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  • कत्ल करने वाले लिव इन LOVER को मिली ऐसी सजा ! पुलिस ने खोले एक एक राज ! राज खुलने के बाद जो हुआ उसे जानने के लिए पढ़िए हमारी खास रिपोर्ट

    कत्ल करने वाले लिव इन LOVER को मिली ऐसी सजा ! पुलिस ने खोले एक एक राज ! राज खुलने के बाद जो हुआ उसे जानने के लिए पढ़िए हमारी खास रिपोर्ट

    आखिर कुनकुरी पुलिस की मेहनत अब रंग लाई है, जहां हत्या के आरोपी को आजीवन कारावास एवं 1000 के अर्थदंड से निरोपित किया गया है। सबसे अहम बात किसी अपराध को लेकर यह होती है कि, पुलिस अपराधी को सजा दिलवा पाती है या नही, जो पुलिस के जुटाए साक्ष्य और गवाह के बिनाह पर होती है, और जब पुलिस आरोपी सजा की चौखट तक पहुंचा पाती है तो वह उसकी सफलता होती है।

    हम आपको यह बतादें की एक साल पूर्व अगस्त के महीने में कुनकुरी के थाना प्रभारी को एक फोन ग्रामीणों के द्वारा आया, जिसमे बदहवाश से कुछ लोग आधी अधूरी बात कहते यह बता रहे थे कि, भंडारी चौक स्थित एक कुएं के पास शव के सड़ने के मानिंद बदबू आ रही है। उनकी आशंका थी कि कुछ दिनों पहले अपने घर से गायब “सुशीला कीरो” का शव जमीन में दफन है।

    जिस सूचना पर थाना प्रभारी भाष्कर शर्मा तत्काल मौके पर पहुंचे, पर रात काफी होने के कारण खुदाई नही हो सकी, अगले दिन कुनकुरी तहसीलदार की उपस्थिति में जब खुदाई शुरू हुई तो लोग आवाक थे, क्योंकि शव की पहचान उसके कपड़ो के माध्यम और परिजनों के माध्यम से शिनाख्त यह कह रही थी कि उनकी शंका सच निकली है, और शव शुशीला कीरो का ही है।

    दरअसल हुआ यह था कि पिछले वर्ष 9-8-21 को मृतिका शुशीला कीरो के बेटे ने कुनकुरी थाने में मृतिका के बेटे ने गुमशुदगी दर्ज कराई। पुलिस गुमशुदगी पर अपनी जांच जारी ही रखी थी, कि थाना प्रभारी भाष्कर शर्मा को आये इस फोन ने सारी कहानी को हत्या में तब्दील कर दिया, जब पुलिस ने कार्यवाही शुरू की, और एक एक कड़ी को जोड़ना शुरू किया तो जो बात सामने आई, की मृतिका जिसके साथ लिव इन मे थी, उसी पर जाकर जांच का हर बिंदु टिक गया।

    जहां पुलिस को मालूम हुआ कि मृतिका का पति कुछ समय पहले ही बीमारी से मर चुका है, इस बीच मृतिका फ्रांसिस कुल्लू नाम के शख्स के संपर्क में आई, और उसके साथ ही रहने लगी, पर घटना में तथ्य भी था कि मृतिका शुशीला कीरो कुछ समय से अलग हो गयी थी, जिसके बाद 4 अगस्त दो हजार इक्कीस को दोनो मिले, तो दोनों में जमकर मारपीट और विवाद हुआ और शुशीला कीरो गम हो गयी।

    इस संदेह पर पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की तो ना नुकुर के बाद घटना कबूल किया, कि विवाद में डंडे से पीटा जिसमे मृतिका के सर में चोट लगने से उसकी मृत्यु हो गयी, और उसके बाद उसने कुएं के पास मृतिका को दफन कर दिया, जिसके बाद पुलिस ने न्यायालय में आरोपी को प्रस्तुत किया।

    अब पुलिस की मेहनत रंग लाई,  पुलिस के द्वारा जुटाए गए एक-एक  साक्ष्य, गवाह को सुनने के बाद प्रथम अपर सत्र न्यायालय कुनकुरी ने आरोपी को आजीवन कारावास सहित 1000 के अर्थदंड से आरोपी को दंडित किया गया है।साथ ही साथ धारा 201 के तहत आरोपी को  10 वर्ष की सजा और 1000 का अलग से अर्थदंड दिया गया है

  • भारतवासी क्या अपनी आने वाली पीढ़ी को नक्सली, उग्रवादी या कमजोर बनाना चाहते हैं ?…… मुफ़्तख़ोरी की पराकाष्ठा!

