Category: Health

  • चेयरमैन नरगिस द्वारा नगर के चट्टी चौराहों पर जलवाए जा रहे अलाव

    चेयरमैन नरगिस द्वारा नगर के चट्टी चौराहों पर जलवाए जा रहे अलाव

    चेयरमैन नरगिस द्वारा नगर के चट्टी चौराहों पर जलवाए जा रहे अलाव
    राहगीरो व मजदूरों को नही होगी ठंड महसूस: नरगिस अतहर
    भदोही। नगर पालिका परिषद भदोही चेयरमैन नरगिस अतहर द्वारा प्रतिदिन नगर में अलाव की व्यवस्था की जा रही है। खासतौर से हर चट्टी चौराहों पर शाम के समय नगर पालिका के वाहन द्वारा लकड़ी गिराई जा रही है जिससे लोगो को काफी सहूलियत मिल रही है। वहीं चेयरमैन नरगिस अतहर ने नगर पालिका के संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों को निर्देशित किया है कि ठंड का मौसम देखते हुए खासतौर से नगर के हर चौराहों व रेलवे स्टेशन पर अलाव की व्यवस्था नियमित रूप से किया जाय ताकि राहगीरों, मुसाफिरों व मजदूरों को ठंड से बचाया जा सके। कहा इसमे कोताही बरदाश्त नही की जाएगी। ज्ञात हो कि ठंड को देखते हुए नगर पालिका परिषद भदोही द्वारा भदोही रेलवे स्टेशन परिषर में रैन बसेरा लगाया गया है जहां पर दूरदराज से आने वाले मुसाफिरों को ठहरने की मुक्कमल व्यवस्था की गई है। श्रीमती नरगिस अतहर ने कहा कि ठंड का मौसम जब तक रहेगा तब तक अलाव की व्यवस्था पूरी तरह से नगर में किया जाता रहेगा। वहीं अलाव की व्यवस्था होने से रोजमर्रा के खाने कमाने वाले मजदूरों को काफी सहूलियत मिली है। कहा राहगीरों, मजदूरों व मुसाफिरों को ठंड महसूस नही होगी। वहीं नगर पालिका के ठेकेदार हारून खां ने चेयरमैन नरगिस अतहर के निर्देश के अनुसार रैन बसेरा को बेहतरीन ढंग से बनाया गया है। श्रीमती नरगिस अतहर द्वारा नगर में किये जा रहे कार्यों की चहुंओर सराहना हो रही है।
  • हमारी समस्याओं का निदान संविधान में है

    हमारी समस्याओं का निदान संविधान में है

    हमारी समस्याओं का निदान संविधान में है

    मिहींपुरवा/बहराइच l बलहा विधानसभा क्षेत्र के उर्रा ग्राम सभा के करीकोट मैदान पर राष्ट्रीय निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद   कैबिनेट मंत्री उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने कार्यकर्ताओं में भरा जोश
    जनसभा स्थल पर निषाद समाज के एकत्र भारी भीड़ को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि पव्वा भर लोग पव्वा पिलाकर झौवा भर वोट लेकर शासन करते है । आगे उन्होंने अपने समाज से कहा कि किस्सा चाहिए या हिस्सा  हिस्सा के लिए हमें एकजुट होना पड़ेगा  संगठित होना पड़ेगा पार्टी के लिए  समर्पित होना पड़ेगा रोटी कपड़ा और मकान के साथ-साथ ज्ञान भी लेना पड़ेगा जिससे समाज शिक्षित एवं संगठित हो सके । हमारी समस्याओं का निदान हमारे संविधान में है इसलिए हमें जिससे हमारे समाज की दशा एवं दिशा बदल सकेगी केंद्र की मोदी सरकार एवं योगी सरकार ने आपके समाज को धनवान एवं बलवान बनाने के लिए विभिन्न प्रकार की योजनाओं का शुरुआत की है उन योजनाओं का लाभ लेने  की विधि डॉक्टर संजय निषाद ने विस्तार से मौजूद कार्यकर्ताओं को समझाया की आप इन योजनाओं का लाभ लें जिससे  आर्थिक उन्नति हो सके । कार्यक्रम में ही मंत्री ने 13 जनवरी को लखनऊ चलो अभियान की का निमंत्रण भी दिया तथा जनसभा में मौजूद महिला पुरुष की भारी संख्या को देखकर मंत्री ने उन्हें  धन्यवाद दिया इस दौरान बलहा विधानसभा की विधायक सरोज सोनकर ने मंत्री को अंग वस्त्र उढकर उनका स्वागत किया
    कार्यक्रम में प्रदेश अध्यक्ष बाबूराम निषाद, राष्ट्रीय सचिव मुरलीधर निषाद, मनोज निषाद, ओम प्रकाश मिश्रा, विधान सभा बलहा अध्यक्ष अजय निषाद, पूर्व प्रधान संतोष श्रीवास्तव सहित पार्टी के हजारों की संख्या में महिला पुरुष कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम के बाद मंत्री ने  अपने एक कार्यकर्ता के घर पहुंच कर जलपान ग्रहण किया इस दौरान उप जिलाधिकारी मिहीपुरवा संजय कुमार एवं थाना प्रभारी मोतीपुर दद्दन सिंह  दलबल के साथ मंत्री के काफिले मे मौजूद रहे।

