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  • दिल्ली में परिवहन संबंधित कार्यों में प्रयोग होने वाला मेडिकल सर्टिफिकेट असली या फर्जी, कौन लेने को तैयार ज़िम्मेदारी

    दिल्ली में परिवहन संबंधित कार्यों में प्रयोग होने वाला मेडिकल सर्टिफिकेट असली या फर्जी, कौन लेने को तैयार ज़िम्मेदारी

    दिल्ली में परिवहन संबंधित कार्यों में प्रयोग होने वाला मेडिकल सर्टिफिकेट असली हैं या फर्जी, है कोई लेने को तैयार इसकी ज़िम्मेदारी

    दिल्ली राज्य भारत देश में इकलौता ऐसा राज्य था जहा अपना ड्राईविंग लाईसेंस बनवाने वालों को सबसे अधिक मेहनत करनी पड़ती थी और लर्निंग लाइसेंस भी पूर्ण जांच पड़ताल के बिना नही मिल पाता था।

    दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार और वर्तमान के परिवहन आयुक्त द्वारा जनहित का नाम लेकर लर्निंग लाइसेंस को ऑनलाइन प्रक्रिया में शूरू करने के आदेश पारित नही किए गए थे तब तक दिल्ली में कलर ब्लाइंड व्यक्ति अपना लाइसेंस बनवाने में सक्षम नहीं था यह एक बहुत बड़ा सच है।

    दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार और परिवहन आयुक्त को शायद कलर ब्लाइंड व्यक्तियो के लाइसेंस ना बनना रास नहीं आ रहा था इसी लिए जनहित का नाम लेकर इस आदेश को पारित कर सबका दिल जीत लिया।

    ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया में डॉक्टर द्वारा जारी सर्टिफिकेट की सत्यता लुप्त हो गई यह हम नहीं आप सभी भली भांति जानते है ।

    अभी कुछ दिनों पहले इंदौर मध्यप्रदेश में आरटीओ की शिकायत पर जांच में अनगिनत आरटीओ एजेंटों के पास नकली डॉक्टर की मोहर और खाली सर्टिफिकेट बरामद हुए कही ऐसा तो नही दिल्ली में यह कार्य पूरी तेजी में हो क्योंकि परिवहन विभाग में ना तो आरटीओ कार्य करवाने के लिए कोई मान्यता प्राप्त एजेंट नियुक्त किए हैं और ना ही डॉक्टर।

    सबसे बड़ी बात परिवहन विभाग द्वारा डॉक्टर प्रमाण पत्र यानी मेडिकल सर्टिफिकेट की जांच का कोई ओचित्य ही नहीं है और ना ही कोई डीटीओ इसकी जांच करते हैं।

    कही दिल्ली परिवहन विभाग के द्वारा की गई ऑनलाइन फेस फ्री प्रक्रिया में प्रयोग होने वाले मेडिकल सर्टिफिकेट भी इंदौर में प्रयोग होने वाले नकली डॉक्टर सर्टिफिकेट जैसे तो नहीं, क्या परिवहन विभाग के आला अधिकारियों और परिवहन मंत्री के पास है इसका जवाब ! अगर है तो कृप्या जनता की समक्ष उपस्थित करे ।
    प्रश्न सिर्फ इतना है कि जनहित का नाम लेकर ऐसे कितने आदेश दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार और परिवहन आयुक्त पारित करना चाहते हैं जिन से दिल्ली की सड़को पर दुर्घटना पहले से काफ़ी अधिक होने लगे पर सजा कम, क्योंकि कानून में जिसके पास ड्राईविंग लाईसेंस उपल्ब्ध है उसकी गलती से जनता को पहुचे नुकसान की कानूनी सजा उससे बहुत अलग है जिसके पास ड्राइविंग लाइसेंस नहीं।

    धन्यवाद दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार और परिवहन आयुक्त को उन सभी को सजा से बचवाने का रास्ता देने के लिए।

    जनहित में जारी
    संजय बाटला

  • परिवहन विभाग कितना महिलाओ के साथ, आप भी समझें

    परिवहन विभाग कितना महिलाओ के साथ, आप भी समझें

    परिवहन विभाग कितना महिलाओ के साथ, आप भी समझें,

    परिवहन विभाग और परिवहन मंत्री लगातार विज्ञापनो द्वारा अपनी आप को महिला सशक्तिकरण और महिला सुरक्षा की बातें जनता के समक्ष प्रस्तुत करते रहे है और इस विषय में परिवहन विभाग की विज्ञापनो के आधार पर हमने भी धन्यवाद के साथ प्रशंसा करी थी पर सब कुछ सामने आनी पर पता चला कि वह सब तो सिर्फ आखों का धोखा ही था।