    भारतवासी क्या अपनी आने वाली पीढ़ी को नक्सली, उग्रवादी या कमजोर बनाना चाहते हैं ?…… मुफ़्तख़ोरी की पराकाष्ठा!

    आज भारत देश में अपना राजनीतिक वर्चस्व कायम करने के लिए सभी राजनीतिक दलों द्वारा मुफ़्त दवा, मुफ़्त जाँच, मुफ्त बस यात्रा, मुफ्त मैट्रो रेल यात्रा, मुफ़्त राशन, मुफ़्त शिक्षा, मुफ्त विवाह, मुफ्त जमीन के पट्टे, मुफ्त मकान बनाने के पैसे, बच्चा पैदा करने पर पैसे, बच्चा पैदा नहीं (नसबंदी) करने पर पैसे, स्कूल में खाना मुफ़्त, बिजली मुफ्त, मुफ्त तीर्थ यात्रा आदि के प्रलोभन देकर सत्ता पर अपना कब्जा बनाने में लगी है।

    “जन्म से मृत्यु तक सब मुफ्त” मुफ़्त बाँटने की होड़ सिर्फ और सिर्फ सत्ता हथियाने के लिए । ऐसे में देश का विकास कैसे होगा जब राजनेता और राजनीतिक दल देश की जनता का हित भुलकर अपना हित पूरा करने में लगे है ।

    यह तो वहीं बात हुई – अंधी पीसे, कुत्ते खायें।

    पिछले दस सालों से लेकर आगे आने वाले बीस सालों में एक ऐसी पीढ़ी तैयार हो रही है जो कुर्सी के पिस्सू, अस्थिर दिमाग वाले और निखथू के अलावा कुछ नहीं होंगे और इस कार्य को सम्पन्न करने में लगे हैं हमारे वह नेता और दल जो राजसत्ता पाने के लालच में घोषणा कर रहे हैं फ्री और सभी जो इनको सत्ता में काबिज करवाने में लगे हैं वह सब बनेंगे और कहलाएंगे पूर्णतया मुफ़्तखोर !

    जब मां – बाप, बड़े बुजुर्ग या कोई और पारिवारिक सदस्य उनको काम करने को कहेंगे तो वो गाली दे कर कहेंगे कि सरकार क्या कर रही है?

    आप सभी जानते हैं कि यह मुफ़्तखोरी की ख़ैरात कोई भी नेता / राजनीतिक दल अपनी जेब या पार्टी फ़ंड से नही देती बल्कि टैक्स दाताओं के पैसो से जो राष्ट्रहित में खर्च होने चाहिए से लुभावने वादों को पूरा करने के लिए इस्तेमाल करती है!

    हम अपने बच्चो और आने वाली पीढ़ी को मेहनतकश सभ्य नागरिक नहीं बल्कि “परजीवी” बनाने में लगे हैं वह भी उस लालच में जो पैसा वैसे भी हमारी प्रगति के लिए ही खर्च होना है!

    देश का हाडतोड़ मेहनत और अक्ल लगाकर ईमानदारी से कमाने और टैक्स भरने वाला टैक्सदाता बहुसंख्यक मुफ़्तखोर समाज को कब तक और क्यों पालेगा ?

    बीस – तीस सालों बाद आर्थिक समीकरण फ़ेल हो जाएगा उस समय मुफ़्तखोर पीढ़ी का क्या होगा ? जिस ने जीवन में कभी मेहनत की रोटी नही खाई होगी, हमेशा मुफ़्तखोरी में समय बिताया होगा और उन्हे फ्री नहीं मिलने पर हम सबकी पीढ़ी नक्सली बन जाऐगी, उग्रवादी बन जाएगी या आत्महत्या कर लेगी, परन्तु काम नही कर पायेगी!

    सोचने की बात है कि यह राजनीतिक दल और ऐसे नेता कैसे समाज का और देश का निर्माण कर रही हैं?

    झूठा फ्री का लोभ मोह छोड़ कर गम्भीरता से चिंतन करिये, क्या हम सही रास्ते पर हैं?