  • डेढ़ साल बाद बच्ची को मिली नई जिंदगी: चोट लगने से फट गई थीं दिमाग की नसें, डॉक्टरों ने नहीं लिए पैसे

    डेढ़ साल बाद बच्ची को मिली नई जिंदगी: चोट लगने से फट गई थीं दिमाग की नसें, डॉक्टरों ने नहीं लिए पैसे

    डेढ़ साल बाद बच्ची को मिली नई जिंदगी: चोट लगने से फट गई थीं दिमाग की नसें, डॉक्टरों ने नहीं लिए पैसे

    मूल रूप से बिहार के रोहतास जिले के सेमारी गांव निवासी प्रिया के पिता मुन्ना कुमार गुप्ता चाय बेचकर जीवनयापन करते हैं। मां साधना गृहिणी हैं। प्रिया जब 10 साल की थी तो अक्तूबर 2021 में प्रिया के सिर पर स्कूल में गमला गिर गया था। इससे उसके सिर में गंभीर चोट आई थी।

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    ये डॉक्टरों का अटूट विश्वास ही था जो डेढ़ साल से वेंटीलेटर पर पड़ी मासूम प्रिया आज हंस बोल रही है। मां पिता ने तो उम्मीद छोड़ दी थी लेकिन बीएचयू ट्रॉमा सेंटर के डॉक्टरों के अथक प्रयास ने उनके चेहरे पर मुस्कान बिखेर दी। बिहार रोहतास के मुन्ना कुमार गुप्ता की 10 साल की प्रिया ने आज जिंदगी से जंग जीतकर वेंटीलेटर से व्हीलचेयर पर आ गई है। मां-पिता से अब बातें कर रही हैं। उनके पास तो डॉक्टरों का शुक्रिया अदा करने के लिए लफ्ज भी नहीं हैं।

    मूल रूप से बिहार के रोहतास जिले के सेमारी गांव निवासी प्रिया के पिता मुन्ना कुमार गुप्ता चाय बेचकर जीवनयापन करते हैं। मां साधना गृहिणी हैं। प्रिया जब 10 साल की थी तो अक्तूबर 2021 में प्रिया के सिर पर स्कूल में गमला गिर गया था। इससे उसके सिर में गंभीर चोट आई थी। पांच महीने तक तो परिजन स्थानीय स्तर पर इलाज में लगे रहे लेकिन जब हर जगह से प्रिया के ठीक होने की उम्मीद नहीं मिली तो 28 फरवरी 2022 को मां-पिता से उसे बीएचयू ट्रॉमा सेंटर लेकर आए। बीएचयू ट्रॉमा सेंटर के प्रभारी प्रो. सौरभ सिंह के अनुसार 11 अप्रैल 2022 को उसका ऑपरेशन किया गया। उसके बाद से ही बच्ची को वेंटीलेटर सपोर्ट पर रखा गया। आठ महीने तक उसे 24 घंटे वेंटीलेटर पर रखा गया। इसके बाद अगस्त 2023 तक 12-12 घंटे वेंटीलेटर सपोर्ट दिया गया। हालत में सुधार होने पर सितंबर 2023 से वेंटीलेटर से हटा दिया गया। 

    चोट लगने से फट गई थीं दिमाग की नसें

    ट्रॉमा सेंटर के प्रभारी प्रो. सौरभ सिंह के मुताबिक प्रिया को सर्वाइकल स्पाइन में गंभीर चोट आई थी। चोट लगने से उसके दिमाग की नसें फट गई थीं। सर्जरी के बाद भी बच्ची कोई गतिविधि नहीं कर पा रही थी। पिता की माली हालत ठीक नहीं थी, इसलिए हमने बिना किसी खर्च के इलाज करने का फैसला लिया। उसके लिए अतिरिक्त बेड मंगाकर आईसीयू में लगाया गया। करीब डेढ़ साल से बच्ची इसी बेड पर रही।

    इलाज में ये टीमें रहीं शामिल

    प्रिया के इलाज में न्यूरो सर्जरी के प्रो. कुलवंत सिंह और डॉ. अनुराग साहू के साथ एनीस्थीसिया विभाग की प्रो. कविता मीना ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    पिता बोले धरती के भगवान, बाबा विश्वनाथ का आशीर्वाद मिल गया

    प्रिया को डेढ़ साल बाद व्हीलचेयर के सहारे चलते और बोलते देख पिता मुन्ना कुमार और माता साधना की खुशी का ठिकाना नहीं है। पिता मुन्ना ने बताया कि डॉक्टरों के साथ बाबा विश्वनाथ की कृपा बेटी को मिल गई। आर्थिक स्थिति ठीक न होने की वजह से कैसे इलाज करा पाएंगे, इसकी चिंता थी लेकिन यहां के डॉक्टरों ने ये चिंता भी दूर कर दें।

