंडित गोविंद बल्लभ एक महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। आजादी के बाद उत्तर प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री बने। प्रदेश की तरक्की और देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए उन्होंने सतत प्रयास किया था।

    सीएम योगी ने कहा कि पंडित गोविंद बल्लभ ने आजादी की लड़ाई में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया था। उनकी कर्मठता, उनकी राष्ट्र निष्ठा व संगठन क्षमता को ध्यान में रखकर उन्हें प्रदेश के मुख्यमंत्री पद का दायित्व दिया गया। वह स्वतंत्र भारत के उत्तर प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री बने फिर उन्होंने गृहमंत्री के रूप में देश व प्रदेश की सेवा की।

     

    मुख्यमंत्री ने कह कि वर्तमान में उत्तराखंड जो कि तब उत्तर प्रदेश का ही भाग हुआ करता था, उसके कुमायूं मंडल में जन्मे पंडित गोविंद बल्लभ पंत को समाज और राष्ट्र के लिए किए गए उनके योगदान के लिए मैं प्रदेशवासियों की तरफ से स्मरण करते हुए विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।

  • बच्चों को पढ़ाना है संस्कृति का पाठ तो अपनाएं ये तरीके, त्योहारों पर कराएं ये काम

    बच्चों को पढ़ाना है संस्कृति का पाठ तो अपनाएं ये तरीके, त्योहारों पर कराएं ये काम

    बच्चों को पढ़ाना है संस्कृति का पाठ तो अपनाएं ये तरीके, त्योहारों पर कराएं ये काम
    नई दिल्ली
    रेणु फ्रांसिस

    Parenting Tips: बच्चों को अपनी सांस्कृतिक विरासत और उत्सवों के बारे में जानकारी देना आपकी जिम्मेदारी है इसलिए जरूरी है कि आप उन्हें अनुष्ठानों और समारोहों से परिचित कराएं। त्योहार लोगों को एक साथ लाते हैं और समाज में अपनेपन की भावना पैदा करते हैं। खासकर बच्चे तो बड़ों से ज्यादा त्योहारों का लुत्फ उठाते हैं लेकिन आजकल बच्चों की उत्सुकता और ऊर्जा सिर्फ टेक्नोलॉजी में जाया हो रही है।

    ऐसे में जरूरी है कि माता-पिता अपने बच्चों को उत्सवों से जोड़ें और उनके महत्व बताएं, ताकि अपनी परंपराओं के प्रति उनकी खुशी एवं उत्साह बरकरार रहे। चूंकि बच्चे हर चीज के बारे में जिज्ञासु होते हैं, लिहाजा त्योहारों और उनमें छिपी परंपराओं के बारे में जानना उन्हें रोमांचक भी लगेगा। इसके लिए कुछ आसान तरीके भी हैं।

    साफ-सफाई में भागीदारी

    जब भी कोई अनुष्ठान, पर्व या उत्सव आता है तो आप घर की साफ-सफाई और सजावट में जुट जाती हैं। इस काम में बच्चों को भी शामिल करें, जिससे उनके मन में भी उत्सवों, अनुष्ठानों के आने की खुशी बनी रहे। बच्चों से छोटे-मोटे काम करने को कहें। आप उनसे कूड़ा-कचरा उठाकर कूड़ेदान में डालने, फर्नीचर की झाड़-पोंछ करने जैसे काम करा सकती हैं। इससे उनमें काम करने की आदत भी पडे़गी।

    पकवान बनाने में सहयोग

    त्योहार आने पर सभी घरों में पकवान बनाए जाते हैं। आप इस काम में भी बच्चों की मदद ले सकती हैं और छोटे-छोटे काम कराकर उन्हें जिम्मेदारी का अहसास करा सकती हैं कि त्योहारों पर उन्हें भी काम करना है। इससे उनमें बचपन से ही साथ में काम करने की भावना पैदा होगी। बच्चे साथ में पकवान बनाएंगे तो उन्हें भी खुशी मिलेगी और वे त्योहार का दुगुना मजा उठाएंगे।

