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  • जातीय जनगणना: मछुआरा समुदाय को जगाएंगे यूपी के मंत्री संजय निषाद, 15 अक्तूबर को शुरू करेंगे अभियान

    जातीय जनगणना: मछुआरा समुदाय को जगाएंगे यूपी के मंत्री संजय निषाद, 15 अक्तूबर को शुरू करेंगे अभियान

    जातीय जनगणना: मछुआरा समुदाय को जगाएंगे यूपी के मंत्री संजय निषाद, 15 अक्तूबर को शुरू करेंगे अभियान

    लखनऊ यूपी सरकार के मंत्री संजय निषाद प्रशिक्षण कार्यक्रम के जरिए मछुआरा समुदाय को जगाएंगे और कार्यक्रम में आरक्षण के मुद्दे को धार देकर भाजपा पर दबाव बनाएंगे।

    जातीय जनगणना का मुद्दा गरमाने के बीच जातीय जनगणना की मांग करने वाले निषाद पार्टी के अध्यक्ष और योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री संजय निषाद अब मछुआ समाज को अनुसूचित जाति में शामिल करने के मुद्दे को धार देंगे। इसके लिए वह 15 अक्तूबर से समुदाय को जगाने के अभियान पर निकलेंगे। 01 दिसंबर तक चलने वाले इस प्रशिक्षण अभियान के दौरान संजय मछुआ समुदाय को अनूसूचित जाति की सूची से बाहर करने के लिए जिम्मेदार सियासी दलों के बारे में भी जानकारी देकर एनडीए के पक्ष में बिरादरी को लामबंद करेंगे।

     

    इस कवायद के लेकर सियासी जानकारों का कहना है कि वह इस तरह के कार्यक्रमों के जरिए भाजपा हाईकमान पर टिकट के लिए दबाव बनाने की कोशिश है। दरअसल इस बार वह लगातार अपने ही सिंबल पर चुनाव लड़ने की बात को पुरजोर तरीके से उठा रहे हैं। इससे साफ है कि वह चाहते हैं कि उन्हें जितना टिकट दिया जाए, वह उनके ही सिंबल पर दिया जाए। अपनी इस मंशा को पूरा करने के लिए ही लगातार वह मछुवारा समाज को लामबंद करने के लिए जहां लगातार बिरादरी को अनुसूचित जाति में शामिल करने का मुद्दा उठा रहे हैं। वहीं, भाजपा को यह संदेश भी देना चाहते हैं कि अपनी बिरादरी के वही एक सर्वमान्य नेता है। इसलिए पूर्वांचल में उनको उचित प्रतिनिधित्व देने से लोकसभा चुनाव में फायदा हो सकता है।

     

    अपने इसी सियासी एजेंडे को धार देने के लिए निषाद पार्टी के अध्यक्ष लगातार संगठन के मजबूत करने के नाम पर बिरादरी को यह समझाने में जुटे हैं कि उनके हितों की लड़ाई वही लड़ रहे हैं। इसी कड़ी में उन्होंने 15 अक्तूबर से बिरादरी को समझाने के लिए प्रशिक्षण अभियान शुरू करने की ऐलान किया है। इस अभियान के तहत हर मंडल पर कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा, जिसमें संजय निषाद खुद मौजूद रहेंगे। हर मंडल पर आयोजित होने वाले एक दिवसीय प्रशिक्षण में ऑनलाइन सदस्य बनाने के साथ उनसे निषाद पार्टी को ही वोट देने का संकल्प पत्र भरवाया जाएगा। साथ ही उन्हें यह समझाया जाएगा कि मछुआ समाज को एससी श्रेणी में अब तक आरक्षण क्यों नहीं दिया गया और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। अब उन्हें अपना हक लेने के लिए आगे किस दल के साथ रहना है, यह भी बताया जाएगा।

    मंडलवार कब कहां होगा प्रशिक्षण कार्यक्रम
    1- गोरखपुर, बस्ती 15 अक्टूबर
    2- बनारस, आजमगढ़ 21 अक्टूबर
    3- प्रयागराज, मिर्जापुर 27 अक्टूबर
    4- अयोध्या, देवीपाटन 2 नवंबर
    5- चित्रकूट, झांसी 8 नवंबर
    6- आगरा, अलीगढ़ 14 नवंबर
    7- बरेली, मुरादाबाद 20 नवंबर
    8- मेरठ, सहारनपुर 26 नवंबर
    9- लखनऊ कानपुर मंडल 1 दिसम्बर

  • वाराणसी में मनोज तिवारी ने बांधा समा: ‘फिर आईल सिंगार के बारी नेवता पठवले केडी से पुजारी..’ भजन पर झूमे भक्त

    वाराणसी में मनोज तिवारी ने बांधा समा: ‘फिर आईल सिंगार के बारी नेवता पठवले केडी से पुजारी..’ भजन पर झूमे भक्त

    वाराणसी में मनोज तिवारी ने बांधा समा: ‘फिर आईल सिंगार के बारी नेवता पठवले केडी से पुजारी..’ भजन पर झूमे भक्त

    वाराणसी
    मनोज तिवारी ने देवी गीतों की शुरुआत दोनों हाथ जोड़कर फिर आईल सिंगार के बारी नेवता पठवले केडी से पुजारी कइसे न आई मनोज तिवारी…, काशी काली मठ बा स्थित जहवा लक्ष्मीकुंड बा माई के दुवारी…, आईल भगतन के भारी झुंड बा…, बाड़ी शेर पर सवार रुपवा मनवा मोहत बा…, यह सिद्ध पीठ रहस्यमय मां काली का शृंगार है
    Manoj Tiwari sang the 5108th song to Maa Kali. Three-day music festival at Lakshmikund ancient
    भोजपुरी गायक व दिल्ली के सांसद ने कहा कि मनोज तिवारी ने भक्तों से निवेदन करते हुए कहा कि अब आप लोग बइठ जाइल जा माई के गुणगान सब लोग मिलके कइल जाव। आज हमार काशी के साथ 30 बरिस क सफर पूरा हो गईल हव। अऊर आज हम काली माई के 5108वां गीत सुनावे चढ़ावे सुनावे मनावे खातिर आईल बानी…।

