Author: cwsadmin

  • महामंडलेश्वर महंत नवल किशोर दास को किया गया नियुक्त अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के प्रवक्ता

    महामंडलेश्वर महंत नवल किशोर दास को किया गया नियुक्त अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के प्रवक्ता

    महामंडलेश्वर महंत नवल किशोर दास अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के प्रवक्ता नियुक्त

    महामंडलेश्वर महंत नवल किशोर दास (रामायणी) जी को अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद की तरफ से प्रवक्ता नियुक्त किए जाने पर सभी ने उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी।

    सभी अखाड़ों की सहमति और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और महामंत्री व 13 अखाड़ों के देश के सभी संतो की तरफ से महाराज जी को अखिल भारतीय संतो का पक्ष रखने के लिए अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद का प्रवक्ता बनाया गया है ।

    महामंडलेश्वर महंत नवल किशोर दास जी ने अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत राजेंद्र दास महाराज और महामंत्री महंत रविंद्र पूरी जी महाराज , समस्त अखाड़ा परिषद व संत समाज का आभार व्यक्त किया ।

    महंत नवल किशोर दास हमेशा अपनी जिम्मेदारियों का निर्वाह पूरे मन से करते रहे इसलिए अखाड़ा परिषद के कार्यों एवं उसकी नीतियों का प्रचार प्रसार तथा सोशल मीडिया समाचार पत्र एवं टीवी पर प्रवक्ता के तौर पर उन्हें अखाड़ों की बात रखने तथा समाज की कुरीतियों एवं विसंगतियों पर धार्मिक पक्ष रखने की जिम्मेदारी का निर्वाह करेंगे।

    महंत नवल किशोर दास महान विद्वान एवं धर्म के ज्ञाता है जो अपने विचारों से समाज को नई दिशा देने का काम करेंगे ।

    सौजन्य से :- स्वतंत्र सिंह भुल्लर

    प्रस्तुतकर्ता :- संजय बाटला

  • परिवहन विभाग दिल्ली को प्रदुषण मुक्त बनाना चाहता है या प्रदुषण ग्रस्त

    परिवहन विभाग दिल्ली को प्रदुषण मुक्त बनाना चाहता है या प्रदुषण ग्रस्त

    दिल्ली परिवहन विभाग द्वारा बुराड़ी से 350 हरे भरे पेड़ सिर्फ इसलिए कटवा दिए गए थे क्योंकि वहा दिल्ली परिवहन विभाग को इलेक्ट्रिक वाहन डिपो शुरु करना है। वन विभाग और माननीय उपराज्यपाल द्वारा आज्ञा भी प्राप्त हो गई वह भी ऐसे समय में जब दिल्ली प्रदुषण का चैंबर बनी हुई हैं। इस समय शुद्ध वायु के लिए पेड़ों की सख्त आवश्यकता है और उसके बावजूद हरे भरे पेड़ों को काटा जाना और वह भी स्वयं सरकारी विभाग जो दिल्ली को प्रदुषण मुक्त करने के लिए सबसे अधिक मेहनत कर रहा है उसके द्वारा, थोड़ा सोचने का विषय बनता है।

    ऐसा नहीं की इन 350 हरे भरे लहलहाते पेड़ों को काटने के बदले में परिवहन विभाग ने नए पेड़ ना लगाए हो। विश्वस्त सूत्रों की माने तो दिल्ली परिवहन विभाग ने इसके बदले 1000 नए वृक्ष लगवाए थे, पर कहा और आज उनमें से कितने पेड़ जिन्दे है इसका जवाब देने वाला कोई नहीं।

    विश्वस्त सूत्रों की माने तो दिल्ली परिवहन द्वारा फिर से अन्य कई हजार हरे भरे लहलहाते पेड़ों को काटने की इजाजत के लिए फाइल चला रखी है और उन्हें काटने की इजाजत भी प्राप्त कर ही लेगा क्योंकी परिवहन विभाग कोई कार्य करने का फैसला कर ले या दिल मना ले तो उसे पूरा करके ही मानता है उसमे चाहें माननीय उच्चतम न्यायालय, माननीय उच्च न्यायालय, माननीय कैट, भारत सरकार के मंत्रालय या दिल्ली सरकार के मंत्रालयों का विरोधी आदेश ही पारित क्यो नही हो।

    दिल्ली परिवहन विभाग स्वयं यह सिद्ध करने में नही चुकता की दिल्ली में प्रदुषण का मुख्य कारण दिल्ली में चलने वाले वाहन हैं जबकि दिल्ली में चलने वाले सभी वाहन जिस पेट्रोलियम पदार्थ से चलते हैं वह जिस कैटेगरी में आता है उसके अनुसार वाहनों से प्रदुषण उत्पन्न होना ही नहीं चाहिए पर फिर भी वाहन है प्रदुषण उत्पन्न होने का मुख्य ज़िम्मेदार।