  • हड्डियों को रखना है मजबूत तो कम कर दें इस चीज का सेवन, ब्लड प्रेशर की समस्या में भी मिलेगा लाभ

    हड्डियों को रखना है मजबूत तो कम कर दें इस चीज का सेवन, ब्लड प्रेशर की समस्या में भी मिलेगा लाभ

    हड्डियों को रखना है मजबूत तो कम कर दें इस चीज का सेवन, ब्लड प्रेशर की समस्या में भी मिलेगा लाभ
    नई दिल्ली
    शरीर को स्वस्थ और फिट बनाए रखने के लिए जरूरी है कि आप रोजाना स्वस्थ और पौष्टिक चीजों का सेवन करते रहें। आहार में कई प्रकार के मौसमी फलों-सब्जियों को शामिल करना शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने और बीमारियों से बचाने में लाभकारी है। पर स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, हमें रोज क्या खाना चाहिए इससे जरूरी ये जानना है कि किन चीजों से परहेज किया जाना मौजूदा समय में सबसे जरूरी है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अगर आप शरीर को स्वस्थ रखना चाहते हैं तो चीनी और नमक दोनों का सेवन कम कर लें।

    नमक के अधिक सेवन को संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए कई प्रकार से हानिकारक माना जाता है। इससे सबसे ज्यादा जोखिम ब्लड प्रेशर बढ़ने का होता है और यह स्थिति आपके हृदय की सेहत के लिए हानिकारक हो सकती है। इतना ही नहीं स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया कि अधिक नमक आपकी हड्डियों के लिए भी नुकसानदायक हो सकती है। आइए अधिक नमक से होने वाले जोखिमों के बारे में जानते हैं।

    ज्यादा नमक के नुकसान
    नमक के कारण शरीर में कम हो जाता है कैल्शियम

    हड्डियों को स्वस्थ और मजबूत बनाए रखने के लिए जिन पोषक तत्वों को सबसे आवश्यक माना जाता है, कैल्शियम उनमें से एक है। अध्ययनों में पाया गया है कि यदि आप बहुत अधिक मात्रा में नमक वाली चीजों का सेवन करते हैं तो यह शरीर में कैल्शियम की कमी का कारण बन सकती है। जितना अधिक नमक आप खाते हैं, उतना अधिक कैल्शियम आपके शरीर से निकल जाता है, जिसका अर्थ है कि यह आपकी हड्डियों के लिए भी बहुत हानिकारक है।

    एक दिन में 2,300 मिलीग्राम से कम सोडियम लेने का लक्ष्य रखें।

    हार्ट अटैक के बढ़ते खतरे से बचाव के उपाय
    ज्यादा नमक हार्ट के लिए भी ठीक नहीं

    रक्तप्रवाह में सोडियम का बढ़ा हुआ स्तर किडनी से पानी निकालने की क्षमता को कम कर देता है, जिससे शरीर की रक्त वाहिकाओं पर तनाव पड़ता है। उच्च रक्तचाप अंततः स्ट्रोक और हार्ट फेलियर जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है। चूंकि किडनी अतिरिक्त नमक को बाहर निकालने के लिए लगातार काम करती है, इसलिए यह स्थिति किडनी की भी बीमारियों का कारण बन सकती है।

    कम करें नमक का सेवन
    सोडियम की अधिकता से होने वाली इन समस्याओं को भी जानिए

    सोडियम/नमक का अत्यधिक सेवन हमारे शरीर के लिए कई प्रकार से नुकसानदायक हो सकता है। इसका मांसपेशियों-हड्डियों से लेकर कई अन्य अंगों पर भी गंभीर दुष्प्रभाव हो सकता है।
    हृदय की मांसपेशी की समस्या
    सिरदर्द- किडनी के रोग
    ऑस्टियोपोरोसिस
    दिल के धड़कनों की समस्या।
    उच्च रक्तचाप
    किडनी की पथरी।
    पेट के कैंसर का जोखिम।

  • महिलाओं में बहुत कॉमन पर गंभीर हो सकती है ये बीमारी, विशेषज्ञों ने बताए बचाव के उपाय

    महिलाओं में बहुत कॉमन पर गंभीर हो सकती है ये बीमारी, विशेषज्ञों ने बताए बचाव के उपाय

    महिलाओं में बहुत कॉमन पर गंभीर हो सकती है ये बीमारी, विशेषज्ञों ने बताए बचाव के उपाय
    नई दिल्ली

    पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) महिलाओं में होने वाली काफी आम समस्या है लेकिन यह कई प्रकार की गंभीर स्थितियों का कारण बन सकती है। यह मुख्यरूप से हार्मोन्स से संबंधित समस्या मानी जाती है और आमतौर पर महिलाओं में प्रजनन की आयु के दौरान होती है। यदि आपको पीसीओएस है, तो इसके कारण आपका मासिक धर्म भी प्रभावित होने लगता है जो शरीर में कई प्रकार की दिक्कतों के लिए एक कारण हो सकती है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, विशेषज्ञओं को पीसीओएस का सटीक कारण पता नहीं है। हालांकि माना जाता रहा है कि वजन घटाने के साथ-साथ शीघ्र निदान और उपचार से इस रोग के जोखिमों को कम करने में मदद मिल सकती है। डॉक्टर कहते हैं सभी लोगों को इस रोग के जोखिमों से बचाव करते रहना चाहिए, आइए जानते हैं इसके लिए किन उपायों का पालन करते रहने की सलाह दी जाती है?