    मनोज तिवारी ने देवी गीतों की शुरुआत दोनों हाथ जोड़कर फिर आईल सिंगार के बारी नेवता पठवले केडी से पुजारी कइसे न आई मनोज तिवारी…, काशी काली मठ बा स्थित जहवा लक्ष्मीकुंड बा माई के दुवारी…, आईल भगतन के भारी झुंड बा…, बाड़ी शेर पर सवार रुपवा मनवा मोहत बा…, यह सिद्ध पीठ रहस्यमय मां काली का शृंगार है…, 2024 के चुनाव का भी संकेत देते हुए मनोज तिवारी ने गाया कि जवन आशीषवा मैया मालिनी के दिहलू मोदी जी के दिह मैया उहे आशीषवा ना…, मंदिर अब बनने लगा है…, ममतामई दरबार बा…, हर साल बुलावत रहिया मनोजवा आई बनके सेवकवा…, मैया के मंदिर में तकदीर बदल जाला…, देश-विदेश कतहूं हम जाइ बाकी काली मठ में आईब हो… सहित लोगों की फरमाइश पर अनेक देवी गीत सुनाकर काशी की महिमा का बखान करते हुए और बागेश्वर धाम का जय जयकार लगाकर हर हर महादेव शंभू काशी विश्वनाथ गंगे… से अपने कार्यक्रम को विराम दिया

    इसके पूर्व भोजपुरी सम्राट भरत शर्मा व्यास ने जब काली माई बाड़ी हमरा गांव…की धुन छेड़ी तो श्रोता भी ताल से ताल मिलाने लगे। इसके बाद उन्होंने जीभ लटकल होई मुंड के माला…, निमिया के डार मैया…सुनाकर पूरे माहौल में भक्ति के रंग घोल दिए। मध्य रात्रि तक मां काली के दरबार में सुर, संगीत की गंगा प्रवाहमान होती रही।

    सोमवार को लक्सा लक्ष्मीकुंड स्थित प्राचीन काली मठ में तीन दिवसीय संगीत समारोह की अंतिम निशा में माता काली का अड़भंगी शृंगार हुआ। माता काली को पंचामृत स्नान कराकर नूतन वस्त्र आभूषण से सुसज्जित किया। माता को बारा, जायफल के साथ नरमुंड की प्रतीकात्मक माला पहनाकर अड़भंगी शृंगार मंदिर के महंत पं ठाकुर प्रसाद दुबे ने शृंगार किया। आरती प्रधान पुजारी पंडित विकास दुबे काका गुरु ने उतारी। मंदिर परिसर डमरू के निनाद से गूंज रहा था। मध्य रात्रि में भोजपुरी गायक व सांसद डॉ. मनोज तिवारी मृदुल ने जैसे ही मंदिर प्रांगण में आने के लिए सड़क पर उतरे सैकड़ों की संख्या में भक्त उनकी तरफ माला चुनरी लेकर दौड़ पड़े।
    सबका अभिवादन स्वीकार करते हुए मनोज तिवारी ने प्रशंसकों के साथ सेल्फी फोटो खिंचवाई। भक्तों के भारी जनसमूह के कारण मंच तक आने में मनोज तिवारी को काफी समय लग गया रास्ते में डमरू दल के लोगों ने कतार में लगकर डमरू निनाद करते हुए स्वागत में हर हर महादेव का जयघोष किया। प्रधान पुजारी पं विकास दुबे काका गुरु ने मेवे की माला और चुनरी पहनाकर आशीर्वाद दिया। इसके पूर्व प्रांजल ग्रुप के कलाकारों ने पंचनाद की प्रस्तुति से शुभारंभ किया। शांभवी सेठ मांडवी सिंह और अंकिता ने बनारस घराने के कथक के मनोहारी भाव को प्रस्तुत करते हुए शिव वंदना डमरू पाणि शूल पाणि… के साथ कथक की बारीकियां कायदा तिहाई टुकड़ा प्रस्तुत करते हुए देवी भजन मैं आज देखूं आनंद रूप भवानी… से सभी का मन मोह लिया। मानस मर्मज्ञ पं. रमेश पांडेय ने सुमधुर हनुमान चालीसा का पाठ करते हुए जय सियाराम जय सियाराम जय माता दी जय माता दी हर हर महादेव का संकीर्तन करते हुए सभी को झूमने पर विवश कर दिया। अन्नपूर्णा मठ मंदिर के महंत शंकर पुरी महाराज ने कलाकारों का स्वागत किया। संयोजक व संचालक गीतकार कन्हैया दुबे केडी ने किया।

     

    काली मठ की मैया सुख लुटाने वाली…

    काली मठ में मध्य रात्रि में डॉ. अमलेश शुक्ला ने काली मठ की मैया सुख लुटाने वाली… कालीमठ की महिमा जग में महान है… विकराल रूप धर के आई मां काली…सुनाया। स्नेहा अवस्थी ने तेरे दर पर आने को जी चाहता है… जय काली जय काली जय काली मां…, कुमार विनीत सिंह ने गणपति राखो मेरी लाज…पेश किया। मध्य रात्रि में अरुण सिंह, बालेश्वर शर्मा के साथ अन्य कलाकारों ने देर रात्रि तक अपनी हाजिरी लगाई।

  • सीएम योगी कल आएंगे गोरखपुर, इस कार्यक्रम में लेंगे भाग

    सीएम योगी कल आएंगे गोरखपुर, इस कार्यक्रम में लेंगे भाग

     

    सीएम योगी कल आएंगे गोरखपुर, इस कार्यक्रम में लेंगे भाग

    गोरखपुर
    सीएम योगी 11 अक्तूबर को गीता वाटिका में आयोजित कार्यक्रम में भाग लेंगे और फिर टाउनहाल स्थित रवींद्र भवन आवास पर पहुंचकर हॉकी के प्रदेश उपाध्य धीरज सिंह हरीश को श्रद्धांजलि देंगे। सीएम के आगमन को लेकर प्रशासन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।

    सीएम योगी आदित्यनाथ बुधवार को दो दिवसीय दौरे पर गोरखपुर आएंगे। वह 11 अक्तूबर को गीता वाटिका में आयोजित कार्यक्रम में भाग लेंगे और फिर टाउनहाल स्थित रवींद्र भवन आवास पर पहुंचकर हॉकी के प्रदेश उपाध्य धीरज सिंह हरीश को श्रद्धांजलि देंगे। सीएम के आगमन को लेकर प्रशासन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।

    सीएम योगी योदित्यनाथ 11 अक्तूबर को अपराह्न 3 बजे गीता वाटिका में हनुमान प्रसाद पोद्दार भाईजी की 131 वीं जयंती कार्यक्रम में शरीक होंगे। इसके बाद शाम 5:30 बजे हॉकी उत्तर प्रदेश के उपाध्यक्ष धीरज सिंह हरीश के निधन पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में शरीक होंगे। सात अक्तूबर को धीरज सिंह हरीश का आकस्मिक निधन हो गया था। यह जानकारी गोरखनाथ मंदिर प्रशासन की ओर से विज्ञप्ति जारी की दी गई है।

  • गोरखपुर: लाखों डकार कर बैठे थे…कार्रवाई शुरू की तो हर गली-गली पर मिलने लगे भू माफिया

