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  • छह सड़कों पर थमे रहे वाहनों के पहिए, आठ हजार की आबादी परेशान

    छह सड़कों पर थमे रहे वाहनों के पहिए, आठ हजार की आबादी परेशान

    अल्मोड़ा। बारिश के बाद जिले में छह सड़कें बंद हैं। इन सड़कों पर आवाजाही ठप होने से 20 से अधिक गांवों का जिले से संपर्क कटा है और यहां की आठ हजार से अधिक की आबादी परेशान है।

    अल्मोड़ा में बारिश के बाद मलबा और बोल्डर गिरने से छह सड़कें बंद हैं। ऐसे में 20 से अधिक गांव अलग-थलग पड़े हैं और इनका सड़क संपर्क पूरी तरह कटा है। इन गांवों की आठ हजार से अधिक की आबादी का गांवों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। हालात यह हैं कि ग्रामीण किसी तरह उपचार और अन्य जरूरी काम के लिए बदहाल सड़कों पर जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हैं। हालांकि सड़कों को खोलने के लिए जेसीबी लगाई गई हैं लेकिन लगातार हो रही बारिश से फिर से मलबा और बोल्डर गिरने से कार्यदायी संस्थाओं के लिए सड़कों पर आवाजाही सुचारू कर पाना चुनौती बना है। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी विनीत पाल ने बताया कि जेसीबी लगातार सड़कों को खोलने का काम कर रही हैं। सड़कों पर जल्द आवाजाही शुरू करा दी जाएगी। संवाद

    अल्मोड़ा में 12.4 और सोमेश्वर में हुई 15.2 एमएम बारिश
    अल्मोड़ा। जिले में बारिश से जनजीवन पटरी से उतर गया है। बीते शनिवार से रविवार सुबह तक रुक-रुक कर बारिश होती रही। आपदा प्रबंधन के मुताबिक बीते 24 घंटे में अल्मोड़ा में 12.4, रानीखेत में 04, सोमेश्वर में 15.2, जागेश्वर में 03 एमएम बारिश रिकार्ड की गई। वहीं द्वाराहाट, चौखुटिया, भिकियासैंण, ताकुला, सल्ट, जैंती, शीतलाखेत में बारिश का आंकड़ा शून्य रहा। यहां के लोगों ने बारिश थमने से राहत महसूस की।
    ऑफिसर्स कॉलोनी में आवासीय भवनों में घुसा पानी
    अल्मोड़ा। ऑफिसर्स कॉलोनी के आवासीय भवनों में बारिश का पानी घुसने से लोग परेशान रहे। लोगों ने जिलाधिकारी को ईमेल के माध्यम से ज्ञापन भेजकर जलभराव की समस्या से मुक्ति दिलाने की मांग की। पीड़ित परिवारों ने कहा कि आवासीय भवन में रहने वाले राजस्व विभाग के कर्मी निकासी नाली के निर्माण का विरोध कर रहे हैं। ऐसे में बारिश का पानी घरों में पहुंच रहा है। ज्ञापन भेजने वालों में दीपा साह, ज्योति, दिया, प्रेमलता आदि शामिल रहे।

  • कर्मचारियों का डीए 4% बढ़ाने की घोषणा : विनियमित कर्मचारी नाराज

    • मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कल 23 जुन 2023 को घोषणा की है कि राज्य के कर्मचारियों का महँगाई भत्ता 4% बढ़ाया जाएगा. अभी केंद्र और राज्य सरकार के कर्मचारियों में 4% महँगाई भत्ते का अंतर है, अब इस अंतर को समाप्त किया जाएगा. मुख्यमंत्री श्री चौहान कल सीहोर जिले के भैरुंदा तहसील के ग्राम गिल्लौर में मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह समारोह को संबोधित कर रहे थे.

    वहीं कई कर्मचारी संगठनों ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि प्रदेश में विगत 30 सालों से स्थाईकर्मचारीयों को स्थाई कर्मचारी का वेतन नहीं दिया जा रहा है, हर बार चुनाव में घोषणा होती है कि दैनिक वेतन भोगियों को विनियमित और स्थाईकर्मीयों को स्थाईकरण का लाभ दिया जाएगा लेकिन आज दिनांक तक मुख्यमंत्री जी घोषणा करते हुए और उसी समय भूल जाते है कि प्रदेश के कर्मचारियों का घर कैसे चलेगा. बातें तो कई तरहा की होती है, लेकिन लाभ के समय सरकार के पास कर्मचारियों को देने के लिए पैसा नहीं होने का बहाना बनाकर कर्मचारियों को मिलने वाली तमाम सुविधा से वंचित किया जा रहा है.

