Author: cwsadmin

  • आओ जुड़ कर अपने अधिकार राजनीतिक दलों, नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों से प्राप्त करे, भाग:- 2

    आओ जुड़ कर अपने अधिकार राजनीतिक दलों, नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों से प्राप्त करे, भाग:- 2

    *आओ जुड़ कर अपने अधिकार इन राजनीतिक दलों, नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों से प्राप्त करे*

    1. प्रशासनिक अधिकारियों और जन प्रतिनिधियों द्वारा पद की शक्ति का दुरुपयोग कर जनता का शोषण करने पर अंकुश लगाना है मानव अधिकार,

    2. समाज के सभी व्यक्तियों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक आज़ादी में कोई खलल ना हो इसके लिए है मानव अधिकार,

    3. नस्ल, धर्म, जाति के नाम पर मानव द्वारा मानव का शोषण ना हो और अत्याचार एवम जुल्म ना हो यह है मानव अधिकार,

    4. आदमी गोरा हो या काला,
    हिन्दू हो या मुसलमान,
    सिख हो या ईसाई,
    हिंदी बोले या अन्य भाषा, उसको समान अधिकार प्राप्त हो यह है मानव अधिकार,

    5. a. सबको साफ सुथरा माहौल मिले,
    b. शारीरिक जांच – पड़ताल, इलाज और दवाईयों की अच्छी साहूलियत मिले
    c. पढ़ाई लिखाई करने की अच्छी और पूरी सुविधा मिले,
    d. बिजली पानी की उपलब्धता सुनिश्चित हो और पीने का पानी सवच्छ मिले,
    e. जाति, धर्म, भाषा, के कारण किसी के साथ भेदभाव नहीं हो,
    f. सबको रोजगार, स्थाई नौकरी, और समान अधिकार मिले
    g. कही भी कभी भी आने जाने पर कोई रोक टोक नही हो
    h. कुछ भी बोलने पर कोई पाबंदी नहीं हो यह है मानव अधिकार,

    मानव अधिकारों में अगर कोई भी बाधा उत्पन्न करता है तब बाधा डालने वाले के खिलाफ़ कार्यवाही कर सकते है और सरकारी विभाग , प्रशासनिक अधिकारी शिकायत के बाद मदद नहीं कर रहे या हनन को रोकना नहीं चाहा रहे तब सरकारी विभाग, प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ़ मानव अधिकार आयोग में शिकायत दर्ज करवाने का प्रावधान है और इसके लिए किसी अधिवक्ता (वकील) की जरूरत नहीं होती।

    *सबको सबकी इच्छा अनुसार आजादी रहे यह है मानव अधिकार* ,

    *आओ जुड़ कर अपने अधिकार इन राजनीतिक दलों, नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों से प्राप्त करे* जल्द आएगा कुछ और नई जानकारी के साथ भाग 3, हमसे जुड़ें और अपने हक को प्राप्त करे वह भी कानून के दायरे में।

    जनहित में जारी,
    संजय बाटला

  • *क्या भारत देश के युवा जानते हैं आपको बेरोजगार रखने से राजनीतिक पार्टियों और सरकार को कितना फायदा होता है, जाने* ?

    *क्या भारत देश के युवा जानते हैं आपको बेरोजगार रखने से राजनीतिक पार्टियों और सरकार को कितना फायदा होता है, जाने* ?

    आओ जुड़ कर अपने अधिकार इन राजनीतिक दलों, नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों से प्राप्त करे।
    भाग :- 1

    क्या भारत देश के युवा जानते हैं आपको बेरोजगार रखने से राजनीतिक पार्टियों और सरकार को कितना फायदा होता है, जाने ?

    देश में कोई बेरोजगार ना हों, यह किसी देश के लिए सम्मान की बात होती हैं, इसीलिए पश्चिमी देशों में बेरोजगार युवाओं को बेरोजगारी भत्ता देकर दुसरे देशों में जाने के लिए बोल दिया जाता हैं जहां जाकर वह अपना जीवन उस बेरोजगारी भत्ते के पैसों से कर सकता हो।

    लेकिन भारत देश पश्चिमी देशों से इस के लिए बिलकुल भिन्न है यहां के सभी राजनीतिक दल चाहते है भारत देश का युवा बेरोजगार रहे।

    यह मै जिंदगी में देखे गए अनुभव के आधार पर बता रहा हू ।

    भारत देश के राजनीतिक दलों और नेताओं को भीड़ दिखाने, नारे लगवाने, आगे पीछे चापलूसी करते घूमने वालों की जरूरत सबसे ज्यादा रहती हैं, जिसके आगे पीछे जितनी भीड़ उसकी नज़र में उसका कद उतना बड़ा।

    अब आप ही बताइए अगर भारत देश के युवाओं को रोजगार / नौकरी मिल गई तो क्या वह किसी नेता, अभिनेता, नायक या अभिनायक के पीछे घुमेंगे ?