    जनहित में जारी
    संजय बाटला

  • Gold Price Update: सोने के चढ़े दाम तो चांदी ने मारी बड़ी छलांग, खरीदारी के पहले यहां जानें ताजा भाव जाने डिटेल

    Gold Price Update: सोने के चढ़े दाम तो चांदी ने मारी बड़ी छलांग, खरीदारी के पहले यहां जानें ताजा भाव जाने डिटेल

    इस कारोबारी हफ्ते के पहले दिन सोमवार को सोना (Gold Price) 436 रुपये प्रति 10 ग्राम की दर से महंगा होकर 50958 रुपये पर बंद हुआ। जबकि पिछले कारोबारी दिन शुक्रवार को को सोना 408 रुपये प्रति दस ग्राम की दर से महंगा होकर 50522 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बंद हुआ था।

    सोने की तरह सोमवार को चांदी (Silver Price) की कीमत में भी बड़ी तेजी दर्ज की गई। चांदी 1490 रुपये महंगा होकर 60245 रुपये प्रति किलो पर बंद हुई। जबकि शुक्रवार को चांदी (Silver Rate) 1706 रुपये प्रति किलो की दर से महंगी होकर 58755 रुपये प्रति किलो पर बंद हुई थीा

    14 से 24 कैरेट सोना का ताजा भाव
    इस तरह सोमवार को 24 कैरेट वाला सोना 436 महंगा होकर 50958 रुपये, 23 कैरेट वाला सोना 434 रुपया महंगा होकर 50754 रुपये, 22 कैरेट वाला सोना 400 रुपया महंगा होकर 46678 रुपये, 18 कैरेट वाला सोना 327 रुपया महंगा होकर 38219 रुपये और 14 कैरेट वाला सोना 255 रुपये महंगा होकर 29810 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बंद हुआ।

    ऑलटाइम हाई से सोना करीब 5200 और चांदी 19000 रुपये मिल रहा है सस्ता
    सोना फिलहाल अपने ऑलटाइम हाई से करीब 5242 रुपये प्रति 10 ग्राम रुपये सस्ता बिका रहा है। आपको बता दें कि सोने ने अगस्त 2020 में अपना ऑलटाइम हाई बनाया था। उस वक्त सोना 56200 रुपये प्रति दस ग्राम के स्तर तक चला गया था। वहीं चांदी अपने उच्चतम स्तर से करीब 19735 रुपये प्रति किलो की दर से सस्ता मिल रहा था। चांदी का अबतक का उच्चतम स्तर 79980 रुपये प्रति किलो है।

    मिस कॉल देकर ऐसे जानें सोने का लेटेस्ट प्राइस
    22 कैरेट और 18 कैरेट गोल्ड जूलरी के खुदरा रेट जानने के लिए 8955664433 पर मिस्ड कॉल दे सकते हैं। कुछ ही देर में एसएमएस (SMS) के जरिए रेट्स मिल जाएंगे। इसके साथ ही लगातार अपडेट्स की जानकारी के लिए www.ibja.co या ibjarates.com पर देख सकते हैं।

    ऐसे जानें सोने की शुद्धता
    अगर आप अब सोने की शुद्धता जांचना चाहते हैं तो इसके लिए सरकार की ओर से एक एप बनाया गया है। बीआईएस केयर ऐप से ग्राहक सोने की शुद्धता की जांच कर सकते हैं। इस ऐप के जरिए आप न सिर्फ सोने की शुद्धता की जांच कर सकते हैं, बल्कि इससे जुड़ी कोई शिकायत भी कर सकते हैं।http://www.ibja.co

  • गाजीपुर : प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट में रेलवे पास, NHAI फेल, पुल को जोड़ने के लिए नहीं शुरू हो सका कार्य

    गाजीपुर : प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट में रेलवे पास, NHAI फेल, पुल को जोड़ने के लिए नहीं शुरू हो सका कार्य

    गाजीपुर प्रतिनिधि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट ताड़ीघाट-मऊ नई रेल परियोजना के प्रथम फेज में सोनवल से सिटी रेलवे स्टेशन तक रेल लाइन बिछाने का कार्य अब अंतिम चरण में चल रहा है।गंगा में बन रहा रेल सह रोड ब्रिज भी करीब 95 फीसद बन गया है, लेकिन अभी तक रेल पुल के ऊपर बन रहे सड़क पुल को जोड़ने के लिए सड़क का निर्माण शुरू भी नहीं हो सका है।

    रेलवे और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) की खींचतान में अबतक कार्य अटका हुआ है जबकि दोनों का एक साथ निर्माण होना था। 14 नवंबर वर्ष 2016 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 51 किमी लंबे ताड़ीघाट-मऊ नई रेल लाइन परियोजना की आधारशीला रखी थी। यह कार्य दो चरण में हो रहा है। प्रथम चरण में सोनवल से सिटी रेलवे स्टेशन तक कार्य अब अंतिम चरण में चल रहा है।