    सूत्रों का कहना है कि भोपाल में कई कर्मचारी संगठन एक बड़ा आंदोलन करके सरकार को खुल्ली चुनौति देने के इरादे से पुन मैदान में कुदने वाले है, जिससे शिवराज सरकार की सांसे ऊपर नीचे हो सकती है.

    • केंद्र और राज्य सरकार के डीए में अंतर

    इस दौरान सीएम शिवराज ने कहा कि अभी केंद्र और राज्य सरकार के कर्मचारियों में 4% महंगाई भत्ते का अंतर है, अब इस अंतर को समाप्त करते हुए राज्य के कर्मचारियों का महंगाई भत्ता 4% बढ़ाने का हम फैसला कर रहे हैं. उन्होंने सभी को इसके लिए ढेरों शुभकामनाएं दी है. गौरतलब है कि अभी राज्य के कर्मचारियों को 38 फीसदी की दर महंगाी भत्ता (डीए) दिया जा रहा है, इसमें 4 फीसदी की बढ़ोत्तरी की गई है. वहीं दूसरी ओर सीएम शिवराज ने सामूहिक रूप शादी के बंधन में बंधे वर-वधुओं को बधाई दी.

  • निगम आयुक्त हर्षिकासिंह सख्त : भाजपा पार्षद के पति को नगर निगम की मीटिंग से बाहर निकाला : वीडियो वायरल

    • इंदौर नगर निगम कार्यालय की एक बैठक का वीडियो शुक्रवार को वायरल हो गया। इस वीडियो में नगर निगम आयुक्त हर्षिकासिंह सख्त तेवर में दिखाई दीं और उन्होंने महिला भाजपा पार्षद की जगह मीटिंग में बैठे उनके पति को बाहर का रास्ता दिखा दिया।

    दरअसल, गुरुवार को यह मामला है। विधानसभा-2 के विधायक और पार्षदों को अपनी बात रखने और उनके क्षेत्रों में हो रहे कामों पर चर्चा के लिए बुलवाया गया था। बैठक शुरू होने से पहले ही विवादों से घिर गई। निगम कमिश्नर सिंह ने इससे पहले 30 मई 2023 को भी हुई एक बैठक में एक पार्षद पति को मीटिंग से बाहर भेज चुकी हैं।

    इंदौर की नगर निगम आयुक्त बनी हर्षिका सिंह ने एक बार फिर अपने तेवर साफ कर दिए हैं। बैठक में कमिश्नर सिंह एक वीडियो में यह कहती दिखाई दे रही हैं कि बैठक में सिर्फ पार्षद ही शामिल हो, अगर पार्षद पति आए तो वो उनकी बात नहीं सुनेंगी। दरअसल, गुरुवार को बैठक में वार्ड-30 की मनीषा की जगह उनके पति दुलीचन्द गगोरे पहुंच गए थे। इसी तरह वार्ड-18 की पार्षद सोनाली परमार की जगह उनके पति विजय परमार पहुंचे। साथ ही 2 नम्बर विधानसभा के कार्यकर्ता भी इस बैठक में पहुंच गए।

    बैठक में निगम कमिश्नर सब पार्षद से परिचय प्राप्त कर रही थीं कि अचानक से एक सदस्य ने उनका परिचय करवाया कि ये सोनाली विजय परमार हैं। इतना सुनते ही निगम कमिश्नर ने पूछा कि पार्षद कहां है। इस पर पार्षद पति ने जवाब दिया कि उनका स्वास्थ्य ठीक नही है। इस पर कमिश्नर सिंह ने तुरंत कहा कि आप बैठक में नहीं बैठ सकते हैं। आप पार्षद को बुलाएं। इसके बाद पार्षद पति तुरन्त बैठक से बाहर हो गए। परमार को बाहर जाता देख वार्ड 30 के पार्षद पति दुलीचंद और अन्य कार्यकर्ता भी खुद ही बाहर निकल गए। विधायक रमेश मेंदोला के सामने बाहर दोनों पार्षद पति ने अपनी बात रखी। विधायक ने भी उन्हें कह दिया कि आपको पार्षद को लेकर आना चाहिए था। इतना कह कर वे भी तुरंत बैठक में चले गए।

