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  • यूपी के मंत्री को नहीं दिखी लखनऊ की बारिश: नगर विकास मंत्री बोले- ‘कहां है जलभराव, हमें तो कहीं नहीं दिखा’

    यूपी के मंत्री को नहीं दिखी लखनऊ की बारिश: नगर विकास मंत्री बोले- ‘कहां है जलभराव, हमें तो कहीं नहीं दिखा’

    यूपी के मंत्री को नहीं दिखी लखनऊ की बारिश: नगर विकास मंत्री बोले- ‘कहां है जलभराव, हमें तो कहीं नहीं दिखा’

    लखनऊ
    अरविंद शर्मा ने जवाब में कहा कि कहां है जलभराव, कहां पानी भरा है। लखनऊ में हम भी कल बारिश की स्थिति का जायजा लेने निकले थे लेकिन कहीं पानी भरा नहीं दिखा।

    ” लखनऊ में पानी कहां भरा है, कहां जल जमाव हुआ है हम भी शहर की स्थिति का जायजा लेने निकले थे लेकिन हमें तो कहीं पानी भरा नहीं दिखा”। मंगलवार को कैबिनेट बैठक के बाद लोक भवन में पत्रकारों से मुखातिब नगर विकास मंत्री अरविंद शर्मा ने यह बात कही।

    हुआ यूं कि पत्रकारों ने अरविंद शर्मा से सवाल किया कि आपने पहले कहा था कि यदि कहीं भी बरसात के पानी के कारण जलभराव की समस्या हुई तो नगर आयुक्त की जिम्मेदारी तय होगी। सोमवार को लखनऊ के कई बाजार, मोहल्ले और मार्ग जलमग्न हो गए थे। जलभराव ऐसा था कि लोगों का निकलना मुश्किल हो रहा था।

    अरविंद शर्मा ने जवाब में कहा कि कहां है जलभराव, कहां पानी भरा है। लखनऊ में हम भी कल बारिश की स्थिति का जायजा लेने निकले थे लेकिन कहीं पानी भरा नहीं दिखा। जब पत्रकारों ने जलभराव वाले इलाके गिनाना शुरू किए तो शर्मा ने कहा कि कल बारिश बहुत तेज थी, यदि आप अपने घर के बाथरूम में भी नल को तेज चलाएंगे तो घर में पानी भर जाएगा। ऐसे में बारिश तेज होगी तो पानी तो भरेगा ही। इससे बाद मीडिया कर्मी कोई सवाल करते उससे पहले शर्मा गाड़ी में बैठकर रवाना हो गए।

    पूरे शहर में रही जलभराव की स्थिति
    रविवार देर रात शुरू हुई बारिश सोमवार को सुबह तक होती रही। बारिश इतनी तेज थी कि शहर का कोई ऐसा इलाका नहीं था जहां जलभराव की स्थितियां ना बनी हों। शहर के निचले हिस्से तो पूरी तरह से पानी में डूबे रहे। बारिश और जलभराव को देखते हुए जिलाधिकारी ने कक्षा एक से लेकर 12 तक के स्कूलों की छुट्टी घोषित कर दी थी।

  • यूपी में पिछड़ी जातियों की गोलबंदी में जुटी कांग्रेस, जिला सम्मेलन की तैयारी शुरू

    यूपी में पिछड़ी जातियों की गोलबंदी में जुटी कांग्रेस, जिला सम्मेलन की तैयारी शुरू

    यूपी में पिछड़ी जातियों की गोलबंदी में जुटी कांग्रेस, जिला सम्मेलन की तैयारी शुरू

    लखनऊ
    यूपी में कांग्रेस ने अब मंडल स्तर के बाद जिला सम्मेलन की तैयारियां शुरू कर दी हैं। पार्टी की कोशिश पिछड़ी जातियों की गोलबंदी की है। इसके लिए पार्टी कांग्रेस शासित राज्यों में पिछड़े समाज के लिए किए गए कार्यों का जनता के बीच प्रचार करेगी।

    कांग्रेस ने नए अध्यक्ष की तैनाती के बाद पिछड़ों पर फोकस बढ़ाना शुरू कर दिया है। मंडल से लेकर जिला स्तर पर पिछड़ा वर्ग सम्मेलन शुरू करने की तैयारी शुरू हो गई है। इन सम्मेलनों में कांग्रेस को पिछड़ा वर्ग हितैषी साबित करने की रणनीति तैयार की गई है। इसके तहत जिन राज्यों में कांग्रेस की सरकार है, वहां से पिछड़ों के लिए किए गए कार्यों की सूची मंगाई गई है। अभियान की जिम्मेदारी पिछड़ा वर्ग विभाग को सौंपी गई है।

     

    कांग्रेस पिछड़ा वर्ग विभाग के प्रदेश अध्यक्ष मनोज यादव ने बताया कि 12 मंडलों में सम्मेलन हो चुका है। 28 सितंबर को मेरठ और एक अक्तूबर को बरेली में मंडलीय सम्मेलन होगा। पार्टी के नए प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के कार्यभार ग्रहण करने के बाद रणनीति बदली गई है। जहां मंडलीय सम्मेलन हो चुके हैं, वहां नए सिरे से जिला स्तरीय सम्मेलन शुरू होंगे।