    1. महिलाओ की लिए ऑटो परमिट पर कोटा, जांच में पता चला की ई वाहनों को टू दिल्ली परिवहन विभाग परमिट देता ही नहीं है यानी किसी भी ई वाहन को परमिट की आवश्यकता है ही नहीं, जब परमिट की जरुरत नहीं तो कोटा कैसा?
      इस बात के लिए उदाहरण और सबूत में मेट्रो फीडर ई बस हैं जो दिल्ली की सड़को पर स्टेज कैरेज परमिट की तरह स्टेज़ से और डीटीसी बस स्टैंड से सवारी उठाती हुए चलती है वह भी बिना परमिट। दूसरा उदाहरण और सबूत दिल्ली की सड़को पर डीटीसी के नाम से चलने वाली ई बसे।
      निष्कर्ष:- जब परमिट की आवश्यकता ही नहीं टू किस प्रकार का कोटा?

    दिल्ली की सड़क पर दुर्भाग्य पुर्ण दुर्घटना होने के बाद गृह सचिव कमेटी भारत सरकार द्वारा जारी आदेश के तहत दिल्ली परिवहन विभाग को दिल्ली में व्यवसायिक सवारी वाहनों पर चलने वाले सभी वाहन मालिकों का दिल्ली पुलिस की स्पैशल ब्रांच द्वारा जांच करवाना ओर वहा से जांच रिपोर्ट की साथ बार कोड प्राप्त करना था और उसी कोड द्वारा जांच बनाए रखना अनिवार्य था जिसे परिवहन विभाग ने अपनी ड्यूटी से मुक्त होने के लिए वाहन मालिको को ही पुलिस वेरिफिकेशन सर्टिफिकेट अनिवार्य कर दिया।
    निष्कर्ष:- परिवहन विभाग द्वारा महिला सुरक्षा की अहमियत जीरो हैं।

    वाहनों में पैनिक बटन और उसका संबंध सीधा दिल्ली पुलिस विभाग के अंतर्गत, जिससे अगर कोई महिला सुरक्षा हेतु पैनिक बटन का प्रयोग करें तो जल्द से जल्द पुलिस सेवा उपल्ब्ध हो सके पर बसो में पैनिक बटन तो लगा दिए गए पर उसका संबंध कही भी नहीं जिसके तहत पैनिक बटन का प्रयोग करने वाले को मदद मिल सके।
    निष्कर्ष:- सिर्फ दिखावा, महिला सुरक्षा नही

    महिलाओ के सशक्तिकरण हेतु महिलाओ को ड्राईवर ट्रैनिंग फ्री, पर जिस कैटेगरी के लिए ट्रैनिंग फ्री उस कैटेगरी में दिल्ली परिवहन विभाग और दिल्ली सरकार में कोई स्थाई या अस्थाई नौकरी ही नहीं और प्राइवेट सवारी वाहनों में कार्य करना कितना सुरक्षित, यह तो आप जानते ही हैं।
    निष्कर्ष:- सिर्फ दुनियां में दिखावे का माध्यम और कुछ नहीं।

    यह तो कुछ उदाहरण और सबूत है अभी और भी बहुत है जो सत्य ओर तथ्य का सच बताने में सक्षम है, अब आप ही सोच ले परिवहन विभाग के आला अधिकारी मुख्य रूप में परिवहन आयुक्त एवम् परिवहन मंत्री कितने महिला सशक्तिकरण और सुरक्षा के प्रति जागरूक है।

    जनहित में जारी
    संजय बाटला

  • क्या दिल्ली परिवहन विभाग द्वारा वाहनों पर बंदिश लगाने से ही दिल्ली प्रदुषण मुक्त हो जाएगी, जाने*

    क्या दिल्ली परिवहन विभाग द्वारा वाहनों पर बंदिश लगाने से ही दिल्ली प्रदुषण मुक्त हो जाएगी, जाने*

    दिल्ली परिवहन विभाग द्वारा बाजारों में मालवाहक वाहनों पर रोक के बाद नया दिशा निर्देश भी हुआ जारी

  • 1 सितम्बर परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए क्यों है यादगार?

    1 सितम्बर परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए क्यों है यादगार?

