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  • ज्यादातर लोग नई कार खरीदने के बाद कर देते हैं ये बड़ी गलतियां, कार को होता है बड़ा नुकसान

    ज्यादातर लोग नई कार खरीदने के बाद कर देते हैं ये बड़ी गलतियां, कार को होता है बड़ा नुकसान

    ज्यादातर लोग नई कार खरीदने के बाद कर देते हैं ये बड़ी गलतियां, कार को होता है बड़ा नुकसान
    नई दिल्ली
    भारत में कार खरीदना काफी बड़ी बात मानी जाती है। लेकिन कुछ लोग नई कार खरीदने के बाद कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं। जिसके बाद उनको बाद में पछताना पड़ता है। हम इस खबर में आपको ऐसी कुछ सामान्य गलतियों की जानकारी दे रहे हैं। जिनको ना करके आप अपनी नई कार की उम्र बढ़ा सकते हैं।

    कार की सर्विस
    नई कार खरीदने के बाद कई लोग कार को खराब सड़कों के साथ ही तेज स्पीड में चलाते हैं। लेकिन पहली सर्विस होने तक कार को आराम से चलाना चाहिए। साथ ही खराब सड़कों पर भी कार को चलाने से बचना चाहिए। साथ ही कार की सर्विस को हमेशा समय पर कंपनी के सर्विस सेंटर से करवानी चाहिए। इससे इंजन और अन्य महत्वपूर्ण हिस्सों को नुकसान से बचाया जा सकता है।

    ज्यादा एक्सलरेशन देना
    नई कार चलाने पर कुछ लोग बिना वजह ज्यादा एक्सलरेशन दे देते हैं। जिससे कार तेजी से पिक-अप लेती है। साथ ही इससे स्पीड भी बढ़ जाती है। जिससे दुर्घटना हो सकती है। इसके अलावा ज्यादा एक्सलरेशन के कारण इंजन को ज्यादा क्षमता से काम करना पड़ता है, जिससे ईंधन की खपत भी ज्यादा होती है।
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    कुछ ग्राहक हैं जो नई कार खरीदने के बाद उसको इस्तेमाल करने लग जाते हैं। वो इस बात पर बिलकुल भी ध्यान नहीं देते कि कार के साथ एक यूजर मैनुअल बुक भी आती है जिसमें कई ऐसी जरूरी बातें लिखी होती हैं जो आपकी मदद करेगी कार को लेकर, लेकिन लोग इसे नजरअंदाज कर देने हैं।
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    ओवरलोडिंग करना
    किसी भी वाहन में एक तय सीमा तक ही वजन को रखा जा सकता है। जरूरत से ज्यादा वजन आपकी कार को जल्दी खराब कर सकता है। ओवर लोडिंग से गाड़ी के टायर्स, सस्पेंशन और इंजन पर बुरा असर पड़ता है। इससे गाड़ी की परफॉरमेंस खराब होने चांस बढ़ जाते हैं।
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    दूसरी कार को टो करना
    किसी भी नई कार से किसी दूसरी कार को टोइंग करने से बचना चाहिए। अगर आप ऐसा करते हैं तो इसका सीधा असर आपकी कार के इंजन से कई अहम् पार्ट्स पर पड़ता है। लेकिन अगर कार की दो या तीन सर्विस हो गई हों तो किसी की मदद करने के लिए आप ऐसा करने के बारे में सोच सकते हैं।

  • बच्चों को पढ़ाना है संस्कृति का पाठ तो अपनाएं ये तरीके, त्योहारों पर कराएं ये काम

    बच्चों को पढ़ाना है संस्कृति का पाठ तो अपनाएं ये तरीके, त्योहारों पर कराएं ये काम

    बच्चों को पढ़ाना है संस्कृति का पाठ तो अपनाएं ये तरीके, त्योहारों पर कराएं ये काम
    नई दिल्ली
    रेणु फ्रांसिस

    Parenting Tips: बच्चों को अपनी सांस्कृतिक विरासत और उत्सवों के बारे में जानकारी देना आपकी जिम्मेदारी है इसलिए जरूरी है कि आप उन्हें अनुष्ठानों और समारोहों से परिचित कराएं। त्योहार लोगों को एक साथ लाते हैं और समाज में अपनेपन की भावना पैदा करते हैं। खासकर बच्चे तो बड़ों से ज्यादा त्योहारों का लुत्फ उठाते हैं लेकिन आजकल बच्चों की उत्सुकता और ऊर्जा सिर्फ टेक्नोलॉजी में जाया हो रही है।

    ऐसे में जरूरी है कि माता-पिता अपने बच्चों को उत्सवों से जोड़ें और उनके महत्व बताएं, ताकि अपनी परंपराओं के प्रति उनकी खुशी एवं उत्साह बरकरार रहे। चूंकि बच्चे हर चीज के बारे में जिज्ञासु होते हैं, लिहाजा त्योहारों और उनमें छिपी परंपराओं के बारे में जानना उन्हें रोमांचक भी लगेगा। इसके लिए कुछ आसान तरीके भी हैं।

    साफ-सफाई में भागीदारी

    जब भी कोई अनुष्ठान, पर्व या उत्सव आता है तो आप घर की साफ-सफाई और सजावट में जुट जाती हैं। इस काम में बच्चों को भी शामिल करें, जिससे उनके मन में भी उत्सवों, अनुष्ठानों के आने की खुशी बनी रहे। बच्चों से छोटे-मोटे काम करने को कहें। आप उनसे कूड़ा-कचरा उठाकर कूड़ेदान में डालने, फर्नीचर की झाड़-पोंछ करने जैसे काम करा सकती हैं। इससे उनमें काम करने की आदत भी पडे़गी।

    पकवान बनाने में सहयोग

    त्योहार आने पर सभी घरों में पकवान बनाए जाते हैं। आप इस काम में भी बच्चों की मदद ले सकती हैं और छोटे-छोटे काम कराकर उन्हें जिम्मेदारी का अहसास करा सकती हैं कि त्योहारों पर उन्हें भी काम करना है। इससे उनमें बचपन से ही साथ में काम करने की भावना पैदा होगी। बच्चे साथ में पकवान बनाएंगे तो उन्हें भी खुशी मिलेगी और वे त्योहार का दुगुना मजा उठाएंगे।