     

    इनमें पाल, निषाद, यादव, नोनिया, मौर्या, नाई, कुम्हार, लोधी, कुर्मी, कहार, लोहार, बढ़ई और चौरसिया समाज के प्रतिनिधियों को बुलाने की तैयारी है। कांग्रेस के प्रदेश संगठन मंत्री अनिल यादव कहते हैं कि चार राज्यों में कांग्रेस की सरकार है। पार्टी हमेशा जिसकी जितनी भागीदारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी के सिद्धांत पर कार्य करती है। पिछड़ों को निरंतर तवज्जो दी जा रही है।

    2024 में सत्ता से बाहर होगी भाजपा : अजय राय
    कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने मंगलवार को प्रदेश मुख्यालय में पार्टी के पूर्व सांसदों और पूर्व विधायकों के साथ बातचीत की और लोकसभा चुनाव के मद्देनजर उनके सुझाव लिए। ज्यादातर लोगों ने कहा कि पार्टी को जनहित के मुद्दों पर सड़क पर उतर कर प्रदर्शन करना होगा। अजय ने कहा कि 2024 में भाजपा को सत्ता से बेदखल किया जाएगा। वर्ष 2027 में भाजपा को हराकर प्रदेश में अमनपसंद सरकार बनाई जाएगी। उधर, प्रदेश अध्यक्ष के समक्ष पूर्व मंत्री श्याम लाल रावत समेत कई नेताओं ने कांग्रेस की सदस्यता ली।

  • राजकीय व निजी आईटीआई में प्रवेश 23 तक, रजिस्टर्ड अभ्यर्थियों को प्रवेश में दी जाएगी वरीयता

    राजकीय व निजी आईटीआई में प्रवेश 23 तक, रजिस्टर्ड अभ्यर्थियों को प्रवेश में दी जाएगी वरीयता

    राजकीय व निजी आईटीआई में प्रवेश 23 तक, रजिस्टर्ड अभ्यर्थियों को प्रवेश में दी जाएगी वरीयता

    लखनऊ
    निजी आईटीआई के प्रवेश पंजीकरण के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 22 सितंबर व प्रवेश की अंतिम तिथि 23 सितंबर निर्धारित की गई है।

    प्रदेश में राजकीय व निजी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में प्रवेश के लिए अंतिम तिथि 23 सितंबर निर्धारित की गई है। इस तिथि तक सभी राजकीय व निजी आईटीआई में प्रवेशित अभ्यर्थियों का डाटा पोर्टल पर अपलोड व सत्यापित करना होगा। यह जानकारी विशेष सचिव व्यावसायिक शिक्षा कौशल विकास और उद्यमशीलता अभिषेक सिंह ने दी।

     

     

    उन्होंने बताया कि निजी आईटीआई के प्रवेश पंजीकरण के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 22 सितंबर व प्रवेश की अंतिम तिथि 23 सितंबर निर्धारित की गई है। ऐसे सभी गैर चयनित अभ्यर्थियों (प्रवेश प्रक्रिया में पूर्व में पंजीकृत व नए ऑनलाइन आवेदनकर्ता) की ग्रुपवार मेरिट सूची संबंधित राजकीय आईटीआई को भेज दी गई है।

    विशेष सचिव ने बताया कि राजकीय संस्थानों में पूर्व पंजीकृत, गैर चयनित अभ्यर्थियों को सीट आवंटन की कार्यवाही की जाएगी। इसके बाद खाली सीटों के सापेक्ष (नए ऑनलाइन आवेदनकर्ता) की मेरिट सूची से प्रवेश पूरा किया जाएगा। राजकीय आईटीआई के प्रधानाचार्य अभ्यर्थी के ऑनलाइन आवेदन में दी गयी सूचनानुसार, सभी प्रमाण-पत्रों की जांच के बाद प्रवेश करेंगे।

    उन्होंने कहा कि राजकीय व निजी आईटीआई में तीसरे चरण प्रवेश की प्रक्रिया के बाद खाली सीटों के सापेक्ष पूर्व पंजीकृत अभ्यर्थी से नए विकल्प मांगे गए थे। राजकीय व निजी संस्थानों के लिए नए आवेदनकर्ताओं से ऑनलाइन आवेदन 08 सितंबर तक मांगे गये थे। इसके अनुसार ही प्रवेश पूर्ण किए जाएंगे।

  • बसपा की रणनीति: अब आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णों पर फोकस करेगी पार्टी, दलितों का छिटकना बना चिंता का विषय

    बसपा की रणनीति: अब आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णों पर फोकस करेगी पार्टी, दलितों का छिटकना बना चिंता का विषय

    बसपा की रणनीति: अब आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णों पर फोकस करेगी पार्टी, दलितों का छिटकना बना चिंता का विषय

    लखनऊ
    2017 के विधानसभा चुनाव में बसपा को एक करोड़ 93 लाख वोट मिले थे। उस समय पार्टी को 19 सीटें मिली थीं। अब लोकसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर बसपा ने कैडर कैंप शुरू किए हैं तो साफ कहा है कि सर्व समाज पर फोकस करना है।