    इसी में गंगा नदी पर रेल सह सड़क पुल भी है। रेल व इसके ऊपर बन रहे सड़क पुल का कार्य भी एक साथ ही हो रहा है, जो 95 फीसद पूर्ण हो गया है। इसके आगे की रेल लाइन बिछाने का कार्य दो शिफ्ट में 24 घंटे चल रहा है।

    शोपीस बना रहेगा पुल,,,,,

    कार्यदायी संस्था आरवीएनएल का लक्ष्य है कि मार्च तक इस पर ट्रेन को दौड़ा दी जाए, लेकिन सड़क का निर्माण कार्य अभी शुरू भी नहीं हो सका है, जिसे एनएचएआइ वाराणसी को कराना है। मार्च में इस रूट पर ट्रेन तो दौड़ने लगेगी, लेकिन रेल के ऊपर बना सड़क पुल शोपीस बना रहेगा। इसको लेकर पहले से ही रेलवे और एनएचएआइ में खींचतान चलता रहा।

    आरवीएनएल की मानें तो करीब साढ़े पांच वर्ष बाद वह इसके लिए तैयार हुए। वहीं, एनएचएआइ का कहना है कि पहले सड़क का निर्माण भी रेलवे को ही कराना था। करीब पांच-छह माह पहले उन्होंने निर्णय लिया कि इसे एनएचएआइ कराएगा।

    इन्होंने कहा,,,,,

    पहले इसे रेलवे को कराना था, बाद में करीब पांच-छह महीने पहले उन्होंने निर्णय लिया कि सड़क का निर्माण एनएचएआइ करेगी। हम शीघ्र ही इसका टेंडर निकालने वाले हैं और कार्य भी शुरू कर दिया जाएगा।

    आरएस यादव, परियोजना निदेशक- एनएचएआइ वाराणसी।

    हम लोग सिर्फ रेल पुल और ट्रैक बना रहे हैं। एनएचएआइ सड़क कब बनाएंगी, इसकी जानकारी नहीं है। रेल पुल के ऊपर बन रहे सड़क पुल की ढलाई पूरी हो गई है। दो-तीन सप्ताह में रेलिंग का निर्माण भी पूरा हो जाएगा।

    विकास चंद्रा, सीपीम-आरवीएनएल।

  • महापौर /विधायक बनने का सब्जबाग दिखा रहे एवं स्वयं भी पाल रहे दुर्ग के ये नेता

    महापौर /विधायक बनने का सब्जबाग दिखा रहे एवं स्वयं भी पाल रहे दुर्ग के ये नेता

    दुर्ग । पिछलग्गू टीवी चैनल में पैसे के दम पर डिबेट में भाग लेकर अपनी राजनीतिक रोटी सेक कर तथ्यहीन आंकड़ों को पेश कर पार्टी संगठन में आगे बढ़ने की जुगत लगा रहे दुर्ग के एक नेता इन दिनों निजी चैनल का सहारा ले रहे है । चर्चा यहां तक है कि यह नेता छोटे-छोटे चैनलों में बड़ी-बड़ी ज्ञान की बातें कर चंद निजी चैनलों यूट्यूब चैनल के सहारे सोशल मीडिया में खुद प्रचार कर संगठन में अपने पैर जमाने की कोशिश में लगा हुआ है नेता के इस कदम से विपक्षी पार्टी तो दूर कई समर्थक भी दबी जुबान में व्यंग करते हुए नजर आते हैं ।

    बता दे कि दुर्ग से जुड़े हुए नेता डिबेट में बैठकर बड़ी-बड़ी बातें कर रहे हैं जो कि कुछ चैनलों के पिछलग्गू बन गए हैं और सीधे तौर पर अपनी अपने मन की भड़ास टीवी चैनलों के माध्यम से जो कि प्रायोजित उन्हीं के नेताओं द्वारा की जाती है बैठकर मन की भड़ास निकालते नजर आ रहे हैं जिनका सपना था कि वह महापौर या विधायक तक पहुंच जाएंगे । हालांकि संगठन में पद तो मिल गया किंतु अभी फिलहाल पार्टी संगठन से जुड़ कर काम करने पर कुछ खास उपलब्धि दिख नहीं रहा है जिससे नेताजी काफी हताश बताए जा रहे हैं और तथाकथित दीदी से जुड़कर अपनी राजनीतिक रोटी सेकने में लगे हुए हैं जो कि दुर्ग छत्तीसगढ़ से बाहर रहकर बिल्डिंग बनाते हैं वह अपने सपनों का महल दुर्ग महापौर और विधायक बनने का सपना लेकर चल रहे हैं जो खुद खास लोकल चैनलों के पिछले बनकर ही डिबेट किंग बन गए हैं । अब देखना यह है कि आने वाले समय में उनका यह डिबेट उन्हें खास मुकाम तक पहुंचाता है या कोशिश नाकाम होती है ।