    रचनात्मकता जरूरी

    बच्चों को अपनी संस्कृति के बारे में जानकारी दें। त्योहार या समारोह के दौरान उन्हें पारंपरिक पोशाक पहना कर, सजावट और पकवान बनाने में मदद लेकर और अन्य रचनात्मक गतिविधियों में भाग लेकर अपनी परंपराओं की जानकारी दें, जिससे वे बचपन से ही अपनी संस्कृति को जान सकें और उत्सवों का मजा ले सकें।

    कहानियां और फिल्में

    हर त्योहार के पीछे कोई न कोई कहानी होती है, जो हमें सकारात्मक संदेश देती है। इसलिए समय-समय पर आप बच्चों को अपने त्योहारों और परंपराओं की जानकारी किताबों द्वारा या फिल्में दिखाकर भी दे सकती हैं। जब आप बच्चे को कुछ रीति-रिवाजों के बारे में समझाती हैं तो वे उसे उबाऊ और बोर लगते हैं। वह आपकी बातों पर ध्यान नहीं देता इसलिए त्योहारों के बारे में कहानी सुनाकर, पढ़कर या फिर उस विषय पर बनी कोई फिल्म दिखाकर आप जानकारी को उसके लिए रुचिकर बना सकती हैं, ताकि वह उत्साहित होकर अपनी संस्कृति के बारे में जानकारी हासिल करे।

    मेल-मिलाप की भावना

    अगर आप अपने बच्चों को त्योहारों से जोड़ेंगी तो उनमें मेल-मिलाप की भावना बढे़गी। आज बच्चे भी अकेलापन महसूस करते हैं। ऐसे में मिल-जुल कर त्योहार मनाने से उनका अकेलापन दूर होगा। अपने बच्चे को त्योहारों पर रिश्तेदारों, परिचितों और पड़ोसियों के घर जरूर लेकर जाएं, ताकि वह सबसे घुले-मिले और त्योहारों को मिल-जुल कर मनाना सीखे।

    हमेशा प्रोत्साहन

    आजकल स्कूलों में भी बहुत से त्योहार मनाए जाते हैं। ऐसे में आप बच्चों को उनमें बढ़-चढ़ कर भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करें, जिससे उनमें उत्साह पैदा हो। आप बच्चे को त्योहार से जुड़ी कविता या भाषण भी तैयार करा सकती हैं। जब बच्चा मंच पर त्योहार से संबंधित कविता या भाषण बोलेगा तो उसे अच्छा भी लगेगा और साथ में अपने उत्सवों के बारे में जानकारी भी हासिल हो जाएगी।

  • अगर बप्पा को करना है खुश तो पहनें इन रंगों के कपड़े, स्टाइल भी दिखेगा सबसे अलग

    अगर बप्पा को करना है खुश तो पहनें इन रंगों के कपड़े, स्टाइल भी दिखेगा सबसे अलग

    अगर बप्पा को करना है खुश तो पहनें इन रंगों के कपड़े, स्टाइल भी दिखेगा सबसे अलग
    नई दिल्ली
    हिंदू धर्म में जब भी कोई शुभ काम होता है तो उससे पहले गणपति की पूजा की जाती है। ऐसी मान्यता है कि बप्पा की पूजा से हर काम सफल होता है और सुख समृद्धि मिलती है। हर साल देशभर में गणपति का जन्मदिन भाद्रमाह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। गणेश उत्सव पूरे दस दिन चलता है। इस बार इसकी शुरूआत 19 सितंबर से होगी, जिसकी तैयारियों की धूम बाजार में दिखने लगी है।

    गणेश उत्सव में जगह-जगह बप्पा की स्थापना की जाती है। कई लोग तो अपने घरों में भी गणेश भगवान को लेकर आते हैं। इन 10 दिनों में गणपति बप्पा को 10 अलग-अलग चीजों का भोग लगाया जाता है। इसके साथ ही लोग पांरपरिक रूप से तैयार भी होते हैं।

    अगर आप बप्पा को खुश करना चाहते हैं तो खास रंगों के कपड़े पहन कर उन्हें प्रसन्न कर सकते हैं। इन रंगों को पहन कर आप स्टाइलिश भी दिखेंगे। ऐसे में आपको ये पता होना बेहद जरूरी है कि बप्पा की पूजा में किन रंगों के कपड़े आप पहन सकते हैं।

    हरा रंग

    ऐसी मान्यता है कि हरा रंग भगवान गणेश को काफी प्रिय है। ऐसे में अगर आप हरे रंग के कपड़े पहन कर बप्पा का स्वागत करेंगे तो इससे गणपति जरूर खुश होंगे और आपको मनचाहा वरदान देंगे। इसके साथ ही हरा एक ऐसा रंग है, जिसे पहनकर आप स्टाइलिश दिखेंगे।

    पुरुष हरे रंग के कुर्ते के साथ जींस पहन सकते हैं, वहीं महिलाएं हरे रंग की साड़ी या सूट पहनकर जलवा दिखा सकती हैं।

    लाल रंग

    हमारे धर्म में लाल रंग का काफी महत्व है। किसी भी शुभ काम में लाल रंग पहनना अच्छा माना जाता है। ऐसे में आप लाल रंग के कपड़े पहन कर बप्पा को खुश कर सकते हैं। महिलाएं अगर लाल रंग की साड़ी या सूट पहन रही हैं तो बालों में गजरा जरूर लगाएं।

    पीला रंग

    पीले रंग का पूजा-पाठ में काफी महत्व होता है। अगर आप गणपति की पूजा में बप्पा को खुश करना चाहती हैं और ये भी चाहती हैं कि आप सबसे अलग दिखें तो पीला रंग एक बेहतर विकल्प है।

