Author: cwsadmin
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रेलवे ने करोड़ों यात्रियों को दी सौगात, अब बिना टिकट ट्रेन में करें सफर, नहीं रोकेगा टीटीई!
एजेंसी डेस्क : आप भी ट्रेन से सफर करने वाले हैं और आपको टिकट नहीं मिल रहा है? अब आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है. अगर आपको कभी अचानक यात्रा करना पड़ जाए और आपके पास टिकट नहीं हो तो अब आप बिना रिजर्वेशन भी यात्रा कर सकते हैं.पहले ऐसी स्थिति में बस तत्काल टिकट का ही विकल्प था. लेकिन उसमें भी टिकट मिल जाए, ये जरूरी नहीं है. ऐसे में आपको रेलवे का एक खास नियम जानना बहुत जरूरी है. इस सुविधा के तहत अब आप बिना रिजर्वेशन भी यात्रा कर सकते हैं.
प्लेटफॉर्म टिकट पर यात्रा,,,,,
रेलवे के नियम के अनुसार, अगर आपके पास रिजर्वेशन नहीं है और आपको ट्रेन से कहीं जाना है तो आप सिर्फ प्लेटफॉर्म टिकट लेकर ट्रेन में चढ़ सकते हैं. आप बहुत ही आसानी से टिकट चेकर के पास जाकर टिकट बनवा सकते हैं. यह नियम (Indian Railways Rules) रेलवे ने ही बनाया है. इसके लिए आपको प्लेटफॉर्म टिकट लेकर तुरंत TTE से संपर्क करना होगा. फिर TTE आपके गन्तव्य स्थल तक की टिकट बनाएगा. इतना ही नहीं आप TTE को कार्ड पेमेंट भी कर सकते हैं.
सीट खाली नहीं होने पर भी है विकल्प,,,,,
ट्रेन में सीट खाली नहीं होने पर TTE आपको रिजर्व सीट देने से मना कर सकता है. लेकिन, यात्रा करने से नहीं रोक सकता. अगर आपके पास रिजर्वेशन नहीं है ऐसी स्थिति में यात्री से 250 रुपए पेनाल्टी चार्ज के साथ आप यात्रा का कुल किराया देकर टिकट बनवा लें. रेलवे के ये जरूरी नियम जो आपको जरूर जानना चाहिए.
प्लेटफॉर्म टिकट की वैल्यू,,,,,
प्लेटफॉर्म टिकट यात्री को ट्रेन में चढ़ने का पात्र बनाता है. इसके साथ यात्री को उसी स्टेशन से किराया चुकाना होगा, जहां से उसने प्लेटफॉर्म टिकट लिया है. किराया वसूलते वक्त डिपार्चर स्टेशन भी उसी स्टेशन को माना जाएगा.और सबसे बड़ी बात कि आपको किराया भी उसी श्रेणी का देना होगा जिसमें आप सफर कर रहे होंगे.
सीट होती है आपकी,,,,,
अगर आपकी ट्रेन किसी कारणवश छूट गई है तो TTE अगले दो स्टेशनों तक आपकी सीट किसी को अलॉट नहीं कर सकता है. यानी अगले दो स्टेशनों पर आप ट्रेन से पहले पहुंचकर अपना सफर पूरा कर सकते हैं. लेकिन ध्यान रहे, दो स्टेशनों के बाद TTE RAC टिकट वाले यात्री को सीट अलॉट कर सकता है. लेकिन आपके पास दो स्टेशन का विकल्प रहता है.