  • बिज़ली बिल पर 5% Extra Tax और गाँव के ज़मीन पर भी लगेगा Property Tax. जानिए अपना महँगा जीवन

    बिज़ली बिल पर 5% Extra Tax और गाँव के ज़मीन पर भी लगेगा Property Tax. जानिए अपना महँगा जीवन

    बिज़ली बिल पर 5% Extra Tax और गाँव के ज़मीन पर भी लगेगा Property Tax. जानिए अपना महँगा जीवन
    पिछले कुछ वर्षों से आम आदमी के ऊपर, प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तरीके से करारोपण किया जा रहा है। सरकारों ने आम जनता को कामधेनु की गाय मान लिया है। जो सरकारों की हर इच्छा को पूरी करने में सक्षम है। इस करारोपण के दायरे में अब गरीब से गरीब व्यक्ति भी आ रहा है। भारत की अर्थतंत्र में करीब 32 फीसदी टैक्स अभी तक मध्यमवर्ग देता आया है।

    28% GST स्लैब में जी रहा अब INDIA.
    हाल ही के वर्षों में मध्यम वर्ग पर केंद्र सरकार तथा राज्य सरकारों और स्थानीय संस्थाओं द्वारा लगातार टेक्स, शुल्क एवं उपकर के नाम पर टेक्स का दायरा बढ़ाया जा रहा है । GST के माध्यम से अब गरीबों को भी भारी टैक्स के दायरे में ले लिया गया है। जीएसटी की बढ़ी हुई दरें 8, 12, 18 और 28 फीसदी अब गरीब आदमी को भी परेशान कर रही हैं। मजदूर हो, बेरोजगार हो, पेंशन से गुजारा करता हो । सभी को खाने-पीने एवं नियमित जरुरतों पर भारी टेक्स देना पड़ रहा है।

    वर्तमान में गरीब सबसे ज्यादा टेक्स दे रहा है.
    चाहे रेलवे की टिकट हो चाहे पेट्रोल डीजल का उपकर हो, खाने पीने का केंद्र एवं राज्य सरकारों ने यह मान लिया है, कि जनता के पास बहुत पैसा है। कोई भी टैक्स लगाते हैं, जनता उसको देने लगती है। जब तक जनता विरोध नहीं कर रही है। कोई भी सामान हो, किसी भी प्रकार की सेवाएं हो, सभी पर जीएसटी लागू है। इसकी मार सबसे ज्यादा गरीब और मध्यम वर्ग पर पड़ रही है। अब टैक्स की मार गांव-गांव तक पहुंच रही है।

    गाँव के ज़मीन पर टैक्स.
    गांव में प्रॉपर्टी टैक्स, जल कर, प्रकाश कर इत्यादि लगना शुरू हो गए हैं पिछले 8 वर्षों में जितने टैक्स बढ़े हैं। वह पिछले 50 सालों में नहीं लगे । सरकार ने सब्सिटी लागू कर दी। टेक्स बड़ा दिये । जिससे मंहगाई बड़ी। आय कम हो गई है। खर्च बड़ गये हैं।

    सरकार ने जानता को बनाया दुधारू गाय.
    केंद्र एवं राज्य सरकारों ने यह मान लिया है, कि जनता के पास बहुत पैसा है। कोई भी टैक्स लगाते हैं, जनता उसको देने लगती है। जब तक जा विरोध नहीं कर रही है, तब तक जनता की क्षमता टैक्स चुकाने की है। इसी को आधार बनाकर पिछले 8 वर्षों से लगातार टैक्स बढ़ाया जा रहा है। केंद्र एवं राज्य सरकारें अपना बोझ आम जनता के ऊपर धीरे-धीरे करके डाल रही हैं।