    गोरखपुर: लाखों डकार कर बैठे थे…कार्रवाई शुरू की तो हर गली-गली पर मिलने लगे भू माफिया

    गोरखपुर: लाखों डकार कर बैठे थे…कार्रवाई शुरू की तो हर गली-गली पर मिलने लगे भू माफिया

    गोरखपुर
    एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर ने कहा कि जालसाजी के मामले सामने आने पर पुलिस केस दर्ज कर कार्रवाई कर रही है। सब पर गैंगस्टर के तहत कार्रवाई कर उनकी अवैध कमाई से अर्जित की गई संपत्ति को जब्त भी किया जा रहा है। पुलिस का अभियान आगे भी जारी रहेगा।
    जमीन के नाम पर जालसाजी करने के मामलों में पुलिस ने कार्रवाई शुरू की तो अब हर गली-चौराहे पर ही भू माफिया मिलने लगे हैं। सबने किसी न किसी को झांसा देकर लाखों रुपये की ठगी की है और फिर धमकी देते हैं। दरअसल, उनके यहां तक पहुंचने के पीछे पुलिस भी कम जिम्मेदार नहीं है।

     

    पहले पुलिस ऐसे मामलों में सिर्फ अमानत में खयानत (धारा 406) का केस दर्ज कर लेती थी, जिसमें सात साल से कम की सजा होने की वजह से गिरफ्तारी नहीं हो पाती थी और मामला न्यायालय में लंबित हो जाता है। अब पुलिस ऐसे मामले में कूटरचित दस्तावेज पर जालसाजी जैसी धाराओं में केस दर्ज कर रही है तो जेल भी जा रहे और लोग सामने भी आने लगे हैं।

    जानकारी के मुताबिक, रोजाना दर्ज किए जा रहे केसों की अलग से सूची भी तैयार की जा रही है। पिछले एक साल में 40 से अधिक जमीन के नाम पर जालसाजी करने वालों पर गैंगस्टर के केस दर्ज कर पुलिस ने कार्रवाई की है तो अब नए मामलों की सूची भी तैयार की जा रही है, ताकि इनके खिलाफ भी गैंगस्टर का केस दर्ज कराया जा सके।

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    पुलिस की कोशिश है कि जमीन के मामलों में कार्रवाई है। शुक्रवार को तीन मामले नए सामने आए हैं, जिसमें जमीन के नाम पर जालसाजी कर ली गई है। पुलिस की अब तक की जांच से भी इस बात की पुष्टि हुई है कि सीलिंग की जमीन और सस्ते दाम पर जमीन दिलाने का लालच देकर करोड़ों की ठगी भू माफिया ने गोरखपुर में की है। पुलिस सबकी कुंडली तैयार कर रही है।

    केस एक
    जमीन के नाम पर वसूले 16.80 लाख, बैनामा न रुपये वापस
    कैंट थाना क्षेत्र के दाउदपुर निवासी राजीव अग्रवाल ने कैंट थाने में मोहद्दीपुर निवासी अंकित पांडेय पर जमीन के नाम पर 16.80 लाख रुपये लेकर जालसाजी करने व रुपये हड़पने का केस दर्ज कराया। आरोप है कि अब आरोपी धमकी भी दे रहा है। राजीव के मुताबिक, वह विदेश में रहते हैं। जमीन की जरूरत होने पर अगस्त 2022 में मोहद्दीपुर स्थित पांडेय एसोसिएट कार्यालय में गए थे। उन्हें जमीन दिखाई गई। एक करोड़ रुपये में सौदा तय हुआ और 16.80 लाख रुपया एडवांस दे दिया गया। बाद में वह विदेश चले गए और जमीन का बैनामा कराने आए तो पता चला कि जालसाजी हो गई है। रुपये वापस मांगने पर चेक दिया, जो बाउंस हो गया। पुलिस केस दर्ज कर जांच कर रही है।

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    केस दो
    26 लाख लेकर नहीं की रजिस्ट्री, चार के खिलाफ केस दर्ज
    चौरीचौरा थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत अवधपुर में 26 लाख रुपये लेने के बाद जमीन की रजिस्ट्री नहीं करने वाले चार महिलाओं के खिलाफ पुलिस ने केस दर्ज कर मामले की जांच कर रही हैं। गोरखपुर के गोरखनाथ थाना क्षेत्र के पचपेड़वा निवासी रिंकू सिंह व मदन मोहन मालवीय कॉलेज निवासी सौरभ कुमार ने संयुक्त तहरीर देकर पुलिस को बताया कि करीब एक वर्ष पहले मंजु मिश्रा से एक करोड़ रुपये में जमीन खरीदने का सौदा तय हुआ था। बीस लाख खाते से व छः लाख नकद दिया था। इस जमीन पर करीब पचास लाख रुपये का मिट्टी भी गिरवाया। अब 74 लाख देकर रजिस्ट्री की बात कहने पर यह लोग जमीन की रजिस्ट्री करने से कतरा रहे है। पुलिस ने तहरीर के आधार पर मंजू मिश्रा, किरण उर्फ धीरन, रिंकी व वेवी के खिलाफ केस दर्ज किया है।

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    केस तीन
    जमीन के नाम पर हड़प लिए रुपये, पत्नी को पीटा भी
    गोरखनाथ थाना क्षेत्र के नथमपुर निवासी राजन सिंह ने अभय पांडेय, लक्ष्मीशंकर पांडेय, निर्मला पांडेय, अमित पांडेय व कुछ अज्ञात पर जालसाजी कर रुपये हड़पने का केस दर्ज कराया। राजन का कहना है कि जमीन की जरूरत होने पर लक्ष्मीशंकर पांडेय से उनकी मुलाकात हुई। उसने बताया कि पत्नी को गंभीर बीमारी है, जमीन जल्दी बेचनी है। रुपयों का इंतजाम कर राजन ने 25 लाख खाते में और तीन लाख रुपये नकद दे दिया। बाद में जमीन देने पर आना कानी करने लगा और फिर बीमारी के नाम पर पांच लाख रुपया वसूल लिया गया। अब रुपये मांगने पर उसने पत्नी के साथ मारपीट की, जिससे उसके सिर पर चोट भी लगी।

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    एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर ने कहा कि जालसाजी के मामले सामने आने पर पुलिस केस दर्ज कर कार्रवाई कर रही है। सब पर गैंगस्टर के तहत कार्रवाई कर उनकी अवैध कमाई से अर्जित की गई संपत्ति को जब्त भी किया जा रहा है। पुलिस का अभियान आगे भी जारी रहेगा।

  • सीएम योगी ने गांगेय डॉल्फिन को दिया प्रदेश के जलीय जीव का दर्जा, कहा- तालाब और नदियों को शुद्ध रखा जाए