    *1सितंबर जनता के लिए और खास तौर से परिवहन क्षेत्र से जुड़े व्यवसायियों के लिए क्यों है यादगार ?*

  • प्रदुषण नियंत्रण के लिए क्या वाहनों पर पाबंदी सही विकल्प/ फैसला,

    प्रदुषण नियंत्रण के लिए क्या वाहनों पर पाबंदी सही विकल्प/ फैसला,

    *भारत देश और सबसे ज्यादा दिल्ली राज्य की आबादी विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यू.एच.ओ) की गाइडलाइंस के अनुसार खराब हवा में सांस ले रही हैं।*

  • वाहनों के लिए 1 अक्टूबर 2022 से क्या नए नियम होंगे लागू, जाने ?

    वाहनों के लिए 1 अक्टूबर 2022 से क्या नए नियम होंगे लागू, जाने ?

    सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों में आग लगने की घटनाओं पर संज्ञान लेकर और अंकुश लगाने के लिए जांच के लिए विशेष कमेटी का गठन किया था। इस विशेष समिति की रिपोर्ट के आधार पर मॉर्थ (मिनिस्टरी ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाईवेज) ने इलेक्ट्रिक दो पहिया, तीन पहिया और चार पहिया वाहनों के लिए ए.आई.एस. 156 सेफ्टी स्टैंडर्ड को अपडेट कर लागू किया है।

    सड़क परिवहन एवम् राजमार्ग मंत्रालय द्वारा इलेक्ट्रिक वाहनों को आग की घटनाओं से बचाव के लिए समिति की रिपोर्ट के आधार पर तैयार और लागू किए नए नियम,

    आग के मामलो की जांच करने वाली विशेष समिति ने 29 अगस्त 2022 को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी जिसके आधार पर इलैक्ट्रिक पॉवर से चलने वाले वाहनों को इलैक्ट्रिक पावरट्रेन वाली श्रेणी एल, श्रेणी एम और श्रेणी एन. के लिए नए सुरक्षा नियम लागु किए गए।

    श्रेणी एल. में चार पहियो से कम वाले वाहनों और श्रेणी एम. और श्रेणी एन. में (4) चार पहिया वाहनों को शामिल किया गया जो यात्री और फ्रंट लोडेड वाहनों के लिए उपयोग किया गया है।

    नए नियमों में बैटरी सेल, ऑन-बोर्ड चार्जर, बैटरी पैक के डिजाइन और अतिरिक्त सेल शॉर्ट सर्किट से आग के कारण थर्मल ट्रांसफर से संबंधित अतिरिक्त सुरक्षा उपाय शामिल किए और इलेक्ट्रिक वाहन निर्माताओं के लिए नए नियमों की अधिसूचना जारी कर दी है।

    1. सेल के थर्मल रनवे के मामलो मे थर्मल घटनाओं या गैस का जल्द पता लगाने के लिए इलेक्ट्रिक वाहन ऑडियो-विजुअल अलर्ट से लैस होंगे।
    2. इलेक्ट्रिक वाहनों में सेफ्टी फ्यूज का होना अनिवार्य कर दिया गया जिससे अत्यधिक गर्मी उत्पन्न होने या उच्च धारा प्रवाह के होने पर बैट्री को पावरट्रेन से तुरन्त काटेगा,
    3. इलेक्ट्रिक वाहनों में प्रयोग होने वाली बैट्री में दो सेल के बीच की दूरी बढ़ाने के आदेश इससे रिचार्जेबल एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (आर.ई.एस.एस.) में थर्मल रनवे की स्थिति में गर्मी कम करने और सेल्स को अलग करने में मदद मिलेगी ।
    4. टाइम-बेस्ड चार्ज कट-ऑफ फंक्शन को शामिल करने के लिए फिर से डिजाइन किया जाएगा, आर.ई.एस.एस. को ओवरचार्ज होने से रोकने में मदद होगी।
    5. इलेक्ट्रिक वाहनों में अब चार (4) अतिरिक्त सेंसर होंगे, यह बैट्री सिस्टम के साथ किसी भी समस्या को जल्दी से पहचान करेंगे में और वाहन के कंसोल पर एक त्रुटि दिखाएगा जो सवार को सचेत करेगा कि वाहन अतिरिक्त गर्म हो रहा है।
    6. इलेक्ट्रिक पावरट्रेन से लैस सभी दोपहिया वाहनों को ओवर वोल्टेज, ओवर चार्ज, ओवर डिस्चार्ज, ओवर-टेंप्रेचर, ओवर करंट और शॉर्ट सर्किट प्रोटेक्शन के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों में उन्नत बैट्री सिस्टम लगाना होगा।
    7. एक अक्टूबर से इलेक्ट्रिक वाहनों में मौजूदा बैट्री सुरक्षा मानक के साथ लागू कर वाहनों की बिक्री की इजाजत होगी।