    पीसीओएस के लक्षणों को जानिए

    कुछ सामान्य से लक्षणों की मदद से आसानी से पीसीओएस की समस्या का पता लगाया जा सकता है, इसमें सबसे पहले आपका मासिक धर्म प्रभावित होने लगता है। मासिक धर्म की अवधि में कमी या इसका नियमित न होना पीसीओएस के सामान्य लक्षण हैं। मासिक धर्म कई दिनों तक या सामान्य अवधि से अधिक समय तक रहता है। इस तरह की समस्या का लंबे समय तक बने रहना आपको गर्भधारण करने में भी परेशानी का कारण बन सकता है।

    आइए जानते हैं कि इस समस्या से कैसे बचाव किया जा सकता है?

    लाइफस्टाइल को ठीक रखना बहुत जरूरी

    अध्ययनों में पाया गया है कि जिन लोगों को अधिक वजन की समस्या होती है उनमें पीसीओएस होने का खतरा भी अधिक हो सकता है, ऐसे में इस रोग से बचाव के लिए डॉक्टर आपको लाइफस्टाइल को ठीक रखने की सलाह देते हैं जिससे वजन को भी कंट्रोल में रखा जा सकता है। शरीर के वजन का 5% तक कम होने से भी आपकी स्थिति में सुधार हो सकता है। आपको आहार की पौष्टिकता पर भी ध्यान रखने की सलाह दी जाती है।

    स्वस्थ और पौष्टिक आहार जरूरी

    पीसीओएस की समस्या से बचाव के लिए आहार को ठीक रखना भी जरूरी माना जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं आपको हाई कार्बोहाइड्रेट वाले आहार का सेवन कम करना चाहिए, इससे इंसुलिन का स्तर बढ़ सकता है। यदि आपको पीसीओएस है तो कार्बोहाइड्रेट की मात्रा को कम करने से लक्षणों में भी लाभ पाया जा सकता है। फलों, सब्जियों, साबुत अनाज आदि का सेवन आपके लिए फायदेमंद है।

    शरीर को रखें एक्टिव

    शरीर को एक्टिव रखकर आप कई प्रकार की बीमारियों के जोखिम को कर सकते हैं, ये पीसीओएस से बचाव में भी आपके लिए मददगार है। अपनी दैनिक गतिविधि बढ़ाने और नियमित व्यायाम करने से इंसुलिन प्रतिरोध को कम किया जा सकता है जिससे इस रोग के कारण होने वाली समस्याओं के खतरे से भी बचाव कर सकते हैं। शारीरिक सक्रियता आपके वजन को भी कंट्रोल रखने में मददगार है।

     

  • 18 से 65 साल की उम्र के लोगों को कितने मिनट करना चाहिए व्यायाम और योगाभ्यास?

    18 से 65 साल की उम्र के लोगों को कितने मिनट करना चाहिए व्यायाम और योगाभ्यास?

    8 से 65 साल की उम्र के लोगों को कितने मिनट करना चाहिए व्यायाम और योगाभ्यास?
    , नई दिल्ली

    योगासनों का नियमित मन और शरीर दोनों को स्वस्थ बनाए रखने के लिए फायदेमंद है। कम उम्र से ही योग की आदत बच्चों में डाल देनी चाहिए। योग बहुत गुणकारी है। नियमित योग रक्त संचार को बढ़ाने के साथ ही मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है और शरीर को कई तरह की बीमारियों के जोखिम से बचाता है। इसके अलावा शारीरिक कार्यक्षमता और सहनशक्ति में भी सुधार करने में योग सहायक है। योग के बढ़ते चलन के कारण लोगों को योगाभ्यास से होने वाले फायदों के बारे में तो पता है लेकिन कई बार लोगों को लगता है कि अधिक योग करने से अधिक लाभ होगा। किसी भी चीज की जरूरत से ज्यादा कमी और अधिक होना नुकसानदायक हो सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक उम्र के मुताबिक रोजाना एक निश्चित अवधि की योगाभ्यास ही स्वस्थ रहने के लिए आवश्यक है। ऐसे में आपको पता होना चाहिए कि आयु और आपकी शारीरिक स्थिति के मुताबिक आपको कितनी देर योगासन करना है। अगली स्लाइड में जानिए कितनी देर करें योग।

    प्रतिदिन योगाभ्यास का कुल समय –
    प्रतिदिन कितनी देर करें योग?