    भारत देश के सविधान में सबको समानता के अधिकार मिले हुए हैं पर अधिकारों को पाने के लिए जनता को उन्हे जानना और समझना जरूरी है जिसके लिए पढ़ाई की आवश्यकता होती हैं । पढ़ाई जो हर व्यक्ति का मौलिक अधिकार है पर उसके बावजूद भारत में पढ़े लिखे से ज्यादा अनपढ़ की गिनती है जिसके पीछे मुख्य कारण गरीबी है और उसके लिए जिम्मेदार है राजनीतिक पार्टियां जो सत्ता पर काबिज है।

    दुर्भाग्य की बात यह है कि भारत देश में तो पढ़े- लिखे अधिकतर युवा बेरोजगार हैं या अपने ज्ञान से बहुत न्यूनतम कार्य करने को मजबूर हैं और उसका मुख्य कारण भारत देश के राजनीतिक

    भारत देश में राजनीतिक पार्टी सत्ता पर विराजमान होने के लिए जनता को लुभावनी वायदे और प्रलोभन देकर जनता से वोट प्राप्त कर सत्ता पर कब्जा कर जाते है और सत्ता पर विराजमान होते ही जनता को सिर्फ वायदों पर घुमाते रहते हैं जिससे उनके आगे पीछे घूमने वालों का तांता लगा रहें।

    अब सरकारों का फायदा भी देखें:- सरकार बेरोजगार के लिए नौकरी का विज्ञापन जारी करेगी और साथ में जारी करेंगे उसको प्राप्त करने के लिए आवेदन पत्र जिसका सरकार की कथनी के अनुसार होगा एक मामूली सा मूल्य, नौकरी होगी मान ले 100, आवेदन प्रक्रिया में आवेदन प्राप्त होगें कम से कम लाखों में।
    अब आप अंदाजा लगा सकते है 100 नौकरी के एवज में मामूली से मूल्य से भी सरकारी खजाने में पैसे जमा हो गए करोड़ों रुपए।

    यह बात भी यही खत्म नहीं हो जाती उसके बाद किसी भी बहाने का समाचारों में ढिंढोरा पिटवा कर जैसे पेपर लीक हो जाना इत्यादि उस प्रक्रिया को बंद करवा देना। यानी बेरोजगार से रोजगार प्राप्त करने वाला एक भी नहीं और सरकारी राजस्व में इज़ाफ़ा करोड़ों रुपए।

    आपकों आपके अधिकार दिलवाने और अधिकारों की जानकारी हेतु यह पहला ब्लॉग है, आपकी जानकारी और मदद के लिए प्रतिदिन आपके साथ मिलेंगे।

    आओ जुड़ कर अपने अधिकार इन राजनीतिक दलों, नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों से प्राप्त करे।

    जनहित में जारी,
    संजय बाटला

  • सवाल :- समाज, प्रशासन, शासक और महानायकों से, हैं क्या जवाब?

    सवाल :- समाज, प्रशासन, शासक और महानायकों से, हैं क्या जवाब?

    सवाल समाज, प्रशासन, शासक और सता पर विराजमान महानायकों से ?

    1. आखिर कब तक महिलाओं और नाबालिग बच्चियों को निर्भया के रूप में अपनी जिंदगी को अलविदा कहना होगा ,
    2. आखिर कब तक किसी निर्भया के जाने के बाद उसे न्याय दिलाने के लिए हाथों में मोमबत्ती लेकर शहर की गलियों और चौराहों पर बैठना पड़ेगा ?,
    3. आखिर कब तक महिलाओं को ऑफिस या कहीं और से आते समय लेट होने पर डर और चिन्ता के कारण सार्वजनिक वाहन में भी सोच समझ और देख कर बैठना होगा ? आखिर ये सिलसिला कब थमेगा ? है क्या कोई जवाब सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों के पास ?