    पीले रंग के कपड़ों में तैयार होने के लिए आप चाहें तो अपने लुक को इंडोवेस्टर्न लुक देने के लिए अनारकली कुर्ते को ड्रेस के रूप में भी ट्राई कर सकती हैं। इसके अलावा बाजार में पुरुषों के लिए पीले रंग का कुर्ता आसानी से मिल जाएगा।

  • सालभर में घटाया 63 किलो वजन, हो गई मौत, जानिए बहुत तेजी से वजन कम करना कितना खतरनाक

    सालभर में घटाया 63 किलो वजन, हो गई मौत, जानिए बहुत तेजी से वजन कम करना कितना खतरनाक

    सालभर में घटाया 63 किलो वजन, हो गई मौत, जानिए बहुत तेजी से वजन कम करना कितना खतरनाक
    नई दिल्ली
    तेजी से वजन घटाने के दुष्प्रभाव

    वजन अधिक होना शरीर के लिए कई प्रकार से हानिकारक हो सकता है, इससे हृदय रोग, डायबिटीज जैसी कई प्रकार की क्रोनिक बीमारियों का जोखिम काफी बढ़ जाता है। यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को अपने वजन को कंट्रोल में रखने की सलाह देते हैं। पर क्या आप जानते हैं कि बहुत तेजी से वजन घटाना भी आपके लिए काफी नुकसानदायक हो सकता है? ऐसे ही एक हालिया मामले में यूके में एक महिला की मौत हो गई। उसने एक साल के भीतर ही करीब 63 किलो तक वजन कम कर लिया, जो अंतत: उसकी मौत का कारण बन गई।

    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कायली कॉक्स नाम की 30 वर्षीय महिला ने महज सालभर के भीतर ही 63 किलो वजन कम कर लिया। 2021 तक, कायली कॉक्स का वजन 137 किलोग्राम था, इसके दुष्प्रभावों को देखते हुए उन्होंने तेजी से वजन घटाना शुरू कर दिया।

    बहुत तेजी से न घटाएं वजन
    तेजी से वजन घटाना पड़ गया भारी

    यूके मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कायली कॉक्स ने खुद को पतला करने के लिए डाइटिंग करना शुरू कर दिया। वजन बहुत कम होने का जल्द ही उनके शरीर पर असर दिखने लगा, उसकी तबीयत बिगड़ती गई। शरीर की स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों से उसे आपातकालीन चिकित्सा के लिए अस्पताल में भर्ती होने की सलाह दी। समय के साथ उसकी स्थिति बिगड़ती गई और एक दिन वह बाथरूम में मृत पाई गई।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, तेजी से वजन घटाना शरीर के लिए कई प्रकार से हानिकार प्रभावों वाला हो सकता है, आइए जानते हैं कि विशेषज्ञ इसे क्यों इतना खतरनाक मानते हैं?

    वेट लॉस करने के तरीके
    तेजी से वजन घटाने के नुकसान

    स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, वजन को कंट्रोल में रखना सभी लोगों के लिए जरूरी है, लेकिन ऐसे किसी भी उपाय से बचना चाहिए जो बहुत तेजी से वजन घटाने वाली हो सकती हैं। बहुत तेजी से वजन घटाने से मांसपेशियों की हानि, पोषक तत्वों की कमी से लेकर गॉलब्लेडर में पथरी तक की समस्या होने का खतरा अधिक होता है। हमेशा धीमी, स्थिर गति से वजन कम करना बेहतर होता है।

    अधिकांश अध्ययनों से पता चलता है कि जो लोग धीरे-धीरे अपना वजन कम करते हैं, उनके लिए लंबे समय तक वजन को कंट्रोल में रखना भी आसान हो सकता है।

    वजन को करें कंट्रोल
    मेटाबोलिज्म पर हो सकता है इसका असर

    तेजी से वजन घटाने के लिए किए गए प्रयासों के कारण आपके शरीर में कैलोरी और पोषक तत्व बहुत कम हो जाते हैं। इससे आपको कई स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा भी हो सकता है। बहुत तेजी से वजन कम करने से आपका मेटाबोलिज्म भी धीमा हो सकता है। मेटाबॉलिज्म में होने वाली इस तरह की समस्या के कारण पूरे शरीर पर असर हो सकता है। सभी लोगों को वजन को कंट्रोल में रखने के लिए प्रयास करने चाहिए और समय के साथ धीरे-धीरे वजन घटाने की कोशिश की जानी चाहिए।

     

     

  • चीनी की जगह खाएं ये ‘फायदेमंद चीज’, पाचन की समस्या से लेकर इम्युनिटी बढ़ाने तक में इसके लाभ

    चीनी की जगह खाएं ये ‘फायदेमंद चीज’, पाचन की समस्या से लेकर इम्युनिटी बढ़ाने तक में इसके लाभ

    चीनी की जगह खाएं ये ‘फायदेमंद चीज’, पाचन की समस्या से लेकर इम्युनिटी बढ़ाने तक में इसके लाभ
    नई दिल्ली
    चीनी के अधिक सेवन को स्वास्थ्य के लिए कई प्रकार से हानिकारक माना जाता है, इससे न सिर्फ ब्लड शुगर का स्तर बढ़ने का खतरा रहता है साथ ही वजन बढ़ने, मेटाबॉलिज्म की सेहत और हृदय रोगों का भी इससे खतरा हो सकता है। यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ, शरीर को स्वस्थ रखने के लिए सभी लोगों को कम से कम मात्रा में चीनी का सेवन करने की सलाह देते हैं। अगर आप चीनी को पूरी तरह से छोड़ देते हैं, तो यह सेहत को ठीक रखने के लिए सबसे बेहतर माना जाता है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अगर आपकी भी मीठा खाने की आदत रही है और लाख कोशिशों के बाद भी मीठा नहीं छोड़ पा रहे हैं, तो आपको चीनी के स्वस्थ विकल्पों की तरफ ध्यान देने की आवश्यकता है। गुड़ खाना इसमें आपके लिए सबसे लाभकारी हो सकता है। कई अध्ययनों में विशेषज्ञों ने पाया कि गुड़ न सिर्फ आपको मीठा स्वाद देता है साथ ही इससे कई प्रकार के स्वास्थ्य लाभ भी हो सकते हैं।