    बसपा सुप्रीमो मायावती।

    लोकसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी बसपा एक बार फिर से सवर्णों पर फोकस करेगी। खास तौर पर आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णों को जोड़ने की कवायद तेज करने की तैयारी की जा रही है। गांव चलो अभियान में भी इस पर जोर रहेगा। हालांकि बसपा ने अपने दलित वोट बैंक को रोकने के लिए विशेष तौर दलित बाहुल्य क्षेत्रों में कॉडर कैंप करने की रूपरेखा तैयार की है।

    वर्ष 2007 के बाद चुनावों में लगातार मात खाती जा रही बसपा के सामने इस समय विकट स्थिति है। लगातार सोशल इंजीनियरिंग का सहारा लेती आ रही बसपा का यह फार्मूला वर्ष 2022 के चुनाव में भी बुरी तरह से फ्लॉप हो गया। बावजूद इसके कि इस चुनाव में बसपा को एक करोड़ 18 लाख वोट मिले लेकिन सीट बस एक ही जीत पाई। रसड़ा विधानसभा सीट पर केवल बसपा विजयी हुई। प्रदेश में दलित वोटरों की संख्या लगभग तीन करोड़ है। इसमें काफी वोट बसपा को मिलते रहे हैं पर अब यह वोट बैंक भी खिसक रहा है। घोसी के उपचुनाव में यह वोटर बड़ी संख्या में शिफ्ट हुआ। हालांकि इस चुनाव में बसपा ने अपना प्रत्याशी चुनावी मैदान में नहीं उतारा था, पर साथ ही बसपाइयों को वोट न देने या नोटा दबाने की अपील की थी। बड़ी संख्या में दलित वोट बैंक शिफ्ट होने से बसपा के रणनीतिकारों की नींद उड़ गई है।

    गौरतलब है कि वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में बसपा को एक करोड़ 93 लाख वोट मिले थे। उस समय पार्टी को 19 सीटें मिली थीं। अब लोकसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर बसपा ने कैडर कैंप शुरू किए हैं तो साफ कहा है कि सर्व समाज पर फोकस करना है। इनमें खास तौर पर आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णों को भी जोड़ने को कहा गया है। इसके लिए इस वर्ग के पदाधिकारियों के लक्ष्य तय किए जा रहे हैं। गांव चलो अभियान में इस वर्ग के बाहुल्य गांवों में लगातार अभियान चलाने को कहा है।

    दलित वोट बैंक खिसकने का डर
    भले ही किसी भी अन्य वर्ग पर फोकस किया जा रहा हो पर बसपा की सबसे बड़ी चिंता यही है कि दलित वोटर स्थायी रूप से कहीं दूसरे दलों में शिफ्ट न हो जाएं। यही कारण है कि दलितों में लगातार कैंप करने को कहा है। शहर गांव दोनों में ही दलितों के बीच बसपाई लगातार कैंप कर रहे हैं। साथ ही इनके क्षेत्रों में काडर कैंपों का आयोजन लगातार करने को कहा है। हर विधानसभा क्षेत्र में इस बाबत अलग से कार्ययोजना बनाई जा रही है। इसमें युवाओं एवं महिलाओं को जोड़ते हुए नए सदस्य बनाने का लक्ष्य दिया जा रहा है। बूथ कमेटियों पर खास फोकस है।

  • नोएडा बनने के 47 साल बाद प्रदेश को मिला एक और औद्योगिक शहर, नाम होगा ‘बीडा’, जानिए क्या होगी लोकेशन

    नोएडा बनने के 47 साल बाद प्रदेश को मिला एक और औद्योगिक शहर, नाम होगा ‘बीडा’, जानिए क्या होगी लोकेशन

    नोएडा बनने के 47 साल बाद प्रदेश को मिला एक और औद्योगिक शहर, नाम होगा ‘बीडा’, जानिए क्या होगी लोकेशन

    लखनऊ
    नोएडा के गठन के 47 वर्ष बाद प्रदेश को एक और नए औद्योगिक शहर की सौगात प्रदेश सरकार ने दी है। बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीडा) के नाम से नया औद्योगिक शहर झांसी-ग्वालियर मार्ग पर बसाया जाएगा।

    नोएडा के गठन के 47 वर्ष बाद प्रदेश को एक और नए औद्योगिक शहर की सौगात प्रदेश सरकार ने दी है। बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीडा) के नाम से नया औद्योगिक शहर झांसी-ग्वालियर मार्ग बसाया जाएगा। मंगलवार को कैबिनेट की बैठक में इसे मंजूरी दे दी गई। खास बात ये है कि बीडा का आकार नोएडा से भी बड़ा होगा। नोएडा का गठन 13 हजार हेक्टेयर जमीन से किया गया था। बीडा का गठन करीब 14 हजार हेक्टेयर जमीन से किया जा रहा है। बीडा के लिए सरकार पहले चरण में 5000 करोड़ रुपये की राशि देगी।

     