    रचनात्मकता जरूरी

    बच्चों को अपनी संस्कृति के बारे में जानकारी दें। त्योहार या समारोह के दौरान उन्हें पारंपरिक पोशाक पहना कर, सजावट और पकवान बनाने में मदद लेकर और अन्य रचनात्मक गतिविधियों में भाग लेकर अपनी परंपराओं की जानकारी दें, जिससे वे बचपन से ही अपनी संस्कृति को जान सकें और उत्सवों का मजा ले सकें।

    कहानियां और फिल्में

    हर त्योहार के पीछे कोई न कोई कहानी होती है, जो हमें सकारात्मक संदेश देती है। इसलिए समय-समय पर आप बच्चों को अपने त्योहारों और परंपराओं की जानकारी किताबों द्वारा या फिल्में दिखाकर भी दे सकती हैं। जब आप बच्चे को कुछ रीति-रिवाजों के बारे में समझाती हैं तो वे उसे उबाऊ और बोर लगते हैं। वह आपकी बातों पर ध्यान नहीं देता इसलिए त्योहारों के बारे में कहानी सुनाकर, पढ़कर या फिर उस विषय पर बनी कोई फिल्म दिखाकर आप जानकारी को उसके लिए रुचिकर बना सकती हैं, ताकि वह उत्साहित होकर अपनी संस्कृति के बारे में जानकारी हासिल करे।

    मेल-मिलाप की भावना

    अगर आप अपने बच्चों को त्योहारों से जोड़ेंगी तो उनमें मेल-मिलाप की भावना बढे़गी। आज बच्चे भी अकेलापन महसूस करते हैं। ऐसे में मिल-जुल कर त्योहार मनाने से उनका अकेलापन दूर होगा। अपने बच्चे को त्योहारों पर रिश्तेदारों, परिचितों और पड़ोसियों के घर जरूर लेकर जाएं, ताकि वह सबसे घुले-मिले और त्योहारों को मिल-जुल कर मनाना सीखे।

    हमेशा प्रोत्साहन

    आजकल स्कूलों में भी बहुत से त्योहार मनाए जाते हैं। ऐसे में आप बच्चों को उनमें बढ़-चढ़ कर भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करें, जिससे उनमें उत्साह पैदा हो। आप बच्चे को त्योहार से जुड़ी कविता या भाषण भी तैयार करा सकती हैं। जब बच्चा मंच पर त्योहार से संबंधित कविता या भाषण बोलेगा तो उसे अच्छा भी लगेगा और साथ में अपने उत्सवों के बारे में जानकारी भी हासिल हो जाएगी।

  • जानें दोनों एंट्री-लेवल स्पोर्ट्स बाइक के इंजन और फीचर्स में कितना है अंतर

    जानें दोनों एंट्री-लेवल स्पोर्ट्स बाइक के इंजन और फीचर्स में कितना है अंतर

    जानें दोनों एंट्री-लेवल स्पोर्ट्स बाइक के इंजन और फीचर्स में कितना है अंतर
    नई दिल्ली
    Hero MotoCorp (हीरो मोटोकॉर्प) ने पिछले हफ्ते नई Karizma XMR (करिज्मा एक्सएमआर) की लॉन्चिंग के साथ ही करिज्मा नाम को फिर से जिंदा कर दिया। पूरी तरह से नई मोटरसाइकिल होने के बावजूद, एक्सएमआर काफी हद तक ओरिजिनल करिज्मा की कुछ बातों को बरकरार रखने में कामयाब रही है। यह एंट्री-लेवल स्पोर्ट्स बाइक सेगमेंट में एक शानदार पेशकश होने का वादा करती है। यहां हम आपको बता रहे हैं एंट्री-लेवल स्पोर्ट्स बाइक स्पेस में अपने प्राथमिक प्रतिद्वंद्वियों में से एक Yamaha R15 (यामाहा R15) की तुलना में इसका प्रदर्शन कैसा है।