    सीएम योगी ने गांगेय डॉल्फिन को दिया प्रदेश के जलीय जीव का दर्जा, कहा- तालाब और नदियों को शुद्ध रखा जाए

    सीएम योगी ने गांगेय डॉल्फिन को दिया प्रदेश के जलीय जीव का दर्जा, कहा- तालाब और नदियों को शुद्ध रखा जाए

    लखनऊ
    उन्होंने कहा कि तालाबों और नदियों को शुद्ध रखने का प्रयास करना चाहिए। गांगेय डाल्फिन प्रदेश में गंगा, यमुना, चम्बल घाघरा, राप्ती, गेरूआ आदि नदियों में पायी गयी है। एक अनुमान के अनुसार राज्य में गांगेय डाल्फिन की संख्या लगभग 2000 है।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पीलीभीत के मुस्तफाबाद से गांगेय डॉल्फिन को प्रदेश के जलीय जीव का दर्जा देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि तालाबों और नदियों को शुद्ध रखने का प्रयास करना चाहिए। गांगेय डाल्फिन प्रदेश में गंगा, यमुना, चम्बल घाघरा, राप्ती, गेरूआ आदि नदियों में पायी गयी है। एक अनुमान के अनुसार राज्य में गांगेय डाल्फिन की संख्या लगभग 2000 है।

    सीएम ने कहा कि वन्य जीवों को लेकर किस प्रकार का व्यवहार होना चाहिए, इसका प्रशिक्षण यहां के लोगों को दिया जाना चाहिए। टाइगर रिजर्व से जुड़े आरक्षित क्षेत्र के हर गांव के लोगों को ट्रेनिंग देकर उन्हें गाइड के रूप में मान्यता देनी चाहिए, जिससे लोगों को रोजगार मिल सके। पूरे गांव में जागरूकता भी पैदा होगी। उन्होंने कहा कि हमें यह भी देखना होगा जो पर्यटक या स्थानीय लोग आते हैं। वह प्लास्टिक का उपयोग करके कोई भी ऐसा कार्य न करें, जिससे जल और प्रकृति प्रदूषित हो।

    मुख्यमंत्री ने चूका बीच की सुंदरता को निहारा, जंगल सफारी का लिया आनंद
    मुख्यमंत्री जंगल सफारी वाहन में सवार होकर चूका बीच पहुंचे। पीलीभीत में जंगल और शारदा डैम के किनारे स्थित चूका बीच का नजारा सैलानियों के लिए गोवा जैसा एहसास कराता है। मुख्यमंत्री ने चूका बीच पर सैलानियों को मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी की। करीब 20 मिनट तक चूका बीच की प्राकृतिक खूबसूरती को निहारा। मुख्यमंत्री यहां बनाई गई वाटर हट पर भी पहुंचे। जंगल सफारी के दौरान मुख्यमंत्री के साथ वन राज्यमंत्री डॉ. अरुण कुमार व जिले के विधायक मौजूद रहे।

  • मप्र में सीटों का बंटवारा: सपा के लिए दस सीटें छोड़ सकती है कांग्रेस, 2003 में जीते थे सपा के 7 विधायक

    मप्र में सीटों का बंटवारा: सपा के लिए दस सीटें छोड़ सकती है कांग्रेस, 2003 में जीते थे सपा के 7 विधायक

    मप्र में सीटों का बंटवारा: सपा के लिए दस सीटें छोड़ सकती है कांग्रेस, 2003 में जीते थे सपा के 7 विधायक

    लखनऊ दोनों पार्टियों के शीर्ष नेतृत्व की ओर से प्रो. रामगोपाल और सुरजेवाला को यह सिलसिला आगे बढ़ाने के लिए कहा गया। दोनों के बीच इस संबंध में लंबी वार्ता हो चुकी है। सपा ने कांग्रेस से रीवा, सतना और टीकमगढ़ समेत पांच जिलों में 12 सीटें मांगी हैं।

    मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस के बीच सीटों के बंटवारे की गुत्थी शीघ्र सुलझने की संभावना है। सपा की ओर से प्रमुख महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव और कांग्रेस की ओर से मध्य प्रदेश के प्रभारी महासचिव रणदीप सुरजेवाला को यह जिम्मेदारी दी गई है। समाजवादियों ने 12 सीटें मांगी हैं और माना जा रहा है कि दोनों के बीच 10-12 सीटों पर बात बन जाएगी।

    सपा नेतृत्व देश के अन्य राज्यों में भी पार्टी की उपस्थिति दर्ज कराने की रणनीति पर काम कर रहा है ताकि आधिकारिक रूप से राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिल सके। इसी के तहत मध्य प्रदेश में पूरी तैयारी के साथ विधानसभा चुनाव लड़ने का निर्णय लिया गया है। इससे पहले वर्ष 2003 के चुनाव में सपा वहां सात सीटें जीत चुकी है। पिछले विधानसभा चुनाव में भी उसने एक सीट जीती थी जबकि पांच सीटों पर भाजपा के साथ मुख्य लड़ाई में रही थी।

    राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक मध्य प्रदेश के चुनाव को लेकर सपा और कांग्रेस के बीच इंडिया गठबंधन के प्लेटफॉर्म पर अनौपचारिक बातचीत शुरू हुई थी। बाद में दोनों पार्टियों के शीर्ष नेतृत्व की ओर से प्रो. रामगोपाल और सुरजेवाला को यह सिलसिला आगे बढ़ाने के लिए कहा गया। दोनों के बीच इस संबंध में लंबी वार्ता हो चुकी है। सपा ने कांग्रेस से रीवा, सतना और टीकमगढ़ समेत पांच जिलों में 12 सीटें मांगी हैं।

    खास बात यह है कि सपा ने सीटों के नाम 12 से ज्यादा दिए हैं ताकि कांग्रेस के लिए भी अपने स्थानीय समीकरणों को देखते हुए सपा को सीट देने में कोई मुश्किल न खड़ी हो। वहीं, चयन में पर्याप्त विकल्प की गुंजाइश भी रहे। सूत्रों के मुताबिक दोनों पार्टियों के बीच मध्य प्रदेश राज्य चुनाव में गठबंधन पर सैद्धांतिक सहमति बन चुकी है। मामला सिर्फ सीटें फाइनल किए जाने पर ही अटका हुआ है।

     

    प्रो. रामगोपाल और सुरजेवाला की सोमवार को नई दिल्ली में मुलाकात भी होनी थी लेकिन प्रो. रामगोपाल के बड़े भाई के निधन के चलते नहीं हो पाया। शीघ्र ही सीट बंटवारे के मामले में अंतिम निर्णय ले लिया जाएगा। उसके बाद यादव बहुल सीटों पर सपा-कांग्रेस की संयुक्त जनसभाएं भी होंगी।