    समाज में होने वाले सभी प्रकार के अत्याचारों पर सख्त से सख्त कदम उठाने के प्रावधान है पर उसके बावजूद सता पर हमारे ही द्वारा विराजमान कराए गए महानायक और प्रशासनिक अधिकारी हाथ पर हाथ रख आंखे और मुंह बंद कर बैठे रहते है।

    क्योंकि हमारे बीच जागरुकता की कमी हैं और इसी वजह से हमे हमारे अधिकार नहीं मिल पाते। जो हमे संविधान में मिले हुए हैं मौलिक हो या मानव अधिकार ।

    अपने अधिकारों को पाने के लिए और सता पर विराजमान महानायको, आईएएस/ धानिक/ सरकारी / प्रशासनिक अधिकारी द्वारा जो हमारे अधिकार दिलाने में अहम भूमिका निभाई जानी चाहिए पर नही निभाई जा रही,, ऐसे हनन को रोकने के लिए आप आगे आए साथ जुडें और अपने जीवन में मिले अधिकारो जैसे न्याय का अधिकार,
    समानता का अधिकार,
    जीवन का अधिकार, इत्यादि सभी कामो को पाने के लिए एकजुट होकर मानवता की सेवा करे इस मुहिम के एक मुख्य किरदार और हिस्सेदार बने, आपके द्वारा आपका अपना दायित्व निभाने से हम हम सभी अपने अधिकारों को पाने में कामयाब हो जाएंगे।

    जनहित में जारी,
    संजय बाटला

  • परिवहन विभाग के आदेश की बेखौफ अवेहलना,

    परिवहन विभाग के आदेश की बेखौफ अवेहलना,

    परिवहन विभाग के आदेश के बाद भी टाटा और आईचर वाहन डीलर स्पीड गवर्नर एएमसी के लिए चार्ज कर रहे हैं रुपए 2000,

    दिल्ली में व्यवसायिक वाहनों में वाहन के अन्दर ही स्पीड गवर्नर डिवाइस लग कर आता है और दिल्ली की सड़कों पर स्पीड कैमरे भी लगाए जा चुके हैं जिनसे सड़कों पर वाहनों की स्पीड अपनी आप जांच होती हैं पर उसके बाद भी दिल्ली परिवहन विभाग द्वारा वाहन फिटनेस की जांच के समय स्पीड गवर्नर डिवाइस की एएमसी अनिवार्य कर रखी है ।

    कुछ महीने पहले वाहन मालिकों और अन्य संगठनों ने परिवहन विभाग में डिवाइस एएमसी अनिवार्यता समाप्त करने की बात कही थी जिस पर परिवहन विभाग ने इसकी अनिवार्यता समाप्त ना करके आदेश पारित किए थे की एएमसी जारी करने वाला कोई भी वाहन डीलर 500 रुपए से अधिक चार्ज नहीं करेगा पर परिवहन विभाग का यह आदेश आज भी हवाई आदेश बना हुआ है।

    वाहन के स्पीड गवर्नर डिवाइस की एएमसी बनाने वाले आज भी वाहन मालिको से रुपए 2000 ले रहे हैं और उनसे आदेश की बात करो तो जवाब में बोल देते हैं जो इतने में कर रहा है वहा से करवा लो। स्पीड गवर्नर डिवाइस एएमसी इंचार्ज नंबर 099583 63647 Mr Mukesh Mishra

    वाहन मालिक क्या करे उसको मजबूर होकर रुपए 2000 देने पड़ रहे हैं क्योंकि परिवहन विभाग ने वाहन जांच के लिए इस एएमसी की अनिवार्यता कर रखी है जिसका भरपूर फायदा एएमसी बनाने वाले उठा रहे हैं।

    परिवहन विभाग अगर अपने द्वारा जनहित में जारी आदेश को लागू करवाने में असमर्थ हैं तो ऐसे आदेश जनहित में पारित करने का क्या उद्देश्य

    परिवहन विभाग को अपने द्वारा जारी इस जनहित के आदेश को या तो वापिस ले लेना चाहिए अन्यथा एएमसी डीलर्स के द्वारा आदेश के बाद भी अधिक फीस लेने वाले से वाहन मालिको को ब्याज समेत पैसा वापिस दिलवाना चाहिए अन्यथा स्पीड गवर्नर डिवाइस की एएमसी की अनिवार्यता समाप्त कर देनी चाहिए जिससे परिवहन विभाग के आदेश ना मानने वालों को आगे के लिए समझ आ सके।

    अब देखना है की परिवहन विभाग द्वारा उनके आदेश की अवहेलना करने वाले एएमसी डीलर के प्रति क्या फैसला लिया जाता हैं ।

    जनहित में जारी
    संजय बाटला