206 हेक्टेयर जमीन से होगा हवाई पट्टी का विस्तार, तैयारी में जुटा प्रशासन

206 हेक्टेयर जमीन से होगा हवाई पट्टी का विस्तार, तैयारी में जुटा प्रशासन

मेरठ से हवाई उड़ान का सपना जल्द पूरा होने जा रहा है। 206 हेक्टेयर जमीन से हवाई पट्टी का विस्तार किया जाएगा। इसके लिए जिला प्रशासन, विकास प्राधिकरण, वन विभाग और नगर निगम के अधिकारियों को लगाया गया है। डीएम ने एक सप्ताह में रिपोर्ट मांगी है।

मेरठ के परतापुर स्थित हवाई पट्टी पर 72 सीटर विमान की उड़ान की तैयारियों के साथ-साथ जिला प्रशासन विस्तारीकरण योजना की भी तैयारी में है। बुधवार को डीएम ने चार विभाग के अधिकारियों के साथ हवाई पट्टी के विस्तार के लिए 206 हेक्टेयर जमीन की व्यवस्था के लिए बैठक की। साथ ही वर्तमान में उपलब्ध जमीन को नागरिक उड्डयन के अभिलेख में दर्ज कराने को कहा। ताकि 72 सीटर विमान की उड़ान का रास्ता साफ हो सके।
डीएम दीपक मीणा की अध्यक्षता में बुधवार को कलक्ट्रेट में एडीएम वित्त, सिटी मजिस्ट्रेट, तहसीलदार, वन विभाग, विकास प्राधिकरण और नगर निगम के अधिकारियों के बैठक की। जिसमें हवाई पट्टी के विस्तारीकरण में 206 हेक्टेयर जमीन को लेकर चर्चा हुई। बताया गया कि विस्तारीकरण में नागरिक उड्डयन विभाग को 206 हेक्टेयर जमीन देनी होगी, जिसमें से 130 हेक्टेयर जमीन किसानों की है।
किसानों को उचित मुआवजा देकर उनकी जमीन ली जाए, इसको लेकर अधिकारियों को उक्त किसानों के साथ बैठक करने के डीएम ने निर्देश भी दिए। डीएम ने बताया कि हवाई पट्टी पर नागरिक उड्डयन को जमीन देनी है। जिसको लेकर पहले ही जिला प्रशासन तैयारी करने में लग जाए। सिटी मजिस्ट्रेट अनिल श्रीवास्तव ने बताया कि हवाई पट्टी की स्थापना के समय 18.85 हेक्टेयर जमीन थी।

2010 में विस्तारीकरण होकर यह जमीन 53.55 हेक्टेयर हो गई है, जिसमें से सिर्फ 35.37 हेक्टेयर जमीन नागरिक उड्डयन के अभिलेखों में दर्ज है, बाकी की दर्ज कराने में प्रशासन जुटा हुआ है।

जिला प्रशासन को अब नये विस्तारीकरण करने में 54 हेक्टेयर जमीन वन विभाग की, 11 हेक्टेयर सरकार की, 9 हेक्टेयर विकास प्राधिकरण, दो हेक्टेयर पराग डेयरी और 130 हेक्टेयर जमीन किसानों से अधिग्रहण करानी है।

चार हेक्टेयर जमीन की जानकारी जुटाई
72 सीटर विमान की उड़ान के लिए 53.55 हेक्टेयर जमीन उड्डयन विभाग के अभिलेखों में दर्ज करने के लिए जिला प्रशासन जुट गया है। इसमें चार हेक्टेयर किसानों की जमीन का मामला कोर्ट में विचाराधीन है। डीएम ने इसके लिए किसानों से बातचीत कर हल निकालने की बात कही।

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