  • जाति जनगणना पर गर्मायी राजनीति: बीजेपी के सहयोगी दलों ने भी उठा दी मांग, भाजपा ने ओढ़ी ‘राजनीतिक चुप्पी’

    जाति जनगणना पर गर्मायी राजनीति: बीजेपी के सहयोगी दलों ने भी उठा दी मांग, भाजपा ने ओढ़ी ‘राजनीतिक चुप्पी’

    जाति जनगणना पर गर्मायी राजनीति: बीजेपी के सहयोगी दलों ने भी उठा दी मांग, भाजपा ने ओढ़ी ‘राजनीतिक चुप्पी’

    लखनऊ बिहार में जातीय जनगणना की रिपोर्ट आने के बाद उत्तर प्रदेश में जातीय जनगणना कराने के मुद्दे पर भाजपा ने चुप्पी साध ली है। अलबत्ता पार्टी ने बिहार में जातीय जनगणना की रिपोर्ट पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार और आरजेडी के अध्यक्ष लालू यादव पर पलटवार किया है।

    बिहार सरकार द्वारा जातीय जनगणना के आंकड़े जारी किए जाने के बाद यूपी में भी इस मुद्दे पर सियासत शुरू हो गई है। विपक्ष ही नहीं बल्कि सत्ता पक्ष में शामिल भाजपा के सहयोगी दल भी जातीय जनगणना की मांग को फिर से उठाने लगे हैं।

    एनडीए के घटक दल अपना दल (एस) और सुभासपा ने भी जातीय जनगणना कराने की मांग उठाकर भाजपा पर दबाव बढ़ा दिया है। जबकि निषाद पार्टी ने जातीय जनगणना को भरमाने का प्रयास बताया है। अपना दल (एस) की अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल का कहना है कि उनकी पार्टी हमेशा से जातीय जनगणना कराने की पक्षधर रही है और इस मुद्दे को सड़क से लेकर संसद तक भी उठाती रही है। रायबरेली में सोमवार को कार्यकर्ता सम्मेलन में उन्होंने जातीय जनगणना को समय की मांग बताया। वहीं, सुभासपा के राष्ट्रीय मुख्य प्रवक्ता अरुण राजभर का कहना है कि उनकी पार्टी का गठन ही इस मुद्दे की लड़ाई को लेकर हुआ है। पार्टी विधानसभा में इस मुद्दे को कई बार उठा चुकी है। हर वर्ग के हिस्सेदारी की लड़ाई सत्ता के भीतर और बाहर रहकर भी लड़ती रही है। सुभासपा रोहिणी आयोग की रिपोर्ट को लागू करने की भी मांग कर चुकी है।

    वर्ष 1961 की सेंसस के आधार पर हो गणना
    निषाद पार्टी के अध्यक्ष और प्रदेश के कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद का कहना है कि नीतिश सरकार जातीय जनगणना के नाम पर जातियों को भरमाना चाहती है। इनके वोट को बांटकर ओबीसी और एससी, एसटी की संख्या को छोटा करना चाहते हैं। हम चाहते हैं संवैधानिक रूप से गिनती होनी चाहिए। यदि जातीय जनगणना कराना है तो वर्ष 1961 की सेंसस के आधार पर जातीय जनगणना होनी चाहिए।

    जातीय जनगणना पर भाजपा ने साधी चुप्पी
    बिहार में जातीय जनगणना की रिपोर्ट आने के बाद उत्तर प्रदेश में जातीय जनगणना कराने के मुद्दे पर भाजपा ने चुप्पी साध ली है। अलबत्ता पार्टी ने बिहार में जातीय जनगणना की रिपोर्ट पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार और आरजेडी के अध्यक्ष लालू यादव पर पलटवार किया है।

    भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी ने सोमवार को कहा कि बिहार सरकार ने किस नियम के आधार पर जातीय जनगणना कराई है। कहा कि कांग्रेस, सपा, आरजेडी परिवारवाद की राजनीति करते हैं। विपक्षी दलों के नेता जातीय जनगणना के नाम पर राजनीतिक रोटियां सेंक रहे हैं। आरजेडी में लालू के बाद तेजस्वी और तेजप्रताप ही आगे रहेंगे, कांग्रेस में सोनिया गांधी के बाद राहुल गांधी ही सर्वोपरि रहेंगे, सपा मे भी मुलायम सिंह यादव के बाद अखिलेश यादव ही पार्टी की कमान संभाल रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि ये दल बताएं कि इनकी सरकारों के कार्यकाल में पिछड़ों और दलितों के उत्थान के लिए क्या किया गया। संगठन और सरकार में कितनी भागीदारी दी गई। अपना दल और निषाद पार्टी की ओर से जातीय जनगणना की मांग के सवाल पर चौधरी ने कहा कि वह हमारे सहयोगी दल हैं। उनका राजनीतिक एजेंडा अलग है, भाजपा का अलग है। मामले पर भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता आलोक अवस्थी ने कहा कि जातीय जनगणना के मुद्दे पर मुख्यमंत्री विधानसभा में पहले ही कह चुके हैं कि जनगणना कराना केंद्र सरकार का अधिकार है। राज्य सरकार जनगणना नहीं करा सकती है।

     

    हर हाल में होनी चाहिए जातीय जनगणना: अजय राय
    लखनऊ। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि जातीय जनगणना हर हाल में होनी चाहिए ताकि उसी हिसाब से आगे की रणनीति बनाई जा सके। लोगों को योजनाओं का लाभ दिलाया जा सके। कांग्रेस लगातार इसकी मांग कर रही है। पार्टी जातीय जनगणना कराने की मांग को लेकर सम्मेलन भी करा रही है। उन्होंने कहा कि बिहार में हुई जातीय जनगणना के आंकड़ें वहां वस्तुस्थिति से वाकिफ करा रहे हैं। उत्तर प्रदेश ही नहीं सभी राज्यों में यह गणना होनी चाहिए।

    जातिगत जनगणना से ही योजनाओं का लाभ: संजय सिंह
    आम आदमी पार्टी के यूपी प्रभारी और राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने कहा कि आरक्षण और सरकार की लाभकारी नीतियों का लाभ वांछित लोगों तक तभी पहुंचेगा, जब जातिगत जनगणना होगी। इसलिए हर राज्य में जातिगत जनगणना होनी चाहिए। मध्य प्रदेश के सियासी हालात पर उन्होंने कहा कि यह भाजपा का दुर्भाग्य है कि वहां उनके नेता दिन-रात प्रार्थना कर रहे है कि उनका टिकट कट जाए। यानि वह चुनाव लड़ने से बच रहे हैं क्योंकि उनको पता है कि भाजपा चुनाव हारने जा रही है।

     

     

     