    योग विशेषज्ञों के मुताबिक, रोजाना 30 मिनट का योगाभ्यास शरीर को स्वस्थ रखने के लिए आदर्श माना जाता है। आमतौर पर योग के अभ्यास के प्रकार और फोकस के आधार पर योग मुद्रा निर्भर करती है। कई अलग अलग तरह के योग हैं, जिनके प्रकार के आधार पर योगाभ्यास की अवधि निर्धारित होती है। लेकिन सांस और शारीरिक योगासनों के लिए लगभग 30 मिनट पर्याप्त होता है।

    18 साल से अधिक के लोगों के लिए योग का समय
    18 से 65 वर्ष के लोग कितनी देर करें व्यायाम

    बीते कुछ समय में ऐसे कई मामले सामने आए, जिसमें जिम में अधिक वर्कआउट करने से व्यक्ति की मौत हो गई। व्यायाम शरीर को स्वस्थ बनाने का एक जरिया है लेकिन सही अवधि तक व्यायाम करना ही लाभकारी होता है। उम्र के मुताबिक वर्कआउट या एक्सरसाइज का समय तय होता है।18 से 65 साल की उम्र के लोगों को हफ्तेभर में 150 मिनट व्यायाम करना चाहिए। इस आयु वर्ग के लोग फुर्ती वाले व्यायाम हर हफ्ते कम से कम 75 मिनट करें।

    बुजुर्ग कितने देर करें योग व व्यायाम –
    65 से अधिक उम्र के लोगों के लिए व्यायाम का समय

    अगर आप 65 साल से अधिक आयु के हैं तो आप योग या डांस को अपनी फिजिकल एक्टिविटी में शामिल करें। हफ्ते में तीन दिन ही आपको वर्कआउट करना चाहिए। विशेषज्ञ से सलाह के बाद ही अधिक थकान वाली एक्सरसाइज करें।

    बच्चे कितनी देर करें योग और व्यायाम –
    बच्चों के लिए व्यायाम की कुल अवधि

    5 से 17 साल तक के बच्चों और किशोरों को कम से कम 60 मिनट रोजाना व्यायाम करना चाहिए। किशोर मांसपेशियों और हड्डियों को मजबूत बनाने वाली एक्सरसाइज कर सकते हैं। वर्कआउट में दौड़, कूद आदि को भी शामिल कर सकते हैं।

  • एंटीऑक्सीडेंट का अच्छा स्रोत है ये फल, हार्ट-कैंसर रोगियों के लिए भी लाभकारी

    एंटीऑक्सीडेंट का अच्छा स्रोत है ये फल, हार्ट-कैंसर रोगियों के लिए भी लाभकारी

    एंटीऑक्सीडेंट का अच्छा स्रोत है ये फल, हार्ट-कैंसर रोगियों के लिए भी लाभकारी
    नई दिल्ली
    फलों के सेवन की बनाएं आदत

    आहार में मौसमी फलों-सब्जियों को शामिल करना सेहत के लिए कई प्रकार से लाभकारी माना जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सभी लोगों को इन्हें रोजाना सेवन का हिस्सा बनाना चाहिए। ताजे मौसमी फल शरीर के लिए आवश्यक पोषक तत्वों के साथ कई विटामिन्स और खनिजों की आसानी से पूर्ति कर सकते हैं। शोधकर्ताओं ने बताया, अनार का सेवन करना सभी के लिए लाभकारी हो सकता है, यह लो कैलोरी वाला फल होने के साथ फाइबर, विटामिन्स और मिनरल्स से भरपूर होता है, जो आपको कई गंभीर बीमारियों के खतरे से बचाने में भी मदद कर सकता है।

    आहार विशेषज्ञ कहते हैं, सभी लोगों को दैनिक रूप से अनार का सेवन जरूर करना चाहिए, ये एंटीऑक्सीडेंट का स्रोत है जो कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के जोखिम से बचाने में लाभकारी है। एनीमिया के जोखिम वालों के लिए भी ये फायदेमंद फल माना जाता है।

    आइए जानते हैं अनार किस प्रकार से हमारी सेहत के लिए लाभकारी है?