    आपसे वसूली और प्राइवेट को डिलीवरी.
    सरकारों के अपने खर्चे बहुत बढ़ रहे हैं. इंफ्रास्ट्रक्चर में सरकार जो खर्च कर रही है। उसका पैसा आम जनता से पैसा वसूल किया जा रहा है। सरकारी पैसा खर्च करके उसे निजी क्षेत्र को सौंपा जा रहा है। निजी क्षेत्र भी भारी कमाई कर रहे हैं। जनता के ऊपर बड़े पैमाने पर कर्ज बड़ रहा है। उसकी नियमित जिंदगी बहुत तनावपूर्ण हो गई है। जगह-जगह आत्महत्या, लड़ाई – झगड़े, लूट, चोरी, नशाखोरी इत्यादि की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।

    अब बिजली पर भी 5% Tax उपकर के रूप में.
    इसके बाद भी सरकारों का ध्यान इस ओर नहीं जा रहा है। मध्य प्रदेश सरकार अब बिजली के बिलों पर 5 फीसदी का बिजली उपकर लगाने जा रही है ।

  • क्या दिल्लीवासी जवाब दे सकते हैं तो दे अपने जवाब

    क्या दिल्लीवासी जवाब दे सकते हैं तो दे अपने जवाब

    समस्याओं का समाधान करने के लिए जो जरूरी प्रबंध करने की आवश्यकता हो उसकी जगह दूसरो पर इल्जाम लगा कर और फ्री का लालच देकर जनता का मुंह बंद करवाकर सत्ता में विराजमान द्वारा जनहित सम्भव है ?

    रूस में भी 100 साल पहले इसी फ्री के लालच ने सत्ता परिवर्तन कर दिया था ओर आज तक वहा की जनता इस गलती का हर्जाना अदा कर रहे हैं।

    आज दिल्ली अनगिनत समस्याओं से जूझ रहा है जो आम आदमी अच्छी तरह जानती है। उनमें से किसी एक भी समस्या का समाधान करने का दिल्ली सरकार द्वारा प्रयास नही किया गया उसके विपरित जनता को गुमराह करने के लिए सभी आवश्यक समस्याओं के लिए दुसरे को जिम्मेदार ठहराते हुए अपने कर्तव्य से विमुख हो रही हैं और जनता विरोधाभास ना करें उसके लिए बाहरी राज्यों से लोगो को दिल्ली में अपना वोट बैंक बनाने और फ्री का डंडा दिखाने में लगी है।

    स्वास्थ्य से जुड़े सर्वे के आधार पर दिल्ली वालों की आयु से 10 वर्ष कम और भयंकर बीमारियां होने की आशंकाएं जताई गई हैं।

    कुछ सौं रुपयों की फ्री बिजली-पानी के चक्कर मे दिल्ली की जनता अपने जीवन से समझौता कर रही है।

    अगर दिल्ली के यही हालत रहे तो दिल्ली में घुटकर मरने या दिल्ली को छोड़कर किसी अन्य राज्यो में जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं रहेगा।

    दिल्ली का यह हाल दिल्ली की सरकार द्वारा उत्पन्न किया है क्या इस पार्टी की सरकार आने से पहले कभी दिल्ली में सुना था, ओड इवन, दिवाली पर बम पटाखे जलाने से मनाही या प्रदुषण की मार ।

    राज्य में आज ना कोए सड़क सुरक्षित है चलने के लिए
    ना कहीं सफाई व्यवस्था है
    ना ही करोड़ों रुपए खर्च कर यमुना नदी में पानी साफ मिला
    ना दिल्ली सरकार की और से एक भी नियमित सरकारी नौकरी दी गई
    ना ही किसी विभाग में करप्शन पहले से कम हुआ
    ना ही दिल्ली के छोटे रोजगार करने वालों पर रोजगार रहा
    ना दिल्ली में कोई सुरक्षित

    हा, दिल्ली की हर गली कूचे और हर जगह 24 घण्टे नशे उपल्ब्ध जरूर हुए।

    दिल्ली की जनता अगर फ्री के लालच में अभी भी अपने मुंह बंद रखेंगे तो
    अच्छा है
    1.बीमार होकर तड़फ तड़फ कर मरने,
    2.सड़क दुर्घटना से मरने,
    3. किसी नशे बाज के हाथों मरने,
    4. अपराधी प्रवृत्ति के व्यक्ति के हाथो से मरने से अच्छा है दिल्ली छोड़नी ।

    अभी छोड़ दो या फिर प्रदूषण से बीमार होने को तैयार हो जाओ या दूसरा विकल्प है अपने बंद मुंह को खोलकर और फ्री का लोभ छोड़ कर अपने कर्तव्य को पूरा नहीं करने वालो को सबक सिखाओ।

    जनहित में जारी
    संजय बाटला