    दिल्ली में जब सीएनजी और उच्च मानक के पेट्रोलियम पदार्थ उपल्ब्ध नही थे तब भी दिल्ली का प्रदुषण इतना कभी नही पाया गया था उल्टा दिल्ली को ग्रीन सिटी का अवार्ड प्राप्त हुआ था।

    आज दिल्ली का पूरा व्यवसायिक वाहन सीएनजी वर्जन में है और अन्य सभी उच्च श्रेणी के पेट्रोलियम से चालित है फिर उनसे प्रदुषण का कारण, शायद किसी के पास नही है जवाब।

    ऐसे में परिवहन विभाग द्वारा ही हरे भरे लहलहाते पेड़ों को कटवाना कितना दिल्ली को प्रदुषण मुक्त करने का प्रयास है आप स्वयं सोचे समझे।

    जनहित में जारी :- संजय बाटला

  • परिवहन विभाग द्वारा ड्राइविंग ट्रैनिंग के नाम पर घोषणा 4800 रुपए सब्सिडी कितनी तथ्यपूर्ण,

    परिवहन विभाग द्वारा ड्राइविंग ट्रैनिंग के नाम पर घोषणा 4800 रुपए सब्सिडी कितनी तथ्यपूर्ण,

    दिल्ली परिवहन आयुक्त द्वारा आज ट्वीट (कापी इसी ब्लॉग के साथ) कर कहा की दिल्ली में जो महिलाएं ई वाहन व्यवसायिक चलाने की उत्सुक हैं वह परिवहन विभाग की साइट पर सब्सिडी के लिए अप्लाई करें, यह एक अच्छी खबर है।

     

     

    परिवहन विभाग द्वारा बताया गया की विभाग ड्राइविंग ट्रैनिंग के लिए 50 प्रतिशत की सब्सिडी जो 4800 रुपए बनती हैं दी जाएगी।

    उल्लेखनीय बात यह है कि दिल्ली में बेहतरीन ड्राइविंग ट्रैनिंग देने के लिए बहुत से ट्रस्ट, एनजीओ एवम् ट्रैनिंग देने में सक्षम स्कूल है जो दिल्ली परिवहन विभाग द्वारा दिए तीन ड्राइविंग ट्रैनिंग स्कूल (बुराड़ी, सराय काले खां और लोनी) जो परिवहन विभाग की जमीन पर चल रहे हैं से बेहतरीन नई तकनीक के साथ सिर्फ 4000 रुपए में बिना महिलाओ है एक भी रुपया लिए महिलाओ को ड्राइविंग स्किल में माहिर करने को तैयार हैं फिर सरकारी ज़मीन का प्रयोग करने वाले स्कूल को इतनी अधिक फीस लेने की इजाजत क्यों?

    दिल्ली परिवहन विभाग को महिलाओ को ड्राइविंग स्किल डेवलपमेंट ट्रैनिंग देने की लिए अन्य सभी रजिस्टर्ड ट्रस्ट, एनजीओ और ड्राइविंग ट्रैनिंग देने की स्किल रखने वालों से भी पहली इस ट्रैनिंग को देने की दर प्राप्त करनी चाहिए।

    इससे दिल्ली परिवहन विभाग का पैसा भी कम खर्च होगा और महिलाओं को सब्सिडी के अलावा एक रूपया भी नही देना पड़ेगा।

    जनहित में जारी :- संजय बाटला

  • परिवहन विभाग द्वारा सरकारी खजाने में इजाफा करवाने और आप पार्टी के वोट बैंक बनवाने का परिणाम है क्या “दिल्ली परिवहन निगम का निजीकरण”

    परिवहन विभाग द्वारा सरकारी खजाने में इजाफा करवाने और आप पार्टी के वोट बैंक बनवाने का परिणाम है क्या “दिल्ली परिवहन निगम का निजीकरण”

    परिवहन विभाग द्वारा दिल्ली सरकार के राजस्व में इज़ाफ़ा और आप पार्टी के वोट बैंक बनवाने की नीतियों का परिणाम / हिस्सा है क्या ???””दिल्ली परिवहन निगम का निजीकरण”” ?