    अनार के स्वास्थ्य लाभ
    एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर है ये फल

    अनार, कई प्रकार के पोषक तत्वों वाला फल है, इसका एंटीऑक्सीडेंट गुण इसे सेहत के लिए बहुत लाभकारी बनाता है। एंटीऑक्सीडेंट, ऐसे यौगिक हैं जो आपके शरीर की कोशिकाओं को फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाने में मदद करते हैं। अनार जैसे फलों से एंटीऑक्सीडेंट प्राप्त करना समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देने और बीमारी को रोकने में आपके लिए फायदेमंद है, इससे कैंसर के खतरे को भी कम किया जा सकता है।

    इंफ्लामेशन का खतरा –
    दूर होती है इंफ्लामेशन की समस्या

    अनार में एंटी-इंफ्लामेटरी यौगिक पाए जाते हैं जो शरीर में सूजन को कम करने में लाभकारी हैं। क्रोनिक इंफ्लामेशन की समस्या को हृदय रोग, टाइप-2 डायबिटीज और कैंसर कई अन्य गंभीर बीमारियों का कारक माना जाता है। अनार खाने से इन समस्या को रोकने में लाभ मिल सकता है।

    कैंसर से बचाव के लिए करें प्रयास
    कैंसर रोधी गुण

    शोध में पाया गया है कि अनार में मौजूद यौगिकों में कैंसर रोधी गुणों वाले होते हैं। पशुओं पर किए गए अनुसंधान में यह भी पाया गया है कि अनार लिवर कैंसर के शुरुआती चरण में ट्यूमर के विकास को धीमा करने में भी मदद करता है। एक अन्य शोध के अनुसार, अनार का अर्क प्रोस्टेट कैंसर के लिए भी फायदेमंद हो सकता है। यानी इसका सेवन आपको कई जानलेवा बीमारियों के जोखिम से सुरक्षा दे सकता है।

    हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभ

    अनार जैसे पॉलीफेनोलिक यौगिकों से भरपूर फल हृदय स्वास्थ्य को लाभ पहुंचा सकते हैं। हृदय रोग से पीड़ित लोगों पर किए गए एक अध्ययन में, अनार का रस पीने से सीने में दर्द की आवृत्ति और गंभीरता कम हो गई। शोधकर्ताओं ने पाया कि यह शरीर में खून की मात्रा को भी बढ़ाने वाला फल है, ऐसे में इसका सेवन करना आपके लिए बहुत लाभकारी है।

     

  • वजन कम करने में इस तरह मददगार है पपीता

    वजन कम करने में इस तरह मददगार है पपीता

    वजन कम करने में इस तरह मददगार है पपीता

    पपीता एक ऐसा फल है, जिसका कैलोरी काउंट काफी कम होता है। इसलिए, जब आप इसका सेवन करते हैं तो आपको फुलर तो महसूस होता है, लेकिन आपका कैलोरी काउंट गड़बड़ाता नहीं है। मिड मील्स में पपीता खाने से आप अनहेल्दी स्नैकिंग करने से बच जाते हैं।
    पपीता एक ऐसा फल है, जो साल के बारह महीने आसानी से मिलता है। बेहद कम दाम में मिलने वाला यह सेहत के लिए बेहद ही गुणकारी है। पपीता सिर्फ पाचन तंत्र के लिए ही अच्छा नहीं माना जाता है, बल्कि यह वजन कम करने में भी मददगार है। अगर आप एक हेल्दी लाइफस्टाइल जीते हुए पपीते को अपनी डाइट का हिस्सा बनाते हैं तो इससे यकीनन आपको वजन कम करने में मदद मिलती है। यह एक नहीं, बल्कि कई तरीकों से वजन कम करने में सहायक है। तो चलिए जानते हैं इसके बारे में-

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    कैलोरी होती है कम

    पपीता एक ऐसा फल है, जिसका कैलोरी काउंट काफी कम होता है। इसलिए, जब आप इसका सेवन करते हैं तो आपको फुलर तो महसूस होता है, लेकिन आपका कैलोरी काउंट गड़बड़ाता नहीं है। मिड मील्स में पपीता खाने से आप अनहेल्दी स्नैकिंग करने से बच जाते हैं।
    माइग्रेन की समस्या होने पर हो जाएं अलर्ट, इससे दिल संबंधी बीमारियों का बढ़ सकता है खतरा
    फाइबर होता है अधिक

    पपीता में डायटरी फाइबर अच्छी मात्रा में पाया जाता है। जिसके कारण पपीता आपको अधिक देर तक फुलर होने का अहसास करवाता है। फाइबर होने के कारण आप ओवरईटिंग से बच जाते हैं और इससे कैलोरी इनटेक को बैलेंस करने में मदद मिलती है। जिससे आपके लिए वजन कम करना अधिक आसान हो जाता है।

    बेहतर हाइड्रेशन

    पपीते का सेवन करने का एक लाभ यह होता है कि इसमें पानी की मात्रा अधिक होती है। जिसके कारण आपको खुद को हाइड्रेटेड रखने में मदद मिलती है। आपको शायद पता ना हो, लेकिन कभी-कभी आपका शरीर प्यास को भूख लेता है और इससे आप ओवरईटिंग करने लग जाते हैं। इसलिए, जब आप पपीता खाते हैं तो इससे आपको हाइड्रेटेड रहने से मदद मिलती है, जिससे अनावश्यक स्नैकिंग से बचा जा सकता है।

    फैट होता है कम

    जिस तरह पपीते में कैलोरी कम होती है, ठीक उसी तरह यह फैट फ्री होता है। इसलिए, जब पपीते को डाइट में शामिल किया जाता है तो इससे आप अपने फैट इनटेक को कम कर पाते हैं और इस तरह वजन कम करना काफी आसान हो जाता है।