    जनहित में जारी,
    संजय बाटला

  • परिवहन क्षेत्र से जुड़ी सभी जानकारियां आज से होगी उपल्ब्ध मात्र एक क्लिक पर,

    परिवहन क्षेत्र से जुड़ी सभी जानकारियां आज से होगी उपल्ब्ध मात्र एक क्लिक पर,

    ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर्स एंड लेबर वेलफेयर एसोसिएशन (पंजीकृत),

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    आपकी राय और विचारो के इन्तजार में,

    संजय बाटला,
    चैयरमैन-टोलवा ट्रस्ट, अध्यक्ष-टोलवा,
    एमडी-ट्रांसपोर्ट विशेष न्यूज़

  • दिल्ली परिवहन विभाग के द्वारा तीन एमएलओ कार्यालय बंद करके खोला गया बेकैंड कार्यालय ,* कितना जनता के लिए हितकारी

    दिल्ली परिवहन विभाग के द्वारा तीन एमएलओ कार्यालय बंद करके खोला गया बेकैंड कार्यालय ,* कितना जनता के लिए हितकारी

    *दिल्ली परिवहन विभाग के द्वारा तीन एमएलओ कार्यालय बंद करके खोला गया बेकैंड कार्यालय ,* कितना जनता के लिए हितकारी

    दिल्ली सरकार द्वारा अपनी प्रशंसा को खुद ही पीठ ठपठपा कर विज्ञापनों द्वारा प्रदर्शित करना आप सभी जानते हैं। अपनी प्रशंसा के दौर को दिखाने और लाइसेंस, बेज और आरसी कार्ड प्रिंट करने वाली कम्पनी को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से दिल्ली में तीन एमएलओ कार्यालयों को बंद करके और सभी कार्यालयों में कार्ड प्रिंटिग बंद करके सिर्फ एक जगह शुरु करवाने का श्रेय प्राप्त कर जनहित का नाम दे दिया।

    आप सभी को तो याद ही होगा इसके बाद दिल्ली में जनता कितनी परेशान हुई और दो बार तो बेकैंड आफिस में तोड़ फोड़ भी हुई पर परिवहन विभाग और दिल्ली सरकार के लिए तो यह जनहित है।

    इसके बाद दिल्ली परिवहन विभाग ने कार्ड प्रिंटिग के कार्यों को एक से दो स्थानों पर शुरु करने के दिशा निर्देश जारी कर दिए जिसके तहत लाइसेंस और बेज बेकैंड कार्यालय में और आरसी द्वारका कार्यालय में ।

    इससे एक तो फायदा पहुंचा की आज व्यवसायिक वाहन मालिको की अतिरिक्त अन्य किसी को ज्यादा आरसी समय पर उपल्ब्ध होने की समस्या से निजात मिल गया पर बेकैंड कार्यालय में बचा काम आज भी राम भरोसे है और वहा जनता किसी से मिल कर शिकायत भी नहीं सुना सकते क्योंकि इस ब्रांच के डीटीओ परिवहन आयुक्त की गुड लिस्ट में है । डीटीओ के कहने के बाद बेकैंड कार्यालय को खोलने का मुख्य उद्देश्य यानी कार्यों को भी वापिस सभी बचे हुए डीटीओ कार्यालयों में करने के दिशा निर्देश जारी करवा दिए और अब यहां बचा है मात्र एक काम लाइसेंस और बेज प्रिंटिंग और वह भी समय सीमा में ना तो अप्रूव हो रहा है और ना प्रिंट ।

    *इन हालातों में अब दिल्ली की जनता स्वयं फैसला करे कि परिवहन विभाग का जनहित के नाम से किया गया यह आदेश जनहित में था या अपने हित में* और दूसरा सोचने का विषय *तीन कार्यालय जो इस जनहित का नाम लेकर दिल्ली परिवहन विभाग ने बंद किए थे उन सभी को होने वाली असुविधाएं जनहित है या अहित?*

    आपके लिए एक लाइसेंस की फीस रसीद और उसके वापिस बेकैंड आफिस में पहुंचने का सबूत इस ब्लॉग के साथ आज भी स्लगन कर रहे हैं जिससे आपकों स्वयं फैसला लेने में दिक्कत नहीं होगी की किस तरह का कार्य कर रहा है बेकैंड कार्यालय और इसकी ज़रुरत जनता को है या किसी और को जिसके शुरु करने पर दुनियां में सर्वश्रेष्ठ बनने के विज्ञापन जारी हुए थे।

    *संजय बाटला*


  • परिवहन क्षेत्र के सभी सवालों का जवाब, सिर्फ एक क्लिक पर, सुने और जाने!

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