    पिछले कुछ सालों से दिल्ली परिवहन विभाग द्वारा जारी आदेश/ दिशा निर्देश/ नीतियां स्वयं यह सिद्ध करती रही है की इनके पीछे मुख्य कारण सिर्फ आप पार्टी दिल्ली सरकार के लिए वोट बैंक और राजस्व में इज़ाफ़ा करना है, इस बारे में किसी को सिद्ध करने के प्रमाण देने की जरूरत नहीं।

    दिल्ली में ऑटो की फिटनेस फीस और डिम्ट्स माफ करना और अन्य सभी वाहन मालिकों द्वारा उठाई गई मांग बढ़ी हुई फिटनेस जुर्माने की बढोतरी को कम करने को मना कर देना यह कह कर की यह भारत सरकार के आदेश है हम कुछ नहीं कर सकते फिर बिना भारत सरकार द्वारा माफ के आदेश प्राप्त किए ऑटो के लिए माफ कर देना!?
    कोरोना वायरस के बुरे दौर में सिर्फ उन्ही वाहन मालिकों और ड्राइवरों को मदद देने की घोषणा करना और अन्य के लिए मदद के लिए मना कर देना!!?
    ई रिक्शे की रजिस्ट्रेशन करवाने पर बिना पक्के लाईसेंस होते हुए भी सब्सिडी देना!!?
    ऑटो का किराया कई बार बढ़ाने के आदेश पारित कर देना!!?
    दिल्ली सरकार और परिवहन विभाग द्वारा स्वयं खड़े करवाए गए वाहनों से रोड टैक्स वसूलना
    दिल्ली में चलने वाली क्लस्टर कंपनियों को एग्रीमेंट की शर्त बता कर प्रति वर्ष किलो मीटर की देय राशि बढ़ा कर देना और अन्य सभी स्टेज कैरेज परमिट पर चलने वाले वाहनों को अनदेखा करना
    धाटे पर होने के बाद भी महिला फ्री, मजदूर फ्री जैसी स्कीमों को लागू करना,

    इन जैसे अनगिनत दिशा निर्देश/ आदेश और नीतियां हैं जो स्वयं इस बात का प्रमाण है कि परिवहन विभाग सिर्फ और सिर्फ दिल्ली की आप पार्टी के वोट बैंक और राजस्व में इज़ाफ़ा करने में संलिप्त हैं।

    आम आदमी की परेशानियों को जनहित के कार्यों में व्यस्त बताकर टालते रहना या ठंडे बस्ते में डाल देना, बैंको, एनबीएफसी कंपनियों, व्यापारियों, एवम् अन्य रोजगार में लिप्त व्यक्तियो पर अलग ढंग के आदेश/ दिशा निर्देश जारी कर और दबाव बना कर दिल्ली सरकार के मंत्री/ मुख्यमंत्री के द्वार पर दस्तक लगाने के रास्ते बनाना आज परिवहन विभाग का मुख्य उद्देश्य और कार्य है।

    दिल्ली परिवहन विभाग दिल्ली परिवहन निगम की जमीन पर परिवहन विभाग के कार्यालय बनाने के लिए, ऑटोमेटिक ड्राईविंग टैस्ट ट्रैक बनाने के लिए और क्लस्टर कंपनियों की बसों को खड़ा करवाने के लिए कब्जा करता आ रहा हैं ।

    अब प्रश्न यह उठता है कि

    1. दिल्ली परिवहन निगम को दिल्ली सरकार और परिवहन विभाग द्वारा ज़रुरत अनुसार सभी रूट पर चलने के लिए बस ही उपल्ब्ध नही करवाना,
    2. परिवहन निगम के अनुरोध के बाद भी दिल्ली परिवहन विभाग और दिल्ली सरकार द्वारा किराया वृद्धि की घोषणा नही करना,
    3. अंतराजकीय रूट पर चलाने के लिए परिवहन विभाग और दिल्ली सरकार द्वारा बस ही उपल्ब्ध नही करवाना,
    4. डीटीसी की बसों में महिला और मजदूरो को दिल्ली परिवहन विभाग और दिल्ली सरकार द्वारा फ्री चलवाना,
    5. परिवहन विभाग और दिल्ली सरकार द्वारा कलस्टर कम्पनियों के संचालन करने वाली कंपनी से डीटीसी के किसी भी रूट पर चलने वाले परिचालन के समय पर उसी समय पर साथ में कलस्टर बसों को चलवाना,

    ऐसे हालात बनाने और बनवाने के बाद जनता के समक्ष प्रस्तुत अपनी सफाई में यह प्रकट करना की दिल्ली परिवहन निगम घाटे में चल रही है इसलिए निजीकरण करने का विचार किया जा रहा है, कितना न्यायपूर्ण है दिल्ली की जनता स्वयं फैसला ले।

    किसी भी राज्य सरकार और परिवहन विभाग का पहला दायित्व है अपने राज्य की जनता को सुरक्षित, सुगम और प्रभावी सार्वजनिक सेवा उपल्ब्ध करवाना और दिल्ली सरकार और परिवहन विभाग दिल्ली क्या कर रहे है आप स्वयं करे फैसला।

    कितना जनहित में लगे हैं
    दिल्ली सरकार और परिवहन विभाग दिल्ली फैसला आपका ?