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प्रयागराज से फ्लाइट का फेरा बढ़ाने के लिए भाजपा सांसद ने उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य को भेजा पत्र
प्रयागराज एयरपोर्ट से सर्वाधिक लोड फैक्टर वाली पुणे मुंबई व बेंगलुरु फ्लाइट के फेरे घटाने पर एयरपोर्ट सलाहकार समिति की अध्यक्ष व सांसद केशरी देवी पटेल ने गहरी नाराजगी जताई है। उन्होंने उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को पत्र भेजकर फेरे कम करने पर आपत्ति दर्ज कराई संगम नगरी से सर्वाधिक लोड फैक्टर वाली पुणे, मुंबई व बेंगलुरु फ्लाइट के फेरे घटाने पर एयरपोर्ट सलाहकार समिति की अध्यक्ष व सांसद केशरी देवी पटेल ने गहरी नाराजगी जताई है। उन्होंने उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को पत्र भेजकर फेरे कम करने पर आपत्ति दर्ज कराई और पुणे, मुंबई व बेंगलुरु के लिए प्रतिदिन विमान सेवा उपलब्ध कराने की मांग की।
इंडिगो ने घटा दिए हैं पुणे, मुंबई, बेंगलुरु के फेरे बीते 30 अक्टूबर को नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए ) की शीत कालीन समय सारिणी लागू होने के साथ ही इंडिगो ने पुणे, मुंबई व बेंगलुरु फ्लाइट के फेरे घटा दिए हैं। 30 अक्टूबर के पहले पुणे के लिए सप्ताह में छह दिन फ्लाइट मिलती थी लेकिन, अब नई समय सारिणी के अनुसार यह विमान केवल दो दिन ही उड़ान भर रहा है। यात्रियों को परेशानी, किराया भी बढ़ाइस वजह से पुणे से प्रयागराज के बीच फ्लाइट का किराया भी चार गुना से अधिक बढ़ गया है। इसके अलावा इंदौर फ्लाइट जो पूर्व में प्रतिदिन उड़ान भरती थी, अब मात्र चार दिन ही चल रही है, ऐसे में इंदौर जाने वाले लोगों को अब ट्रेन व दूसरे साधनों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। इसके अलावा मुंबई और बेंगलुरु फ्लाइट का भी सप्ताह में एक-एक फेरा घटा दिया गया है। इस वजह से सभी फ्लाइट का रेट भी बढ़ गया है।6
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बैतूल में बस और कार की टक्कर में 11 लोगों की मौत
बैतूल : मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के बैतूल में बस और कार की टक्कर में 11 लोगों की मौत हो गई है। बैतूल के झल्लर पुलिस स्टेशन (Jhallar Police Station) के पास बस एक कार से टकरा गई इस भीषण हादसे में 11 लोगों की जान चली गई है।
मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में झाल्लर थाना क्षेत्र में गुरुवार देर रात एक तेज रफ्तार बस और कार के बीच आमने-सामने से भिड़ंत हो गई। इस हादसे में 11 लोगों की मौत हो गई, जबकि एक अन्य घायल हुआ है।
बैतूल पुलिस अधीक्षक सिमाला प्रसाद (Betul Superintendent of Police Simala Prasad) ने हादसे में 11 लोगों की मौत होने की पुष्टि की है। फिलहाल मृतकों की शिनाख्त नहीं हो पाई है। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और घायल को अस्पताल पहुंचाया। वहीं, मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर पुलिस ने मामले को जांच में लिया है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, हादसा झाल्लर थाने के पास गुरुवार देर रात हुआ। यहां एक यात्री बस और कार के बीच आमने-सामने से भिड़ंत हो गई। हादसा इतना भीषण था कि कार के परखच्चे उड़ गए। उसका अगला हिस्सा बुरी तरह पिचक गया, जबकि बस का अगला हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ है। इस हादसे में 11 लोगों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई, जबकि एक यात्री घायल हुआ है, जिसे गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। -

कार्तिक मास : देवोत्थान एकादशी का व्रत और पूजा विधि, जानिए-आज क्या करना चाहिए क्या नहीं.