    पाचन में सहायक

    पपीते में पपेन और काइमोपैपेन होते हैं, जो पाचन में सहायता करते हैं और कब्ज से लड़ते हैं। इतना ही नहीं, यह पेट के अल्सर की रोकथाम और उपचार करने में भी मदद कर सकता है। हेल्दी गट और डाइजेस्टिव सिस्टम वजन कम करने में सहायक माना जाता है।

    – मिताली जैन

    डिस्क्लेमर: इस लेख के सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन सुझावों और जानकारी को किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर न लें। किसी भी बीमारी के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

  • सालभर में घटाया 63 किलो वजन, हो गई मौत, जानिए बहुत तेजी से वजन कम करना कितना खतरनाक

    सालभर में घटाया 63 किलो वजन, हो गई मौत, जानिए बहुत तेजी से वजन कम करना कितना खतरनाक

    सालभर में घटाया 63 किलो वजन, हो गई मौत, जानिए बहुत तेजी से वजन कम करना कितना खतरनाक
    नई दिल्ली
    तेजी से वजन घटाने के दुष्प्रभाव

    वजन अधिक होना शरीर के लिए कई प्रकार से हानिकारक हो सकता है, इससे हृदय रोग, डायबिटीज जैसी कई प्रकार की क्रोनिक बीमारियों का जोखिम काफी बढ़ जाता है। यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को अपने वजन को कंट्रोल में रखने की सलाह देते हैं। पर क्या आप जानते हैं कि बहुत तेजी से वजन घटाना भी आपके लिए काफी नुकसानदायक हो सकता है? ऐसे ही एक हालिया मामले में यूके में एक महिला की मौत हो गई। उसने एक साल के भीतर ही करीब 63 किलो तक वजन कम कर लिया, जो अंतत: उसकी मौत का कारण बन गई।

    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कायली कॉक्स नाम की 30 वर्षीय महिला ने महज सालभर के भीतर ही 63 किलो वजन कम कर लिया। 2021 तक, कायली कॉक्स का वजन 137 किलोग्राम था, इसके दुष्प्रभावों को देखते हुए उन्होंने तेजी से वजन घटाना शुरू कर दिया।

    बहुत तेजी से न घटाएं वजन
    तेजी से वजन घटाना पड़ गया भारी

    यूके मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कायली कॉक्स ने खुद को पतला करने के लिए डाइटिंग करना शुरू कर दिया। वजन बहुत कम होने का जल्द ही उनके शरीर पर असर दिखने लगा, उसकी तबीयत बिगड़ती गई। शरीर की स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों से उसे आपातकालीन चिकित्सा के लिए अस्पताल में भर्ती होने की सलाह दी। समय के साथ उसकी स्थिति बिगड़ती गई और एक दिन वह बाथरूम में मृत पाई गई।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, तेजी से वजन घटाना शरीर के लिए कई प्रकार से हानिकार प्रभावों वाला हो सकता है, आइए जानते हैं कि विशेषज्ञ इसे क्यों इतना खतरनाक मानते हैं?

    वेट लॉस करने के तरीके
    तेजी से वजन घटाने के नुकसान

    स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, वजन को कंट्रोल में रखना सभी लोगों के लिए जरूरी है, लेकिन ऐसे किसी भी उपाय से बचना चाहिए जो बहुत तेजी से वजन घटाने वाली हो सकती हैं। बहुत तेजी से वजन घटाने से मांसपेशियों की हानि, पोषक तत्वों की कमी से लेकर गॉलब्लेडर में पथरी तक की समस्या होने का खतरा अधिक होता है। हमेशा धीमी, स्थिर गति से वजन कम करना बेहतर होता है।

    अधिकांश अध्ययनों से पता चलता है कि जो लोग धीरे-धीरे अपना वजन कम करते हैं, उनके लिए लंबे समय तक वजन को कंट्रोल में रखना भी आसान हो सकता है।

    वजन को करें कंट्रोल
    मेटाबोलिज्म पर हो सकता है इसका असर

    तेजी से वजन घटाने के लिए किए गए प्रयासों के कारण आपके शरीर में कैलोरी और पोषक तत्व बहुत कम हो जाते हैं। इससे आपको कई स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा भी हो सकता है। बहुत तेजी से वजन कम करने से आपका मेटाबोलिज्म भी धीमा हो सकता है। मेटाबॉलिज्म में होने वाली इस तरह की समस्या के कारण पूरे शरीर पर असर हो सकता है। सभी लोगों को वजन को कंट्रोल में रखने के लिए प्रयास करने चाहिए और समय के साथ धीरे-धीरे वजन घटाने की कोशिश की जानी चाहिए।

     

     

  • चीनी की जगह खाएं ये ‘फायदेमंद चीज’, पाचन की समस्या से लेकर इम्युनिटी बढ़ाने तक में इसके लाभ