    जनहित में जारी,
    संजय बाटला

  • परिवहन विभाग ने नहीं लिया जनता के हित मे फैसला, आखिर क्यों ?

    परिवहन विभाग ने नहीं लिया जनता के हित मे फैसला, आखिर क्यों ?

    दिल्ली परिवहन विभाग द्वारा एनबीएफसी कंपनियों और बैंकों को एचपी एडिशन के लिए अपने दिए निर्देश पर खरा नहीं उतरने पर कानूनी प्रक्रिया की धज्जियां उड़ाते हुए आज भी जनता की परेशानी पर कोई हल नहीं निकाला,

    कल हमने बताया था कैसे दिल्ली में प्रदुषण रोकने के लिए माननीय उच्चतम न्यायालय ने 2010 में दिल्ली में डीजल से चलने वाले व्यवसायिक वाहनों पर पाबन्दी के आदेश पारित किए थे पर जनहित में लोगो को इस आदेश के कारण व्यवसायिक वाहनों की कमी होने की वजह से परेशानी नहीं महसूस हो को नजर में रखते हुए डीजल वाहन मालिको पर जुर्माना अदा कर चलाने की इजाजत दी थी, यह था जनहित,

    परिवहन विभाग अपनें आदेशों को जनहित का नाम देकर जनता को ही परेशानी के समुंद्र में धकेल रहा है। यह जनहित है या हठधर्म अब आप ही फैसला कर के बताए।

    दिल्ली में पहले ही दिल्ली सरकार और परिवहन विभाग की नीतियों के कारण अधिकतम व्यवसायिक वाहन सड़कों से हट चुके हैं और परिवहन विभाग की हठधर्मी के कारण जो अपने कारोबार को करना चाहते है वह भी परेशान हो रहे हैं।

    परिवहन विभाग की हठधर्मी के साथ परिवहन विभाग की शाखाओं में कार्यरत अधिकारी भी जनता को परेशान करने में जुटे हैं। जिन बैंको और एनबीएफसी कंपनियों ने परिवहन विभाग की बात मान कर आनलाइन कार्य शुरू कर दिया है उनके भी एचपी एडिशन को बहाने बना कर रोक लगा कर बैठे हैं।

    परिवहन विभाग के आला अधिकारियों को आदेश पारित करने के साथ इतना समय उसे लागू करने के लिए देना चाहिए जिससे जनता परेशान नहीं हो ।

    परिवहन विभाग के दबाव में 80 से ज्यादा बैंको / एनबीएफसी द्वारा अपना आनलाइन कार्य शुरू कर दिया गया है फिर अन्य पर दबाव बनाने के लिए ऐसा तरीका अपनाएं जिससे जनता प्रभावित नही हो और परिवहन विभाग का दबाव भी बने।

    परिवहन विभाग जनता की मदद के लिए हैं ना कि जनता को परेशान करने के लिए।

    जनहित में परिवहन विभाग को वाहनों की एचपी एडिशन को पुराने और नए दोनो तरीको से शुरू रखना चाहिए ।

    जनहित में जारी

    संजय बाटला

  • दिल्ली परिवहन विभाग अपने वर्चस्व और हठधर्मी के लिए क्या नही कर सकता, जाने !!!

    दिल्ली परिवहन विभाग अपने वर्चस्व और हठधर्मी के लिए क्या नही कर सकता, जाने !!!

    दिल्ली परिवहन विभाग अपने वर्चस्व को कायम करने के लिए जनहित का नाम लेकर दिल्ली के वाहन मालिकों को परेशान करने की हठ पर अड़ा हैं, क्या जनता को परेशानी में देखकर ही खुशी मिलती हैं या हैं कोई अंदरूनी कारण ?

    मोटर वाहन नियम अधिनियम के अलावा भारत देश के सविधान के तहत मौलिक अधिकार के अंदर किसी की संपत्ति/वाहन/ अधिकारिक सामानों पर कर्जा लेना या कर्जा उतारना या उस पर किसी के लिए जमानत देना मालिक की इच्छा पर निर्भर करता है, क्या परिवहन विभाग को इसकी जानकारी नहीं।

    दिल्ली परिवहन विभाग अपने स्वयं के कानून / नियम
    वह भी बिना कानूनी प्रक्रिया पूरी करे,
    बिना नियमों कानून में संशोधन करे,
    बिना गैजेट नोटीफिकेशन में जारी किए, जनहित का नाम लेकर जनता को परेशानी में डालने के आदेश जारी कर रहा है। आखिर क्यों ? क्या दिल्ली और भारत सरकार ने दिल्ली परिवहन विभाग को निधि एवम् कानून मंत्रालय का कार्यभार भी सौप दिया है ?