  • सीएम योगी आदित्यनाथ दो दिवसीय दौरे पर वाराणसी पहुंचे, काशी विश्वनाथ मंदिर और काल भैरव मंदिर में किए दर्शन,,।

    सीएम योगी आदित्यनाथ दो दिवसीय दौरे पर वाराणसी पहुंचे, काशी विश्वनाथ मंदिर और काल भैरव मंदिर में किए दर्शन,,।

    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दो दिवसीय दौरे पर गुरुवार को देर शाम वाराणसी पहुंचे। राजकीय वायुयान से लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, बाबतपुर पहुंचने के बाद उन्होंने सड़क मार्ग द्वारा सीधे काशी के कोतवाल काल भैरव मंदिर एवं उसके बाद श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में विधिवत दर्शन पूजन किया।
     

     

    तत्पश्चात मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लहुराबीर स्थित सरोजा पैलेस में पूर्व मंत्री एवं विधायक डॉ नीलकंठ तिवारी के छोटे भाई की शादी के प्रीतिभोज में सम्मिलित हुए। उन्होंने पुष्पगुच्छ देकर दंपत्ति को आशीर्वाद दिया। प्रीतिभोज कार्यक्रम में एक छोटी बच्ची को देख मुख्यमंत्री ने उसे पुचकारते हुए आशीर्वाद दिया।
     
    श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन पूजन करने के बाद मुख्यमंत्री ने कॉरिडोर को भी देखा। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि भीषण गर्मी पड़ रहा है। ऐसे में बाबा दरबार में आने वाले उनके भक्तों को प्रकार की परेशानी न होने पाए, इसका विशेष ध्यान रखा जाए। मंदिर परिसर में ठंडा पेयजल की समुचित व्यवस्था के साथ ही साथ हवा की भी व्यवस्था सुनिश्चित कराई जाए।
     
    इस दौरान मुख्यमंत्री के साथ उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, आयुष एवं खाद्य सुरक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’, एमएलसी हंसराज विश्वकर्मा, मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश कुमार अवस्थी, कमिश्नर कौशल राज शर्मा, जिलाधिकारी एस. राजलिंगम सहित पुलिस के अधिकारी एवं अन्य लोग प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
  • कानपुर : लव मैरिज के खिलाफ थे दोनों परिवार, पति के जेल जाते ही देवर ने की भाभी की हत्या,,,।

    कानपुर : लव मैरिज के खिलाफ थे दोनों परिवार, पति के जेल जाते ही देवर ने की भाभी की हत्या,,,।

    कानपुर,क्राइम न्यूज :: उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले से एक दर्दनाक खबर सामने आई है। यहां एक महिला का शव कब्रिस्तान में पड़ा मिला। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।वहीं, मामले की जांच पड़ताल में जुट गई है। पुलिस ने मृतक महिला मां की तहरीर पर देवर के खिलाफ FIR दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है।
     
    यह मामला कानपुर जिले के कर्नलगंज थाना क्षेत्र के बिसाती कब्रिस्तान का है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ग्वालटोली की रहने वाली 25 वर्षीय सिमरन ने 2021 में कर्नलगंज बिसाती कब्रिस्तान निवासी फैजान से लव मैरिज की थी। ससुराल और मायके वाले दोनों ही इस शादी के खिलाफ थे।
    शादी के कुछ दिन बाद ही सिमरन का पति फैजान एक दरगाह में चोरी करने के आरोप में जेल चला गया। पति के जेल जाने के बाद ससुरालियों ने सिमरन को घर से भगा दिया। तो वहीं, मायके वालों ने भी घर में पनाह नहीं दी। इसके चलते वह कर्नलगंज की दरगाह में ही रहती थी।
     