    लोकभवन में सीएम योगी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में सरकार ने नोएडा की तर्ज पर बुंदेलखंड में नया औद्योगिक शहर बसाने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की। इस फैसले से बुंदेलखंड के जिलों को विकास की मुख्य धारा से जोड़ा जा सकेगा और बुनियादी विकास के साथ ही रोजगार सृजन होगा। उत्तर प्रदेश में इससे पहले वर्ष 1976 में नोएडा के गठन का निर्णय लिया गया था और अब 47 वर्षों के बाद एक नया औद्योगिक शहर बसाया जा रहा है। इस संबंध में वित्त एवं संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि बुंदेलखंड के विकास को लेकर सरकार की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 11 फीसदी प्रस्ताव केवल इसी क्षेत्र के लिए पास किए गए हैं।

    सुरेश खन्ना ने बताया कि मुख्यमंत्री औद्योगिक क्षेत्र विस्तारीकरण व नए औद्योगिक क्षेत्र प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत बसाये जाने वाले बीडा को नोएडा की तर्ज पर ही विकसित किया जाएगा। पहले चरण में झांसी के 33 राजस्व ग्रामों की 35 हजार एकड़ जमीन को अधिग्रहीत किया जाएगा। इस जमीन की कीमत 6312 करोड़ रुपये है। बीडा के गठन के लिए वित्तीय वर्ष 2022-23 में सरकार की ओर से 5 हजार करोड़ की व्यवस्था की गई थी। इस वर्ष 2023-24 में मुख्यमंत्री औद्योगिक क्षेत्र विस्तारीकरण व नए औद्योगिक क्षेत्र प्रोत्साहन योजना मद के तहत ऋण के रूप में 5000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। जो जमीन अधिग्रहीत की जाएगी, उसमें 8 हजार एकड़ जमीन ग्राम समाज की है।

    पहले चरण में 35 हजार एकड़ जमीन का अधिग्रहण

    कैबिनेट की बैठक के बाद वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने पारित हुए प्रस्तावों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बैठक में मुख्यमंत्री औद्योगिक क्षेत्र विस्तारीकरण व नए औद्योगिक क्षेत्र प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत झांसी में बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीडा) द्वारा नोएडा की तर्ज पर एक नए इंडस्ट्रियल टाउनशिप को विकसित किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई है। परियोजना के पहले चरण में झांसी के 33 राजस्व ग्रामों की 35 हजार एकड़ जमीन को अधिग्रहीत कर औद्योगिक शहर की स्थापना की जाएगी। इस जमीन की कीमत 6312 करोड़ रुपये है।

    अतिरिक्त 5 हजार करोड़ रुपये का किया गया प्रावधान

    सुरेश खन्ना ने बताया कि बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण के गठन के लिए वित्तीय वर्ष 2022-23 में सरकार की ओर से 5 हजार करोड़ की व्यवस्था की गई थी और इस वर्ष (2023-24) में मुख्यमंत्री औद्योगिक क्षेत्र विस्तारीकरण व नए औद्योगिक क्षेत्र प्रोत्साहन योजना मद के तहत ऋण के रूप में 5000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। जो जमीन अधिग्रहीत की जाएगी, उसमें 8 हजार एकड़ जमीन ग्राम समाज की है।

    प्रमुख शहरों से होगी बेहतरीन कनेक्टिविटी

    वित्त मंत्री ने बताया कि यह योगी सरकार का बहुत बड़ा कदम है। इस ऐतिहासिक निर्णय से बुंदेलखंड के बहुआयामी विकास को तेज गति मिलेगी। झांसी के आसपास का एरिया बड़े पैमाने पर विकसित हो जाएगा। इसके माध्यम से कुल 14 हजार हेक्टेयर जमीन पर औद्योगिक शहर विकसित करने की योजना है। यह औद्योगिक शहर झांसी-ग्वालियर मार्ग पर प्रस्तावित है जो राष्ट्रीय राजमार्ग के माध्यम से देश के प्रमुख शहरों से भी जुड़ा होगा। यही नहीं, यह राष्ट्रीय राजमार्ग 27 से जालौन जनपद से गुजरने वाले बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे से जुड़कर प्रदेश के अन्य शहरों से अच्छी तरह जुडे़गा।

    क्षेत्र के विकास के साथ ही मिलेंगे रोजगार के अवसर
    उन्होंने बताया कि बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण के अंतर्गत टाउनशिप समेत औद्योगिक स्थापना के लिए आवश्यक सभी आवश्यक सुविधाओं का यहां समावेश होगा। इसके गठन से क्षेत्र का सर्वांगीण विकास होगा तथा बड़े पैमाने पर रोजगार का सृजन होगा। जन सामान्य को क्षेत्रीय विकास के साथ ही रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे, जिसका प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। यह कदम प्रदेश के विकास में भी बहुत बड़ा योगदान देगा। सरकार ने जो वन ट्रिलियन इकॉनमी बनने का संकल्प लिया है, वो इसके माध्यम से पूरा हो सकेगा।