  • घाटे व बजट के गणित में उलझी मेट्रो के विस्तार की रफ्तार, छह साल में शासन तक ही पहुंच पाई फाइल

    घाटे व बजट के गणित में उलझी मेट्रो के विस्तार की रफ्तार, छह साल में शासन तक ही पहुंच पाई फाइल

    घाटे व बजट के गणित में उलझी मेट्रो के विस्तार की रफ्तार, छह साल में शासन तक ही पहुंच पाई फाइल

    लखनऊ सितंबर 2017 में जब पहली बार लखनऊ मेट्रो ने यात्रियों के संग विस्तार पकड़ी थी तब लोगों को उम्मीद थी कि इसका दायरा शहर के अन्य हिस्सों तक भी पहुंचेगा पर फाइल के मेट्रो दफ्तर से शासन तक पहुंचने में छह साल लग गए।

    उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के लिए ‘लाइफलाइन’ के तौर पर शुरू की गई लखनऊ मेट्रो पिछले पांच साल से जहां की तहां अटकी हुई है। मेट्रो का विस्तार न हो पाने व कई अन्य कारणों से मेट्रो का घाटा बढ़ता जा रहा है और शहर में सुगम यातायात की समस्या दिनोंदिन जटिल होती जा रही है। मेट्रो विस्तार में जहां वित्तीय प्रबंधन रोड़ा बना है, वहीं सपा सरकार द्वारा डीपीआर को मंजूरी देने में हुई चूक को भी एक वजह बताया जा रहा है। माना जा रहा है कि अगर कानपुर की तरह लखनऊ मेट्रो रेल परियोजना के भी दोनों कॉरिडोर को एक साथ मंजूरी दे दी गई होती तो पहले कॉरिडोर (रेड लाइन ) का काम समाप्त होने के साथ ही दूसरे कॉरिडोर (ब्लू लाइन) का भी काम शुरू हो गया होता। ऐसा करके मेट्रो सेवा को जहां घाटे से उबारा जा सकता था, वहीं शहर के घनी आबादी वाले लोगों को भी इस सेवा का लाभ मिलता।

    बता दें कि छह साल पहले सितंबर 2017 को जब पहली बार लखनऊ मेट्रो ने यात्रियों के संग रफ्तार पकड़ी थी, तब लखनऊ वासियों में यह उम्मीद जगी थी कि इसका दायरा शहर के अन्य हिस्सों में भी बढ़ेगा। पर, उच्च स्तर पर हुई कई बैठकों के बाद भी चारबाग से बसंतकुंज तक प्रस्तावित मेट्रो के पूरब-पश्चिम कॉरिडोर पर खर्च होने वाले बजट की गुत्थी नहीं सुलझ सकी है। करीब 11.98 किमी. लंबे 12 स्टेशन वाले दूसरे चरण की परियोजना पर काम शुरू होना तो दूर, डीपीआर तक को मंजूरी नहीं दी जा सकी है। राज्य स्तर पर हो रही लेटलतीफी का नतीजा है कि दूसरे चरण का काम शुरू नहीं होने से पूरे शहर को मेट्रो से जोड़ने के लिए प्रस्तावित सात अन्य रूटों के लिए भी होमवर्क शुरू नहीं हो पा रहा है।

     

    सूत्रों के अनुसार मेट्रो के विस्तार में सबसे बड़ी अड़चन परियोजना पर आने वाला खर्च और मेट्रो से होने वाली आय में भारी अंतर है। सूत्रों का यह भी कहना है कि यूपीएमआरसी के लिए विश्व बैंक के लोन की किस्तें चुका पाना भी मुश्किल हो गया है। पहले से ही कोरोना के चलते मेट्रो की हालात और खस्ता हो गई थी, जिससे घाटा और ज्यादा बढ़ गया। मेट्रो पर सैकड़ों करोड़ रुपये का कर्ज चढ़ गया है। लखनऊ में मेट्रो के घाटे में पहुंचने का बड़ा कारण रूट का विस्तार नहीं होना है। विशेषज्ञों का मानना है कि नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर पर 23 किलोमीटर की दूरी में मेट्रो का संचालन किया जा रहा है, लेकिन इस रूट पर बड़ी संख्या में यात्री नहीं मिल रहे हैं। वहीं, अगर दूसरे चरण का काम भी पूरा हो जाए और चारबाग से बसंतकुंज के बीच मेट्रो दौड़ने लगे तो इस रूट पर बड़ी संख्या में यात्री मिल सकते हैं।

    इसलिए कानपुर, आगरा मेट्रो की रफ्तार तेज
    उप्र मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (यूपीएमआरसी) के उच्च तकनीकी अधिकारी के मुताबिक 2014 में तत्कालीन सरकार के एक अव्यावहारिक फैसले की वजह से लखनऊ में मेट्रो की रफ्तार थमी हुई है। पहले चरण के साथ ही दूसरे चरण की डीपीआर भी मंजूर करा ली जानी चाहिए थी। ऐसा नहीं होने की वजह से पहले चरण के 22 स्टेशनों के बीच मेट्रो का संचालन शुरू होने के बावजूद दूसरे चरण का डीपीआर अब तक मंजूर नहीं हो पाया है। देखा जाए तो इस लिहाज आगरा मेट्रो परियोजना की प्रगति की रफ्तार भी लखनऊ से आगे है। वहां पर पहले चरण का काम अंतिम चरण में है और दूसरे चरण के प्रारंभिक कार्य शुरू हो चुके हैं। इसी तरह लखनऊ मेट्रो परियोजना से करीब पांच साल बाद फरवरी 2019 में शुरू हुए कानपुर मेट्रो परियोजना के दूसरे चरण का काम भी शुरू हो चुका है और अगले साल इसे पूरा करने का लक्ष्य है।

    यह भी बड़ी वजह: जानकारों की नजर में पहले चरण में शुरू की गई लखनऊ मेट्रो का बढ़ता घाटा और दूसरे चरण के निर्माण की बढ़ती लागत भी परियोजना के विस्तार को रोकने की एक बड़ी वजह है। इसके चलते पहले चरण का काम पांच वर्ष पहले पूरा होने के बाद भी लखनऊ मेट्रो के दूसरे चरण का काम अब तक शुरू नहीं हो पाया है। जबकि यूपीएमआरसी ने दूसरे चरण की परियोजना की डीपीआर एक साल पहले ही शासन को भेज दी थी। परियोजना की बढ़ी लागत के आधार पर बजट की फाइल अभी तक शासन स्तर पर ही लटकी है। लागत को लेकर वित्त विभाग का सहमत न होना मुख्य कारण बताया जा रहा है।