    एसीपी कर्नलगंज अकमल खान ने बताया कि गुरुवार सुबह खून से लथपथ सिमरन का शव कब्रिस्तान में पड़ा मिला। शव मिलने की सूचना पर पुलिस और फॉरेंसिक विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई। फॉरेंसिक विभाग ने मौका-ए-वारदात से साक्ष्यों को कब्जे में लेकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
     
    वहीं, पुलिस ने मामले की जांच पड़ताल शुरू कर दी। प्राथमिक जांच में सामने आया है कि देवर पप्पू ने ईंट से सिर कूचकर हत्या की है। हत्या के बाद से पप्पू फरार है। मृतक की मां जमीना बानो और पिता सकूर अली ने मौके पर पहुंचकर शिनाख्त की। मां की तहरीर पर कर्नलगंज थाने की पुलिस ने देवर पप्पू के खिलाफ हत्या की FIR दर्ज की है।
     
    एसीपी ने बताया कि हत्याकांड के बाद ससुराल के लोग मौके पर नहीं पहुंचे। मायके वालों ने भी शिनाख्त करके एफआईआर भले दर्ज करा दी हो, लेकिन कोई भी पोस्टमार्टम हाउस नहीं पहुंचा। इसके चलते पंचायतनामा भी नहीं हो सका। पुलिस ने ससुराल और मायके वालों को सख्ती से फोन करके बुलाया है।
  • UP बनेगा फार्मा का हब, योगी सरकार ला रही नई पॉलिसी, इतने हजार युवाओं को मिलेगा रोजगार

    UP बनेगा फार्मा का हब, योगी सरकार ला रही नई पॉलिसी, इतने हजार युवाओं को मिलेगा रोजगार

    उत्तरप्रदेश
    लखनऊ/स्वराज टुडे: उत्तर प्रदेश को फार्मा के क्षेत्र में हब बनाने के प्रयास में जुटी योगी सरकार जल्द ही नई फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री पॉलिसी-23 लेकर आने वाली है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसको लेकर हाल में एक बैठक में 2018 की फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री पॉलिसी में महत्वपूर्ण बदलाव पर चर्चा की।

    वर्ष 2018 में नई फार्मास्युटिकल पॉलिसी लायी गयी थी। यूपी जीआईएस-23 में फार्मा क्षेत्र में आए निवेश प्रस्तावों को देखते हुए योगी सरकार ने पॉलिसी में कुछ अहम बदलावों की आवश्यकता महसूस की है। इसके चलते नई फार्मास्युटिकल पॉलिसी लाने का निर्णय किया गया है। नई पॉलिसी लागू होने के बाद अगले पांच वर्षों तक मान्य होगी। फरवरी में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर समिट-23 में 212 कंपनियों ने दवा और चिकित्सा उपकरण क्षेत्र में रुचि दिखायी थी, जिसमें लगभग 28,402 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव मिले थे। इससे 57,000 रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। यानी बड़ी संख्या में युवाओं को नई नौकरियां मिलने वाली है।

    आम लोगों को मिलेगी सस्ती दवाएं

    मुख्यमंत्री के सलाहकार जीएन सिंह ने बताया कि, नई नीति का उद्देश्य स्थानीय उत्पादन को प्रोत्साहित करना, अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देकर नागरिकों को सस्ती दवाओं की उपलब्धता में सुधार करके राज्य के फार्मास्युटिकल और चिकित्सा उपकरण उद्योग में सुधार करना है। नई नीति प्रदेश में फार्मा के विकास के लिए एक अनुकूल वातावरण बनाने पर केंद्रित है। योगी सरकार प्रदेश में फार्मास्युटिकल उद्योग को बढ़ावा देने के लिए फार्मा इंडस्ट्री को सब्सिडी, प्रोत्साहन और भूमि आवंटन करने पर फोकस कर रही है।

