दिल्ली परिवहन विभाग, जनता की सुरक्षा से अधिक राजस्व इजाफा महत्वपूर्ण

संजय कुमार बाठला

दिसम्बर 2012 में दिल्ली की सड़को पर निर्भया कांड के बाद जब भारत की सड़को पर महिला सुरक्षा की मांग को लेकर जन समूह सड़को पर उतर आई तब गृह मंत्रालय भारत सरकार सचिव के नेतृत्व में कमेटी का गठन किया गया और उच्च न्यायालय की न्यायधीश ऊषा मेहरा द्वारा तुरंत कार्यवाही और दिशा निर्देश जारी किए गए।

दिसम्बर 2012 का आदेशों और आज 2026,

दिल्ली परिवहन विभाग द्वारा इस आदेश के पालन के नाम पर वाहन मालिकों को जबरदस्ती वाहनों में जीपीएस लगवा दिए और उसकी निगरानी के नाम पर 2000 से 2500 रुपए महीने का शुल्क वसूलने लग गया पर निगरानी के नाम कर उस ऐप को आज तक सुरक्षा प्रदान करने के लिए समयानुसार प्रवर्तन शाखा के अधिकारियों तक सूचना पहुंचाने का कार्य नहीं किया।

महिला सुरक्षा की जगह राजस्व इजाफा महत्वपूर्ण मानते हुए राजस्व में इजाफा करते रहे और बाकी सभी (गृह मंत्रालय भारत सरकार, सर्वोच्च न्यायालय भारत सरकार, उच्च न्यायालय दिल्ली)को कागजों में महिला सुरक्षा दिखाते रहे।

सड़को पर खस तौर से भारत देश की राजधानी की सड़को पर महिलाओं की असुरक्षा के लिए सबसे बड़ी जिम्मेदार कोई एजेंसी/ सरकारी विभाग है तो वह है

  1. पहला नंबर “परिवहन विभाग”
  2. दूसरा नंबर “दिल्ली यातायात पुलिस” और
  3. तीसरा नंबर पर ” दिल्ली पुलिस”

आपकी जानकारी हेतु बता दें दिल्ली की सड़को पर उपलब्ध सार्वजनिक सवारी सेवा वाहनों में जीपीएस और कैमरे और साथ ही पैनिक बटन तो लगे हैं पर वह सिर्फ खिलौने से खेलने का ही काम करते है और उसके लिए जिम्मेदार हैं सिर्फ और सिर्फ “परिवहन विभाग दिल्ली”

सड़क परिवहन एवम् राजमार्ग मंत्रालय द्वारा वीएलटीडी, जीपीएस, पैनिक बटन और कैमरों के कंट्रोल करने के लिए एनआईसी द्वारा कंट्रोल सेंटर स्थापित करवाए और सभी राज्यों के परिवहन विभाग को कंट्रोल सेंटर को कार्यवंतित करने के लिए करोड़ो रूपये दिए।

दिल्ली परिवहन विभाग पिछले चार सालों से इस रकम को प्राप्त कर के भी महिलाओं की सुरक्षा के स्थान पर राजस्व की ललक में व्यस्त है।

27 अप्रैल 2026 को सड़क परिवहन एवम् राजमार्ग मंत्रालय भारत सरकार द्वारा सभी प्रधान सचिव (परिवहन)/ परिवहन आयुक्तों, राज्य एवं केंद्रशासित प्रदेश को लिखित में सूचित किया है “विषय: एआईएस-140 वीएलटीडी सक्रियण और वाहन पंजीकरण के लिए राष्ट्रीय सूचना केंद्र (एनआईसी) की कॉमन लेयर बैकएंड सेवाओं का गो-लाइव होना।” (प्रति का हिंदी अनुवाद और प्रति सलग्न)

अब भारत देश की राजधानी में अगर महिला सुरक्षा के लिए परिवहन विभाग का यह हाल है तो बाकी तो रामभरोसे क्योंकि प्रधान सचिव परिवहन स्वयं भी एक महिला है।

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार, परिवहन अनुभाग, परिवहन भवन, 1, संसद स्ट्रीट, नई दिल्ली-110001, क्रमांक आरटी- 16011/8/2020-टी, दिनांक: 27 अप्रैल, 2026,

सभी प्रधान सचिव (परिवहन)/ परिवहन आयुक्तों, राज्य एवं केंद्रशासित प्रदेश.

विषय: एआईएस-140 वीएलटीडी सक्रियण और वाहन पंजीकरण के लिए राष्ट्रीय सूचना केंद्र (एनआईसी) की कॉमन लेयर बैकएंड सेवाओं का गो-लाइव होना।

मैडम सर,

  1. इसके द्वारा सूचित किया जाता है कि राष्ट्रीय सूचना केंद्र (एनआईसी) द्वारा विकसित कॉमन लेयर बैकएंड सेवाएं, जो उन राज्यों में एआईएस-140 के अनुरूप वाहन स्थान ट्रैकिंग उपकरणों (वीएलटीडी) को सक्रिय करने के लिए हैं जहां कोई राज्य बैकएंड नहीं है, अब लाइव हो गई हैं।
  2. यह भी सूचित किया जाता है कि कॉमन लेयर बैकएंड सेवाएं उपलब्ध हैं और वीएलटीडी सक्रियण जांच के लिए निःशुल्क उपलब्ध हैं, सिवाय सिम वैधता शुल्क के, जो वाहन मालिक द्वारा वहन किया जाएगा।
  3. एनआईसी बैकएंड को निम्नलिखित लिंक पर एक्सेस किया जा सकता है: https://vahan.parivahan.gov.in/vltdmaker/vahan/welcome.xhtml
  4. सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से, जिन्होंने अभी तक अपना बैकएंड एप्लिकेशन तैनात नहीं किया है, अनुरोध है कि वे वीएलटीडी सक्रियण और वाहन पंजीकरण के लिए वाहन पर कॉमन लेयर सेवाओं को जल्द से जल्द ऑनबोर्ड करें और उनका उपयोग करें।

आपका विश्वासी
(यतेंद्र कुमार)
भारत सरकार के अवर सचिव

  1. राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को सूचना और आवश्यक सहायता प्रदान करने के लिए राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) के डीडीजी