    आगे नहीं बढ़ा इन 7 नए रूटों का काम (लंबाई 92.30 किमी.)
    – जानकीपुरम से मुंशी पुलिया (6.5 किमी.)
    – आईआईएम से राजाजीपुरम (21.5 किमी.)
    – चारबाग से पीजीआई (11 किमी.)
    – इंदिरानगर से इकाना स्टेडियम (8.7 किमी.)
    – इकाना स्टेडियम से सीसीएस हवाई अड्डा (19.6 किमी.)
    – सचिवालय से चक गंजरिया सिटी (12 किमी.)
    – आईआईएम से अमौसी (13 किमी.)
    एक साल में बढ़ी 475 करोड़ से अधिक लागत
    सूत्रों के मुताबिक यूपीएमआरसी ने दूसरे चरण का डीपीआर तैयार करके पिछले साल 9 सितंबर को ही आवास विभाग को भेज दिया था। इसमें परियोजना की बढ़ी लागत 4264 करोड़ प्रस्तावित की गई थी। जबकि 2017 में यह 3789 करोड़ थी। छह साल में लागत में 475.286 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हो गई है, इसलिए वित्त विभाग के स्तर पर इससे संबंधित प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिल पाई है। इस वजह से ब्ल्यू लाइन (पूरब-पश्चिम कॉरिडोर) का काम शुरू नहीं हो पा रहा है।

    जमीन न मिलने से भी विस्तार अटका
    सीजी सिटी में एलडीए से जमीन नहीं मिलने और दूसरी लाइन शुरू नहीं हो पाने से लखनऊ मेट्रो का रेवेन्यू मॉडल फेल हो गया है। सीजी सिटी में करीब 150 एकड़ जमीन मिलनी थी, पर पांच साल में ऐसा नहीं हो सका है। घाटे में चल रही मेट्रो अब यूरोपियन इन्वेस्टमेंट बैंक (ईआईबी) की किस्तें तक नहीं चुका पा रही है।

    329 करोड़ तक पहुंच चुका है घाटा
    यूपीएमआरसी की रिपोर्ट के मुताबिक पहले चरण के रूट पर मेट्रो का घाटा 329 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। एयरपोर्ट से मुंशीपुलिया के करीब 23 किमी. लंबे रूट पर प्रतिदिन एक लाख से अधिक यात्री मिलने का आकलन किया गया था, लेकिन संख्या 70 हजार तक ही पहुंच पाई है।

    इन वजहों से भी नहीं बढ़ रही यात्रियों की संख्या
    – पहले चरण के रूट का घनी आबादी से न जुड़ना।
    – मेट्रो की आय का जरिया सिर्फ यात्रियों को बनाना।
    – स्टेशन और मेट्रो में विज्ञापन डिस्प्ले की व्यवस्था न होना।
    – मेट्रो स्टेशन आदि के पास वाहनों के लिए सुरक्षित पार्किंग की व्यवस्था नहीं होना।

    खर्च की तुलना में कम है आय
    – यूपीएमआरसी को वर्ष 2017-2018 में यात्री आय सिर्फ 4.35 फीसदी थी, जो वर्ष 2018-2019 में बढ़कर 10.80 फीसदी और 2019-2020 में आय का ग्राफ 54.73 फीसदी तक पहुंच गया था। इससे कुछ हद तक मेट्रो रेल कॉरपोरेशन की वित्तीय स्थिति कुछ सुधरी ही थी कि इसी बीच कोविड की लहर आ गई और मेट्रो के पहिये थम गए। इसका नतीजा ये हुआ कि 2020-21 में आय का आंकड़ा 15.94 पर आ गया। 2022-23 में मेट्रो में यात्रियों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है, जिसका फायदा आय पर भी दिख रहा है। हालांकि मेट्रो के संचालन पर हो रहे खर्च और आय में अभी भारी अंतर बना हुआ है।

    विज्ञापन मद से कम ही रही आय
    स्टेशनों पर विज्ञापन, स्टेशन व संबंधित व्यावसायिक संपत्तियों के किराये, पार्किंग व अन्य मदों से आय होने लगी। मेट्रो की कमाई स्टाॅलों व अन्य वाणिज्यिक गतिविधियों से बहुत ज्यादा नहीं बढ़ सकी। यही नहीं जो शासन स्तर से लविप्रा की ओर से जमीन दिए जाने का मसौदा था, आज तक वह भी पूरा नहीं हो सका। ऐसे में लखनऊ मेट्रो अपनी आर्थिक स्थिति बहुत ज्यादा मजबूत नहीं कर सकी।
    महज दो साल में कानपुर में दौड़ने लगी मेट्रो
    दोनों कॉरिडोर की डीपीआर एक साथ मंजूर होने की वजह से लखनऊ की तुलना में कानपुर में मेट्रो का तेज गति से पूरा किया गया। 15 नवंबर 2019 को मेट्रो परियोजना का शुभारंभ हुआ था और 28 दिसंबर 2021 को इसका उद्घाटन हो गया था। इस प्रकार महज दो वर्ष के भीतर ही कानपुर में मेट्रो का संचालन शुरू हो गया। यही नहीं इसके साथ ही दूसरे कॉरिडोर का काफी काम हो चुका है और तीसरे चरण के लिए भी नापजोख शुरू हो चुकी है। इससे इस परियोजना पर लागत कम आई। माना जा रहा है कि अगले साल दूसरे कॉरिडोर पर भी मेट्रो का संचालन शुरू कर दिया जाएगा। ऐसे में कानपुर मेट्रो परियोजना को घाटे से बचाया जा सकता है।

    डीपीआर का हो रहा है परीक्षण, जल्द शुरू होगा कामः गोकर्ण
    अपर मुख्य सचिव आवास नितिन रमेश गोकर्ण का कहना है कि ये सही है कि दूसरे रूट पर काम शुरू होने में विलंब हो रहा है। यूपीएमआरसी ने चारबाग-वसंतकुंज रूट का डीपीआर शासन को उपलब्ध करा दिया है। इस परियोजना पर आने वाले खर्च को लेकर वित्त विभाग के साथ चर्चा भी हो रही है। साथ ही डीपीआर का तकनीकी परीक्षण कराया जा रहा है। बजट और डीपीआर का परीक्षण करने के बाद जल्द ही इस रूट पर का काम शुरू कराया जाएगा ।

    विस्तार से बढ़ेगी राइडरशिपः कुमार केशव
    यूपीएमआरसी के एमडी रहे कुमार केशव का कहना है कि आने वाले 5 वर्षों में लखनऊ की जनसंख्या 45 लाख से अधिक हो जाएगी। उस समय तक मेट्रो के 2 कॉरिडोर तैयार हो गए तो लाखों लोगों को जहां सुगम सफर की सुविधा मुहैया हो सकेगी, वहीं राजधानी की घनी आबादी वाले क्षेत्र में रहने वाले लोगों को मेट्रो रेल सेवा से जोड़ा सकेगा। ऐसा करने से मेट्रो की राइडरशिप के साथ ही आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।