    साइज
    Karizma XMR एक बड़ी मोटरसाइकिल की तरह दिखती और महसूस कराती है और इसलिए, यह R15 की तुलना में लंबी और चौड़ी है। Karizma XMR का वजन Yamaha R15 से 22.5 किलो ज्यादा है। Karizma में एक लंबा व्हीलबेस मिलता है, जिसका मतलब है कि यह R15 की तुलना में थोड़ा ज्यादा स्थिर होनी चाहिए। हालांकि, R15, XMR के 160mm की तुलना में 170mm का बेहतर ग्राउंड क्लीयरेंस देती है। दूसरी तरफ, करिज्मा की सीट R15 की 815 मिमी की तुलना में 810 मिमी पर थोड़ी ज्यादा सुलभ है।

     

    इंजन पावर और गियरबॉक्स
    Karizma XMR में 210cc का लिक्विड-कूल्ड इंजन है जो 25 bhp का पावर और 20.4 Nm का पीक टॉर्क जेनरेट करता है। इसकी तुलना में, R15 डिस्प्लेसमेंट में काफी कम है, और इसकी वजह से 18.2 bhp का कम पीक आउटपुट और 14.2 Nm टॉर्क मिलता है। दोनों मोटरसाइकिलों को स्लिप और असिस्ट क्लच द्वारा समर्थित 6-स्पीड गियरबॉक्स के साथ जोड़ा गया है, हालांकि, R15 को क्विकशिफ्टर का फायदा मिलता है।

    फीचर्स
    हीरो एक कॉम्प्रीहेंसिव इक्यूप्मेंट प्रदान करता है जिसमें 5-इंच एलसीडी इंस्ट्रूमेंटेशन, ब्लूटूथ के जरिए स्मार्टफोन कनेक्टिविटी, कॉल और मैसेज अलर्ट, ऑल-एलईडी रोशनी और टर्न-बाय-टर्न नेविगेशन जैसे फीचर्स शामिल हैं। R15 में हालांकि नेविगेशन का फीचर नहीं दिया गया है, लेकिन इसमें ट्रैक्शन कंट्रोल सिस्टम और साइड-स्टैंड इंजन इनहिबिटर, राइड मोड और एक क्विक शिफ्टर है, जो करिज्मा में नहीं मिलता है।

    कॉल और मैसेजिंग अलर्ट के अलावा, यामाहा का वाई-कनेक्ट एप लास्ट पार्क किए गए स्थान, मेंटेनेंस अलर्ट, खराबी अलर्ट आदि जैसे ज्यादा फीचर्स के साथ आती है। हालांकि, करिज्मा ने आर15 के मुकाबले यूएसबी चार्जिंग पोर्ट और एक एडजस्टेबल फ्रंट विंडस्क्रीन के साथ अपनी बढ़त बनाए रखी है।

     

    ब्रेकिंग और सस्पेंशन
    दोनों मोटरसाइकिलें बिल्कुल अलग आर्किटेक्चर पर आधारित हैं। जहां R15 डेल्टा बॉक्स फ्रेम पर आधारित है, वहीं Karizma XMR स्टील ट्रेलिस फ्रेम पर आधारित है। R15 में सस्पेंशन ज्यादा प्रीमियम कंपोनेंट्स के साथ आता है जिसमें अपसाइड-डाउन गोल्ड एनोडाइज्ड फ्रंट फोर्क्स और एक लिंक्ड-टाइप मोनो-शॉक शामिल है।

    इसकी तुलना में, करिज्मा में एक सिंपल सेटअप मिलता है जिसमें टेलीस्कोपिक फ्रंट फोर्क्स और 6-स्टेप प्रीलोड एडजस्टेबल मोनो-शॉक शामिल है। ब्रेकिंग की बात करें तो, Karizma में थोड़ा बड़ा डिस्क ब्रेक दिया गया है। लेकिन यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि R15 अपने प्रतिद्वंद्वी की तुलना में काफी हल्की है।