    आइए आहार में चीनी की जगह गुड़ को शामिल करने से होने वाले फायदों के बारे में जानते हैं।

    गुड़ खाने के फायदे
    अध्यनकर्ताओं ने पाया कि चीनी की जगह गुड़ खाना अच्छा विकल्प हो सकता है, इससे आप कई प्रकार के स्वास्थ्य लाभ भी पा सकते हैं। साल 2015 में किए गए एक अध्ययन के अनुसार, परिष्कृत सफेद चीनी की तुलना में गुड़ अधिक पौष्टिक विकल्प है। गुड़ के सेवन से शरीर के लिए प्रोटीन और पोटेशियम जैसी चीजों की भी पूर्ति की जा सकती है, जिसकी हमारे शरीर को आवश्यकता होती है। इसके अलावा डायबिटीज रोगियों के लिए भी यह अच्छा विकल्प माना जाता है।

     

    गुड़ खाने के लाभ
    डायबिटीज रोगी खा सकते हैं गुड़?

    डायबिटीज में गुड़ खाना चाहिए या नहीं, यह लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, गुड़ का सेवन चीनी से बेहतर है, डायबिटीज की स्थिति में इसका कम मात्रा में सेवन किया जा सकता है। चीनी की तरह इसके दुष्प्रभाव नहीं हैं, साथ ही यह पाचन और इम्युनिटी को ठीक रखने में भी आपके लिए मददगार है, जो डायबिटीज रोगियों के लिए हमेशा से बड़ी समस्या रही है।

    हालांकि गुड़ का ग्लाइसेमिक इंडेक्स अधिक (84) होता है ऐसे में इसका अधिक मात्रा में सेवन करना सेहत के लिए कई प्रकार से दुष्प्रभावों वाला हो सकता है।

    पाचन के लिए गुड़ के लाभ
    बेहतर पाचन में मिलती है मदद

    गुड़ खाना आपके पाचन स्वास्थ्य के लिए कई प्रकार से लाभकारी हो सकता है। आयुर्वेद विशेषज्ञों का कहना है कि यह पाचन में मदद करता है और मल त्याग को भी बढ़ावा दे सकता है। कब्ज को रोकने के लिए इसे एक अच्छे विकल्प के तौर पर भी जाना जाता है। भारतीय खाद्य परंपरा में पाचन को बढ़ावा देने के लिए सभी लोगों को भोजन के बाद थोड़ी मात्रा में गुड़ खाने की सलाह दी जाती है।

    गुड़ से होने वाले फायदे
    एनीमिया की रोकथाम में भी इसके लाभ

    एनीमिया गंभीर स्वास्थ्य समस्या है। भारत में महिलाओं में इसका जोखिम अधिक देखा जाता है। कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि गुड़ खाना आपको एनीमिया के खतरे से बचाने में मददगार हो सकता है। गुड़ में प्रति 100 ग्राम में लगभग 11 मिलीग्राम आयरन होता है, हालांकि हमेशा ध्यान रखें बहुत अधिक मात्रा में गुड़ का सेवन नहीं किया जाना चाहिए।

    आयरन के साथ-साथ गुड़ खाना शरीर के लिए और भी कई प्रकार के पोषक तत्वों की पूर्ति करने में सहायक है, ऐसे में इसे सेहत के लिए बेहतर विकल्प माना जा सकता है।

     

  • लोकसभा चुनाव से पहले जीत से इंडिया को ताकत, सहयोगी दलों को मिलेगी ऊर्जा; एनडीए के लिए बड़ा झटका

    लोकसभा चुनाव से पहले जीत से इंडिया को ताकत, सहयोगी दलों को मिलेगी ऊर्जा; एनडीए के लिए बड़ा झटका

    लोकसभा चुनाव से पहले जीत से इंडिया को ताकत, सहयोगी दलों को मिलेगी ऊर्जा; एनडीए के लिए बड़ा झटका

    लखनऊ
    घोसी उपचुनाव की जीत ने इंडिया गठबंधन को आत्मविश्वास से भर दिया है। वहीं, भाजपा के सहयोगी दलों का दावा कमजोर होगा। वहीं, जीत के बाद अखिलेश यादव के बयान से साफ है कि लोकसभा चुनाव में इंडिया फिर एनडीए को हराने के लिए पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरेगा।

    घोसी सीट के उपचुनाव के नतीजे ने विपक्षी गठबंधन इंडिया को बड़ी ताकत दी है। वहीं, भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को आत्ममंथन के लिए विवश किया है। भले ही नतीजा सिर्फ एक सीट का हो, लेकिन इसकी चर्चा लोकसभा चुनाव तक रहेगी।

    इंडिया के गठन के बाद यूपी में हुए पहले चुनाव में विपक्षी दलों ने पूरी ताकत लगाई। सपा प्रत्याशी सुधाकर सिंह को कांग्रेस, रालोद, आप और अपना दल कमेरावादी ने भी समर्थन दिया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सुधाकर सिंह की बड़े अंतर से जीत ने न सिर्फ सपा को ऊर्जा दी है, बल्कि विपक्षी गठबंधन को मजबूती दे सकता है।

    लोकसभा चुनाव के मद्देनजर अब इंडिया के घटक दल अपने गठबंधन को मजबूत करने के लिए सीटों के बंटवारे में अड़ियल रुख के बजाय समझौतावादी रास्ता अपनाएंगे। इतना ही नहीं जो छोटे विपक्षी दल अब तक इंडिया में शामिल होने से बच रहे थे, वह भी गठबंधन का हिस्सा बन सकते हैं।