    जमीन खरीदने पर 50 फीसदी सब्सिडी

    उन्होंने बताया कि, नीति का मुख्य उद्देश्य अत्याधुनिक सुविधाओं की स्थापना और शैक्षणिक संस्थानों के साथ सहयोग करके अनुसंधान और विकास के लिए एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र बनाना है। नई फार्मा पॉलिसी को स्थानीय अर्थव्यवस्था को अधिक से अधिक बढ़ावा देने के उद्देश्य से तैयार किया जा रहा है, जिसमें फार्मास्युटिकल और मेडिकल डिवाइस सेक्टर को लेकर विशेष तकनीक, गुणवत्तापूर्ण नियंत्रण प्रणाली और विशेष पारिस्थितिकी तंत्र की आवश्यकता पर फोकस किया जा रहा है। नई पॉलिसी के तहत सरकार इंडस्ट्री स्थापित करने के लिए जमीन की खरीदारी करने पर बैंक कर्ज में अधिकतम 7 वर्षों तक 50 प्रतिशत ब्याज पर अनुदान देगी, जो प्रति वर्ष अधिकतम एक करोड़ रुपये से अधिक नहीं होगा। नई पॉलिसी में फार्मा और मेडिकल डिवाइस पार्क पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। नीति का उद्देश्य एलोपैथिक, आयुष उत्पादों, चिकित्सा उपकरणों और थोक दवा निर्माण में उपयोग की जाने वाली प्रमुख सामग्री, दवा के बल्क निर्माण के लिए भूखंड की पहचान और पार्क विकसित करना है।

  • ट्विटर के वैल्यूएशन में भारी कमी, डील के मुकाबले आधी रह गई मार्केट वैल्यू

    ट्विटर के वैल्यूएशन में भारी कमी, डील के मुकाबले आधी रह गई मार्केट वैल्यू

    दुनिया के सबसे अमीर व्यक्तियों में से एक एलन मस्क ने पिछले साल अक्टूबर में कई महीनों के बातचीत के बाद ट्विटर खरीदा था। यह पिछले साल की सबसे चर्चित डील रही थी। इसके बाद एलन मस्क ने कंपनी को मुनाफे में लाने के लिए कई उपाय किए, लेकिन लगता है कि उनकी कोशिशें कामयाब नहीं हो रही हैं। इसी के चलते कंपनी की वैल्यूएशन में भारी गिरावट आई है और मार्केट वैल्यू डील के मुकाबले आधी रह गई है।

    इतनी रह गई कीमत
    एक रिपोर्ट के मुताबिक, ट्विटर के सीईओ एलन मस्क ने कंपनी के कर्मचारी स्टॉक अनुदान को करीब 20 अरब डॉलर आंका था। यह रिपोर्ट शनिवार को सामने आई। जब एलोन मस्क ने पिछले साल ट्विटर खरीदा था, तो सोशल मीडिया कंपनी का मूल्य उसके मूल्य से दोगुना था। एलोन मस्क ने ट्विटर को खरीदने के लिए 44 अरब डॉलर का भुगतान किया था।

     

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    कितना नुकसान
    रिपोर्ट के मुताबिक, मस्क को उम्मीद है कि इस साल ट्विटर का घाटा 3 अरब डॉलर से कम रहेगा। कंपनी पर करीब 13 अरब डॉलर का कर्ज है। डील के बाद मस्क ने कहा कि ट्विटर को रोजाना 40 लाख डॉलर का नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि कंपनी ने बड़े पैमाने पर छंटनी और लागत में कटौती के जरिए करीब 70 फीसदी कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है।

    मस्क द्वारा ट्विटर को खरीदने के बाद से ट्विटर की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। मस्क ने कहा है कि उनके अधिग्रहण के बाद से कई विज्ञापनदाताओं ने खुद को दूर कर लिया है। उन्होंने विज्ञापन लागत कम कर दी है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, दिसंबर 2022 तक ट्विटर ने विज्ञापन खर्च में 71 फीसदी की कमी की है। इससे पहले नवंबर 2022 में इसमें पिछले साल के मुकाबले 55 फीसदी की कमी आई थी।

  • लाइसेंस के लिए ऑटोमेटिक टेस्ट सेंटर अनिवार्य करने के पीछे क्या सोच रही आशीष कुंद्रा और दिल्ली सरकार की

    लाइसेंस के लिए ऑटोमेटिक टेस्ट सेंटर अनिवार्य करने के पीछे क्या सोच रही आशीष कुंद्रा और दिल्ली सरकार की