    100 सबसे पिछड़े नगरीय निकायों में लागू होगी आकांक्षी नगर योजना
    योगी कैबिनेट ने 20 हजार से एक लाख जनसंख्या वाले सबसे पिछड़े 100 नगरीय निकायों में आकांक्षी नगर योजना को लागू किए जाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी प्रदान की है। इसके अंतर्गत इन नगरीय निकायों में वर्तमान में चल रही सरकारी योजनाओं के साथ ही केंद्र व राज्य सरकार, सांसद व विधायक निधि समेत अन्य संस्थाओं से सहयोग प्राप्त कर कन्वर्जन के माध्यम से परियोजनाओं को क्रियान्वित किया जाएगा। योजना के तहत 762 नगरीय निकायों में से 100 आकांक्षी नगरीय निकायों का चयन नीति आयोग द्वारा 16 पैरामीटर्स के आधार पर किया जाएगा। इनमें यह योजना 31 मार्च 2026 तक लागू रहेगी, लेकिन इसकी मॉनीटरिंग डैशबोर्ड के माध्यम से 31 मार्च 2028 तक चलेगी। इस योजना के जरिए संसाधनों का आदर्श प्रयोग और आर्थिक विकास के अवसरों को बढ़ाकर पलायन रोकने में मदद मिलेगी।

    सहारनपुर, अयोध्या और फिरोजाबाद में भी चलेंगी एसी इलेक्ट्रिक बसें
    कैबिनेट में सहारनपुर, अयोध्या और फिरोजाबाद में एसी इलेक्ट्रिक बसों से संचालन से संबंधित प्रस्ताव को भी ग्रीन सिग्नल मिल गया। इन शहरों में इलेक्ट्रिक बसों से संचालन, प्रबंधन एवं अनुरक्षण के लिए कंपनी अधिनियम 2013 के अंतर्गत संबंधित मंडल के आयुक्त की अध्यक्षता में नए एसपीवी के गठन का निर्णय लिया गया है। एसपीवी को नगरों में बसें चलाने के लिए मार्ग निर्धारित करने का अधिकार होगा। साथ ही मार्गों पर किराए के निर्धारण के साथ ही यात्रियों को दी जाने वाली सुविधाओं के संबंध में विचार विमर्श करने का भी अधिकार होगा। उल्लेखनीय है कि अभी प्रदेश के 14 शहरों में कुल 740 एसी इलेक्ट्रिक बसों का संचालन 13 एसपीवी क माध्यम से कराया जा रहा है।

  • इन पांच इलेक्ट्रिक स्कूटर्स में मिलती है सामान रखने की सबसे ज्यादा जगह, जानें डिटेल

    इन पांच इलेक्ट्रिक स्कूटर्स में मिलती है सामान रखने की सबसे ज्यादा जगह, जानें डिटेल

    इन पांच इलेक्ट्रिक स्कूटर्स में मिलती है सामान रखने की सबसे ज्यादा जगह, जानें डिटेल
    , नई दिल्ली

    दो पहिया वाहनों में बाइक के मुकाबले स्कूटर चलाना ज्यादा आरामदायक होता है। साथ ही इनमें सामान रखने के लिए भी ज्यादा जगह मिलती है। हम इस खबर में आपको ऐसे पांच इलेक्ट्रिक स्कूटर्स की जानकारी दे रहे हैं। जिनमें सामान रखने के लिए सबसे ज्यादा जगह दी जाती है।

    रिवर इंडी
    बेंगलुरु की स्टार्टअप कंपनी रिवर की ओर से भारतीय बाजार में इंडी इलेक्ट्रिक स्कूटर को ऑफर किया जाता है। कुछ समय पहले लॉन्च हुए इस इलेक्ट्रिक स्कूटर में कंपनी की ओर से 43 लीटर का बूट स्पेस दिया जाता है। अन्य सभी इलेक्ट्रिक स्कूटर्स में इस स्कूटर में सबसे ज्यादा सामान रखने की जगह मिलती है।

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    ओला एसवन प्रो
    ओला की ओर से प्रीमियम इलेक्ट्रिक स्कूटर के तौर पर एसवन प्रो को ऑफर किया जाता है। इस स्कूटर में सामान रखने के लिए 36 लीटर की जगह दी जाती है। इलेक्ट्रिक स्कूटर सेगमेंट में यह दूसरा सबसे ज्यादा सामान रखने की क्षमता के साथ आने वाला स्कूटर है। हालांकि इसकी दूसरी जनरेशन में 34 लीटर का बूट स्पेस मिलता है।

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    ओला एसवन एयर
    ओला की ओर से कम बजट में एसवन एयर इलेक्ट्रिक स्कूटर को ऑफर किया जाता है। प्रो के मुकाबले एयर इलेक्ट्रिक स्कूटर में सामान रखने की जगह थोड़ी कम मिलती है। एसवन एयर में कंपनी की ओर से 34 लीटर का बूट स्पेस दिया जाता है।

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    टीवीएस आईक्यूब
    टीवीएस की ओर से आईक्यूब इलेक्ट्रिक स्कूटर को दो वैरिएंट में ऑफर किया जाता है। इसके बेस वैरिएंट आईक्यूब और मिड वैरिएंट आईक्यूब एस में कंपनी की ओर से सामान रखने के लिए 32 लीटर का स्टोरेज स्पेस दिया जाता है।

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    सिंपल वन
    बेंगलुरु की एक और स्टार्टअप सिंपल एनर्जी की ओर से वन इलेक्ट्रिक स्कूटर को 30 लीटर के बूट स्पेस के साथ ऑफर किया जाता है। इस इलेक्ट्रिक स्कूटर में कंपनी की ओर से कई और फीचर्स भी दिए जाते हैं। जिनमें दो बैटरी जैसे फीचर को दिया है। इसमें एक बैटरी फिक्स और दूसरी बैटरी को निकालने की सुविधा दी जाती है।