    अखिलेश बोले- सिर्फ सपा का नहीं, इंडिया का प्रत्याशी जीता
    घोसी उपचुनाव से भविष्य की राजनीति का अंदाजा सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के एक्स (पूर्व नाम ट्विटर) पर दिए बयान से लगाया जा सकता है। अखिलेश ने कहा कि घोसी ने सिर्फ सपा का नहीं, बल्कि इंडिया गठबंधन के प्रत्याशी को जिताया है। अब यही आने वाले कल का भी परिणाम होगा। यूपी एक बार फिर देश में सत्ता के परिवर्तन का अगुआ बनेगा। उन्होंने कहा कि भारत ने इंडिया को जिताने की शुरुआत कर दी है और यह देश के भविष्य की जीत है। अखिलेश के बयान से साफ है कि लोकसभा चुनाव में इंडिया फिर एनडीए को हराने के लिए पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरेगा।

    सीटों के बंटवारे पर पड़ेगा असर
    जानकारों का मानना है कि उपचुनाव के नतीजों से लोकसभा चुनाव में सीटों के बंटवारे में अपना दल, सुभासपा और निषाद पार्टी की भागीदारी पर भी असर पड़ेगा। यदि उपचुनाव भाजपा जीतती तो राजभर और निषाद मजबूती से मोलभाव कर पाते।

    भाजपा के वोटबैंक में लगी सेंध, सपा का मजबूत हुआ
    घोसी के नतीजे बताते हैं कि सपा ने भाजपा के परंपरागत ठाकुर, भूमिहार, वैश्य के साथ राजभर, निषाद और कुर्मी मतदाताओं में अच्छी खासी सेंध लगाई है। वहीं सपा का परंपरागत यादव और मुस्लिम वोटबैंक तो उसके साथ मजबूती से खड़ा रहा। स्वार उपचुनाव में मिली हार के बाद माना जा रहा था कि मुस्लिम वोट सपा से खिसक रहा है, लेकिन घोसी में मिली जीत ने सपा के साथ मजबूती से होने की बात फिर साबित की है।

    भाजपा को सोचना पड़ेगा
    राजनीतिक विश्लेषक जेपी शुक्ला का मानना है कि घोसी उपचुनाव के नतीजे पूरे लोकसभा चुनाव की नतीजों पर असर डालेंगे यह कहना उचित नहीं हैं। लेकिन यूपी में इसका असर होगा। खासतौर पर पूर्वांचल की सीटों पर भाजपा को सोचना पड़ेगा। भाजपा के लिए यह संदेश भी है कि वह इतना ताकतवर न माने कि राजनीति में वैसा ही होगा, जैसा वह चाहेगी।

    भाजपा की हार के कारण
    – दलित वोट उम्मीद के हिसाब से न मिलना। बड़ी तादाद में क्षत्रिय सजातीय उम्मीदवार के साथ चले गए।
    – साढ़े छह साल में चौथे विधानसभा चुनाव से राजनीतिक अस्थिरता का माहौल।
    – एनडीए के सहयोगी दलों का सजातीय वोट बैंक में पकड़ साबित न कर पाना।
    – रामपुर और आजमगढ़ उपचुनाव जैसा माहौल का न बन पाना।

    सपा की जीत के कारण
    – सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव का खुद उप चुनाव के मैदान में उतरना और सुधाकर सिंह का स्थानीय होना।
    – मुस्लिम-यादव फैक्टर का मजबूत होना।
    – बसपा के मैदान में न होने से दलित मतदाताओं के बीच पैठ बढ़ाने में कामयाबी
    – स्थानीय मुद्दों का सपा के पक्ष में होना।
    काम नहीं आए जातीय समीकरण
    घोसी में करीब 55 हजार राजभर, 19 हजार निषाद और 14 हजार कुर्मी मतदाता हैं। भाजपा ने सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर और निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद की सभाएं, रैलियां और बैठकें कराईं। लेकिन चुनाव आंकड़े बता रहे हैं कि कुर्मी, राजभर और निषाद मतदाताओं ने स्थानीय उम्मीदवार को महत्व देते हुए मतदान किया है। यही नहीं करीब 8 हजार ब्राह्मण और तकरीबन 15 हजार क्षत्रिय भी सपा की ओर चले गए।

    अवसरवादी और बाहरी का मुद्दा दारा की हार की बड़ी वजह
    उपचुनाव में सपा ने भाजपा प्रत्याशी दारा सिंह चौहान के खिलाफ अवसरवादी और बाहरी होने का मुद्दा उठाया था। सपा ने मतदाताओं को बताया कि 16 महीने पहले चुनाव जीतने के लिए दारा सिंह भाजपा छोड़कर सपा में आए थे। चुनाव जीतने के बाद अब मंत्री बनने के लिए फिर भाजपा में चले गए हैं। इसे दारा की हार की बड़ी वजह मानी जा रही है। आजमगढ़ के मूल निवासी दारा सिंह 2017 में मऊ की मधुबन सीट से चुनाव लड़े थे। तब वे बसपा छोड़कर भाजपा में आए थे। जब 2022 का चुनाव आया तो वे भाजपा छोड़ सपा में चले गए और मऊ की घोसी सीट से चुनाव लड़े और जीते। उपचुनाव में दारा फिर घोसी से चुनाव लड़े, लेकिन इस बार वे सपा की जगह भाजपा से थे।

  • जानें दोनों एंट्री-लेवल स्पोर्ट्स बाइक के इंजन और फीचर्स में कितना है अंतर

    जानें दोनों एंट्री-लेवल स्पोर्ट्स बाइक के इंजन और फीचर्स में कितना है अंतर

    जानें दोनों एंट्री-लेवल स्पोर्ट्स बाइक के इंजन और फीचर्स में कितना है अंतर
    नई दिल्ली
    Hero MotoCorp (हीरो मोटोकॉर्प) ने पिछले हफ्ते नई Karizma XMR (करिज्मा एक्सएमआर) की लॉन्चिंग के साथ ही करिज्मा नाम को फिर से जिंदा कर दिया। पूरी तरह से नई मोटरसाइकिल होने के बावजूद, एक्सएमआर काफी हद तक ओरिजिनल करिज्मा की कुछ बातों को बरकरार रखने में कामयाब रही है। यह एंट्री-लेवल स्पोर्ट्स बाइक सेगमेंट में एक शानदार पेशकश होने का वादा करती है। यहां हम आपको बता रहे हैं एंट्री-लेवल स्पोर्ट्स बाइक स्पेस में अपने प्राथमिक प्रतिद्वंद्वियों में से एक Yamaha R15 (यामाहा R15) की तुलना में इसका प्रदर्शन कैसा है।