    दिल्ली में अच्छी ड्राइविंग स्किल वाले ही ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त कर पाए इसके लिए दिल्ली परिवहन आयुक्त आशीष कुंद्रा द्वारा दिल्ली की जनता के लिए खास तौर से दिल्ली की युवा पीढ़ी जो कार और बाइक का अपना ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए इच्छुक रहते हैं उन के लिए दिल्ली में ड्राइविंग स्किल टेस्ट ऑटोमेटिक स्किल टेस्ट सेंटर पर टेस्ट पास करना अनिवार्य कर दिया।

    सही मायने में जनता की सुरक्षा हेतु ऐसा करना / करवाना एक अच्छा विचार और कार्य है पर इसका सच बयानों और जनता की सुरक्षा से बिलकुल भिन्न नज़र आ रहा है।

    दिल्ली में कार्यरत

    कुछ दिन पहले पूर्व दिल्ली उपायुक्त परिवहन द्वारा एक सर्कुलर/ नोटिफिकेशन जारी किया गया था (कॉपी स्लगन), जिसमे उपायुक्त अनिल छिकारा द्वारा जनता के समकक्ष उजागर किया गया की उनकी जानकारी में आया है की कार चलाने के ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने वाले थ्री व्हीलर आटो द्वारा टेस्ट देकर ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त कर रहे हैं जो सड़को पर सुरक्षा की दृष्टि से गलत है । सड़को पर जनता की सुरक्षा को मद्देनजर रखते हुए उनके यह बयान बहुत अधिक मूल्यवान है इसमें कोई शक नहीं। उपायुक्त अनिल छिकारा द्वारा कहे गए इसी बयान को अगर सही तरीके से समझा जाए तो परिवहन आयुक्त आशीष कुंद्रा और दिल्ली सरकार की मिलीभगत ओर जनता की सुरक्षा का नाम लेकर जनता को असुरक्षा की तरफ़ धकेलना सपष्ट नज़र आ रहा है।

    दिल्ली की सड़को पर आज की तारिख में सबसे अधिक मात्रा मे चलने वाले वाहन ई रिक्शा और आटो रिक्शा है और पूर्व दिल्ली उपायुक्त परिवहन की बात को सही दृष्टि से देखें और समझे तो इन ड्राइविंग कंप्यूटराइज्ड स्किल टेस्ट पर किसी भी ई रिक्शा और आटो द्वारा टेस्ट देने से फेल होना असम्भव है इसके लिए उन्होंने बताया आटोमेटिक कंप्यूटराइज्ड ड्राइविंग स्किल टेस्ट के प्रोग्राम में सुरक्षा की दृष्टि से दोनो कैटेगरी (ई रिक्शा और आटो) के वाहन चालकों के प्रति कुछ भी नहीं रखा गया।

    इसका अर्थ सीधे शब्दो में हुआ ” दिल्ली सरकार के वोट बैंक का श्रेय प्राप्त व्यक्ति से ड्राइविंग स्किल टेस्ट लिया जाना सिर्फ अन्य ड्राइविंग टेस्ट देने वालो के लिए दिखावा मात्र है” और सारी सोच दिल्ली के युवा जो अपने निजी वाहन चलाने के लिए ड्राइविंग लाइसेंस लेना चाहते हैं के लिए रचा गया है।

    सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा पूरे भारत देश के लिए कुछ वर्षों पूर्व गैजेट नोटिफिकेशन जारी कर लाइसेंस टेस्ट की प्रकिया से ही मुक्त होने का मार्ग दे दिया था पर दिल्ली के जनहित का नाम लेकर कार्य करने वाले परिवहन आयुक्त आशीष कुंद्रा द्वारा उसके लिए अभी तक दिल्ली में कोई भी कदम नहीं उठाया, क्योंकि दिल्ली में अगर यह नियम लागू हो गया तो परिवहन आयुक्त कैसे दिल्ली के युवा को फेल करवाकर बार बार उससे फीस के नाम पर पैसा जमा करवाकर दिल्ली के राजस्व में इतना इज़ाफ़ा करवाने में कामयाब हो पाएंगे।

    कितनी जनहित की सोच है ना दिल्ली परिवहन आयुक्त आशीष कुंद्रा की दिल्ली सरकार के प्रति फैसला आपका

  • उच्चतम न्यायालय के निर्देश के बाद भी दिल्ली में अभी तक नही शुरू किया गया डीजल वाहनों का पंजीकरण, कौन जिम्मेदार ?