    दूसरे के निजी मामलो और व्यवसाय में दखलंदाजी करना और जनता को परेशानी में डालना क्या परिवहन विभाग के कार्य शैली में निमित है?

    बैंको द्वारा अपनी निजी वाहनों पर लोन लेना आज की नई प्रक्रिया नही है ऐसे में अपने निजी फायदे के लिए वाहन मालिक और फाइनेस करने वालों के बीच में अपना वर्चस्व स्थापित करना क्या परिवहन विभाग का कार्य है ?

    जनता को मदद करने के नाम से जनता को ही परेशान करना कहा का ओचित्य है वह भी सिर्फ अपने वर्चस्व कायम करने के लिए, किस कानून में ऐसे किए जाने वाले कार्य को जनहित में कहा गया है।

    परिवहन विभाग एनबीएफसी कंपनियों और बैंकों में अपना वर्चस्व स्थापित करना चाहता है तो जरूर करे पर जनता को जरिया बनाकर यह कहा का इंसाफ है?

    कुछ दिन पहले परिवहन विभाग द्वारा जनहित में आदेश पारित किया गया था । वाहनों में लगे स्पीड गवर्नर डिवाइस की एएमसी के लिए कोई भी अधिकृत डीलर 500 रुपए से ज्यादा नही लेगा पर आज तक उस पर परिवहन विभाग अमल नही करवा सका आखिर क्यों ?

    क्या परिवहन विभाग देगा जनता को जवाब ???

    दिल्ली परिवहन विभाग द्वारा इस आदेश के पारित होने के बाद परेशान जनता हुई और आज भी हो रही है और जब जनता को समझ आया परिवहन विभाग कुछ नहीं करेगा तो चुप चाप डीलर द्वारा मांगे जाने वाले पैसे देने शूरू कर दिए । क्या यह ही होता है जनहित का आदेश?

    अब परिवहन विभाग बैंको और एनबीएफसी कंपनियों में अपना वर्चस्व स्थापित करने के लिए जनहित का नाम लेकर आदेश पारित कर जनता को खून के आसू निकलवाने में लगा है, आखिर क्यों?

    बैंको और एनबीएफसी कंपनियों के द्वारा आनलाइन कार्य परिवहन विभाग के दिशा निर्देश से शूरू ना करने वालों को अपनी ताकत दिखाने के चक्कर मे जो लोग वाहन खरीद चुके उनके वाहन पंजीकृत करने से बंद करवा दिए, आखिर इससे कोन होगा परेशान?

    परिवहन विभाग बताएगा:- आखिर कहा है गैजेट नोटीफिकेशन जिसमे यह कहा गया है दिल्ली में जो एनबीएफसी कंपनी या बैंक परिवहन विभाग के आदेश को नही मानेगा उसकी एचपी एडीशन नही की जाएगी, क्या परिवहन विभाग बताएगा कब मोटर वाहन नियम अधिनियम में इसे बदलने के लिए जनता के समक्ष जनता की राय के लिए प्रस्तुत किया गया था,

    क्या दिल्ली परिवहन विभाग को किसी की राय की आवश्कता ही नहीं जो दिल में आया वह आदेश जारी कर लागू कर दिया। क्या यह जनहित है ?

    दिल्ली परिवहन विभाग को जनता को परेशान करने का कारण नही बनना चाहिए इसलिए जो व्यक्ति अपने वाहनों पर एचपी एडिशन करवाना चाहता है उसके लिए बिना विलम्ब एचपी एडिशन करने के आदेश कर देने चाहिए ।

    दिल्ली परिवहन विभाग को अपने वर्चस्व कायम करने की प्रक्रिया बैंकों और एनबीएफसी कंपनियों पर चलानी चाहिए ना कि दिल्ली की जनता पर!!!