    साइज
    Karizma XMR एक बड़ी मोटरसाइकिल की तरह दिखती और महसूस कराती है और इसलिए, यह R15 की तुलना में लंबी और चौड़ी है। Karizma XMR का वजन Yamaha R15 से 22.5 किलो ज्यादा है। Karizma में एक लंबा व्हीलबेस मिलता है, जिसका मतलब है कि यह R15 की तुलना में थोड़ा ज्यादा स्थिर होनी चाहिए। हालांकि, R15, XMR के 160mm की तुलना में 170mm का बेहतर ग्राउंड क्लीयरेंस देती है। दूसरी तरफ, करिज्मा की सीट R15 की 815 मिमी की तुलना में 810 मिमी पर थोड़ी ज्यादा सुलभ है।

     

    इंजन पावर और गियरबॉक्स
    Karizma XMR में 210cc का लिक्विड-कूल्ड इंजन है जो 25 bhp का पावर और 20.4 Nm का पीक टॉर्क जेनरेट करता है। इसकी तुलना में, R15 डिस्प्लेसमेंट में काफी कम है, और इसकी वजह से 18.2 bhp का कम पीक आउटपुट और 14.2 Nm टॉर्क मिलता है। दोनों मोटरसाइकिलों को स्लिप और असिस्ट क्लच द्वारा समर्थित 6-स्पीड गियरबॉक्स के साथ जोड़ा गया है, हालांकि, R15 को क्विकशिफ्टर का फायदा मिलता है।

    फीचर्स
    हीरो एक कॉम्प्रीहेंसिव इक्यूप्मेंट प्रदान करता है जिसमें 5-इंच एलसीडी इंस्ट्रूमेंटेशन, ब्लूटूथ के जरिए स्मार्टफोन कनेक्टिविटी, कॉल और मैसेज अलर्ट, ऑल-एलईडी रोशनी और टर्न-बाय-टर्न नेविगेशन जैसे फीचर्स शामिल हैं। R15 में हालांकि नेविगेशन का फीचर नहीं दिया गया है, लेकिन इसमें ट्रैक्शन कंट्रोल सिस्टम और साइड-स्टैंड इंजन इनहिबिटर, राइड मोड और एक क्विक शिफ्टर है, जो करिज्मा में नहीं मिलता है।

    कॉल और मैसेजिंग अलर्ट के अलावा, यामाहा का वाई-कनेक्ट एप लास्ट पार्क किए गए स्थान, मेंटेनेंस अलर्ट, खराबी अलर्ट आदि जैसे ज्यादा फीचर्स के साथ आती है। हालांकि, करिज्मा ने आर15 के मुकाबले यूएसबी चार्जिंग पोर्ट और एक एडजस्टेबल फ्रंट विंडस्क्रीन के साथ अपनी बढ़त बनाए रखी है।

     

    ब्रेकिंग और सस्पेंशन
    दोनों मोटरसाइकिलें बिल्कुल अलग आर्किटेक्चर पर आधारित हैं। जहां R15 डेल्टा बॉक्स फ्रेम पर आधारित है, वहीं Karizma XMR स्टील ट्रेलिस फ्रेम पर आधारित है। R15 में सस्पेंशन ज्यादा प्रीमियम कंपोनेंट्स के साथ आता है जिसमें अपसाइड-डाउन गोल्ड एनोडाइज्ड फ्रंट फोर्क्स और एक लिंक्ड-टाइप मोनो-शॉक शामिल है।

    इसकी तुलना में, करिज्मा में एक सिंपल सेटअप मिलता है जिसमें टेलीस्कोपिक फ्रंट फोर्क्स और 6-स्टेप प्रीलोड एडजस्टेबल मोनो-शॉक शामिल है। ब्रेकिंग की बात करें तो, Karizma में थोड़ा बड़ा डिस्क ब्रेक दिया गया है। लेकिन यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि R15 अपने प्रतिद्वंद्वी की तुलना में काफी हल्की है।

  • अगले हफ्ते लॉन्च हो रही हैं ये कारें और बाइक, जानें पूरी डिटेल्स

    अगले हफ्ते लॉन्च हो रही हैं ये कारें और बाइक, जानें पूरी डिटेल्स

    अगले हफ्ते लॉन्च हो रही हैं ये कारें और बाइक, जानें पूरी डिटेल्स
    नई दिल्ली
    त्योहारी सीजन नजदीक आने के साथ, कार और दोपहिया वाहन निर्माता इस महीने भारत में अपने नए मॉडल लॉन्च करने की तैयारी कर रहे हैं। अगला हफ्ता वाहन निर्माताओं के लिए खास तौर पर व्यस्त रहने वाला है क्योंकि चार लॉन्चिंग की पुष्टि हो चुकी है, जिसमें दो इलेक्ट्रिक वाहन, एक एसयूवी और एक मोटरसाइकिल शामिल हैं। यहां हम आपको 11 सितंबर से 17 सितंबर के बीच लॉन्च होने वाली कारों और बाइक्स के बारे में बता रहे हैं।

    जापानी दोपहिया वाहन निर्माता कावासाकी इस हफ्ते की शुरुआत अपनी नई Kawasaki Ninja ZX-4R (कावासाकी निंजा ZX-4R) मोटरसाइकिल के लॉन्च के साथ करेगी। ZX-4R भारत में ब्रांड की सबसे किफायती चार-सिलेंडर मोटरसाइकिल होगी। यह 399 सीसी, चार-सिलेंडर इंजन से लैस होगा, जो 6-स्पीड ट्रांसमिशन यूनिट से जुड़ा होगा। यह इंजन 78 bhp का पावर और 37.6 Nm का पीक टॉर्क जेनरेट करता है। बाइक चार राइडिंग मोड्स – स्पोर्ट, रोड, रेन और राइडर (कस्टमाइजेबल) के साथ आएगी। मोड को 4.3-इंच टीएफटी स्क्रीन के जरिए कंट्रोल किया जा सकता है, जिसमें टर्न-बाय-टर्न नेविगेशन और नोटिफिकेशन अपडेट के साथ ब्लूटूथ कनेक्टिविटी मिलती है।