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  • गाड़ियों में बढ़ रहा है सनरूफ का चलन, जानें इस फीचर के क्या हैं नुकसान

    गाड़ियों में बढ़ रहा है सनरूफ का चलन, जानें इस फीचर के क्या हैं नुकसान

    गाड़ियों में बढ़ रहा है सनरूफ का चलन, जानें इस फीचर के क्या हैं नुकसान
    नई दिल्ली

    देश में गाड़ियों में लगातार नए फीचर्स को जोड़ा जा रहा है। जिसे ग्राहकों की ओर से भी काफी पसंद किया जाता है। ऐसे ही फीचर के साथ आने वाली गाड़ियों को ग्राहक काफी ज्यादा पसंद कर रहे हैं। हम इस खबर में आपको सनरूफ जैसे फीचर के साथ आने वाली गाड़ियों में क्या नुकसान होते हैं। इसकी जानकारी दे रहे हैं।

    सुरक्षा पर खतरा
    सनरूफ वाली गाड़ियों में सफर करने के दौरान आपकी सुरक्षा पर ज्यादा खतरा होता है। सफर के दौरान ही नहीं बल्कि सनरूफ वाली गाड़ियों को पार्क करने पर भी वह ज्यादा सुरक्षित नहीं होती। इस फीचर के साथ आने वाली कार में सफर के दौरान जहां लोग इससे बाहर निकलते हैं जो बिल्कुल सुरक्षित नहीं होता। वहीं खड़ी हुई कार में भी शीशा टूटने का खतरा रहता है।
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    लगती है ज्यादा गर्मी
    सनरूफ वाली गाड़ियों में अन्य गाड़ियों के मुकाबले में ज्यादा गर्मी लगती है। इसका सीधा कारण सनरूफ है। क्योंकि यह शीशे का होता है इसलिए सूरज की तेज रोशनी से कार जल्दी गर्म हो जाती है। जिसे सामान्य करने के लिए ऐसी को तेज चलाना पड़ता है। इसके अलावा ऐसी कारों में बाहर से शोर भी ज्यादा आता है।

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    तेल की ज्यादा खपत
    सनरूफ जैसे फीचर के साथ आने वाली गाड़ियों में तेल की खपत सामान्य कारों के मुकाबले ज्यादा होती है। क्योंकि ऐसी कारों में सीधी धूप पड़ती है, जिससे एसी को तेज चलाना पड़ता है। एसी को तेज चलाने के कारण ईंधन की खपत भी बढ़ जाती है।

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    रखरखाव भी जरूरी
    सनरूफ के साथ आने वाली कारों का रखरखाव सामान्य कारों के मुकाबले में ज्यादा होता है। ऐसी कारों में छत पर ज्यादा सफाई की जरुरत होती है। ऐसा ना करने पर कई जगह मिट्टी जम जाती है और सनरूफ को सही से चलाने में परेशानी भी होती है। कई बार मिट्टी जमने के कारण सनरूफ जाम हो जाता है और उसे ठीक करवाने में समय और खर्च दोनों होते हैं।

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    महंगी होती है कार
    जिन कारों में ज्यादा फीचर होते हैं। उनकी कीमत भी ज्यादा होती है। किसी एक कार के बेस वैरिएंट में कंपनियों की ओर से सनरूफ जैसे कई फीचर्स नहीं दिए जाते। लेकिन उसी कार के टॉप वैरिएंट्स में ऐसे फीचर्स को दिया जाता है। जिससे सनरूफ के साथ कार को खरीदना महंगा हो जाता है।

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  • 18 से 65 साल की उम्र के लोगों को कितने मिनट करना चाहिए व्यायाम और योगाभ्यास?

    18 से 65 साल की उम्र के लोगों को कितने मिनट करना चाहिए व्यायाम और योगाभ्यास?

    8 से 65 साल की उम्र के लोगों को कितने मिनट करना चाहिए व्यायाम और योगाभ्यास?
    , नई दिल्ली

    योगासनों का नियमित मन और शरीर दोनों को स्वस्थ बनाए रखने के लिए फायदेमंद है। कम उम्र से ही योग की आदत बच्चों में डाल देनी चाहिए। योग बहुत गुणकारी है। नियमित योग रक्त संचार को बढ़ाने के साथ ही मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है और शरीर को कई तरह की बीमारियों के जोखिम से बचाता है। इसके अलावा शारीरिक कार्यक्षमता और सहनशक्ति में भी सुधार करने में योग सहायक है। योग के बढ़ते चलन के कारण लोगों को योगाभ्यास से होने वाले फायदों के बारे में तो पता है लेकिन कई बार लोगों को लगता है कि अधिक योग करने से अधिक लाभ होगा। किसी भी चीज की जरूरत से ज्यादा कमी और अधिक होना नुकसानदायक हो सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक उम्र के मुताबिक रोजाना एक निश्चित अवधि की योगाभ्यास ही स्वस्थ रहने के लिए आवश्यक है। ऐसे में आपको पता होना चाहिए कि आयु और आपकी शारीरिक स्थिति के मुताबिक आपको कितनी देर योगासन करना है। अगली स्लाइड में जानिए कितनी देर करें योग।

    प्रतिदिन योगाभ्यास का कुल समय –
    प्रतिदिन कितनी देर करें योग?