एजेंसी डेस्क : कार्तिक मास में आने वाली शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवोत्थान, देवउठनी या प्रबोधिनी एकादशी कहा जाता है। यह एकादशी दीपावली के बाद आती है। आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयन करते हैं और कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन उठते हैं, इसीलिए इसे देवोत्थान एकादशी कहा जाता है।आचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री कि देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर में 4 माह शयन के बाद जागते हैं। भगवान विष्णु के शयनकाल के चार मास में विवाह आदि मांगलिक कार्य नहीं किये जाते हैं, इसीलिए देवोत्थान एकादशी पर भगवान हरि के जागने के बाद शुभ तथा मांगलिक कार्य शुरू होते हैं। इस दिन तुलसी विवाह का आयोजन भी किया जाता है।

देवोत्थान एकादशी व्रत और पूजा विधि,,,,,
प्रबोधिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु का पूजन और उनसे जागने का आह्वान किया जाता है। इस दिन होने वाले धार्मिक कर्म इस प्रकार हैं-
● इस दिन प्रातःकाल उठकर व्रत का संकल्प लेना चाहिए और भगवान विष्णु का ध्यान करना चाहिए।
● एक ओखली में गेरू से चित्र बनाकर फल,मिठाई,बेर,सिंघाड़े,ऋतुफल और गन्ना उस स्थान पर रखकर उसे डलिया से ढांक देना चाहिए।
● इस दिन रात्रि में घरों के बाहर और पूजा स्थल पर दीये जलाना चाहिए।
● रात्रि के समय परिवार के सभी सदस्य को भगवान विष्णु समेत सभी देवी-देवताओं का पूजन करना चाहिए।
● इसके बाद भगवान को शंख, घंटा-घड़ियाल आदि बजाकर उठाना चाहिए और ये वाक्य दोहराना चाहिए- (उठो देवा, बैठा देवा, आंगुरिया चटकाओ देवा, नई सूत, नई कपास, देव उठाये कार्तिक मास)
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क्यों फ्री की राजनीति करने वाले देश के दुश्मन हैं।
*लेनिन का इतिहास पढ़ना और जानना राष्ट्र की रक्षा हेतू हम सबके लिए जरूरी है।*
लेनिन रूस का था और भगवान ने रूस को संभलने का कोई मौका नही दिया लेकिन भारत को दिया है।*
जैसे आज रूस का नाम रशियन फेडरेशन है , वैसे ही 1917 तक रशियन एम्पायर हुआ करता था यहाँ राजा था रानी थी।
मंत्रियों के निकम्मेंपन और रानी के एक गलत सलाहकार के चक्कर मे 300 सालो से चला आ रहा यह साम्राज्य नष्ट हो गया।
*रूस में गरीबी बढ़ रही थी और उसका फायदा उठाया व्लादिमीर लेनिन ने। लेनिन ने फेक्ट्री वर्कर्स और किसानों को भरोसा दिलाया कि फ्री पानी, फ्री बिजली, फ्री ट्रांसपोर्ट सब दूंगा बस राजा को मार दो और मुझे सत्ता दे दो*
लोगो ने लेनिन की बातो में आकर 1917 में तख्तापलट कर दिया जिसे यहां के लोग क्रांति कहते है।
लेनिन सत्ता में आया, देखा तो राजकोष खाली है, 2 महीने हो गए लोग वास्तव में भूखे थे तो प्रदर्शन करने लगे लेनिन ने लोगो को देशद्रोह के नाम पर मरवाना शुरू कर दिया बाद में सफाई दी कि उसमें कुछ राजा के नोबल थे।
*आज तक लादेन और बगदादी ने अपनी किसी हरकत को आतंकवाद का नाम नही दिया लेकिन लेनिन ने रेड टेरर की थ्योरी दी। लेनिन ने कहा की आतंकवाद से ही गरीबो का उत्थान हो सकेगा इसलिए अमीरों को मारो और लूटो*