    दिल्ली परिवहन विभाग क्या जनता को बताएगा दिल्ली सरकार की अपनी फाइनेस कंपनियों ने अभी तक आनलाइन कार्य परिवहन विभाग के साथ शुरू क्यों नहीं किया ??? डीएफसी, डीएफआईडीसी जैसे जो वाहनों पर लोन देते हैं और एससी एसटी एवम् अन्य बहुत जनता के वाहन वहा से लोन पर है।

    इसके लिए परिवहन विभाग को जैसे दिल्ली में माननीय उच्चतम न्यायालय ने डीजल वाहन चलने से बंद के आदेश पारित कर दिए थे पर फिर भी चलाने वालों को पहले कुछ दिन 500 रुपए जुर्माना फिर कुछ दिन 1000 रुपए जुर्माना और फिर 2000 जुर्माना भरने के बाद चलने की इजाजत देने के आदेश साथ में पारित किए थे जनहित में वैसे ही परिवहन विभाग को जो बैंक और एनबीएफसी कंपनी परिवहन विभाग का दबाव / वर्चस्व नही मानते उसके द्वारा करे जाने वाले हर लोन एचपी एडिशन पर उससे जुर्माना जमा करवाने के आदेश पारित करने चाहिए और अन्त में भी नहीं माने तो रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को पत्र लिखकर उसको दिल्ली में वाहनों पर लोन देने के लिए ब्लैक लिस्ट करवाने का प्रयास करना चाहिए।

    REPORT THIS AD

    इस प्रक्रिया से जनता भी परेशान नही होगी और परिवहन विभाग के द्वारा राजस्व में इज़ाफ़ा भी करवाया जाएगा और अपना दबाव सभी बैंको और एनबीएफसी कंपनियों पर स्थापित करने में कामयाब हो जाएंगे और सभी आनलाइन कार्य जैसा परिवहन विभाग चाहता है शुरू करने लगेगे।

    जनहित में जारी
    संजय बाटला

  • *परिवहन निगम के अधिकारी और उनकी टीम को भ्रष्टाचार में लिप्त की जांच के लिए उठाया सीबीआई ने,*

    *परिवहन निगम के अधिकारी और उनकी टीम को भ्रष्टाचार में लिप्त की जांच के लिए उठाया सीबीआई ने,*

    परिवहन निगम के अधिकारी और उनकी टीम को उठाया सीबीआई ने,

    पूर्व परिवहन मंत्री एवम् स्वास्थ्य मंत्री को भ्रष्टाचार में लिप्त कि जांच में उठाने के बाद अब सीबीआई की जांच की दृष्टि परिवहन निगम और विभाग के आला अधिकारियों की और,

    परिवहन निगम में राजनीतिक दल के चहेते और कदवार अधिकारी को उनके सेवा मुक्त होने से दो दिन पहले उनकी टीम के साथ सीबीआई ने भ्रष्टाचार में लिप्त की जांच के लिए शाम को उनके कार्यालयों से उठा लिया।

    आने वाले समय मे अब परिवहन निगम और विभाग के अन्य अधिकारियों से भी पूछताछ जल्द होने की उम्मीद बनी है जो राजनीतिक दल के चहेते और कदवार अधिकारी कहलाते आए हैं।

    डीटीसी के सभी कर्मचारी सीबीआई के इस कार्य के लिए बहुत खुश हैं और उम्मीद करने लगे हैं की सीबीआई की जांच में अन्य भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारी भी जल्द सीबीआई की नजर में आ जाएंगे और निगम भ्रष्टाचार से मुक्त।

    दिल्ली परिवहन निगम के चैयरमैन और परिवहन मंत्री को नैतिकता के आधार पर तत्काल प्रभाव से अपने पदो से इस्तीफा दे देना चाहिए ऐसा दिल्ली की जनता और परिवहन विभाग से जुड़े सभी की सोच और मांग है।

    जनहित में जारी
    संजय बाटला

  • दिल्ली में व्यवसायिक वाहन चालकों के लिए आ सकती हैं बड़ी खुशखबरी,

    दिल्ली में व्यवसायिक वाहन चालकों के लिए आ सकती हैं बड़ी खुशखबरी,

    दिल्ली में सवारी वाहनों को चलाने के लिए चालक के पास ड्राईविंग लाईसेंस के साथ ड्राईवर बैज होना अनिवार्य है ।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार अब बहुत से संगठन सवारी वाहन चालकों के लिए इस बैज की अनिवार्यता को खत्म करवाने का प्रयास कर रहे हैं।

    आपकों बताते हैं कि ड्राईवर बैज क्या है ? इसके बनवाने के लिए क्या मुख्य दस्तावेज अनिवार्य होते हैं।

    ड्राईवर बैज उस चालक को लेना अनिवार्य होता हैं जिस चालक को दिल्ली में व्यवसायिक सवारी वाहन चलाना है, इसके लिए उस ड्राईवर को परिवहन विभाग की शाखा में लाइसेंस बनवाने के बाद अलग से प्रार्थना करनी पड़ती हैं जिस पर परिवहन विभाग की शाखा के द्वारा उस चालक का दिल्ली पुलिस द्वारा जांच प्रणाम रिपोर्ट मंगवाई जाती हैं जिसमे दिल्ली पुलिस उसके निवास स्थान और कैरेक्टर की जांच प्रस्तुत करती हैं, जिससे पता चलता है कि उस चालक पर पहले से केस दर्ज तो नही है जो जनता की सुरक्षा के विपरित हो। पुलिस द्वारा सत्यापित रिपोर्ट के बाद ही किसी ड्राईवर को बैज प्रदान किया जाता हैं।