    उच्चतम न्यायालय के निर्देश के बाद भी दिल्ली में अभी तक नही शुरू किया गया डीजल वाहनों का पंजीकरण, कौन जिम्मेदार ?

    क्या आप जानते हैं डीजल यूरो VI इंजन वाहन का प्रदुषण सीएनजी वाहन से भी कम है, गूगल पर सर्च करने पर जो सूचना सामने आई उसके अनुसार डीजल यूरो VI के वाहन सीएनजी वाहन से भी कम प्रदुषण फैलाते है ( डीजल यूरो VI और सीएनजी प्रदूषण की कॉपी आपकी जानकारी हेतु स्लगन)

    सवाल यह उठता है जब डीजल वाहनों के चलने से प्रदूषण नियंत्रण में रहेगा फिर दिल्ली परिवहन विभाग दिल्ली में यूरो VI डीजल वाहनों का पंजीकरण क्यो नही शूरू करना चाहता।

    बाहरी राज्यों में पंजीकृत वाहनों के दिल्ली में आने पर कोई टैक्स नहीं लिया जाता जबकि अन्य सभी राज्यो को सीमा पर बाहरी राज्यों के वाहनों से पैसेंजर एवम् अन्य टैक्स जमा करवाने के बाद ही राज्य की सीमा में प्रवेश दिया जाता है।

    इस छूट का फायदा बाहरी राज्यों में पंजीकृत वाहन वाले खुब उठाते हैं और खुल कर दिल्ली में अपने वाहनों को चलाते नज़र आते हैं।

    अब सवाल यह उठता है की बाहरी राज्यों के डीजल वाहन जब दिल्ली में बे रोक टोक चल सकते हैं तो दिल्ली परिवहन विभाग द्वारा दिल्ली में डीजल वाहनों का पंजीकरण बंद क्यों ?
    दूसरा बड़ा सवाल यह उठता है की जब यह सिद्ध हो चुका की यूरो VI डीजल वाहनों के द्वारा निकलने वाला प्रदुषण सीएनजी वाहनों से भी कम है फिर इनके पंजीकरण के लिए परिवहन विभाग द्वारा पंजीकरण प्रक्रिया शुरू क्यो नही?
    तीसरा बड़ा सवाल यह उठता है की दिल्ली परिवहन विभाग द्वारा दिल्ली से अंतरराजकिय प्रीमियम बस पर डीजल बसों को शूरू करने के उद्देश्य से कुछ समय पहले कानुनी सलाह प्राप्त की थी जिसके आधार पर दिल्ली परिवहन निगम द्वारा प्रीमियम बस सेवा शुरू करने का फैसला लिया गया था,
    चोथा और अंतिम बड़ा सवाल यह उठता है की जब उच्चतम न्यायालय भारत द्वारा एक याचिका की सुनवाई पर दिल्ली में डीजल VI वाहनों को पंजीकरण करने की छूट दे दी तो परिवहन विभाग ने उस आदेश पर दुबारा कानूनी राय लेने का विचार क्यो बनाया।

    क्या परिवहन आयुक्त यह मानते हैं कि बाहरी राज्यों से दिल्ली में आकर चलने वाले वाहन दिल्ली में अपने पंजीकृत वाहनों से बेहतर है और प्रदुषण नही फैलाते ?

    जवाब तो बनता है क्योंकी प्रदुषण के नाम से होने वाली सारी मार दिल्ली में रहने वाली जनता और परिवहन से जुड़े व्यवसाई ही भुगतते है, जैसे की अभी परिवहन आयुक्त के दिशा निर्देश पर जनता के खडे वाहनों को उठवा कर दूसरे राज्यों में भेजने की प्रक्रिया।

    दिल्ली में जल्द ही जी20 के लिए सभी देशों के गणमान्य व्यक्ति उपस्थित होगें और दिल्ली की छवि को चार चांद लगवाने में दिल्ली की सड़को और उन पर उपल्ब्ध वाहनों का बहुत बड़ा महत्व और योगदान होगा अत: परिवहन आयुक्त दिल्ली को दिल्ली में यूरो VI डीजल वाहनों के पंजीकरण को शुरू करवाने के दिशा निर्देश तत्काल जारी कर देने चाहिए।