    योग विशेषज्ञों के मुताबिक, रोजाना 30 मिनट का योगाभ्यास शरीर को स्वस्थ रखने के लिए आदर्श माना जाता है। आमतौर पर योग के अभ्यास के प्रकार और फोकस के आधार पर योग मुद्रा निर्भर करती है। कई अलग अलग तरह के योग हैं, जिनके प्रकार के आधार पर योगाभ्यास की अवधि निर्धारित होती है। लेकिन सांस और शारीरिक योगासनों के लिए लगभग 30 मिनट पर्याप्त होता है।

    18 साल से अधिक के लोगों के लिए योग का समय
    18 से 65 वर्ष के लोग कितनी देर करें व्यायाम

    बीते कुछ समय में ऐसे कई मामले सामने आए, जिसमें जिम में अधिक वर्कआउट करने से व्यक्ति की मौत हो गई। व्यायाम शरीर को स्वस्थ बनाने का एक जरिया है लेकिन सही अवधि तक व्यायाम करना ही लाभकारी होता है। उम्र के मुताबिक वर्कआउट या एक्सरसाइज का समय तय होता है।18 से 65 साल की उम्र के लोगों को हफ्तेभर में 150 मिनट व्यायाम करना चाहिए। इस आयु वर्ग के लोग फुर्ती वाले व्यायाम हर हफ्ते कम से कम 75 मिनट करें।

    बुजुर्ग कितने देर करें योग व व्यायाम –
    65 से अधिक उम्र के लोगों के लिए व्यायाम का समय

    अगर आप 65 साल से अधिक आयु के हैं तो आप योग या डांस को अपनी फिजिकल एक्टिविटी में शामिल करें। हफ्ते में तीन दिन ही आपको वर्कआउट करना चाहिए। विशेषज्ञ से सलाह के बाद ही अधिक थकान वाली एक्सरसाइज करें।

    बच्चे कितनी देर करें योग और व्यायाम –
    बच्चों के लिए व्यायाम की कुल अवधि

    5 से 17 साल तक के बच्चों और किशोरों को कम से कम 60 मिनट रोजाना व्यायाम करना चाहिए। किशोर मांसपेशियों और हड्डियों को मजबूत बनाने वाली एक्सरसाइज कर सकते हैं। वर्कआउट में दौड़, कूद आदि को भी शामिल कर सकते हैं।

  • एंटीऑक्सीडेंट का अच्छा स्रोत है ये फल, हार्ट-कैंसर रोगियों के लिए भी लाभकारी

    एंटीऑक्सीडेंट का अच्छा स्रोत है ये फल, हार्ट-कैंसर रोगियों के लिए भी लाभकारी

    एंटीऑक्सीडेंट का अच्छा स्रोत है ये फल, हार्ट-कैंसर रोगियों के लिए भी लाभकारी
    नई दिल्ली
    फलों के सेवन की बनाएं आदत

    आहार में मौसमी फलों-सब्जियों को शामिल करना सेहत के लिए कई प्रकार से लाभकारी माना जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सभी लोगों को इन्हें रोजाना सेवन का हिस्सा बनाना चाहिए। ताजे मौसमी फल शरीर के लिए आवश्यक पोषक तत्वों के साथ कई विटामिन्स और खनिजों की आसानी से पूर्ति कर सकते हैं। शोधकर्ताओं ने बताया, अनार का सेवन करना सभी के लिए लाभकारी हो सकता है, यह लो कैलोरी वाला फल होने के साथ फाइबर, विटामिन्स और मिनरल्स से भरपूर होता है, जो आपको कई गंभीर बीमारियों के खतरे से बचाने में भी मदद कर सकता है।

    आहार विशेषज्ञ कहते हैं, सभी लोगों को दैनिक रूप से अनार का सेवन जरूर करना चाहिए, ये एंटीऑक्सीडेंट का स्रोत है जो कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के जोखिम से बचाने में लाभकारी है। एनीमिया के जोखिम वालों के लिए भी ये फायदेमंद फल माना जाता है।

    आइए जानते हैं अनार किस प्रकार से हमारी सेहत के लिए लाभकारी है?

    अनार के स्वास्थ्य लाभ
    एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर है ये फल

    अनार, कई प्रकार के पोषक तत्वों वाला फल है, इसका एंटीऑक्सीडेंट गुण इसे सेहत के लिए बहुत लाभकारी बनाता है। एंटीऑक्सीडेंट, ऐसे यौगिक हैं जो आपके शरीर की कोशिकाओं को फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाने में मदद करते हैं। अनार जैसे फलों से एंटीऑक्सीडेंट प्राप्त करना समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देने और बीमारी को रोकने में आपके लिए फायदेमंद है, इससे कैंसर के खतरे को भी कम किया जा सकता है।

    इंफ्लामेशन का खतरा –
    दूर होती है इंफ्लामेशन की समस्या

    अनार में एंटी-इंफ्लामेटरी यौगिक पाए जाते हैं जो शरीर में सूजन को कम करने में लाभकारी हैं। क्रोनिक इंफ्लामेशन की समस्या को हृदय रोग, टाइप-2 डायबिटीज और कैंसर कई अन्य गंभीर बीमारियों का कारक माना जाता है। अनार खाने से इन समस्या को रोकने में लाभ मिल सकता है।