    आज वाहन चालक के लिए सिर्फ दो श्रेणी में ही लाइसेंस जारी होते हैं
    1. हल्के वाहन जिस लाइसेंस के द्वारा व्यक्ति स्कूटर, ऑटो, रिक्शा, कार और हल्के श्रेणी में पंजीकृत वाहनों को चला सकता है।
    2. भारी वाहन जिसके अंतर्गत हल्के श्रेणी और उसके अलावा अन्य सभी पंजीकृत वाहनों को चलाने की इजाजत होती हैं।

    दोनो ही श्रेणी के चालको को जो दिल्ली में व्यवसायिक सवारी वाहन चलाना चाहते हैं बैज लेना अनिवार्य है पर जानकार सूत्रों की माने तो जल्द ही दिल्ली के लाइसेंस धारकों को बैज की जरूरत से मुक्त कर दिया जाएगा।

    जानकार सूत्रों की माने तो परिवहन विभाग के विशेष आयुक्त ओ. पी. मिश्रा बैज की अनिवार्यता को खत्म करवाने के पक्ष मे है और उम्मीद की जाती हैं दिल्ली में चालक को व्यवसायिक सवारी वाहन चलाने के लिए जल्द ही बैज की अनिवार्यता से मुक्ति मिल जाएगी।

    बैज की अनिवार्यता समाप्त होने के बाद दिल्ली में ऑटो के परमिट के लिए सभी हल्के लाइसेंस धारक जिन्होंने अपनी निजी कार चलाने के लिए भी लाइसेंस बनवा रखे है परमिट के लिए मान्य माने जाएंगे।

    अब देखना है जनहित के कार्यों में पूर्ण रूप से समर्पित परिवहन विभाग कितनी जल्दी इस जनहित के कार्य को हरी झंडी दिखाकर दिल्ली में बिना पुलिस जांच प्रमाण पत्र प्राप्त व्यक्तियो को सवारी वाहन चलाने की इजाजत देता है ।

    दिल्ली परिवहन विभाग सदैव जनहित के लिए तत्पर, इस आदेश के पारित होते ही यह सिद्ध हो जाएगा।

    जनहित में जारी,
    संजय बाटला.

  • क्या परिवहन विभाग द्वारा जारी आदेश 1 अक्टूबर से 28 फ़रवरी तक दिल्ली में अन्य राज्यो के यूरो 6 मानक वाहनों को ही इजाजत होगी?

    क्या परिवहन विभाग द्वारा जारी आदेश 1 अक्टूबर से 28 फ़रवरी तक दिल्ली में अन्य राज्यो के यूरो 6 मानक वाहनों को ही इजाजत होगी?

    उत्तराखंड परिवहन विभाग द्वारा जो बात बताई गई हैं अगर उसको माने तो दिल्ली परिवहन विभाग सच में दिल्ली को वाहनों के द्वारा होने वाले प्रदुषण से दिल्ली को बचाने के लिए चिंतित भी है और समय से पहले तैयारी के लिए अग्रसर भी।

    दिल्ली की जनता जहा एक तरफ़ परिवहन विभाग द्वारा जारी इस आदेश से खुश है की इस बार दिल्ली प्रदुषण का चैंबर नही बनेगा वही इस बात पर भी विचार कर रही है की फिर दिल्ली से अन्य राज्यो मे आने जाने वालों का क्या हाल होगा।

    दिल्ली में तो दिल्ली के अंतर्गत क्षेत्रों में भी चलाने के लिए पूरी सार्वजानिक सवारी सेवा उपल्ब्ध नही वहा अन्य राज्यो से आने वाले वाहन अगर दिल्ली के बॉर्डर पर ही रोक दिए गए तब उन सवारियों को गंतव्य स्थान पर कोन ओर कैसे पहुंचाएगा।

    आप सभी की जानकारी के लिए बता दे दिल्ली में सार्वजानिक सवारी सेवा प्रदान करने वाली अधिकतम सेवाए दिल्ली सरकार और परिवहन विभाग की जनहित प्रणाली के कारण या तो बंद हो गई या बंद होने के कगार पर है।

    दिल्ली में डीटीसी के बेड़े में बसे ना के बराबर रह गई है और वह भी कभी भी कहीं भी सड़कों पर खडी होने वाली है,