लूटमार होती रही बीच बीच मे कुछ समझदार लोग लेनिन पर हमले कर देते थे तो कम्युनिस्टों को मौका मिल जाता था आतंकवाद करने का।
आखिरकार लेनिन ने भूमि बांटनी शुरू कर दी, सभी रूसियो के पास जमीन थी, अनाज था, लेकिन बिजली अब नही थी और पानी की किल्लत भी यथावत थी।
*1924 में लेनिन मर गया, आज 2022 चल रहा है रूस के लोगो के पास आज तक मुफ्त की बिजली और पानी नही है हालांकि उसी के चक्कर मे वो अपने राजा को मार चुके थे और अब तक 7 करोड़ से ज्यादा लोग आपस मे मर चुके है। रूस की आबादी 14 करोड़ है अर्थात फ्री के चक्कर मे आधा देश साफ कर दिया लेकिन हाथ चुहिया ही लगी।*
अलेक्जेंडर केरेन्सकी जो कि बाद में लेनिन ने मौत का सौदागर कहा उन पर जानलेवा हमले करवाये और केरेन्सकी को देश छोड़कर भागना पड़ा।
जो तबका कमजोर है उसे लेनिन बहुत अच्छा लगता है, उसे इससे कोई मतलब नही की संसाधन प्राकृतिक है या कृत्रिम। उसे तो *बस फ्री में मिल जाये तो मानो समुद्र मंथन हो गया।*
जैसे लेनिन ने 100 साल पहले रूस को बर्बाद किया था वैसे ही हमारे भारत मे अब ऐसे राजनीतिक दल आ गए हैं जो टैक्स कट्स, फ्री का लालच देकर सत्ता पर अपना वर्चस्व कायम करने में लगे हैं और हमारे फ्री के लालच से कायम भी हो रहे हैं ।
रूस के पास संभलने का मौका नही था लेकिन हमारे पास बहुत मौके है।
*मातृभूमि की रक्षा कीजिये, आपको सशस्त्र संघर्ष नही करना है बस इन्हें वोट देना बंद कर दीजिए* । 6.2 प्रतिशत की रफ्तार से दौड़ रही जीडीपी के रास्ते मे खड़े सभी राजनीतिक दल और उनके नेता स्वतः ही हट जाएगा ।
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दिल्ली मेट्रो द्वारा इलेक्ट्रिक ऑटो का परिचालन वह भी ऑटो परमिट ड्रॉ के बिना प्राप्त किए
डी.एम.आर.सी. व दिल्ली सरकार की मिलीभगत से “मेट्रो स्टेशनों” पर इलेक्ट्रिक ऑटो का निजीकरण करके गरीब ऑटो चालकों के पेट पर भारी “मार” के विरुद्ध विशाल प्रदर्शन…
स्थान- मेट्रो स्टेशन, सेक्टर- 21, द्वारका
दिनांक- 19th अक्टूबर, 2022
दिन- बुधवार
समय- सुबह 10 बजे
सभी चालक भाई अधिक से अधिक संख्या में पहुँचे ।
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चमोली के थराली में भूस्खलन से 4 की मौत, मकानों पर बोल्डर गिरने से परिवार के 5 लोग दबे
देहरादून से दीपावली मनाने गया था परिवार
चमोली। प्रदेश में से मॉनसून भले ही चला गया हो लेकिन लेकिन प्राकृतिक आपदा का कहर जारी है। चमोली जिले में भूस्खलन लोगों आफत बनकर टूटा है। चमोली के थराली में पैनगढ़ गांव में पहाड़ी से भूस्खलन होने से एक ही परिवार के 5 लोग मलबे में दब गए। वहीं सभी लोगों का रेस्क्यू किया गया। लेकिन मलबे में दबने से 4 लोगों की मौत हो गई, जबकि एक घायल को हायर सेंटर रेफर कर दिया गया है। घायल 12 साल का बच्चा बताया जा रहा है। पैनगढ़ गांव के ठीक ऊपर पहाड़ी से भूस्खलन और बड़े बोल्डर गिरने से दो मकान जमींदोज हो गए और आसपास के मकानों को भी क्षति पहुंची है।
