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  • दिल्ली में डीजल वाहनों पर पाबंदी क्यों, जब बाहरी राज्यों के पंजीकृत वाहनों को आने की इजाजत

    दिल्ली में डीजल वाहनों पर पाबंदी क्यों, जब बाहरी राज्यों के पंजीकृत वाहनों को आने की इजाजत

    दिल्ली में व्यवसायिक कार्य के लिए डीजल वाहनों पर पाबन्दी क्यों ?

    दिल्ली में एनजीटी द्वारा प्रदूषण नियंत्रण के लिए डीजल के वाहनों के पंजीकरण पर रोक लगाने के दिशा निर्देश दिए थे पर क्या यह आज के पेट्रोलियम यूरो VI पर इसको लागू करना न्यायिक है ?

    दिल्ली सरकार, परिवहन विभाग, एनजीटी और माननीय उच्चतम न्यायालय इस दिशा निर्देश को उचित मानते हैं तो दिल्ली की जनता को इसे बंद करने का पूर्ण कारण बताए

    जहां तक हमारी जानकारी हैं यूरो VI पेट्रोलियम पदार्थ (डीजल/पेट्रोल) शीशा रहित है और इनसे निकलने वाला प्रदुषण सीएनजी से निकलने वाले प्रदुषण से ज्यादा नहीं होता।

    अब दिल्ली की जनता दिल्ली सरकार, परिवहन विभाग, एनजीटी और माननीय उच्चतम न्यायालय से जानना चाहते हैं कि क्या दिल्ली में बिकने वाला पेट्रोल/डीजल का मानक क्या यूरो VI नही है या भारत सरकार द्वारा और पेट्रोलियम कंपनियों द्वारा दिया गया ब्यान की यूरो VI मानक के पेट्रोलियम पदार्थ प्रदुषण मुक्त है।

    भारत सरकार द्वारा मानक यूरो VI के वाहनों के पंजीकरण भी इसी लिए अनिवार्य किए थे क्योंकि इनसे प्रदुषण नियंत्रण होगा।

    आज दिल्ली में नए वाहनों का पंजीकरण सिर्फ यूरो VI मानक का ही हो सकता हैं और दिल्ली में पेट्रोलियम पदार्थ (पेट्रोल/डीजल) भी सिर्फ यूरो VI ही मिलता है।

    दिल्ली से अन्य राज्यो मे आने जाने के लिए सीएनजी / इलैक्ट्रिक / पेट्रोल वाहनों से ज्यादा डीजल वाहनों पर जनता विश्वास करते है और इसी कारण दिल्ली में डीजल वाहनों को उपलब्धता ना होने के कारण अन्य राज्यो के पंजीकृत डीजल वाहनों को मंगवाते हैं ।

    दिल्ली में अन्य राज्यो के वाहनों द्वारा दिल्ली में एंट्री करने के लिए परिवहन विभाग/सरकार अन्य राज्यो की तरह टैक्स नहीं लेती हैं जिस कारण दिल्ली में बाहरी राज्यों के डीजल वाहन सदैव घूमते और सवारी लेते हुए नज़र आते है।

    दिल्ली में डीजल वाहनों के पंजीकरण पर बंदिश लगाने के बावजूद दिल्ली में डीजल वाहनों की आवाजाही और कारोबार चल रहा हैं तो दिल्ली के व्यवसायियों को रोज़गार के लिए और दिल्ली की जनता को दिल्ली के नियमो अनुसार चलने वाले वाहनों की उपलब्धता प्रदान करने में रोक क्यों ?

    ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर्स एंड लेबर वेलफेयर एसोसिएशन दिल्ली परिवहन विभाग से अनुरोध करता है कि दिल्ली में अवैधानिक वाहनों को रोक लगाने और दिल्ली की जनता को सुरक्षित और दिल्ली के पंजीकृत वाहनों की जरुरत अनुसार उपलब्धता करवाने के लिए दिल्ली में डीजल वाहनों का पंजीकरण शुरु करे।

    जनहित में जारी
    संजय बाटला

  • बिल्डर और प्राधिकरण के बीच विवाद : सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद नोएडा में घर खरीदार परेशान

    बिल्डर और प्राधिकरण के बीच विवाद : सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद नोएडा में घर खरीदार परेशान

    नोएडा : उत्तर प्रदेश के नोएडा और ग्रेटर नोएडा शहर में अक्सर प्राधिकरण, बिल्डर और सोसाइटी वालों के बीच विवाद के मामले सामने आते रहते हैं. इस बार मामला बिल्डर और प्राधिकरण के बीच का है. दरअसल बिल्डर ने प्राधिकरण को बकाया पैसा नहीं चुकाया और प्राधिकरण ने कंपाउंड इंटरेस्ट के साथ पैसे की डिमांड कर दी है. जिसके बाद पूरे मामले को लेकर बिल्डर्स कोर्ट में चले गए थे. जिसके कारण एक लाख से भी ज्यादा फ्लैट बायर्स की रजिस्ट्री नोएडा व ग्रेटर नोएडा में रुकी हुई है.

    हालांकि बीते दिनों सुप्रीम कोर्ट ने बिल्डरों को बकाया भुगतान चुकाने का निर्देश दिया है. जिसके बाद हजारों फ्लैट बायर्स को घर मिलने के आसार जगे हैं, लेकिन रास्ता इतना भी आसान नहीं है. इस मामले में विस्तार से बता रही हैं, फ्लैट बायर्स के लिए काम करने वाली संस्था नेफोवा की महासचिव श्वेता भारती. नेफोवा की महासचिव श्वेता भारती से खास बातचीत के कुछ अंश.

    Q. क्या है पूरा मामला?

    A. कंपाउंड इंटरेस्ट के साथ जो बकाया मांगे गए थे. उसके बाद बिल्डर्स का एक समूह कोर्ट चला गया था. इस पूरे मामले के कारण पिछले दस सालों से रजिस्ट्री रुकी हुई है. हालांकि कोर्ट ने बिल्डर्स को सारे पैसे चुकाने के निर्देश दिए हैं. अब देखना है कि, आगे क्या कार्रवाई होती है.

    Q. क्या अब आसान होगी रजिस्ट्री

    A. इतना जल्दी कुछ भी कहना आसान नहीं है. क्योंकि जब तक नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की मंशा साफ नहीं होती तब तक कुछ भी आसान नहीं होगा. ऐसा इसलिए क्योंकि, इससे पहले भी कई फैसले हुए. लेकिन फ्लैट बायर्स को लाभ नहीं मिला. कोर्ट के फैसले से पहले बिल्डर्स के पास बहाना था कि मामला कोर्ट में है, फैसले के बाद बिल्डर्स बहाना पैसे नहीं होने के लगा सकते हैं.

    Q. कहां कमी रह जाती है?

    A. यही तो बड़ा प्रश्न है कि, मामला कोर्ट में ही क्यों जाता है. क्या यहां के प्राधिकरण अपना काम सही से नहीं कर रहे?. जब बिल्डर्स ने हमसे पैसे ले लिए तो उन्होंने प्राधिकरण को क्यों नहीं दिया?. हमने कई बार शिकायत दी पर ध्यान नहीं दिया गया. इस सारे ठगी का सूत्रधार बिल्डर्स और प्राधिकरण के अधिकारी समान रूप से हैं.

    Q.आपसे से लोग कॉन्टैक्ट कैसे करें?

    A. लोग हमसे nefowa के सोशल मीडिया साइट्स पर भी कॉन्टैक्ट कर सकते हैं. साथ ही हमारा वेबसाइट nefowa.org पर भी कनेक्ट कर सकते हैं.