    कलस्टर कम्पनियों के द्वारा चालित बसों में अंदाजा 5 कंपनियों के टैंडर समाप्त हो चुके हैं और उन्ही के द्वारा अधिकतम बसे सड़को पर चालित थी

    मेट्रो द्वारा संचालित मिडी बसे पहले ही उन्हें चलाने वाली कंपनियों द्वारा खड़ी कर दी गई है यानी सेवा बंद कर चुकी हैं

    आरटीवी मिनी बसें 3200 से घटकर मात्र 600 के करीब बची है और उनमें से परिचालन में शायद ही 200 बसे होंगी

    ग्रामीण सेवा में चलने वाले वाहन भी अब सड़कों पर गिने चुने रह गए हैं

    फट फट सेवा और ईको फ्रेंडली सेवा के वाहन सड़को पर बहुत कम नज़र आते हैं

    हा दिल्ली में मैक्सी कैब जो कानून के अनुसार सिर्फ 12 सवारियों को लेकर आने जाने के लिए चलाई जाती रही है सड़को पर अपनी गिनती जो अंदाजन 110 के आस पास होगी जरूर चलती नज़र आ जाएगी।

    कुल मिलाकर दिल्ली सरकार और परिवहन विभाग की नीतियों के कारण आज सार्वजनीक सवारी सेवा में सुरक्षित सेवा जनता को प्रदान करने वाले सभी श्रेणियों के वाहनों को उंगलियों पर गिना जा सकता है, ऐसे में कोन देगा सेवा एक बड़ा सवाल?

    क्या दिल्ली सरकार और परिवहन विभाग जनता को इस चिन्ता से बाहर निकालने के लिए जवाब देगा ?

    एक और जानने योग्य बात,, क्या दिल्ली में अभी कुछ दिनों पहले बड़ी धूमधाम से शुरु की गई पंजाब से दिल्ली एअरपोर्ट सेवा इस आदेश से प्रभावित नही होगी ? क्या पंजाब से दिल्ली में आने वाले सभी वाहन यूरो मानक 6 के हैं और नई शुरु की गई सेवा के अंतर्गत चलने वाले सभी वाहन यूरो 6 के हैं।

    अब देखना होगा दिल्ली परिवहन विभाग अपना आदेश वापस लेती हैं या किसी राज्य की सभी यूरो मानक के वाहनों को इजाजत और किसी राज्यो की यूरो 6 मानक वाहनों के अलावा अन्य पर पाबंदी की घोषणा करती हैं।

    जनहित में जारी

  • 1 अक्टूबर से दिल्ली में अन्य राज्यो में आने जाने वालों को आएगी परेशानी, जाने क्यों?

    1 अक्टूबर से दिल्ली में अन्य राज्यो में आने जाने वालों को आएगी परेशानी, जाने क्यों?

    उत्तराखंड परिवहन द्वारा 1 अक्टूबर से दिल्ली के लिए अधिकतम बस सेवा बंद हो जाएगी।

    उत्तराखंड परिवहन की प्रतिदिन 250 बसे दिल्ली आती हैं जिनमे से उत्तराखंड परिवहन द्वारा 200 बसे 1 अक्टूबर से दिल्ली नही भेजी जाएंगी सिर्फ 50 बसे ही पूरे उत्तराखंड राज्य से दिल्ली आयेंगी।

    यह फैसला दिल्ली परिवहन विभाग के विशेष आयुक्त ओ पी मिश्रा द्वारा उत्तराखंड परिवहन को लिखित पत्र भेजने के कारण लिया गया है।

    विशेष आयुक्त द्वारा भेजे गए पत्र में लिखा गया की उत्तराखंड परिवहन यूरो 6 के वाहनों को ही दिल्ली में भेजे और आज की तारीख में उत्तराखंड परिवहन के अन्तर्गत सिर्फ 50 ही बसे यूरो 6 मानक की चल रही है।

    दिल्ली में प्रदुषण का मुख्य कारण वाहनों को बताया जाता रहा है इसीलिए दिल्ली परिवहन विभाग 1 अक्टूबर से 28 फरवरी तक बाहरी राज्यों से आने वाले व्यवसायिक वाहनों जो यूरो 6 मानक से कम के है को दिल्ली में प्रवेश वर्जित का फेसला ले चुका है ।

    परिवहन विभाग द्वारा लिया गया यह फैसला कितना प्रदुषण की रुकावट में कामयाब होगा यह तो तभी पता चलेगा पर इस आदेश के जारी होने से जनता और दिल्ली के व्यापारियों को परेशानी अवश्य होगी और दिल्ली में महंगाई।

    जनहित में जारी
    संजय बाटला