  • बागेश्वर बाबा ने काशी विश्वनाथ मंदिर में लगाई हाजिरी, बोले- देश का सोया हुआ हिंदू अब जाग रहा है

    बागेश्वर बाबा ने काशी विश्वनाथ मंदिर में लगाई हाजिरी, बोले- देश का सोया हुआ हिंदू अब जाग रहा है

    बागेश्वर बाबा ने काशी विश्वनाथ मंदिर में लगाई हाजिरी, बोले- देश का सोया हुआ हिंदू अब जाग रहा है

    वाराणसी बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री सोमवार सुबह वाराणसी पहुंचे। काशी विश्वनाथ धाम में दर्शन-पूजन किया। बारिश के बीच विश्वनाथ धाम के बाहर बाबा भक्तों की भीड़ उमड़ी।
    बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने सोमवार को काशी विश्वनाथ धाम में हाजिरी लगाई। पांच ब्राह्मणों के नेतृत्व में वैदिक मंत्रों के बीच बागेश्वर बाबा ने काशी विश्वनाथ का षोडशोपचार पूजन किया। गंगा जल और दूध से बाबा का अभिषेक किया। गर्भगृह से बाहर आने के बाद बाबा के शिखर को नमन किया।

    दर्शन कर बाहर निकले बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने काशी विश्वनाथ धाम को अद्भुत बताया। कहा कि यहां आकर बहुत अच्छा लगा। एक सवाल के जवाब में बताया कि बाबा विश्वनाथ से भारत के हिंदू राष्ट्र होने की कामना की है। मीडिया के सवालों पर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि देश का सोया हुआ हिंदू अब जाग रहा है।
    हर-हर गंगे का किया उद्घोष
    इसका परिणाम है कि अब जगह-जगह रामराज्य की स्थापना हो रही है। उन्होंने हर-हर गंगे का उद्घोष किया। इससे पहले मंदिर परिसर में बागेश्वर बाबा को देख उनके भक्तों में खुशी की लहर दौड़ पड़ी। धाम के बाहर भी उनकी एक झलक पाने के लिए भारी भीड़ उमड़ी थी।

    एयरपोर्ट पर बागेश्वर बाबा का भव्य स्वागत

    वाराणसी एयरपोर्ट पर बागेश्वर बाबा का भव्य स्वागत – फोटो : अमर उजाला
    अर्चन-पूजन के बाद मंदिर के मुख्य कार्यपालक ने पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को अंग वस्त्रम और स्मृति चिन्ह भेंट किया। एसडीएम शम्भू शरण ने रुद्राक्ष की माला से स्वागत किया। पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री बाबा के भोग आरती के बाद 12:30 पर आए थे और दर्शन-पूजन के बाद 12:50 को अपने गन्तव्य को रवाना हो गए। कतार में लगे श्रद्धालुओं ने हर-हर महादेव के उद्घोष के साथ बागेश्वर धाम के जयकारे लगाए। झमाझम बारिश के बीच हर किसी में बाबा बागेश्वर को एक झलक देखने की ललक थी।

    इससे पहले सुबह करीब 11 बजे बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री निजी विमान से वाराणसी एयरपोर्ट पहुंचे। पोर्टिको परिसर के बाहर बाबा बागेश्वर का भव्य स्वागत हुआ। इसके बाद सड़क मार्ग से काशी विश्वनाथ धाम पहुंचे।

     

  • बागेश्वर बाबा ने काशी विश्वनाथ मंदिर में लगाई हाजिरी, बोले- देश का सोया हुआ हिंदू अब जाग रहा है

    बागेश्वर बाबा ने काशी विश्वनाथ मंदिर में लगाई हाजिरी, बोले- देश का सोया हुआ हिंदू अब जाग रहा है

    बागेश्वर बाबा ने काशी विश्वनाथ मंदिर में लगाई हाजिरी, बोले- देश का सोया हुआ हिंदू अब जाग रहा है

    वाराणसी बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री सोमवार सुबह वाराणसी पहुंचे। काशी विश्वनाथ धाम में दर्शन-पूजन किया। बारिश के बीच विश्वनाथ धाम के बाहर बाबा भक्तों की भीड़ उमड़ी।
    बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने सोमवार को काशी विश्वनाथ धाम में हाजिरी लगाई। पांच ब्राह्मणों के नेतृत्व में वैदिक मंत्रों के बीच बागेश्वर बाबा ने काशी विश्वनाथ का षोडशोपचार पूजन किया। गंगा जल और दूध से बाबा का अभिषेक किया। गर्भगृह से बाहर आने के बाद बाबा के शिखर को नमन किया।

    दर्शन कर बाहर निकले बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने काशी विश्वनाथ धाम को अद्भुत बताया। कहा कि यहां आकर बहुत अच्छा लगा। एक सवाल के जवाब में बताया कि बाबा विश्वनाथ से भारत के हिंदू राष्ट्र होने की कामना की है। मीडिया के सवालों पर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि देश का सोया हुआ हिंदू अब जाग रहा है।
    हर-हर गंगे का किया उद्घोष
    इसका परिणाम है कि अब जगह-जगह रामराज्य की स्थापना हो रही है। उन्होंने हर-हर गंगे का उद्घोष किया। इससे पहले मंदिर परिसर में बागेश्वर बाबा को देख उनके भक्तों में खुशी की लहर दौड़ पड़ी। धाम के बाहर भी उनकी एक झलक पाने के लिए भारी भीड़ उमड़ी थी।

    एयरपोर्ट पर बागेश्वर बाबा का भव्य स्वागत

    अर्चन-पूजन के बाद मंदिर के मुख्य कार्यपालक ने पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को अंग वस्त्रम और स्मृति चिन्ह भेंट किया। एसडीएम शम्भू शरण ने रुद्राक्ष की माला से स्वागत किया। पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री बाबा के भोग आरती के बाद 12:30 पर आए थे और दर्शन-पूजन के बाद 12:50 को अपने गन्तव्य को रवाना हो गए। कतार में लगे श्रद्धालुओं ने हर-हर महादेव के उद्घोष के साथ बागेश्वर धाम के जयकारे लगाए। झमाझम बारिश के बीच हर किसी में बाबा बागेश्वर को एक झलक देखने की ललक थी।

    इससे पहले सुबह करीब 11 बजे बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री निजी विमान से वाराणसी एयरपोर्ट पहुंचे। पोर्टिको परिसर के बाहर बाबा बागेश्वर का भव्य स्वागत हुआ। इसके बाद सड़क मार्ग से काशी विश्वनाथ धाम पहुंचे।