    कैंसर से बचाव के लिए करें प्रयास
    कैंसर रोधी गुण

    शोध में पाया गया है कि अनार में मौजूद यौगिकों में कैंसर रोधी गुणों वाले होते हैं। पशुओं पर किए गए अनुसंधान में यह भी पाया गया है कि अनार लिवर कैंसर के शुरुआती चरण में ट्यूमर के विकास को धीमा करने में भी मदद करता है। एक अन्य शोध के अनुसार, अनार का अर्क प्रोस्टेट कैंसर के लिए भी फायदेमंद हो सकता है। यानी इसका सेवन आपको कई जानलेवा बीमारियों के जोखिम से सुरक्षा दे सकता है।

    हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभ

    अनार जैसे पॉलीफेनोलिक यौगिकों से भरपूर फल हृदय स्वास्थ्य को लाभ पहुंचा सकते हैं। हृदय रोग से पीड़ित लोगों पर किए गए एक अध्ययन में, अनार का रस पीने से सीने में दर्द की आवृत्ति और गंभीरता कम हो गई। शोधकर्ताओं ने पाया कि यह शरीर में खून की मात्रा को भी बढ़ाने वाला फल है, ऐसे में इसका सेवन करना आपके लिए बहुत लाभकारी है।

     

  • वजन कम करने में इस तरह मददगार है पपीता

    वजन कम करने में इस तरह मददगार है पपीता

    वजन कम करने में इस तरह मददगार है पपीता

    पपीता एक ऐसा फल है, जिसका कैलोरी काउंट काफी कम होता है। इसलिए, जब आप इसका सेवन करते हैं तो आपको फुलर तो महसूस होता है, लेकिन आपका कैलोरी काउंट गड़बड़ाता नहीं है। मिड मील्स में पपीता खाने से आप अनहेल्दी स्नैकिंग करने से बच जाते हैं।
    पपीता एक ऐसा फल है, जो साल के बारह महीने आसानी से मिलता है। बेहद कम दाम में मिलने वाला यह सेहत के लिए बेहद ही गुणकारी है। पपीता सिर्फ पाचन तंत्र के लिए ही अच्छा नहीं माना जाता है, बल्कि यह वजन कम करने में भी मददगार है। अगर आप एक हेल्दी लाइफस्टाइल जीते हुए पपीते को अपनी डाइट का हिस्सा बनाते हैं तो इससे यकीनन आपको वजन कम करने में मदद मिलती है। यह एक नहीं, बल्कि कई तरीकों से वजन कम करने में सहायक है। तो चलिए जानते हैं इसके बारे में-

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    कैलोरी होती है कम

    पपीता एक ऐसा फल है, जिसका कैलोरी काउंट काफी कम होता है। इसलिए, जब आप इसका सेवन करते हैं तो आपको फुलर तो महसूस होता है, लेकिन आपका कैलोरी काउंट गड़बड़ाता नहीं है। मिड मील्स में पपीता खाने से आप अनहेल्दी स्नैकिंग करने से बच जाते हैं।
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    फाइबर होता है अधिक

    पपीता में डायटरी फाइबर अच्छी मात्रा में पाया जाता है। जिसके कारण पपीता आपको अधिक देर तक फुलर होने का अहसास करवाता है। फाइबर होने के कारण आप ओवरईटिंग से बच जाते हैं और इससे कैलोरी इनटेक को बैलेंस करने में मदद मिलती है। जिससे आपके लिए वजन कम करना अधिक आसान हो जाता है।

    बेहतर हाइड्रेशन

    पपीते का सेवन करने का एक लाभ यह होता है कि इसमें पानी की मात्रा अधिक होती है। जिसके कारण आपको खुद को हाइड्रेटेड रखने में मदद मिलती है। आपको शायद पता ना हो, लेकिन कभी-कभी आपका शरीर प्यास को भूख लेता है और इससे आप ओवरईटिंग करने लग जाते हैं। इसलिए, जब आप पपीता खाते हैं तो इससे आपको हाइड्रेटेड रहने से मदद मिलती है, जिससे अनावश्यक स्नैकिंग से बचा जा सकता है।

    फैट होता है कम

    जिस तरह पपीते में कैलोरी कम होती है, ठीक उसी तरह यह फैट फ्री होता है। इसलिए, जब पपीते को डाइट में शामिल किया जाता है तो इससे आप अपने फैट इनटेक को कम कर पाते हैं और इस तरह वजन कम करना काफी आसान हो जाता है।

    पाचन में सहायक

    पपीते में पपेन और काइमोपैपेन होते हैं, जो पाचन में सहायता करते हैं और कब्ज से लड़ते हैं। इतना ही नहीं, यह पेट के अल्सर की रोकथाम और उपचार करने में भी मदद कर सकता है। हेल्दी गट और डाइजेस्टिव सिस्टम वजन कम करने में सहायक माना जाता है।

    – मिताली जैन

    डिस्क्लेमर: इस लेख के सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन सुझावों और जानकारी को किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर न लें। किसी भी बीमारी के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।