     

    पिछले हफ्ते आधिकारिक तौर पर नई Tata Nexon Facelift (टाटा नेक्सन फेसलिफ्ट) एसयूवी से पर्दा हटाने के बाद, टाटा मोटर्स अब अपनी सबसे ज्यादा बिकने वाली एसयूवी को एक नए अवतार में लॉन्च करने की तैयारी कर रही है। 2023 नेक्सन फेसलिफ्ट एसयूवी की बुकिंग 11,000 की टोकन राशि पर शुरू हो चुकी है। एसयूवी एक नई एक्सटीरियर डिजाइन लैंग्वेज, कई नए फीचर्स और ट्रांसमिशन ऑप्शंस के नए सेट के साथ बड़े पैमाने पर अपडेटेड केबिन के साथ काफी अपडेट की गई है। यह एसयूवी अपने सेगमेंट में मारुति सुजुकी ब्रेजा, ह्यूंदै वेन्यू, किआ सोनेट जैसी अन्य कारों को टक्कर देती है।

    भारत का सबसे ज्यादा बिकने वाला इलेक्ट्रिक वाहन Nexon EV की लॉन्चिंग 14 सितंबर को होगी। कार निर्माता ने विश्व ईवी दिवस पर 2023 नेक्सन ईवी फेसलिफ्ट के लिए 21,000 रुपये की राशि पर बुकिंग शुरू की। अपडेट के मामले में, Tata Nexon EV Facelift (टाटा नेक्सन ईवी फेसलिफ्ट) को नेक्सन फेसलिफ्ट एसयूवी के समान डिजाइन और इंटीरियर अपडेट मिलने की उम्मीद है। टाटा नेक्सन फेसलिफ्ट एसयूवी की तरह इसमें भी स्प्लिट हेडलैंप सेटअप और बाहरी हिस्से में ज्यादा बदलाव देखने को मिल सकते हैं। इंटीरियर को एक नए और बड़े 10.25-इंच टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम के साथ अपडेट किया जाएगा जिसे हाल ही में हैरियर और सफारी में पेश किया गया था। हालांकि, इलेक्ट्रिक एसयूवी ज्यादा रेंज और वाहन से वाहन या वाहन से लोड चार्जिंग सुविधा जैसे प्रमुख फीचर्स भी प्रदान करती है।

     

    जर्मन ऑटो दिग्गज इसके अगले ही दिन भारत में एक नई फुल-इलेक्ट्रिक एसयूवी लेकर आएगी। Mercedes EQE की लॉन्चिंग 15 सितंबर के लिए तय की गई है। EQB SUV और EQS इलेक्ट्रिक सेडान के बाद EQE इलेक्ट्रिक SUV मर्सिडीज की तीसरी इलेक्ट्रिक कार होगी। वैश्विक बाजारों में, EQE को 292 hp का पावर और 565 Nm टॉर्क के साथ सिंगल-मोटर सेटअप के साथ पेश किया जाता है। EQE 350 4Matic भी है जिसमें समान पावर आउटपुट है लेकिन 765 Nm का बेहतर टॉर्क आउटपुट मिलता है। इसमें डुअल-मोटर सेटअप है। EQE 500 4Matic में डुअल-मोटर सेटअप भी है और यह 408hp और 858Nm का टॉर्क देता है। इसमें 90.6 kWh बैटरी पैक है जो इसे सिंगल चार्ज में लगभग 500 किलोमीटर की रेंज देता है।

  • महिलाओं की सेहत के लिए वरदान है चिया सीड्स, डाइट में शामिल करने से मिलेंगे इतने सारे फायदे

    महिलाओं की सेहत के लिए वरदान है चिया सीड्स, डाइट में शामिल करने से मिलेंगे इतने सारे फायदे

    महिलाओं की सेहत के लिए वरदान है चिया सीड्स, डाइट में शामिल करने से मिलेंगे इतने सारे फायदे

    वर्तमान समय में चिया बीज स्वास्थ्यवर्धक आहार का अहम हिस्सा बन गए हैं। चिया सीड्स महिलाओं के लिए काफी ज्यादा फायदेमंद हो सकते हैं। स्वास्थ्य को सुधारने के साथ-साथ चिया सीड्स महिलाओं की सेहत को भी कई विशेष फायदे प्रदान करते हैं।
    वर्तमान समय में चिया बीज स्वास्थ्यवर्धक आहार का अहम हिस्सा बन गए हैं। चिया सीड्स महिलाओं के लिए काफी ज्यादा फायदेमंद हो सकते हैं। स्वास्थ्य को सुधारने के साथ-साथ चिया सीड्स महिलाओं की सेहत को भी कई विशेष फायदे प्रदान करते हैं। आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको महिलाओं के लिए चिया सीड्स के फायदों के बारे में बताने जा रहे हैं। आइए जानते हैं चिया सीड्स के सेवन से महिलाओं को क्या फायदे हो सकते हैं।

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    हार्ट हेल्थ के लिए फायदेमंद

    बता दें कि चिया सीड्स में ओमेगा-3 फैटी एसिड्स भरपूर मात्रा में पाया जाता है। यह दिल को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करता है। फैटी एसिड्स रक्तचाप को कंट्रोल करने में मददगार होता है। साथ ही दिल संबंधी बीमारियों के जोखिम को कम करता है।
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    हॉर्मोनल बैलेंस को सुधार

    चिया सीड्स में भरपूर मात्रा में आयरन, मैग्नीशियम, जिंक, विटामिन बी और आयोडीन जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। यह हॉर्मोन्स को सही मात्रा में सफलतापूर्वक कंट्रोल करने में मददगार होते हैं। वहीं महिलाओं के पीरियड्स की नियमितता को बनाए रखने में सहायक होता है। इसके अलावा चिया सीड्स के सेवन से पीरियड के दर्द से भी राहत पाई जा सकती है।