    चीनी की जगह खाएं ये ‘फायदेमंद चीज’, पाचन की समस्या से लेकर इम्युनिटी बढ़ाने तक में इसके लाभ

    चीनी की जगह खाएं ये ‘फायदेमंद चीज’, पाचन की समस्या से लेकर इम्युनिटी बढ़ाने तक में इसके लाभ
    नई दिल्ली
    चीनी के अधिक सेवन को स्वास्थ्य के लिए कई प्रकार से हानिकारक माना जाता है, इससे न सिर्फ ब्लड शुगर का स्तर बढ़ने का खतरा रहता है साथ ही वजन बढ़ने, मेटाबॉलिज्म की सेहत और हृदय रोगों का भी इससे खतरा हो सकता है। यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ, शरीर को स्वस्थ रखने के लिए सभी लोगों को कम से कम मात्रा में चीनी का सेवन करने की सलाह देते हैं। अगर आप चीनी को पूरी तरह से छोड़ देते हैं, तो यह सेहत को ठीक रखने के लिए सबसे बेहतर माना जाता है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अगर आपकी भी मीठा खाने की आदत रही है और लाख कोशिशों के बाद भी मीठा नहीं छोड़ पा रहे हैं, तो आपको चीनी के स्वस्थ विकल्पों की तरफ ध्यान देने की आवश्यकता है। गुड़ खाना इसमें आपके लिए सबसे लाभकारी हो सकता है। कई अध्ययनों में विशेषज्ञों ने पाया कि गुड़ न सिर्फ आपको मीठा स्वाद देता है साथ ही इससे कई प्रकार के स्वास्थ्य लाभ भी हो सकते हैं।

    आइए आहार में चीनी की जगह गुड़ को शामिल करने से होने वाले फायदों के बारे में जानते हैं।

    गुड़ खाने के फायदे
    अध्यनकर्ताओं ने पाया कि चीनी की जगह गुड़ खाना अच्छा विकल्प हो सकता है, इससे आप कई प्रकार के स्वास्थ्य लाभ भी पा सकते हैं। साल 2015 में किए गए एक अध्ययन के अनुसार, परिष्कृत सफेद चीनी की तुलना में गुड़ अधिक पौष्टिक विकल्प है। गुड़ के सेवन से शरीर के लिए प्रोटीन और पोटेशियम जैसी चीजों की भी पूर्ति की जा सकती है, जिसकी हमारे शरीर को आवश्यकता होती है। इसके अलावा डायबिटीज रोगियों के लिए भी यह अच्छा विकल्प माना जाता है।

     

    गुड़ खाने के लाभ
    डायबिटीज रोगी खा सकते हैं गुड़?

    डायबिटीज में गुड़ खाना चाहिए या नहीं, यह लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, गुड़ का सेवन चीनी से बेहतर है, डायबिटीज की स्थिति में इसका कम मात्रा में सेवन किया जा सकता है। चीनी की तरह इसके दुष्प्रभाव नहीं हैं, साथ ही यह पाचन और इम्युनिटी को ठीक रखने में भी आपके लिए मददगार है, जो डायबिटीज रोगियों के लिए हमेशा से बड़ी समस्या रही है।

    हालांकि गुड़ का ग्लाइसेमिक इंडेक्स अधिक (84) होता है ऐसे में इसका अधिक मात्रा में सेवन करना सेहत के लिए कई प्रकार से दुष्प्रभावों वाला हो सकता है।

    पाचन के लिए गुड़ के लाभ
    बेहतर पाचन में मिलती है मदद

    गुड़ खाना आपके पाचन स्वास्थ्य के लिए कई प्रकार से लाभकारी हो सकता है। आयुर्वेद विशेषज्ञों का कहना है कि यह पाचन में मदद करता है और मल त्याग को भी बढ़ावा दे सकता है। कब्ज को रोकने के लिए इसे एक अच्छे विकल्प के तौर पर भी जाना जाता है। भारतीय खाद्य परंपरा में पाचन को बढ़ावा देने के लिए सभी लोगों को भोजन के बाद थोड़ी मात्रा में गुड़ खाने की सलाह दी जाती है।

    गुड़ से होने वाले फायदे
    एनीमिया की रोकथाम में भी इसके लाभ

    एनीमिया गंभीर स्वास्थ्य समस्या है। भारत में महिलाओं में इसका जोखिम अधिक देखा जाता है। कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि गुड़ खाना आपको एनीमिया के खतरे से बचाने में मददगार हो सकता है। गुड़ में प्रति 100 ग्राम में लगभग 11 मिलीग्राम आयरन होता है, हालांकि हमेशा ध्यान रखें बहुत अधिक मात्रा में गुड़ का सेवन नहीं किया जाना चाहिए।

    आयरन के साथ-साथ गुड़ खाना शरीर के लिए और भी कई प्रकार के पोषक तत्वों की पूर्ति करने में सहायक है, ऐसे में इसे सेहत के लिए बेहतर विकल्प माना जा सकता है।