  • दुनिया के आठवें अजूबे को जाने,

    दुनिया के आठवें अजूबे को जाने,

    *दुनिया में अब तक थे सात अजूबे अब जाने दुनिया के आठवें अजूबे के बारे में “परिवहन विभाग दिल्ली”*

    *तकनीकी पदो पर गैर तकनीकी कितने सक्षम*

    *दिल्ली परिवहन विभाग दुनिया का प्रथम ऐसा विभाग जहा बिना तकनीकी पदो पर स्वयं आयुक्त परिवहन गैर तकनीकी अधिकारियो को नियुक्ति दे कर करवा रहें हैं काम*

    आशीष कुंद्रा ने जब से दिल्ली परिवहन आयुक्त का कार्य भार संभाला तभी से विभाग की कार्यप्रणाली में बदलाव करके दिखाना शुरू कर दिया था। इन्ही बदलावों और हर कार्य को जनहित का नाम देकर प्रथम दिन से ही सुर्खियों और विज्ञापनों में छाए रहे हैं।

    कामों की श्रखला तो इतनी लम्बी है की उसे किसी भी साधारण ख़बर में प्रस्तुत किया ही नहीं जा सकता कहावत में इसे यह कह सकते है “ऊट के मुंह में जीरा” .

    अपनी इच्छा के कार्य पूरा करने के लिए परिवहन आयुक्त आशीष कुंद्रा द्वारा

    उच्चतम न्यायालय के आदेशों को दरकिनार कर दिखाया

    2. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के द्वारा जारी गैजेट नोटिफिकेशन को दरकिनार कर दिखाया,

    3. राज्य सरकार के परिवहन मंत्री के दिशा निर्देश/ आदेश को दरकिनार करके दिखा दिया। इतने प्रतिभाशाली है परिवहन आयुक्त आशीष कुंद्रा अपनी इच्छा के कार्य को पूरा करने के लिए ।

    हम आपको जो बताने जा रहे हैं वह इस लिए विशेष है क्योंकि आज से पहले आपने ना तो ऐसा सुना होगा और ना ही कभी कहीं देखा होगा, किसी एचओडी / प्रशासनिक अधिकारी द्वारा किसी तकनीकी पद पर गैर तकनीकी अधिकारी को नियुक्त कर देना वह भी कैट/माननीय उच्चतम न्यायालय के दिशा निर्देश को दरकिनार कर

    विश्व में दिल्ली का परिवहन विभाग पहला ऐसा विभाग बन गया जहां तकनीकी कर्मचारियों / तकनीकी अधिकारियो के पदों पर स्वयं अपनी इच्छा से परिवहन आयुक्त गैर तकनीकी लोगो को नियुक्त कर रहे हैं और उनकी ताक़त का अनुभव करे की उनके द्वारा ऐसा करने पर *दिल्ली प्रशासनिक के मुख्य उपराज्यपाल दिल्ली, मुख्य सचिव दिल्ली, के अलावा मुख्य्मंत्री दिल्ली एवम् न्यायिक प्रणाली में से भी किसी ने जवाबदारी नही समझी।*

    * यह बात विशेष इसलिए भी है क्योंकि अगर “दिल्ली परिवहन विभाग को उदाहरण की तरह देख कर सभी विभागों में आने वाले एचओडी / प्रशासनिक अधिकारी तकनीकी पदो पर अपने पद की ताकत का प्रयोग कर गैर तकनीकी लोगो की नियुक्ति करना शुरू कर दें “।*

    a. हॉस्पिटल में डॉक्टर की जगह आम आदमी,
    b. इंडस्ट्री में मिस्त्री की जगह आम आदमी,
    c तकनीकी विभाग में वेल्डर की जगह आम आदमी,
    d. प्रशासनिक विभागों में पढ़े लिखे पदो पर अनपढ़ आदि

    *ऊपर लिखित तकनीकी पदो पर गैर तकनीकी व्यक्ति की नियुक्ति होने से कैसा अनुभव उत्पन्न होगा सोच के देखे और धन्यवाद करे परिवहन आयुक्त आशीष कुंद्रा का जिन्होंने जनहित के नाम से यह कर दिखाया और उन सभी का जिन्हे इस पर जवाब मांगने का हक है पर फिर भी जवाब नहीं मांगा।*