    बोन हेल्थ

    चिया सीड्स में कैल्शियम, मैग्नीशियम और फॉस्फोरस जैसे मिनरल्स पाए जाते हैं। यह हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए काफी अच्छा माना जाता है। ऐसे में जो महिलाएं अपनी बोन हेल्थ का ख्याल रखना चाहती हैं। इन्हें अपनी डाइट में चिया सीड्स को जरूर शामिल करना चाहिए।

    वेट लॉस में सहायक

    अगर आप बार-बार कुछ न कुछ खाते रहते हैं और इस आदत को कंट्रोल करना चाहती हैं, तो इसमें चिया सीड्स आपकी मदद कर सकता है। बता दें कि चिया सीड्स के सेवन से आपका पेट लंबे समय तक भरा रहेगा। ऐसे में आप बार-बार नहीं खाएंगे। ऊबले हुए पानी में फूलने से चिया सीड्स वजन में वृद्धि कर आपकी भूख को दबा सकती है। जिससे आप कम मात्रा में भोजन करेंगी। इससे आपका वेट लॉस भी होगा।

    स्किन केयर

    चिया सीड्स में विटामिन ई और ओमेगा-3 फैटी एसिड्स पाया जाता है। जो आपकी स्किन में ग्लो लाता है। साथ ही उसकी नमी को बनाए रखने में सहायक होता है। चिया सीड्स में प्रोटीन की भी भरपूर मात्रा पायी जाती है। जो आपकी स्किन को रिपेयर कर अंदर से ग्लो लाने में मदद करती है।

  • चाहिए नेचुरल लुक तो फाउंडेशन लगाते वक्त रखें इन बातों का ध्यान, जानें इसके इस्तेमाल का सही तरीका

    चाहिए नेचुरल लुक तो फाउंडेशन लगाते वक्त रखें इन बातों का ध्यान, जानें इसके इस्तेमाल का सही तरीका

    चाहिए नेचुरल लुक तो फाउंडेशन लगाते वक्त रखें इन बातों का ध्यान, जानें इसके इस्तेमाल का सही तरीका
    नई दिल्ली बदलते समय के साथ-साथ मेकअप महिलाओं की जिंदगी का अहम हिस्सा बन गया है। ये सिर्फ खूबसूरत दिखने का सामान नहीं, बल्कि ये एक आर्ट है। देखने वाले तो खूबसूरत मेकअप देखकर बस तारीफ करके चले जाते हैं पर, असल में इसे करने में काफी मेहनत लगती है।

    खासकर जब कोई महिला मेकअप करने बैठती है तो उसके लिए सही तरह का फाउंडेशन का इस्तेमाल करना और सही से इस्तेमाल करना बेहद जरूरी होता है। दरअसल, अगर आपका फाउंडेशन सही नहीं लगा है तो आपका बाकी का पूरा मेकअप खराब हो सकता है। खासकर दिक्कत उन महिलाओं के सामने आती है जो हमेशा नेचुरल मेकअप पर भरोसा करती हैं।

    ऐसे में आज के लेख में हम आपको फाउंडेशन का सही इस्तेमाल का तरीका बताएंगे, जिसके बाद आप महज कुछ बातों का ध्यान रखकर एकदम नेचुरल लुक पा सकती हैं। इस लेख में हम आपको ये भी बताएंगे कि फाउंडेशन के इस्तेमाल से पहले और बाद में आपको किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

    सबसे पहले जरूरी है सही फाउंडेशन का चुनाव

    अगर आप फाउंडेशन का इस्तेमाल करने का सोच रही हैं, तो सबसे पहले सही फाउंडेशन का होना बेहद जरूरी है। अगर ये आपकी स्किन टोन और टाइप के हिसाब का नहीं होगा तो हो सकता है कि इसके इस्तेमाल से आपकी त्वचा एक शेड डार्क या फिर एकदम सफेद दिखने लगे।

    सही से करें ब्लेंड

    अगर आप फाउंडेशन का इस्तेमाल सही तरीके से करेंगी तो आपका लुक एकदम नेचुरल आएगा। क्या आप जानती हैं कि फाउंडेशन को लगाने से पहले सही से ब्लेंड करना चाहिए। ये जितना अच्छे से ब्लेंड होगा, उतना ही इसका लुक निखर कर आएगा।

    कंसीलर इस्तेमाल करते वक्त रखें ये ध्यान

    अगर आपके चेहरे पर पिंपल्स या अन्य दाग-धब्बे हैं तो कंसीलर का इस्तेमाल स्वाभाविक है। ऐसे में इसका इस्तेमाल फाउंडेशन के बाद ही करें वरना कंसीलर की वजह से फाउंडेशन का शेड खराब हो सकता है।

    फाउंडेशन लगाने के लिए क्या इस्तेमाल करें ?

    अगर आप लिक्विड फाउंडेशन का इस्तेमाल कर रहीं हैं तो आपको इसे स्किन पर फैलाने के लिए ब्रश की मदद लेनी चाहिए, पर ध्यान रखें कि फाउंडेशन को ब्लेंड हमेशा ब्यूटी ब्लेंडर के साथ ही करना चाहिए।

    सेटिंग स्प्रे करेगा मदद

    फाउंडेशन लगाने के बाद अगर आप चाहती हैं कि आपका मेकअप देर तक टिका रहे तो सेटिंग स्प्रे का इस्तेमाल करें।

    रखें इन बातों का ध्यान

    फाउंडेशन का इस्तेमाल करने से पहले चेहरे को सही से मॉश्चराइज जरूर करें। इससे ये सही से स्किन पर सेट होगा। इसके साथ ही कभी भी बिना प्राइमर के फाउंडेशन का इस्तेमाल ना करें। ब्यूटी ब्लेंडर से फाउंडेशन सेट करते वक्त हाथों को ज्यादा टाइट ना रखें।