चमोली के थराली में पैनगढ़ गांव में पहाड़ी से भूस्खलन से मकान पर गिरे बोल्डर से एक ही परिवार के 5 लोग मलबे में दब गए। जिनमें से चार की मौत हो गई, जबकि एक घायल को हायर सेंटर रेफर कर दिया गया है। पैनगढ़ में रात्रि डेढ़ बजे हुए जबरदस्त भूस्खलन और भूधंसाव से दो मकान दब गये। इस घटना में एक महिला की घटना स्थल पर ही मौत हो गई। सूचना पाकर एसडीआरएफ की टीम मौके पहुंची और रेस्क्यू अभियान तेजी से चलाया। एसडीआरएफ की टीम लगातार रेस्क्यू अभियान चलाए हुए है। वहीं घायल 12 साल का बच्चा बताया जा रहा है। वहीं मानसून की विदाई के वक्त आई आपदा से ग्रामीण सहमे हुए हैं। आपदा से चार लोगों की मौत के बाद गांव में मातम छाया हुआ है। उक्त परिवार के कुछ सदस्य दिवाली मनाने के लिए देहरादून से घर आये हुए थे। सभी हताहत एक ही परिवार के हैं।गांव वाले लंबे समय से विस्थापन की मांग कर रहे थे
चमोली। ग्रामीणों ने इस घटना का ठीकरा शासन-प्रशासन पर फोड़ते हुए कहा कि पहाड़ी से हो रहे भूस्खलन की सूचना और विस्थापन की मांग लंबे समय से ग्रामीणों द्वारा की जा रही थी। एक वर्ष से भी ज्यादा लंबे समय से भूस्खलन हो रहा था। बावजूद इसके स्थानीय प्रशासन ने इसकी सुध नहीं ली और ग्रामीणों को विस्थापित नहीं किया। जिसका नतीजा है कि भूस्खलन की चपेट में आने से एक ही परिवार के चार लोग काल के गाल में समा गए।खतरे के साए में पैनगढ़ गांव के लोग
चमोली। पैनगढ़ गांव भूगर्भीय दृष्टि से संवेदनशील है। यहां गांव के ऊपर पहाड़ी पर पांच साल पहले दरार पड़ गई थी और जो बाद में बढ़ती गई। पिछले साल बरसात के दौरान यहां के करीब 40 परिवारों को दूसरी जगह टेंट व छानियों में सुरक्षित स्थान पर भेजा गया था। ग्रामीण दिनेश पुरोहित, सुभाष पुरोहित ने बताया कि पूरे गांव में करीब 80 परिवार रहते हैं। गांव के जिस भाग में पहाड़ी में दरार और भूस्खलन होने से खतरा बना है वहां करीब 30 परिवार निवास कर रहे हैं।घटना के बाद गांव में पसरा मातम
चमोली। पैनगढ़ गांव में दीपावली की तैयारियां चल रही थी। बड़ी संख्या में लोग दीपावली पर अपने गांव पहुंचे हैं। देर रात तक गांव के लोग पटाखे जलाकर जश्न मना रहे थे। शनिवार तड़के डेढ़ बजे जब सब लोग गहरी नींद सोए हुए थे तभी पहाड़ से बोल्डर गिरे और चार लोगों की जान चली गई। इस घटना के बाद गांव सहित पूरे पिंडरघाटी क्षेत्र में शोक की लहर है।चमोली का दूरस्थ गांव है पैनगढ़
चमोली। चमोली जिले का पैनगढ़ गांव थराली से करीब 12 किलोमीटर दूर है। थराली से आधे रास्ते तक वाहन जाते हैं। ग्रामीणों को करीब तीन किलोमीटर पैदल चलकर गांव में पहुंचना पड़ता है। गांव के लोगों की आजीविका खेतीबाड़ी व नौकरी पर निर्भर है। गांव में लगातार आ रही प्राकृतिक आपदा से खेतों को भी नुकसान पहुंचा है। गांव की उपजाऊ जमीन पूरी तरह बर्बाद हो गई है।मृतकों के नाम
मृतकों में एक ही परिवार के चार लोग शामिल हैं।
देवानंद (57) पुत्र माल दत्त सती
बचुली देवी पत्नी माल दत्त सती (75)
घनानंद पुत्र माल दत्त सती (45)
सुनीता देवी (37) पत्नी घनानंद


